पहली बार देश की जनता हैरान है कि , आपकी बगल में रखी कुर्सी पर बैठनें के लिये मारा मारी क्यों मची है ।
हाँ मैं खुद भी हैरान हूँ , मेंरे में क्या खासियत है कि लोग मेंरे करीब में बैठनें के लिये झगड़ रहे हैं ।
जनता को खबर है कि , कुर्सी पर बैठनें के लिये , जुनियर-सीनियर का झगड़ा है ।
देश में त्याग की भावना किसी में है ही नहीं , मेरे बगल में बैठ भी गये तो क्या फायदा ।
फिर भी जो सीनियर है , उसे आप अपनें पास क्यों नहीं बैठाते ?
सीनियर कौन है , इसके बारे में फैसला हो गया है और कुर्सी पर भी उसे बैठा दिया गया है ।
सीनियरिटी कैसे डिसाईड किये हैं आप ?
मैंने नहीं डिसाईड किया है ,भाई , हाईकमान के आदेश से होता है ये सब ।
तब काहें चिल्लपों मचायें हैं , नम्बर-२ की कुर्सी के लिये ? लगता है जैसे सरकार गिरा के दम लेंगे ।
एक-दो दिन का नाटक है , जहाँ उनके कारनामों की फाईल सामनें आई कि ठण्डे हुए ।
लेकिन दो तीन दिन से अंगद की तरह पाँव तो टिकाये हुए हैं ।
क्या करें, उनसे न उगलते बन रहा है ना निगलते । और तुम जनता के लोग, लगते हो स्टेटमेंट देनें और हल्ला करनें ।
अगर ऐसा है तो , काहे नहीं ,शरणागत होकर माफी माँग लेते ?
वे सब करेंगे देखना । तरक्की के लिये, आगे निकलनें के लिये , केवल सीनियरिटी से सब कुछ नहीं होता समझे ।
लेकिन हम तो यही जानते थे कि आदमी ईमानदार और सीनियर हो तो फिर ---- ।
किस जमानें में हो भाई तुम , काबिलियत क्या होती है जानते भी हो ।
कोई नय़ी परिभाषा आई है , क्या ,देश में काबिलियत की ?
देखो पहली योग्यता - पहुँच है , दूसरी योग्यता - दरबार लगाना , तीसरी योग्यता- आदेश पालन में निपुण होना है ।
ये तीनों योग्यता तो बहुत से लोगों में जन्मजात होती है , लेकिन सब तो आगे नहीं जा पाते ?
सही कहा , उन सब योग्यताओं और प्रतिभा के बाद , कौशल व दक्षता की परीक्षा भी देनी होती है ।
मैं खुल कर ,एक बात पूछूँ ?
पूछो ।
क्या शरद पवार जी में वे तीनों योग्यतायें नहीं हैं ?
मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता । यदि कोई पेपर वाला फिर कुछ छाप देगा तो नौकरी मुश्किल में पड़ जायेगी ।
जिस कुर्सी के लिये झगड़ा है , उसपर कौन बैठा है ?
रक्षा-मंत्री , श्री ए के एन्टॉनी साहब अभी उस कुर्सी पर बैठे हैं ।
क्या वे सभी तीनों योग्यताएँ रखते हैं ?
तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे मुझे अपनें यहाँ दरबार लगवाना है और आदेश देना है ।
तब वे योग्यताएँ किसके सामनें प्रदर्शित करनीं होती हैं ?
तुम हमेशा मेरी फजीहत करवानें पर तुले रहते हो , जानबूझ कर ऐसे प्रश्न पूछते हो ।
आप एंटॉनी से कह क्यों नहीं देते कि , कृपया इसपर शरद पवार जी को बैठनें दें ।
अरे मूर्खराज , हाईकमान का अन्तिम फैसला है ।
लेकिन, उसे हाईकमान द्वारा बदला भी तो जा सकता है ।
तुम भी मरोगे , मुझे भी बेघर करवाओगे ।
आप अपनें अगल-बगल दो कुर्सी लगवा कर, दोनों पर १ या २ नम्बर लिखवा दीजिये , सारा झगड़ा खत्म ।
ऐसा संभव नहीं है क्योंकि यदि बगल में वे बैठेंगे तो मुझे और एंटॉनी दोनों को दिक्कत होगी ।
दिक्कत किसी बात की नहीं है , स्वामी भक्ति में कुछ कमी के चलते , उनका अपमान किया जा रहा है ।
एंटॉनी रक्षा मंत्री हैं , जो मँहगा मंत्रालय है वहाँ जो आदेश आता है उसका आँख बन्द करके पालन करना होता है ।
यदि आपकी बगल वाली कुर्सी पर शरद पवार बैठे रहेंगे तो क्या दिक्कत हो जायेगी एंटॉनी को,आदेश पालन में ।
उनका कान बहुत तेज है वे बिल्कुल धीरे से कहे जानें वाले आदेश को भी सुन लेंगे , इससे दिक्कत होगी ।
मतलब , शरद पवार जी को आपके बगल में बैठनें और २ नम्बर कहलानें का ,अवसर नहीं मिलनें वाला ।
सबसे बड़ी बात ये है कि वे , हाईकमान के विश्वास-पात्र होनें की परीक्षा में भी कभी शामिल ही नहीं हुए ।
इस परीक्षा की जानकारी पवार जी को नहीं रही होगी , नहीं तो वे जरुर शामिल होते और मेरिट में आते ।
यह कौशल और दक्षता की परीक्षा बहुत कठिन होती है , पवार जी के वश की बात नहीं है ।
उस परीक्षा में केवल आप की पार्टी के लोग शामिल होते हैं या , दूसरी पार्टी के लोग भी ?
पूरी जाँच पड़ताल के बाद , अन्य को भी शामिल किया जाता है , लेकिन उसे संदिग्ध की श्रेणी में रखा जाता है ।
उस श्रेणी में शामिल लोगों के नाम बता सकते हैं ?
कतई नहीं , वे लोग हमें बाहर से समर्थन देते हैं , उनके नाम मैं नहीं बता सकता हूँ ।
अच्छा छोड़िये , झंझट वाली कुर्सी को नम्बर-२ की कुर्सी क्यों कह रहे हैं लोग , मेरी समझ में नहीं आ रहा है ?
मैं नम्बर-१ , मेरे बाद नम्बर-२ , जिसके लिये झंझट है ।
नम्बर-१ आप कैसे हो सकते हैं , जनता को मूर्ख बनाते हैं ।
तुम जो कहना चाहते हो , मैं समझ रहा हूँ । वहीं से यह नम्बर मुझे एलाट हुआ है, समझे मूर्ख राम ।
परमानेन्ट , लाईफ टाईम के लिये ?
नहीं भाई , कुछ दिन और है बस , उसके बाद मैं सेवा से अवकाश ले लूँगा ।
फिर तो नम्बर-१ पर किसको बैठना है , ये हम जनता को अभी से मालूम है ।
हाँ अब तुम जनता ही फैसला करो कि उनके बगल में बैठनें वाला कैसा हो , शरद जी जैसा या एंटॉनी जैसा ।
दोनों के बीच का अन्तर हम जनता क्या जानें , लेकिन दोनों को बोलनें में कष्ट होता है , ऐसा लगता है ।
देखो शरद जी दक्षता परीक्षा में शमिल ही नहीं होते ,और एंटॉनी साहब अच्छे नम्बर से पास हुए थे ।
लेकिन , आप तो टाप किये थे परीक्षा में ?
मुझे मालूम नहीं है , फिर भी , मेरे अन्दर की सेवा भावना से मुझे अतिरिक्त अंक मिले होंगे ।
देखिये , कुछ राज घरानों में सेवक पीढ़ी दर पीढ़ी सेवा करते थे और उसी को अपना सम्मान समझते थे ।
वैसी सेवा-भावना आज के जेनरेशन में कहाँ देखनें को मिलती है ।
इसी लिये आप से विनती है कि नम्बर-१ से हटनें के बाद भी आप नम्बर-२ से चार तक की कुर्सी पर जमे रहियेगा ।
अगर ऐसा हुआ तो मैं अपनें को धन्य समझूँगा और सदैव आदेश पालन एवं चरण-वन्दन में जीवन न्यौछावर कर दूँगा ।
प्रभू आपकी हर मनोकामना पूरी करे ।
हे राम------- हे राम ------- हे राम ------------- हे राम ------------------------- हे राम ।
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