सोमवार, 20 अगस्त 2012

हमहूँ का मौका दो ना -- प्ली-----ज---- ।


   हे भारत भाग्य विधाता ,
                           आप कौन हैं मुझे नहीं मालूम है , मैं बचपन से आप को खोज रहा हूँ , आप ना जानें कितनें आड़े-तिरछों , लुच्चे-लफंगो , गुन्डे-बदमाशों , पापियों-दुराचारियों , नीचों-अधमों को अपनीं शरण में रखकर जमीन से आसमान तक पहुँचा दिये , और वे अब आपके समानान्तर ही देश के भाग्य विधाता बननें की कोशिश में हैं , जिनमें कई तो ऐसे हो गये हैं कि वे भारत की जगह , अन्य देशों की तरक्की में हाथ भी बंटा रहे हैं ।
                           मुझे चालाकी , मक्कारी , देश से गद्दारी , कमीनापन , नीचता और बेईमानी व भ्रष्टाचार आदि के गुण सिखानें वाला कोई योग्य गुरु ही नहीं मिला , जिसके कारण मैं न तो आत्मिक विकास ही कर सका और ना ही अन्य किसी देश में धन रखकर , उस देश की आर्थिक स्थिति सुधारनें में कोई मदद ही कर सका , निश्चित रुप से मेरे अन्दर ना तो कोई प्रतिभा थी ना अब है , लेकिन परिवार में यदि कोई मन्द बुद्धि या अविकसित दिमाग का व्यक्ति  पैदा हो जाये तो क्या उसे प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिये ?
                            मैं जनता हूँ और दावे के साथ कह सकता हूँ कि यदि  आप की थोड़ी सी भी कृपा मिल जाये तो , लँगड़ा एवरेस्ट फतह कर सकता है , गूँगा मो० रफी की मधुर आवाज में गा सकता है , और पागल या गधा टाईप का व्यक्ति  साहित्य में नोबल प्राईज जीत सकता है और देश का सबसे बड़ा पद तक पा सकता है । मुझे आपकी महिमा के बारे में सब मालूम है , यदि आप की कृपा दृष्टि हो जाये तो , खटमल मारनें की दवा बेचनें वाला कई फाईव स्टार होटल का मालिक बन सकता हैं , पान बेचनें वाला देश का सबसे बड़ा उद्योगपति हो सकता है । 
                            आपका गुणगान करनें के लिये , करोंड़ों मुख चाहिये अफसोस कि मेरे पास केवल एक मुँह है  और वह भी आपको दिखनें लायक नहीं है । मेरे मन में विचार आया कि जब तमाम देवी देवताओं की पूजा- अर्चना  करनें , बाबा लोगों का वन्दन करनें और तमाम तंत्र-मंत्र से भी कोई बात नहीं बनी तो क्यों ना आपकी चरणधूलि अपनें गन्दे माथे पर लगाऊँ , शायद मेरा भाग्य भी तमाम नकारों की तरह से पल्टी खा जाये । 
                          मैं आपसे केवल इतना माँगता हूँ कि , अगले आनें वाले कुछ दिनों में जिन तमाम नकारे लोगों को , देश को लूटनें का अवसर मिलनें की संभावना है , उनके सम्भावितों में मुझे भी शामिल कर लीजिये , मैं निष्ठा-पूर्वक शपथ लेकर कहता हूँ कि मैं जो भी घोटाला करूँगा , उसके पाई-पाई का हिसाब पूर्ण पारदर्शिता के साथ आप को दूंगा , फिर मेरी सेवा से खुश होकर जो भी ईनाम आप दीजियेगा मैं उसे सादर आपका प्रसाद समझकर ग्रहण करुँगा , और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं कुछ ही दिन में अपनी स्वामी-भक्ति का ऐसा नमूना पेश करूँगा कि कुछ ही दिन में अपनें सारे , टामियों , मोतियों , जैकियों  जैसे कुत्तों की सेवा लेनें की आपको  कोई जरुरत ही नहीं रह जायेगी  मैं विश्वास दिलाता हूँ कि यदि आपकी कृपा रही तो , देश का कोई भी कुत्ता भौंकनें में मेरी बराबरी नहीं कर पायेगा ।
                          हे भारत के नये नवेले भाग्य विधाता जी - हमहूँ का एक बार मौका प्रदान करिये ना -- प्लीज--  तबियत मस्त ना कर दिये तो ----- कहियेगा । 
                  

                                         

                                  


रविवार, 19 अगस्त 2012

भारत का अगला प्रधान मंत्री कौन ?



           अगस्त का महीना अबकी बार कई महत्वपूर्ण घटनाओं वाला रहा है । १५ अगस्त को हमनें स्वराज्य दिवस मनाया ,जिसे लोग स्वतंत्रता दिवस के नाम से भी जानते हैं । देश के खिलाड़ियों ने जहाँ पदक जीतकर देश का नाम रौशन किया वहीं , सत्ता के खिलाड़ियों नें सारे घोटालों का रिकार्ड तोड़ते हुए  कोयला आबंटन घोटाला किया  देश की जनता नें अपनी नियति मानकर उसे भी देखा ।  लगभग २ लाख करोड़ रुपये का यह घोटाला है जिसमें सोनिया मैडम के परम् भक्त श्री मन मोहन जी का नाम सबसे ऊपर रखा जा रहा है । वैसे देश की जनता घोटालों की इतनी अभ्यस्त हो चुकी है कि देश के किसी भी कोनें से इस बारे में कोई जोरदार आवाज नहीं सुनायी पड़ी , क्योंकि जनता जानती है कि नेता हैं मंत्री हैं , सबको चुनाव लड़ना है । चुनाव में सफेद पैसा तो लगाया नहीं जा सकता , इस लिये घोटाला नहीं होगा तो चुनाव खर्च कहाँ से आयेगा । दूसरे ,हमारे देश के धन से कई देशों की अर्थव्यवस्था चल रही है , उसे भी बरकरार रखना है ।
         इसी महीनें में एक नेता और मंत्री गोपाल कांडा की संगत का दुष्परिणाम भी देखनें को मिला जब गीतिका नामक एक लड़की को अपनी जान गंवानी पड़ी । इसी महीनें बेचारी फिजा नें जिसका संबन्ध भी एक नेता से था इस दुनिया को अलविदा कह दिया , नेतागण की सोहबत में पड़ी अन्य बेचारियों की जिन्दगी सलामत रहे यही रब से दुआ है । इसी महीनें बाबा रामदेव नें अपनीं लीला का प्रदर्शन किया , केन्द्र सरकार नें पुलिस से लाठियाँ नहीं भंजवायी , गोली नहीं चलवायी , इसलिये देश के तमाम लीला-दर्शकों को कोई मजा नहीं आया ।
        इसके अलावा देश नें देखा कि किस तरह से पाकिस्तान के हिन्दू , वहाँ से भागकर देश में आरहे हैं , यदि संसार के किसी कोनें में हमारे वोट बैंक वालों के साथ कुछ होता तो हमारे नेतागण किस कदर आसूँ बहाते , कहना नहीं है , लेकिन हमारे देश के किसी बड़े मंत्री या नेता नें इसपर कोई सकारात्मक टिप्पणी नहीं की । मेरी , छोटी सी राय है कि जिन आतंक वादियों को सोनिया जी की सरकार दामाद ऐसा बैठाकर खिला रही है , वह बन्द करे और उनका सारा राशन पाकिस्तान से आनें वाले लोगों पर खर्च करे , तथा , आतंकवादियों को बाबा रामदेव के आश्रम में काम करनें के लिये भेज दे , ताकि वे आश्रम के व्यवसाय में बाबा की मदद करें , और सरकार उन्हें बतौर खुफिया अधिकारी बाबा के यहाँ से सूचना प्राप्त करनें के लिये भी नियुक्त कर सकती है , क्योंकि इतनें दिन हराम का खानें के बाद हो सकता है वे सरकार के हितैषी हो गये हों । वैसे भी देश से दोनों को ही लगाव नही है ।
          इसके अलावा अगस्त के महीनें में असम में दंगे और उसके कारण देश के अन्य भागों में किये जानें वाले दंगों को भी देश के लोगों नें देखा और पूर्वोत्तर के लोगों का देश के अन्य भागों से पलायन भी देखा , हम भारत देश के लोग बहुत सी बातों को समान्य ही समझ कर उसकी अनदेखी करते हैं और वह दिन दूर नहीं जब सारे भारत वासियों को एक जगह से दूसरी जगह पलायन करना होगा , और फिर अलग- अलग बस्तियाँ होंगी , अलग-अलग के धर्म के लोगों की । देश के भीतर ही इस प्रकार का पलायन देश के नेताओं की समझ में भले ही न आ रहा हो लेकिन देश के हालात पर नजर रखनें वालों की बेचैनी , भयानक भविष्य की ओर इशारा कर रही है ।
           देश भीतर ही भीतर किस तरह सुलगनें की ओर बढ़ रहा है , इस बात से बेपरवाह हमारे नेतागण किस चिन्ता में हैं , यह देखना महत्पूर्ण है ।
          कोयला आबंटन में किये गये महाघोटाले से ध्यान हटानें की साजिश के तहत या अन्य किसी मकसद से मुलायम सिंह जी नें शगूफा छोड़ा है कि , अगला प्रधानमंत्री तीसरे मोर्चे का होगा । देश में घटनें वाली सारी महत्वपूर्ण घटनाओं को दरकिनार कर हमारे देश में बहस चल रही है कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा । सारे लोग तमाम लोगों के नाम गिना रहे हैं । भारत वर्ष की जनता वैसे  भी सब कुछ भूलनें में माहिर है , लेकिन हमारे नेतागण चाहते हैं कि जनता को सोचनें समझनें का वक्त ही ना दो या उसे सोचनें समझनें के लायक ही न रखो , ताकि भूलनें की बीमारी का नाम लेंनें की जरुरत ही न पड़े ।
         मेरा भी आप से सादर निवेदन है कि आप भी देश के हालत के बारे में अपना माथा न खराब करें , और केवल इसपर विचार करें की कौन बनेगा प्रधान-मंत्री , कलमाडी जैसा , राजा जैसा या मनमोहन जी जैसा , देश में ये ही लोग ऐसे हैं जो काफी लोकप्रिय हैं , अभी तो घोटालों की दौड़ में सबसे बड़ी गठरी सिर पर लिये मनमोहन जी ही नम्बर-१ नजर आ रहे हैं , क्या विचार है ?   
        

सोमवार, 13 अगस्त 2012

आप इस देश के कौन ?



प्रणाम , बड़ा रेलेक्स फील  कर रहे होंगे ?
मैं तो हमेशा से रिलेक्स ही फील करता हूँ ।
अन्ना का भूत बिना डरवाये निकल गया और अब बाबा नें अपनें जिन्न को खुद ही बोतल में बन्द कर दिया ।
देखो मैं भूत और जिन्न से नहीं डरनें वाला , समझे ।
तो काहे कुछ नहीं कहे , बाबा और अन्ना के आन्दोलन के समय ?
मैडम नें आदेश दिया था , हम सभी को ।
कैसा आदेश ?
यही कि बोलना मत , ये दोनों खुद ही शान्त हों जायेंगे ।
अच्छा ये बताइये कि आप तो काला धन विदेश में जमा नहीं किये , भ्रष्टाचार नहीं किये , फिर डरे क्यों ?
मैं कहाँ डरा , मैं बस चुप ही रहा ।
ये आन्दोलन तो आपके खिलाफ नहीं था , लेकिन आप ---?
देखो मैं जिन लोगों की संगत में हूँ वे लोग मुझसे कहे कि मैं भी उनके गैंग का मेम्बर हूँ ।
और आप मान लिये कि आप देश के लूटेरों के गैंग के सदस्य हैं ?
नहीं मानूं तो जाऊँ कहाँ । आखिर मैं मैडम का प्रधानमंत्री हूँ , मेरा भी उनके प्रति कोई फर्ज है ।
अरे भाई आप देश के प्रधानमंत्री हैं , आपका फर्ज देश के प्रति पहले है , मैडम के प्रति बाद में ।
ना बाबा ना , मुझे बेवकूफ मत बनाओ , मैं जानता हूँ कि देश की जनता मुझे कुछ नहीं मानती है ।
आप , देश के प्रति , वफदार नहीं हैं क्या ?
हूँ , लेकिन मैडम के आदेश का पालन भी तो करना है ।
वित्त-मंत्री , रक्षा-मंत्री , गृह-मंत्री ,और तमाम मंत्री क्या देश के मंत्री नहीं हैं ?
मेरी अन्तरात्मा से पूछोगे तो मैं कहूँगा , बिल्कुल नहीं ।
क्यों ?
मेरे बारे में तो सब लोग जानते हैं कि ,मैडम नें मुझे यह कुर्सी दी है ।
हाँ ,सब लोग जानते हैं कि आप ---- ।
मेरे समेत सारे मंत्री , मैडम द्वारा बनाये गये हैं , तो तुम्ही बताओ हम सब किसके मंत्री हुए ?
आपके अनुसार भारत देश का ना तो कोई राष्ट्रपति है ना ही प्रधानमंत्री और ना ही कोई मंत्री या नेता है ।
लगता तो है कि , वे लोग हैं , लेकिन हकीकत में , बिना मैडम की चाभी के कोई हिल भी नहीं सकता ।
अब आप बर्दाश्त से बाहर की बात कर रहे हैं ।
तुम भारत वासियों को सब बर्दाश्त करना होगा , देश में ना कोई आन्दोलन होगा ना ही जनता की आवाज होगी ।
तब क्या होगा ?
घोटाले होंगे , हम बिना देखे सुनें कागज पर दस्तखत करेंगे, लोग हमें गाली देंगे ।
आप देश को नरक होते देखते रहें हैं , क्या आगे भी देखते रहेंगे ?
अगर मैडम की कृपा रही तो देश का नाम बदलनें पर भी विचार किया जा सकता है ,समझे ।
सब समझ गया , अब मुझे सोचना है कि मैं इस देश का क्या हूँ ?
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शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

अन्यथा भारत-रत्न जरुर मिलता ।



आज सन्डे मना रहे हैं क्या ?
अच्छा किये आ गये , अन्ना के आन्दोलन के समय से ही कान में रुई और आँख पर पट्टी बँधवाकर अकेले पड़ा रहा ।
रूई और पट्टी क्यों ?
ताकि कुछ देख सुन ना पाऊँ ।
लेकिन मुँह तो खुला ही था , कुछ बोल तो सकते थे ।
जानते हो मैं बिना पूछे , कुछ बोलता नहीं ।
आपकी खामोशी को लोग आप की चतुराई समझे लिये ।
अक्सर मेरे साथ ऐसा ही होता है , मेरी मजबूरी ,ना तो अन्ना समझेंगे ना ही उनकी टीम वाले ।
क्या आपकी पार्टी के सभी नेता को रूई और पट्टी बाँधना अनिवार्य था ?
हाँ जी , और कुछ के मुँह में तो विदेशी टेप भी चिपकाया गया था , कुछ को शीत-निद्रा में भी भेजा गया ।
कपिल सिब्बल टाईप के कुछ लोग जो सर्प योनि में जन्में लगते हैं , अब धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं ।
जानते हो , ये सब मेरे ऊपर , हँसते हैं जब मैं , अपनें पद की गरिमा की बात उन्हें बताता हूँ ।
अच्छा , आप को ऐसा नहीं लगता जैसे आपकी पार्टी के लोग जरुरत से ज्यादा गुलामी में जी रहे हैं ?
लगता तो है , लेकिन करें क्या , मेरी आड़ में सब नंगा नाच कर रहें हैं , बदनाम मैं होता हूँ ।
आप कपड़ा पहनकर नाचनें के लिये क्यों नहीं कहते ।
मजाक मत करो , मैंनें निष्ठा के साथ मैडम की सेवा की है , जो कहा गया सब किया , लेकिन सोचो --- ।
लेकिन सोचें क्या ?
यदि मैंनें वैसी सेवा देश की , की होती तो , मैं भारत-रत्न या देश रत्न का पुरस्कार पानें का हकदार होता ।
लेकिन आप दुखी ना हों , मैडम सेवा मैडल या मैडम रत्न पुरस्कार आपको जरुर मिलेगा ।
वैसा मैडल या पुरस्कार तो है नहीं , लेकिन होता भी तो भी घड़ियाल टाईप के लोग मुझे लेनें नहीं देते ।
आप जैसा व्यक्ति जिसनें देश-हित से कहीं ज्यादा मैडम हित पर ध्यान दिया , आपको ईनाम तो मिलना ही चाहिये ।
सच पूछो तो हमें लगता है कि हम देश से गद्दारी कर रहे हैं , लेकिन करें क्या , दलदल में फँसे हैं ।
आप क्यों दलदल में जाना स्वीकार किये ?
उस समय कितनें नकली आँसू बहे थे ,  मैंनें भवना में बहकर वैसा फैसला लिया ।
लेकिन जनता तो जानती थी कि आप केवल कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं हैं ।
जनता क्या , मैं स्वयं जानता था कि मेरी क्या हैसियत है , लेकिन ऐसी लूट होनें की मुझे उम्मीद नहीं थी ।
झूठ मत बोलिये , आपनें स्वयं घोटाले बाजों के बचाव में कई बयान दिये हैं , आप सब जानते हैं ।
हाँ , मैं सब जानता हूँ किसनें-किसनें , कहाँ-कहाँ कितनें-कितनें घोटाले किये हैं , लेकिन बता नहीं सकता ।
समय आ गया है कि आप , सारे राज खोल कर जनता के सामनें रख दीजिये , और भारतरत्न हो जाइये ।
जानते हो , हर घोटालें में पता नहीं मेरा नाम भी कैसे आ गया है ?
यानि आपको भी चोरों के गैंग नें अपना सदस्य बना ही लिया । आप सच बोलकर  निकल लीजिये वहाँ से ।
अब मैं जहाँ हूँ वही मेरा समाज है , मैं चाहकर भी सामाजिक बन्धनों को तोड़ नहीं सकता ना ही निकल सकता हूँ ।
चोर उचक्कों के समाज में रहना भी चाहते हैं , और सज्जन भी कहलाना चाहते हैं , ये कैसे हो सकता है ?
सहीं कहते हो लेकिन , कुछ वैसे ही काम अनजानें में हम भी कर बैठे हैं , यही हमारी मजबूरी है ।
तब यदि आपको इस जन्म में मिलेगा भी तो केवल मैडम रत्न पुरस्कार या फिर देश का तिरस्कार ।
जा रहे हो क्या ?
जी , अभी आप भी फ्रेश नहीं हुए होंगे , नमस्ते ।
हाँ सही कह रहे हो मैडम से शौच करनें की परमिशन भी अभी लेना है ।
 


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