त्रिलोचन की संक्षिप्त प्रेम कथा
त्रिलोचन चूहा सदा की भाँति अपनें बिल से निकलकर बाहर आया तो देखा कि एक गिलहरी जो हल्के भूरे रंग की थी उसके बिल के बाहर गिरे एक बीज के टुकड़े को अपनें पंजो व दाँतों से तोड़ रही थी । उसकी मोहक स्टाईल देखकर त्रिलोचन ठगा सा केवल उसे निहारता रहा । जब तक वह गिलहरी बीज को तोड़ती रही तब तक त्रिलोचन चूहा अपनें बिल के मुँह के पास बैठकर एकटक उसे देखता जा रहा था ।
त्रिलोचन को सारी रात नींद नहीं आयी । वह बार-बार बिल के बाहर आकर देखता कि शायद वह गिलहरी नजर आ जाये, लेकिन हर बार बोझिल मन से वह पुनः बिल के अन्दर आ जाता । उसकी इस हरकत पर प्रमुख चूहिया नें टोका भी लेकिन त्रिलोचन कोई ना कोई बहाना बनाकर फिर से बिल के मुँह के पास चला आता । किसी प्रकार त्रिलोचन नें बेचैनी के साथ पूरी रात काटी ।
सुबह हुई, त्रिलोचन उस सम्मोहिनी गिलहरी के दीदार के लिये बिल से बाहर आया लेकिन वहाँ चिड़ियों की चहचहाहट के अलावा कुछ नहीं था । कौओं की काँव-काँव त्रिलोचन की पीड़ा को और बढ़ा रही थी । त्रिलोचन को उस गिलहरी के बगैर सब कुछ सूना-सूना सा लग रहा था । त्रिलोचन को खुद भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह मतवाला होकर उस गिलहरी को क्यों तलाश रहा है । उस गिलहरी में ऐसा क्या था कि त्रिलोचन उसे एक बार देखनें के लिये पागल हुआ जा रहा था । त्रिलोचन अपनें बिल से काफी दूर निकल आया था । भोजन की तलाश का काम उसनें बन्द कर दिया था । रास्ते में कुतरनें की चीजों के मिलनें पर भी वह अपना समय खराब नहीं करना चाहता था।
गाँव की बिल्लियों का डर भी था सो त्रिलोचन नें अपनें बिल की ओर वापस जानें का फैसला किया । वह पूरे वापसी के मार्ग पर उस चंचला गिलहरी को तलाश करता रहा । जैसे ही वह अपनें बिल के पास पहुँचा उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ । उसके बिल के पास ही वह गिलहरी अन्य गिलहरियों के साथ एक पेड़ पर चढ़नें- उतरनें का खेल खेल रही थी । त्रिलोचन की सारी थकावट मिट गई । उसे विश्वास हो गया कि दिल से दिल को राह होती है और यदि किसी को सच्चे दिल से याद किया जाये तो वह जरुर मिल जाता है । वह उस गिलहरी को पेड़ पर चढ़ते व उतरते प्रसन्न भाव से देखता रहा ।
त्रिलोचन विचारों मे लीन था कि अचानक उसके ठीक बगल से एक बिल्ली निकली - त्रिलोचन डर गया । बिल्ली के मुँह के दाँतों के बीच में उसकी एक चूहिया पत्नी दबी थी । त्रिलोचन घबरा के बिल में भागा । बिल के अन्दर उसके परिवार में शोक का माहौल था । सारे परिवार वाले उस चूहिया की लापरवाही के बारे में चर्चा कर रहे थे । त्रिलोचन नें सबको समझाया कि जीवन नश्वर है और हर किसी की मौत किसी ना किसी बहानें से ही होती है । चूहे सब कुछ भूला कर अपनें कुतरनें के काम में लग गये ।
थोड़ी देर बाद त्रिलोचन नें बिल के बाहर मुंह निकाल कर देखा सारी गिलहरियाँ जा चुकी थी । अब त्रिलोचन नें उस गिलहरी को अपनें बिल के पास से ही देखनें का प्लान बनाया । बिल्लियों के बढ़ते आतंक के कारण प्रतिदिन बहुत दूर तक जाना उचित भी नहीं था ।
त्रिलोचन द्वारा अपनें परिवार के सदस्यों के प्रति बरती जा रही उदासीनता से उसके चूहा परिवार के लोग खिन्न थे । त्रिलोचन द्वारा कुछ दिन से की जा रही अजीब सी हरकतों को देख कर चूहों को शक हुआ कि कहीं त्रिलोचन का मानसिक संतुलन तो नहीं बिगड़ रहा ।
कुछ नये उभरते हुए चूहों नें परिवार का नया मुखिया चुननें का प्रस्ताव दिया जिसे त्रिलोचन नें भी सहर्ष स्वीकार कर लिया । इस प्रकार त्रिलोचन नें गिलहरी का प्यार पानें की आशा में चूहा परिवार के मुखिया का पद त्याग दिया । त्रिलोचन पर परिवार का मुखिया होनें कारण चूहों की जनसंख्या बढ़ानें का महत्वपूर्ण दायित्व था । गिलहरी के प्रति आकर्षित होनें के बाद से वह अपनें दायित्व का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर पा रहा था । चूहों की जनसंख्या का रेट गिरता जा रहा था । वैसे भी चूहों की जनसंख्या वृद्धि करनें का काम, कोई आसान काम नहीं होता ।
त्रिलोचन आज खुद को मुक्त पा रहा था । अब उसकी ना तो कोई पत्नी थी ना ही कोई सन्तान । आज के बाद से वह उस सुन्दरी गिलहरी को ज्यादा से ज्यादा समय दे सकता था । वह अपनें बिल के पास इधर-ऊधर कूद-फाँद रहा था लेकिन वह भूरी वाली सुन्दर गिलहरी उसे नहीं दिखाई दी ।
आज तीसरा दिन था जब वह गिलहरी त्रिलोचन को नजर नहीं आई । त्रिलोचन उदास मन से बिल से बाहर आकर पत्तों के पास पड़े फल के एक बीज को उठानें के लिये बढ़ा, तभी वह मोहिनी गिलहरी भी लपकती हुई वहाँ आ गई । त्रिलोचन उस बीज को उससे पहले ही अपनी दाँतों से पकड़ चुका था , इसलिये गिलहरी उस बीज को नहीं पा सकी। त्रिलोचन को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ । वह गिलहरी भी त्रिलोचन को देखे जा रही थी । त्रिलोचन नें झट अपनी मुँह से वह बीज निकालकर जमीन पर रख दिया और कुछ दूर पर जाकर बैठ गया, गिलहरी आई और उस बीज को लेकर पेड़ पर चढ़ गई । त्रिलोचन नें फल के बीज के बदले सब कुछ पा लिया था ।
त्रिलोचन जान गया था कि उस गिलहरी को एक विशेष प्रकार के फल के बीज ज्यादा पसन्द हैं । त्रिलोचन नें सोचा कि अगर उसी प्रकार के फल के बीज यहाँ मिलेंगे तो ये गिलहरी हमेशा यहाँ आयेगी । अगले दिन त्रिलोचन नें दो-तीन फल के बीज का जुगाड़ किया और अपनें बिल से थोड़ी दूर रख दिया । जैसे ही उसनें वे बीज वहाँ रखे बिल के अन्दर से दो तीन चूहे निकलकर उस बीज को लेकर भागे । त्रिलोचन नें बहुत रोका लेकिन -- ।
आज गिलहरी उस स्थान पर आई लेकिन वहाँ बीज नहीं थे । गिलहरी को कोई फर्क पड़ा हो या नहीं लेकिन त्रिलोचन अपनी गिलहरी को बीज नहीं खिला सका यह उसके लिये किसी सदमें से कम नहीं था । उसके अपनों नें ही त्रिलोचन का प्लान फेल किया था । त्रिलोचन कुछ कहनें के लिये गिलहरी के पास जानें को हुआ तब तक गिलहरी सामनें वाले पेड़ पर चढ़ गई ।
त्रिलोचन अपनी योजना को फलीभूत करनें के लिये फल के बीजों की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा, बड़ी मुश्किल से जमीन के भीतर से खोदकर उसनें 5 बीज निकाले । तीन बीजों को उसनें जमीन के नीचे छिपा दिया तथा दो बीजों को वह अपनें बिल से कुछ दूरी पर रखकर बीजों के बगल में ही एक पत्ते की आड़ मे छिप गया । त्रिलोचन का दुर्भाग्य -- आज गिलहरी बीजों के पास नहीं आई । त्रिलोचन बीजों को वहीं छोड़कर वापस अपनें बिल में चला आया । थोड़ी देर बाद उन्ही बीजों को चूहे बिल में लाकर कुतर रहे थे।
त्रिलोचन नें 2-3 दिन तक बीज ना रखनें का फैसला किया लेकिन छिपाये गये बीजों को देखनें वह जरुर जाता था । आज चौथा दिन था । सुबह से ही त्रिलोचन की आत्मा कह रही थी कि वह गिलहरी उसके बीजों को खानें आज जरुर आयेगी । त्रिलोचन उन छिपाये गये बीजों को जमीन से निकालकर ले आया तथा उन्हें साफ करके अपनें बिल के सामनें वाले पेड़ के नीचे कुछ-कुछ दूरी पर रख दिया तथा खुद वहीं छिपकर गिलहरी का इन्तजार करनें लगा ।
धम्म से एक आवाज आई । त्रिलोचन के शरीर पर किसी नें शूल गड़ा दिया था । प्रेम मार्ग के पथिक त्रिलोचन के प्रणय-निवेदन की चेष्टा पर कुदृष्टि रखनें वाली एक बिल्ली द्वारा यह जघन्य पाप-कर्म किया गया था । बिल्ली के दाँतों के बीच दबकर त्रिलोचन की आत्मा निकल चुकी थी ।
त्रिलोचन द्वारा बनाई गई गिलहरी दर्शन योजना असफल नहीं रही । वह मोहिनी गिलहरी त्रिलोचन द्वारा लाकर रखे गये बीजों को आनन्द के साथ कुतर रही थी ।
हाँ , उस बीज कुतरती गिलहरी को देखनें के लिये वहाँ कोई त्रिलोचन नहीं था ।
___ समाप्त __



