गुरुवार, 13 दिसंबर 2012



           सोनिया मैडम गजब की सपेरिन हैं । मुलायम और माया रुपी खतरनाक साँपों कि जो कि एक दूसरे की जान के प्यासे रहते हैं , मैडम नें ना जानें कौन सी जादू की लकड़ी सूँघा दी है कि जब मैडम के हित की बात होती है तो वे दोनों ही आपसी संग्राम को बन्द कर देते हैं और एक सुर में मैडम की आरती उतारनें लगते हैं ।
            अभी वाल मार्ट का मामला चल रहा है , जबकी संसद के दोनों सदन में , मुलायम व माया के अघोषित  युद्ध विराम से जो कि सोनिया मैडम के भय के कारण हुआ  वाल मार्ट नें भारतीय नेताओं की प्रवृत्ति को परखते हुए , कुछ करोंड़ रुपये खर्च करके भारतीय अर्थव्यवस्था पर घुसपैठ करनें का जुगाड़ कर लिया है । कमाल यह है कि जनता को बताया जा रहा है कि वाल मार्ट के आनें से देश के लोगों के लाभ होगा , यहाँ उन लाभों को गिनानें की जरुरत नहीं है । 
            बात हो रही थी मुलायम और माया जैसे खतरनाक साँपों कि जो मैडम सोनिया के सामनें दन्त-विहिन और विष-विहिन हो जातें है । पूरे देश नें देखा किस प्रकार माया और मुलायम नें देंश की महान जनता को सदैव की तरह मूर्ख समझकर , खूब कोसा मालमार्ट को , लेकिन जब फैसले का वक्त आया तो दोनों सापों नें मैडम के पिटारे में रहना ज्यादा पसन्द किया । पता नहीं हमारे देश की जनता कब तक जाति पाँति आधारित सोच को ढोती रहेगी जिसका फायदा तमाम नीच किस्म के नेता सदा से उठा रहे हैं ।
             अब बात चल निकली है , नौकरियों में प्रमोशन पर आरक्षण की । दोनों साँपों को मैडम , अपनें पिटारे से उस समय निकाल देती हैं जब , देश को डँसनें जैसा कोई काम नहीं रहता । छोटे-मोटे , अन्य कई और भी साँप हैं  जो मैडम को बताते रहते हैं कि हम भी विषधर हैं और देश को स्थायी रुप से डँस सकते हैं , लेकिन मैडम कुशल सपेरिन हैं , सभी साँपों को सही समय पर विष निकालनें का अवसर प्रदान करती है । 
               हाँ , बात नौकरी में प्रमोशन को लेकर हो रही थी । मैडम की पार्टी नें नौकरी में प्रमोशन का झुनझुना बजाया था ,  माया नें मैडम से परमिशन लेकर इसके पक्ष में बोलना शुरु कर दिया है , और मुलायम नें खिलाफ में । उत्तर प्रदेश की जनता में फिर टकराव होगा , लोग मरेंगे , ये दोनों साँप अपनें राजनीतिक विष को उगलेंगे जिससे इन दोनों साँपों को फायदा होगा , और जनता के बीच जाति की खाईं और चौड़ी होगी , जो कि मैडम सोनिया के देश पर हुकूमत के लिये आवश्यक है ।
               हे , देश प्रदेश की जनता , आप लोग कब तक मूर्ख बनते रहोगे । ये मुलायम और माया ,रुपी साँप देश की महान सपेरिन सोनिया जी के पिटारे के साँप हैं उनके विष-दन्तों को निकालना और पुनः लगा देंना मैडम को बखूबी आता है ।             
              इस समय प्रमोशन- प्रमोशन खेलनें के लिये इन दोनों साँपों को मैडम सपेरिन नें अखाड़े में उतार दिया है । दोनों साँपों का एक दूसरे पर विष प्रहार जारी है । जनता भ्रमित है । समझदार साँप अगल-बगल हो गये हैं । लालू और पासवान को कोई रूचि नहीं है अपना जहर खराब करनें में । कोई भी काँग्रेसी साँप अपना जहर नहीं उगल रहा है । वह गिद्ध , चील और कौवे के समान , युद्ध भूमि पर निगाह रखे है । कई अन्य प्रकार के साँप भी हैं जो इन्हीं के बीच अपनें विष-वमन की सोचते होंगे लेकिन अनुकूल समय न होनें के कारण चुप हैं ।
              जनता से अनुरोध है कि वे इन साँपों का पहले से फिक्स प्रमोशन-प्रमोशन के खेल को ना देखे , अन्यथा जहर की बूँदें उसपर पड़ सकती हैं , जिसका फिर कोई इलाज संभव नहीं है ।

बुधवार, 12 दिसंबर 2012

देश बिकाऊ है खरीदोगे ?



           सर्दी के मौसम के कारण शाम के समय दुकान पर कोई ग्राहक नहीं आया । दुकान बन्द होनें का समय  होनें को आया । तभी दुकान पर मालदार टाईप का सख्श आया और बोला - टुकड़े-टुकड़े में दोगे तो खरीदूँगा । मैं समझा नहीं, मैंनें कहा । वह धीरे से बोला - धीरे -धीरे खरीदूँगा तो दिक्कत नहीं होगी । मैनें कहा - क्या बहुत ज्यादा लेना है । वह बोला यदि सब कुछ सही और मेरी सोच के अनुसार हुआ तो सारा लेंनें की कोशिश करूँगा । अभी कितना दूँ मैनें पूछा । वह बोला - इन सब कामों में इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं होती है । मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये किस जल्दबाजी की बात कर रहा है । मैंनें फिर भी शालीनता से कहा - जब आप को लेंनें की जल्दी नहीं तो हमें देंनें में भला क्या जल्दबाजी करनी । 
           वह बोला - इसे कहते हैं समझदारी वाली बात । फिर बोला , आप जयचन्द या मानसिंह के रिश्तेदार तो नहीं हैं । मैनें पसीना पोंछते हुए कहा , जय बाबू हमारे पड़ोसी हैं रिश्तेदार नहीं हैं और मान बाबू भी अलग बिरादरी के हैं । वह बोला - अच्छा मजाक करते हैं । पसन्द आया । 
           मेरी समझ में नहीं आया कि मैंनें क्या मजाक किया है , जो ये मेरी तारीफ कर रहा है । मैंनें जोर देकर कहा , साहब मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ वे लोग ना तो मेरी बिरादरी के हैं ना ही मेरे रिश्तेदार हैं ।  वह जोर से हँसते हुए बोला - आप तो प्रेजेन्ट टेंस में उन लोगों का नाम ले रहे हैं । मैंनें घबरा कर पूछा- ऐसा क्यों कह रहे हैं भाई साहब वे लोग तो अभी जिन्दा हैं । वह बहुत जोर से ठहाका लगाकर बोला - आप रियली बहुत उच्च कोटि के विजनेसमैंन हैं , और हर तरह से मुझे जाँच परख लेना चाहते हैं ।
            मैंनें फिर घबरा कर कहा - मैं आप को परख नहीं रहा हूँ , बता रहा हूँ । वह बोला - चलिये अब डील किया जाये । मैंनें पूछा क्या डील करना है । वह बोला - देखिये आसाम और बिहार से शुरु करते हैं । मैंनें कहा - आसाम और बिहार से , क्यों मैं तो बंगाल -- । वह बात कर बोला एक साथ तीनों को सम्भालना मुश्किल हो जायेगा । मैंनें कहा - मैं उसे बढ़ियाँ पैक कर दूँगा , कोई दिक्कत नहीं होगी । वह बोला - ठीक है , हम लोग गुप्त भाषा में ही बात करते हैं । मैंनें कहा - देखिये मैं गुप्त भाषा में नहीं साफ-साफ बात कर रहा हूँ । वह बोला अभी हम केवल असम और बिहार की ही डील कर लेते हैं । मैंनें अनजानें में हाँ कह दिया । वह बोला - मैं जानता था कि कोई ना कोई मिल ही जायेगा बेचनें वाला । मैंनें कहा - मैं यहाँ अकेले नहीं हूँ , और भी लोग बेचते हैं । लेकिन मुझे लगता है कि आपके यहाँ से खरीदनें में ठीक रहेगा । मैंनें कहा - देखिये मैं अब घर जानें की जल्दी में हूँ । वह क्रोधित होकर बोला - इतनी बड़ी डील करनें चले हो और , घर की जल्दी में हो । तुम जैसे लोग सही बेचनें वाले नहीं हो । 
            वह बोला - क्या तुम्हारे घर में बैठकर डील के बारे में बात हो सकती है । मैंनें कहा - भाई साहब , दुकान का कोई माल मैं घर नहीं ले जाता । वह चौंककर बोला - दुकान और माल तुम्हारा मतलब क्या है । तुम देश बेचनें का काम नहीं करते । मैंनें घबरा कर कहा - तौबा-तौबा , ये क्या कह रहे हैं । देश को बेचनें का कारोबार कुछ नेताओं के जिम्मे है । वह मेरे पास आकर कान में बोला - किसी से कहना नहीं , नहीं तो ? मैंनें डरते हुए कहा - नहीं कहूँगा , बेवकूफ हूँ जो आपके हाथ मारा जाऊँ या किसी नेता के चमचे का हाथ मारा जाऊँ । वह फिर बोला - लेकिन तुमनें जो पोस्टर टाँग रखा है , उसे देखो । मैंनें पोस्टर देखा - किसी शरारती लड़के नें - "यहाँ संदेश भी बिकता है"  में से "स" हटा दिया था और वह हो गया था - " यहाँ देश भी बिकता है " इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी  । 

 रिकवरी आफ इंडिया   बनाम   डिस्कवरी आफ इंडिया   संसार के अधिकांश इतिहासकारों नें अपनें देश का इतिहास लिखते समय इस बात का ध्यान र...