मंगलवार, 24 जुलाई 2012

(अ) नैतिक समर्थन --- ।



प्रणाम ।
तुम इतनी रात में कैसे आ गये , तुम्हें सिक्योरिटी वाले रोकते क्यों नहीं ?
लंका में , हनुमान जी कैसे घुस गये बताईये , रावण की सिक्योरिटी तो आप से कहीं ज्यादा रही होगी ।
हनुमान जी , मच्छर के समान शरीर बनाकर गये थे , जैसा कि रामायण में लिखा है ।
हम कौन से हाथी बनकर आप के पास आये हैं , मँहगाई में शरीर पारदर्शी हो गया है ।
झूठ बोलते हो , सिक्योरिटी वालों को तुमनें सेट कर रखा है कल को कोई आतंकवादी आ जाये तब क्या होगा ।
पूरा देश ही सेटिंग पर चल रहा है , देश में कुछ भी असंभव नहीं है ।
तुम यहाँ किस लिये आये हो , कारण बताओ ?
मैं बिना मकसद , आप के यहाँ रात में आनें का रिस्क नहीं ले सकता । मैं पवार जी के बारे में जानना चाहता हूँ ।
२ नम्बर की कुर्सी उन्हें नहीं मिलेगी , इसके अलावा तुम और क्या जानना चाहते हो ?
सुना है कि वे बहुत नाराज हैं और सरकार गिरायेंगे नहीं लेकिन हिलाते रहेंगे ?
वे सरकार में भले न रहें लेकिन अपना नैतिक समर्थन हमें देते रहेंगे ।
बाहर रह कर समर्थन , सरकार में रहकर समर्थन , नैतिक समर्थन , इसका क्या अर्थ होता है ?
इसका अर्थ तो मुझे भी नहीं मालूम है , इसका अर्थ वे ही समझते हैं जो वैसा समर्थन हमें करते हैं ।
यदि आप मैडम से प्रार्थना करके अपनें बगल में टूटी कुर्सी ही रखवा देते तो क्या, आपकी इज्जत गिर जाती ?
टूटी कुर्सी तो क्या, वहाँ जमीन पर बैठनें को नहीं मिलनें वाला , वैसे मेरी तरफ से नो कमेन्ट ।
अपनें बगल से आप एन्टॉनी को भी यदि हटा देते और दिग्विजय बाबू को बैठा देते तो झगड़ा खत्म नहीं हो जाता ?
क्या मैंनें उन्हें बिठाया है , अपनें बगल में ? पागल जैसी बात करते हो, मेरी हिम्मत है , उन्हें वहाँ से हटानें की ?
आप तो शालीन व्यक्ति हैं , क्रोध क्यों कर रहें हैं मेरे ऊपर ।
तुम ऐसी बेवकूफी की बात करोगे तो मुर्दा भी गुस्से से उठकर चिल्लानें लगेगा ।
देखिये कभी-कभी जन भावना का ख्याल भी रखना चाहिये , आप लोगों को ।
कैसी जन भावना ? मैडम की भावना को ठेस नहीं लगे ,सदैव हम लोग केवल इसी प्रयास में लगे रहते हैं । 
अच्छा , बाबा रामदेव और अन्ना जी देशव्यापी अनशन व आन्दोलन करनें जा रहें हैं , इसपर कुछ कहेंगे ?
देखो , मेरी समझ में आज तक ये नहीं आया कि वे लोग आन्दोलन क्यों और किसके विरुद्ध  कर रहें हैं ?
आप ही लोगों के विरुद्ध तो आन्दोलन हो रहा है, जो-जो कुकर्म हुए हैं वे लोग हिसाब माँग रहे हैं ।
मैंनें अपनें पूरे जीवन काल में मैंने कोई बुरा काम नहीं किया, लेकिन किसी को कुकर्म करनें मना भी नहीं किया ?
देखिये , बाबा रामदेव विदेशों में जमा काला धन देश में लाना चाहते हैं और अन्ना जी लोक-पाल बिल चाहते हैं ।
बाबा रामदेव को किसनें मना किया है कि  काला धन देश में न लाकर रखें , मैंनें तो नहीं रोका है ।
वे भ्रष्टाचारियों और घोटाले-बाजों द्वारा विदेशों में जमा किये गये काले धन को लानें की बात कर रहे हैं ।
मेंरी समझ में नहीं आता कि दूसरों के द्वारा जमा पैसे को कोई और कैसे ला सकता है ?
लोग आपसे उम्मीद करते हैं कि आप यदि चाहें तो कानून बनाकर सारा काला धन देश में मँगा सकते हैं ।
ऐसा कानून बनना संभव नहीं है ,क्योंकि इससे देश का विकास रुक जायेगा ।
आप तो अर्थ-शास्त्री हैं , फिर ऐसा क्यों कह रहे हैं ?
पहले तुम बोलो , सब जानते हुए तुमनें ऐसा प्रश्न क्यों किया ? 
काला-धन तो देश में आनें से रहा , लेकिन अन्ना जी के लोकपाल बिल के बारे में आप की क्या राय है ?
इस बिल को मेरा वैसा ही नैतिक समर्थन है , जैसा समर्थन हमें पवार जी दे रहे हैं ।
तो हम जनता को आश्वस्त कर दें कि लोकपाल बिल जल्द पास हो जायेगा ?
मैंनें उसके पास होनें के बारे में नहीं नैतिक समर्थन देनें के बारे में कहा है ।
कुछ और सवाल पूछूँ , जिनके उत्तर देश की जनता बहुत दिन से चाह रही है ?
अब बहुत हो गया , भागते हो कि बुलाऊँ, सिक्योरिटी को ।

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