शनिवार, 30 जून 2012

त्याग : सतयुग से कलियुग तक ।

 भक्तों ,
      सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र नें सतयुग में त्याग किया ।
      भगवान राम नें त्रेता युग में पिता के वचन की रक्षा में त्याग किया और वन में गये ।
      द्वापर युग  में कोई त्यागी नहीं हुआ । लेकिन , दानवीर कर्ण और महान प्रतिज्ञाकारी भीष्म इस युग की देंन रहे ।
स्वामी जी, कलियुग में कोई दानी या त्यागी हुआ कि नहीं ।
      अभी , कलियुग का अन्त नहीं आया है , रेकॉर्ड में नाम तो कई हैं , युग के अन्त में सर्वश्रेष्ठ घोषित होगा ।
स्वामी जी , हमारी जिज्ञासा है कि अभी जिनका रेकॉर्ड सबसे ऊँचा है , उनके बारे में बताया जाये ।
      बेटा , तुम्हारी जिज्ञासा हम यदि अभी शान्त कर देंगे तो , फिर तुम कई प्रश्न और पूछोगे ।
स्वामी जी , आप विस्तार से कलियुग के उस महान् त्याग की गाथा हमें सुनायें , ताकि हम भक्त कृत्य-कृत्य हो सकें ।
प्रिय भक्त जन , मैं कथा प्रारम्भ करता हूँ , यदि कोई प्रसंग ना समझ में आये तो भी बीच में कुछ बोलना नहीं है ।
                  अब अपनीं श्वासें रोककर सुनिये और अपनें देश की प्राचीन गौरवमयी संस्कृति को समझिये ।
भक्तों ,
            कलियुग का प्रारम्भ ही , छल ,कपट, धोखेबाजी , प्रपंच , के चरम पर पहुँचनें पर हुआ था । यूँ कह सकते हैं कि कलियुग नें अपनीं आँखें ही , छल ,कपट , कमीना गिरि , जाल फरेब ,धूर्तई ,धोखेबाजीके वातावरण में खोली थी । चूँकि कलियुग का जन्म भारत देश में ही हुआ अतः सर्वाधिक प्रभावित भी यही देश रहा ।  वसुधैव कुटुम्बकम् के सिद्धान्त के अनुयायी भारत वासियों नें खुले दिल से अतिथि देवो भवः की भावना के साथ , जो भी भारत भूमि पर आया सबका स्वागत् किया और , ऐसी स्थिति बना दी कि , उन बाहरी अतिथियों को अपना घर , परिवार ,और जो कुछ भी संभव था , वह उन्हें प्रदान किया और अन्ततः देश भी सौंप दिया जिसका विकृत रुप भारत वासियों के सामनें है । एक समय ऐसा आया जब भारत वासियों को  अपनें देश के शासकों से ज्यादा प्रिय बाहरी शासक लगनें लगे और उनकी सत्ता कायम करवानें में भारत वासियों नें बढ़-चढ़ कर सहयोग किया, इसके लिये भले ही अपनें भाई का गला ही क्यों ना काटना पड़े । वे शान से रहें इसके लिये उनके रहनें के लिये महल बनवाये , किले बनवाये और बाद में अपनें हाथ को कटवा कर भी नत मस्तक रहे ।  परिणाम स्वरुप भारत वासियों के रग-रग में समा गया , कि कोई बाहरी या बाहरी जैसा दिखनें वाला ही उनके ऊपर  शासन करनें योग्य है । समय बदला भारत वालों नें अपनें स्वामी को बदलनें का विचार किया  क्योंकि बाहर से आये शासक ७-८ सौ सालों तक रहनें के बाद देश वासियों जैसे लगनें लगे और बाहरी शासक की चाहत और मनोवृत्ति वाले भारत वासियों नें शुद्ध गोरी चमड़ी वालों को जी जान लगाकर अपना नया स्वामी और शासक बना दिया और कई सौ बरस तक उनकी सेवा में जी जान से जुटे रहे । भारत वासियों को  उस समय जबरदस्त झटका लगनें से बचा जब गोरी चमड़ी वाले जिन्हें अँग्रेज कहा गया  देश को छोड़कर जानें लगे , लेकिन भगवान , नें भारत वासियों की सुन ली और एक बिल्कुल अँग्रेजों की तरह के सोच वाले व्यक्ति को देश का भाग्य विधाता बनाया गया । देश वासियों नें काफी खुशी का इजहार किया । इस प्रकार यद्यपि गोरी चमड़ी वाले चले गये किन्तु उनके शासन के सारे तत्वों को , नियम कानून को , संक्षेप में कहा जाय तो सारी चीजों को ज्यों का त्यों रहनें दिया गया ताकि भारतीयों को एहसास होता रहे कि देश पर अभी भी अग्रजों की हुकुमत है । इस विषय पर विस्तार से गाथा बतानें में  कई महीनें लग जायेंगे इसलिये , सारी कथा का बड़ा भाग, सार रुप में कह दिया ।
भक्तों  ,
             भारत वासियों के मन में , सदैव यह इच्छा बनी रही कि , देशी टाईप का कोई आदमी देश पर शासन ना करनें पाये किन्तु होनी को कौन टाल सकता है , वंशानुगत सत्ताधारी द्वारा, आपात् काल लगा दिया , जनता क्रांति पर उतर आयी और देशी टाईप के लोगों नें सत्ता पायी , लेकिन जैसा होता है कि, कई दिन के भूखे को जब खाना मिलता है तो वह एक साथ ढेर सारा खाना खा लेता है और उसे अपच हो जाता है , जिन्हें सत्ता मिली , वे पहली बार सत्ता का स्वाद चख रहे थे , सो उन्हें खानें का तरीका नहीं आया और वे एक दूसरे की थाली का भोजन छीननें लगे , और आपस में इतना सिर फुटव्वल किये कि जनता , को फिर से , पुरानी शासक  की याद आनें लगी और , जनता नें अपनीं पिछली गलती को सुधारते हुए , क्षमा याचना के साथ उन्हें फिर गद्दी पर बैठाया ।
भक्तों ,
           आप सोचते होंगे कि त्याग गाथा की जगह मैं यह कथा क्यों सुनानें लगा । पूर्ण जानकारी के लिये ,थोड़ा उसकी पृष्ठ भूमि पर गौर करना जरूरी है । आगे सुनिये -
           गद्दी पर दुबारा बैठनें के बाद , यह तय हो गया कि किसी देशी टाईप के व्यक्ति के लिये सत्ता के शीर्ष पर पहुँचना , या उसे बरकरार रखना असंभव है , क्योंकि एक तो देशी टाईप के दलों में लगभग एक ही स्तर के तमाम लोग होते हैं , और बिना बात ही , आपस में एक दूसरे से आगे निकलनें का प्रयास करते हैं जनता सब देखकर समझ जाती है कि बिना सत्ता के शीर्ष पर पहुँचे ही ये हाल है तो , पहुँचनें पर क्या होगा ।
भक्तों ,
           समय बीतता गया , देशी लोगों के पास सत्ता पुनः आयी लेकिन जैसा पहले कहा था कि आपसी खींच तान के कारण , सत्ता जहाँ , जिसके हाथ में होनी चाहिये थी आ गई ।
भक्तों ,
                  जोर दार ताली बजाईये , वह गाथा , जिसका आप को इंतजार था मैं सुनानें जा रहा हूँ ।
           चुनाव हुए , कुछ देशी पार्टियों के गठबन्धन को पराजित होना पड़ा , कुछ देशी दल जो कभी क्रांति के समय में देशी पार्टियों के साथ खड़े थे पाला बदल कर , सत्ताधारियों के साथ में खड़े हो गये , और प्रस्ताव आया कि माता त्यागमूर्तिको देश की सत्ता सौंपी जाये । तमाम लोगों ने आंसूँ का दरिया बहा दिया , बहुत अनुरोध किया , पैरों पर गिर कर प्रार्थना की , लेकिन , जय हो - जय हो - , उन्होनें अन्तर्-आत्मा की आवाज पर पद को स्वीकार नहीं किया और सिंहासन को त्याग दिया । उस समय लगा जैसे सारे देश को काठ मार गया , कई नेता व नेत्री के आँसू तो रुकनें का नाम ही नहीं ले रहे थे । ऐसा त्याग देश वासियों ने केवल सुना था देखा नहीं था । जब उनका मौन आश्वासन मिला कि  मैं ही सब कुछ हूँ सर्वत्र मैं ही विराजमान रहूँगी , तब जाकर लोगों के आसूँ रुके ।
        किसी भक्त को कोई शंका हो तो प्रश्न लिखकर गले में लटका ले ,देश का कोना-कोना विद्वानों से भरा पड़ा है , कोई ना कोई शंका का सामाधान कर देगा ।

                                     जय हो --- जय हो ----- जय हो ----- ।
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गुरुवार, 28 जून 2012

सब क्लियर है ---।

ऐ, रुको -- ।
हमसे , कुछ कहे का ?
हाँ , तुम्हीं से कह रहा हूँ ।
हम का किये हैं , जो हमको आवाज दे रहे हैं ।
तुम वही हो ना जो , मेरा मजाक उड़ाते हो और क्या-क्या बोलते हो ।
मैं ही अकेला थोड़ी हूँ , बहुत लोग आपसे सवाल पूछते हैं ।
नहीं तुम कुछ ज्यादा ही जनता की वकालत करते थे , आज हम बोलेंगे , तुम सुनोगे ।
बीच-बीच में कुछ पूछ तो सकते हैं ना ?
एकदम नहीं , छूट का फायदा उठाकर , तमाम सिरफिरे , बोलते रहे हैं ।
मेरा गला तो छोड़िये । इतनी ताकत एकै दिन में कैसे आ गई ? रिवाईटल ले रहें हैं का ?
आखिर एक सवाल दाग ही दिया ना , अब मेरी और सिर्फ मेरी बात ही सुनो ।
        " प्रणव दादा और संगमा के बीच का चुनाव तो दिखावा है , वास्तव में यह NDA और UPA के बीच की जंग हो गई है , हमारे साथ , लालू , मुलायम , मायावती ---
मायावती और मुलायम एक साथ ---
चुप------- कहा था ना , मत बोलना , अब बोला तो दिग्विजय सिंह बना दूँगा ।
कोई शंका होगी तो पूछेंगे नहीं ?
फिर सवाल -- तुम जनता के पास सवालों के अलावा कुछ है ।
सवाल  पर , पाबन्दी लगाइयेगा तो --- ।
हाँ तो राष्ट्रपति के चुनाव का नामांकन हो गया , और उसी के साथ तय भी हो गया कि  --- ।
दादा ही राष्ट्रपति बनेंगे -- ।
बीच में बात क्यों लपक लिया ?
लेकिन इ सब तो लगभग महीनें भर पहले ही तय हो गया था , इसमें नया क्या है ।
नया ये है कि ममता का क्या होगा ?
हम बतायें कि आप बोलियेगा ।
उन्हें हम अपनें से दूर जानें नहीं देंगे , और दूसरा कोई उन्हें साथ रखेगा नहीं ।
कोई सवाल चाहते हो तो पूछ सकते हो ।
आपके बाद प्रधान मंत्री कौन बनेगा ?
कोई नज़र आता है , दूसरा , दूर-दूर तक ?
हाँ , उनके अलावा कोई है ही नहीं , तो नजर कहाँ से आयेगा ।
जनता में समझदारी आ गई है , तुम सही कह रहे हो ।
लेकिन सच्चाई तो एक और भी है , तमाम लोग कहते हैं ।
कौन सी सच्चाई ?
यही कि आप भरत जी जैसे राजगद्दी की सुरक्षा कर रहें हैं केवल , शासन तो , उनकी खड़ाऊँ  ----- ।
क्या बकते हो , तुमको प्रश्न पूछनें की छूट दे दी तो तुम अपनीं औकात भूल गये ।
देश का शासन उनका जूता चलाये या मैडम की जूती , तुमको उससे क्या ।
हम आपकी बात से पूर्ण रुप से सन्तुष्ट हैं ।
मैं देश के हर व्यक्ति को सन्तुष्ट कर दूँगा , मेरी बात गलत नहीं हो सकती ।
कौन सी बात ?
मेरे बाद है कोई दूसरी पार्टी में , जो यह कुर्सी सम्भाल सके ।
एक से बढ़कर एक नकारा लोग कुर्सी सम्भालें हैं देश में जो उसके लायक नहीं है , देश चल रहा है ना ।
अच्छा अब जाओ , लेकिन कभी भी , बोलनें से पहले , सौ बार सोचना ।
                 " सौ क्या लाख बार भी सोचे चिल्लायें , लेकिन जनता , आपस में इतनी बँट चुकी है , कि उसकी आवाज  में ताकत ही नहीं रह गई है , जनता किसी पार्टी , किसी दल पर विश्वास नहीं करती , जनता को , कोई नांग नाथ तो कोई साँप नाथ लगता है , और आज हमारे देश की हालत ये हो गई है कि , सोनिया गाँधी के सामनें , किसी नेता की कोई औकात ही नहीं नजर आती । इसके लिये सोनिया गाँधी को जिम्मेदार कैसे माना जाये ।
                 देश वालों , अँग्रजों नें हमें कानून बनाकर दिया , हम कैसे रहें , कैसे पढ़ें-लिखे यह बताया , उनकी नकल हम हर स्तर पर करते हैं और करते रहेंगे , वे हमारे , स्वामी थे , हम उनके गुलाम थे , शायद अभी भी उस गुलामी की यादों से गुलामी की मानसिकता से हम  उबर नहीं पाये हैं , वे हमारे जीन्स में घुस गई हैं , और घुसे भी क्यों नहीं लगभग हजार साल तक हम गुलाम रहे हैं , भले ही , बच्चों को हम बताते हैं कि , हम अँग्रजों के गुलाम थे । देश की गुलामी की शुरुआत तो सिन्ध के शासक दाहिर की पराजय के बाद से शुरू हो गई थी । मात्र कुछ साल की आजादी में ही हम इतनें मद मस्त हो गये कि , पता ही नही चला कि हम धीरे-धीरे फिर गुलामी की ओर अग्रसर हो रहे हैं , भले ही हम रेत में सिर छिपाकर स्वयं को सुरक्षित समझनें का भ्रम पाल लें ।
            सोचो ------ खुद से पूछो ----- क्या आँख बन्द कर लेनें से कबूतर को  बिल्ली से छुटकारा  मिल जाता है ?
              नहीं ना ----- तब------ किसकी राह तक रहे हो --- उठो --- ।
                                       जय हिन्द ------ जय हिन्द-------- जय हिन्द --- ।
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मंगलवार, 26 जून 2012

दिग्विजय बाबू का अपमान देश हित में नहीं --।






 बताइये ना और   क्या-क्या बनूँ ?







अरे भाई हम , करुणा बाबू के  राजा की नहीं , मौन व्रती बनाये गये दिग्गी राजा की बात कर रहें हैं ।
उनसे क्या लेना देना तुम लोगों को , वे हमारी पार्टी के नेता हैं ।
देश के नागरिक हैं कि नहीं ।
कौन तुम या , वे ?
कहा ना , दिग्गी राजा के बारे में जानकारी लेना है ।
क्या जानकारी चाहिये ?
यही कि वे बोलना कब शुरु करेंगे , वित्त-मंत्री का पद पानें के वे लायक क्यों नहीं हैं ?
इन प्रश्नों का उत्तर जिसके माध्यम से देना है , उन्हें ऐसी ठेठ भाषा नहीं आती ।
इसका उत्तर आप ही क्यों नहीं दे देते ?
कान इधर करो --
हाँ बोलिये ।
वे अब तभी बोलेंगे ,जब हम न रहेंगे । क्यों कि वे जिस डाल पर बैठते हैं उसी को काटनें लगते हैं ।
लेकिन बेचारे , वोट बैंक के लिये , ओसामा की आत्मा का कितना सम्मान् किये ।
लेकिन हमारी पार्टी का कितना नुकसान हुआ ।
कैसे ?
अब तुम जनता कुछ-कुछ समझदार हो गये हो , लेकिन वे ---- ।
ये क्या कह रहें हैं ?
ऐसा मेरा नहीं , हाई कमान का मानना है ।
लेकिन इस तरह से अपमान करना क्या ठीक है ।
देखो वे चुप हैं तो सब ठीक है , अन्ना की पार्टी वाले भी, कोई मसाला नहीं पा रहें हैं ।
लेकिन हम को तो उनकी ---------------- अच्छी लगती है ।
वे सोचते हैं कि लोगों को मजा आ रहा है , लेकिन हमारी पार्टी का तो कबाड़ा -- हो जाता है ।
हमारी आपसे करबद्ध प्रार्थना है ।
क्या ?
        " कि उन्हें आप वित्त मंत्री ना सही , कोई अन्य फालतू टाईप के विभाग का मंत्री बनानें की सिफारिश , हम जनता की बेहद माँग पर , जनता की तरफ से , उनसे जरुर करियेगा । वीरबाबू जो खाली किये हैं वही मंत्री उन्हें बनवा दीजिये , प्लीज । कितना तड़प है सत्ता में आनें की , कुर्सी पर बैठनें की ,उसी के लिये बेचारे बन्दर की तरह उछलते और करतब करते हैं , लेकिन , आप जैसे निष्ठुर , ना तो उनके करतब पर ताली बजाते हैं और ना ही कुछ इनाम की सिफारिश करते हैं , और ना ही उनपर उनकी (??) कृपा की बरसात होनें ही नहीं दे रहे । हम देशवासी वादा करते हैं कि , देश में चाहे कितना भी लूट हो , घोटाला हो , भ्रष्टाचार हो, ज्यादा हल्ला नहीं करेंगे , यदि आप उन्हें कोई भी मंत्रालय दिलवायेंगे चाहे वह बिना मलाई वाला ही क्यों न हो । "
         यदि ऐसा नहीं हुआ तो , देश के सारे बन्दर , भगवान भरोसे चल रहे देश का चक्का जाम कर देंगे ।
                                           -----  समझे कि नहीं ------ ।
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सोमवार, 25 जून 2012

स्वागतम् - अभिनन्दनम् -- ।




आज बहुत क्रोध में लग रहे हैं ?
हद हो गई है जिसको देखो वही , राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री पर ऊँगली उठा रहा है ।
वैसे लोगों को ऊपर ही उठवा देते तो ठीक रहता । इसके लिये कसाब और अबु जिन्दाल का सहयोग ले लेते ।
मजाक उड़ाते हो , जनता किस कदर गन्दे-गन्दे शब्द हमारे लिये प्रयोग करती , शर्म होनी चाहिये ।
आपके कन्धे पर बन्दूक रख कर लोग देश को लूट कर धन विदेश में भेज रहे हैं और जनता , बोले भी नहीं ?
जनता को तुम जैसे कुछ लोग हम लोगों के खिलाफ हमेशा बरगलाते रहते हो ।
ठीक है हम लोगों को बरगलाते रहते हैं , और आप लोग जनता को राहत पहुँचा रहे हैं , क्यों ? 
हम कोशिश तो करते हैं लेकिन पता नहीं क्यों फिर भी लोग चिल्लाते हैं । खास तौर पर अन्ना की टीम वाले ।
क्यों , वे जिन लोगों की काली करतूतों के बारे में कहते हैं , सब गलत है क्या ?
मुझे क्या पता भाई कि कौन-कौन काली करतूत कर रहा है ।
जब आपको किसी के कारनामों के बारे नहीं मालूम रहता तो फिर क्यों उसके पक्ष में स्टेटमेंट दे देते हैं ।
मुझे नहीं पता रहता है , भाई । लिखा हुआ , कागज मैडम के यहाँ से आता है , मैं पढ़ देता हूँ , बस ।
जब आप कुछ जानते ही नहीं तो , क्यों चार्ली चैपलीन स्टाईल का पोज देते रहते हैं बीच-बीच में ?
तुम जैसे लोग कहीं मुझे प्राण विहीन न घोषित कर दो , इसलिये बोलना पड़ता है कि लोग जीवित समझें ।
अफजल , कसाब आदि कब तक देश का माल हराम में खाते रहेंगे ?

मुझे नहीं पता है । लेकिन इन लोगों के लिये सम्मान जनक भाषा का प्रयोग तो कर ही सकते हो ।
हाँ तो श्री अफजल गुरु जी को और श्री कसाब जी को कब तक सम्मान दिया जायेगा ।
हम अपनें मेहमानों से ये सवाल भला कैसे कर सकते हैं ? देश वैसे-वैसे हजारों को कई साल तक खिला सकता है ।
देश का धन लूटनें या घोटाला करनें वालों को भी देश द्रोही मानकर सजा दी जाये , इस पर आप क्या कहेंगे ?
तुम क्या चाहते हो संसद में हमारा बहुमत खत्म हो जाये ?
ये क्या बोल गये आप ?
मैं कुछ बोला क्या ?
अभी आप कहे कि यदि घोटाले बाजों को सजा हुई तो संसद में आपका बहुमत खत्म हो जायेगा ।
मैं भला ऐसा कैसे कह सकता हूँ , तुम मेरी बात को , गलत ढंग से जनता के सामनें रख रहे हो ।


देश का धन लूटनें वालों को , घोटालेबाजों को यदि देश-द्रोह के अपराध में फाँसी की सजा दी जाये तब ?
एकदम गलत ,  हम अहिंसा के पुजारी हैं , अपराध से घृणा करो , अपराधी से नहीं , समझे ।
तब सारे हत्यारों को काहे नहीं छोड़ देते ? बाईज्जत बरी करवा के ।
क्यों देख नहीं रहे कसाब जी और अफजल जी कितनें साल से जेल में है , लोग फाँसी-फाँसी चिल्लाते हैं , झूठ मूठ ।
यानि आप लोग मन बना लिये हैं कि , वे लोग आराम से रहते हुए देश वालों को मुँह चिढ़ायें ।

पहले देश में चुनाव होना बन्द होगा तब किसी की फाँसी के बारे में विचार हो सकता है ।
मतलब ? अब देश में किसी भी आतंकवादी को फाँसी नहीं होगी ?
कहा ना , वोट -- वोट -- कुर्सी -- कुर्सी -- सत्ता -- सत्ता -- , लोकतंत्र में यही महत्वपूर्ण है ।
संसद पर हमला , देश की अस्मिता पर हमला था , कुछ समझते क्यों नहीं , आप भरतीय नहीं हैं क्या ?
तुम सब जानते हुए क्यों अपना ब्लड प्रेशर बढ़ानें के लिये यह सवाल पूछते हो ? हम भी किसी की कृपा पर हैं भाई ।
बहुत अच्छा , आतंकवादी बन्धुओं हमारे देश को लूटिये , बर्बाद कीजिये , हमें कोई शिकायत नहीं होगी क्योंकि :--
         "  हम अपराध से घृणा करते हैं अपराधी से नहीं , कोई आतंकवादी यदि छिपनें की जगह ढूंढ रहा हो तो हम उसकी  मदद करनें को तैयार हैं । आतंक फैलानें का सामान  यदि लानें में दिक्कत हो रही हो तो  हम उसे उपलब्ध करानें की कोशिश करेंगे लेकिन बाद में हम समझायेंगे  कि आप  गलत कर रहे हैं , और आप से सख्ती के साथ  पेश आया जायेगा , लेकिन डरनें की जरुरत नहीं है क्योंकि हम आपको  अपना भूला हुआ मेहमान समझते हैं । 
             देश का धन जिस भावना से विदेशों  में जमा करते हैं , वह भावना है वसुधैव कुटुम्बकम् की । एक सिद्धान्त हम भारतीयों को अपनाना चाहिये कि यदि कोई २५ हजार करोड़ रुपये का घोटाला कर रहा हो तो , यदि संभव हो तो उसकी मदद करनी चाहिये ताकि वह २५ लाख करोड़ का घोटाला  कर सके । हम जनता मूर्ख हैं , और मूर्ख के पास धन शोभा नहीं देता । 
           आइये देश को लूटनें और आतंक फैलानें का सुनहरा अवसर कहीं छूट न जाये, आशा है आप हम भारतीयों का सब कुछ लूटनें और आतंक फैलानें जरुर आयेंगे । आपका अभिनन्दन व स्वागत है ।"
                                                 जय हिन्द ------ ।
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रविवार, 24 जून 2012

बोरवेल में जिन्दगी --

जानते हैं , माही को बचानें के लिये ८६ घन्टे तक कोशिश की गई ।
हाँ हमारे सेना के जवानों नें दिन रात बचाव का कार्य किया ।
जी सुना और देखा भी ।
सेना के जावानों नें पहले भी कई बार , इससे भी ज्यादा  मेहनत की है और जिन्दगी भी बचाई है ।
ये बोरवेल खुले क्यों छोड़े जाते हैं । इन्हें बन्द क्यों नहीं किया जाता ?
अगर खुले नहीं छोड़े जायेंगे तो , आप जिन्दगी और मौत के संघर्ष का आँखों देखा हाल कैसे देखेंगे ।
भाड़ में गया आप का ऐसा आँखों देखा हाल , ना जानें कितनी जिन्दगी ले ली है , इन बोरवेलों नें ।
उसके लिये जिम्मेदार जो होगा , उसे सख्त सजा मिलेगी ।
सजा छोड़िये , कोई उसका दोषी मिलेगा ही नहीं , जैसे तमाम घटनाओं में नहीं मिलते हैं ।
इस प्रकार क्यों अपना धैर्य खो रहे हो ।
हम तो जनता हैं , सोचते हैं कि , इस तरह के कार्य में कितना खर्च आता होगा ।
जिन्दगी , पैसे से ज्यादा अनमोल है , समझे ।
जितना खर्च बचाव के कार्य में होता है उससे कम खर्च में सारे बोरवेल बन्द किये जा सकते हैं ।
ये तुम्हें ही नहीं , पूरे देश को मालूम है ।
तब भी किसी की जिन्दगी को इस तरह से खतरे में डालना और फिर , ये बचाव का कार्य ?
इसे ही जिन्दगी का रोमांच कहते हैं ।                                    
तो आप क्यों नहीं किसी बोरवेल की सैर करते, रोमांच के लिये ।
माही के घर जानें की सोच रहा हूँ ।
सारे बोरवेलों को बन्द करनें का आदेश क्यों नहीं कर देते ?
आदेश तो है ।
हो सकता है , कागज पर वह ढक गया हो और , उसका पैसा भी , सरकार के खाते से निकल गया हो ।
कुछ कह नहीं सकता ।
कहेंगे क्या , कहीं खुला गढ्ढा , कहीं बोरवेल , कहीं आतंकवादी , कहीं ---------।
यानि थ्रिल और रोमांच जिसे पूरे देश कि जनता श्वाँस रोक कर देखती है , फिर न हो , यही चाहते हो ?
सच तो ये है कि , आप लोगों की कृपा से देश में हर वक्त रोमांच और थ्रिल का माहौल बना रहता है ।
देखो , हमारा देश अपनें में मगन रहता है , देश में क्या हो रहा है , कुछ को छोड़कर , किसी से कोई मतलब नहीं ।
इसी का फायदा आप जैसे लोगों को मिल रहा है ।
वो तो मिलता ही रहेगा , और तुम जैसे लोग चिढ़ते , जलते रहोगे , बोलकर थक जाओगे, और भूल जाओगे ।
और फिर कोई माही गिरेगी , किसी बोरवेल में ?
नियति को कोई कैसे बदल सकता है । हम तो ----- ।
सच कहा यही नियति है हम भारत वासियों की ।
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गुरुवार, 21 जून 2012

बिना पूंछ का बन्दर --

 



जय हो ओसामा जी की जय हो --
कौन हो भाई ?
हम जो भी हों लेकिन आप के भाई नहीं हो सकते ।
ऐसा क्यों कहते हो भाई ?
देखिये , सच बात तो ये है कि लोग समझ गये हैं कि आप ------ ।
आगे मत बोलना भाई ।
हमको भाई मत बोलिये ।
तुम भी डाँट रहे हो --- ।
और कौन डाँटा ?
दूसरा कौन डाँट सकता है , देश में किसी की हिम्मत है , उनके अलावा ----।
आप एक तो ना जानें क्या-क्या बकते हैं ,रहते हैं ।
बकेंगे नहीं तो हमे कौन पूछेगा ।
लेकिन आप इतना न बक दिये कि यू पी में , यू पी ए की लुटिया डूब गई ।
केवल मैं ही थोड़े जिम्मेदार हूँ । वैसे भी हम लोग स्टेट लेबिल पर ध्यान नहीं दे रहे ।
क्यों ?
सरकार किसी की भी रहे स्टेट में, सेन्टर में वह हमें सहयोग करेगी , तुम देख ही रहे हो ।
आप इतना धीरे से काहे बोल रहे हैं ? और हमको तुम कह के ना पुकारिये समझे ।
कई दिन से नहीं बोला ना तो गला --- --।
हाँ , आपको तो बोलनें की बीमारी है । और आपको चुप रहनें का आदेश है ।
यही दिक्कत है , नहीं बोलूँगा तो , कैसे जीवित रह पाऊँगा , यही सोच रहा हूँ ।
तब ठीक रहेगा , जहाँ , ओसामा गये , आप भी वहाँ  चले जाइये ।
आप मना रहे हो कि मैं ------- ।
छोड़िये , एक बात पूछें ,जीवन में पहली बार सच-सच और सही-सही बताइयेगा ।
बहुत दिन बाद कोई कुछ पूछ रहा है , बड़ा अच्छा लग रहा है । जल्दी पूछिये ।
आपको , ओसामा जी से बहुत लगाव , बहुत प्यार ,बहुत मोहब्बत , बहुत अफेक्शन था , ना ?
कोई और तो नहीं है आप के साथ , खुफिया कैमरा तो नहीं लिये हैं ?
आप जैसे के लिये कोई मूर्ख ही होगा जो स्टिंग आपरेशन करनें की सोचेगा ।
फिर भी , डर लगता है ।
काहे जब मोहब्बत की है तो खुल कर इजहार काहे नहीं करते । डर किस बात का ।
क्या चाहते हैं , राजनीति से बाहर फेंक दिया जाऊँ ।
आप राजनीति भी करते हैं क्या ?
देखो तुम जो जानना या कहलवाना चाहते हो , मैं नहीं कहूँगा ।
फिर मुझे तुम कहा ।
सॉरी ।
अच्छा , बताइये , अन्ना और ओसामा , में यदि आपको अपना फेवरेट चुनना हो तो , आप किसे ---?
जान मरवाना चाहते हो । देखो , मैं लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचनें के लिये ---- ।
लेकिन टी वी पर तो बड़ा जोर शोर से ---- अन्ना को ------ दे रहे थे ।
बताइये यदि बच्चा चिल्लायेगा नहीं तो माँ का ध्यान उसपर जायेगा ।
लेकिन आप तो बुजुर्ग टाईप के हैं ।
लेकिन मेरा हाल देखा है । एकदम बिना पूंछ का बन्दर हो गया हूँ ।
सही कहा , पहले आप के सर से सिंग हटा और अब पूंछ , शर्म हो तो ------- ।

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बुधवार, 20 जून 2012

नेता व चमचे के बीच वार्ता


           पत्र -पत्रिकाओं मे जो व्यंग निकलते हैं उस पर हमारे , नेता गण खुलेआम तो कुछ नहीं कहते लेकिन
वे क्या सोचते हैं - इस वार्ता से कुछ जाहिर होगा :-
                                                   नेता उवाच --
   
     " आखिर कोई हद होती है जब देखो तब नेता ,
         गाली देनें को नेता , बेइज्जत करना हो नेता ।
                  साधु नहीं बने रहेंगे , खरी खोटी यदि और सुनेंगे ,
                   अब तक तो सब सुन लिया , आगे नहीं सुनेंगे ।
         अखबारों में व्यंग निकलते ,पत्रिकाओं में लेख,
         ग्लानि में  मरता हूँ अपनीं , गन्दी फोटो देख ।
                  हे मेरे , पुरातन चमचे चाल चलो कुछ ऐसी ,
                   इन बोगस लोगों की हो जाये ऐसी तैसी ।
           उपरोक्त अंश है वार्ता का , नेता चम्मच बीच ,
            सुन रहा था चमचा ,अपनीं कानीं आँखें मीच ।
                    श्रीमुख खोला चमचे नें , मृदुल वाणी में बोला ,
                     गीता से भी महान् उपदेश नेता को दे डाला ।
                                    चमचा उवाच-
             स्वामी इस वर्तमान दौर में चुप्पों का है बोलबाला ,
             खींच-तान के इस महासमर में वो हारा जो बोला ।
                       इस नश्वर संसार में , स्वामी कुछ ऐसा ही होता है ,
                       महान व्यक्ति ही , नीच की गाली सदा खाता है ।
             इन नीचे स्तर वालों को हुजुर, नजर अन्दाज कीजिए ,
             उच्च स्तर वालों के लिये , कोई अच्छी गाली सोचिए ।
                       नेता होकर जो मानव , लज्जा , ग्लानि की बातें करता है ,
                        वह नराधम इस जनम  में , कुछ नहीं कर सकता है ।
               सामूहिक गाली या निन्दा से होता नहीं है कुछ भी ,
               नेता वह महान् जो उपहार , सम्मान् समझे उन्हें भी  ।
                            सर्वज्ञ चमचे की युक्ति , नेता जी को भायी ,
                            चेहरे पर थी अब उनके परम् शान्ति सी छायी ।
                धन्यवाद दे चमचे को खामोश हो गये नेता ,
                 हम सब केवल भूँक रहे , ज्यों हाथी को कुत्ता । "
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मरनें पर भी चैन नहीं -- ।



परनाम बाबा ।
कौन ?
नहीं पहचानें ?
ना ।
अरे बाबा हम हैं चम्पारन वाले पंडित जी ।
यहाँ क्या कर रहे हो ?
का बाबा इहाँ रहे के अधिकार , केवल आपै को है का ?
मेरा मतलब यह नहीं है ।
तब ?
मेरा मतलब था तुम भी यहाँ आ गये ।
ए बाबा इहाँ तो सबै का आना है , कोई को नीचे वाले नरक में , कोई को इधर ,ऊपर ।
देखो मैं थोड़ा शान्ति चाहता हूँ ।
बाबा  आपको अशान्त करनें नहीं , हम तो उनके खोजते हुए इधर आ गये ।
किसको ?
वही -- जिनके हाथे , आप देश का भविष्य छोड़े रहे ।
कौन भाई ?
 वही ..... जिनके कपड़ा धोवे खातिर देश में कउनों धोबिये नै मिलत रहा ।
... ....  उनको यहाँ नहीं ढूंढ़ पाओगे ।
कहाँ मिलिहें ?
वे नीचे वाले हिस्से में होंगे ।
बाबा ,उ तो नरक वाला हिस्सा है ।
कुछ लोग वहाँ भी स्वर्ग ऐसी व्यवस्था बना लेनें में माहिर होते हैं ।
बाबा आप अइसा काहे बोल रहे हैं ।
मैं अनुमान लगाकर बोल रहा हूँ ।
आप हमेशा अनुमानै लगाते रहे बाबा , सुना है देश रसातल में जाय रहा है ।
तो मैं क्या करूँ ?
पहले भी क्या कर लेते बाबा , सब लोग आपै को दोषी मानते हैं कि .....
जब मैं धरती पर था , वो मुझे .. 
काहे खामोश हो गये बाबा ?
जानें दो मैं नहीं चाहता कि यहाँ की बात और कहीं जाये ... और ..
बाबा इहाँ रहते हुए भी , डर ?
मुझे उनका डर नहीं है।
के के डर बाबा ?
मैं उनका नाम नहीं ले सकता ।
इसका मतलब बाबा डर इहाँ भी अभी बाकी हैं ।
तुम बहुत बोलते हो ।
.. ए बाबा का हुआ ...  काहें लुका रहे हैं , --त सिं-- हैं का बाबा ।
चु... ..
-- इ बात है बाबा , आप तो कहे रहे कि नीचे वाले में होंइयें , लेकिन इ तो अँग्रेजवन के साथ
        हँसत भये इधरै आ रहें हैं , आप के ओर तो उ तकते नहीं हैं तबौ आपके हालत खराब हुई
        जा रही है ।
देखो मेरा पीछा छोड़ो , मैं जा रहा हूँ भजन करनें ।
अब भजन करै से का होई बाबा सब तो नाश हुआ जा रहा है , और -
               जानत हैं , सब जगहआफिसन मेंआप के फोटो लगावे और मैदान में  मूर्ति लगाये के प्रचलन चला रहा , लेकिन अब उ फोटो सब चिथड़ा  होकर लटक रहा है , और मैदान नशेड़ियों के काम आता है , नये लोग बतावत हैं ।
भाई बहुत हो गया , अब मैं जा रहा हूँ ।
बाबा , एक सवाल का जवाब दे दीजिये , ओकरे बाद उनहूँ के परनाम करे जाना है ।
चलो जल्दी से पूछो ।
बाबा , सुना है जब आपका देश आजाद भवा (?????) तब आप  कलकत्ता में रहे , दिल्ली में आजादी के जश्न काहे नहीं मनाये ?
तुम्हारे जाननें से भी अब कोई फायदा नहीं होगा ।
बाबा , उनसे मिलनें को जी करता है कि ना इहाँ , मिलना चाहते हैं फिर से ... ?
तुमनें एक ही प्रश्न का उत्तर माँगा था .....
                   हे राम ------  हे राम ---- । 
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द्वारपाल का दर्द

काहे खड़े हो रहे हैं , बैठिये ना ।
आप को भीतर नहीं जाना  ?
भीतर तो नेता लोग जा रहे हैं , हम तो ---
आप क्या हैं ?
मैं नेता जी का ड्राईवर हूँ  ।
देखकर तो तुम नेता लग रहे हो और जो भीतर गये वो एकदम ------------
चिरकुट टाईप लग रहे हैं , यही ना ।
तुमको तो हम पहले भी कहीं देखे हैं , ऐसा लगता है ।
नहीं पहचानें , हम हैं वही पुरानें ---- आम जनता जिसको आप -----
पहचान गया तुमको , एकदम सरदर्द हो ।
देखे कि आप अकेले यहाँ गेट पर खड़े होकर लोगों को ------
हाँ -- राष्ट्रपति का चुनाव है , उसी को लेकर लोगों की लगातार बैठक हो रही है ।
आप के साथ ?
नहीं बाबा , मैडम के साथ ।
क्या , वही राष्ट्रपति भी तय करेंगी ?
और किसी मे औकात है , किसी को कुछ बनानें का , वे ही हैं , जिनपर पूरा देश टिका है ।
ई का कह रहे हैं , आप , आप उनपर आश्रित हैं तो क्या पूरा देश भी ?
और क्या , देखते नहीं कोई भी हो किसी भी पार्टी का हो , केवल उनसे ही मिलता और बात करता है ।
काहे आप देश के ( ???????) हैं , आप कुछ करे लायक नहीं हैं का ?
जब कोई सारे देश का काम स्वयं करनें को तैयार है तो ---- हम क्यों कुछ करें या सोचे ।
आप को लोग अन्धा , बहरा ,गूँगा , लूला , लँगड़ा , और न जाने क्या-क्या कहते हैं ।
मुझे मालूम है लोग मुझे क्या- क्या गालियाँ देते हैं , मुझपर उसका असर नहीं होता ।
एकदम बेहया हो गये हैं । हैं न ?
बेहया कैसे कह रहे हो । हम कुछ करें तब न हमारा कोई दोष होगा ।
काहे , आप कोई भी काम नहीं करते हैं का ?
हम क्या , सारे विभाग के मंत्री भी , बाद मे जान पाते हैं कि उनके मंत्रालय से फलाँ-फलाँ काम हुआ ।
क्या देश के सारे मंत्रालय , उसके मंत्री नहीं चलाते ?
चलाते हुए लगते हैं ।
हाँ , बात राष्ट्रपति के चुनाव की हो रही थी , सुना था कि आप के नाम की बात उठी तो लोग इंकार कर दिये ।
हाँ भाई , वास्तव में राष्ट्रपति की तरह से तो मैं पिछले कई साल से काम कर रहा हूँ ।
फिर ?
फिर क्या , मुखर्जी दादा बहुत बोलते हैं , राष्ट्रपति बनते तो ---
तो क्या हो जाता ?
नेतागिरि का कैरियर उनका खत्म हो जाता , और प्रधान मंत्री बननें की इच्छा भी ।
बहुत दूर की सोचा है , आपनें ।
धन्यवाद , लेकिन , मैं इतना नहीं सोच पाता हूँ , ये तो मैडम की इच्छा है ।
यानी आपका पद एकदम सुरक्षित ।
और मैडम को भी मुझसे काफी आराम रहता है ।
हाँ , उ तो हम देखे रहे हैं कि आप कितनी मुस्तैदी से , द्वार-पाल का कार्य कर रहें हैं ।
देखो वास्तव में मुझे अपनी , इस --------- पद से कोई लगाव नहीं है ।
हाँ तो , दादा को मैडम राष्ट्रपति काहे नहीं बना देती ? कोई अड़चन है का ?
बना तो दिया ही था , बस वही अंगारा टाईप वाली नेता नें सब गड़बड़ कर रखा है ।
हम जनता की निगाह में वही एकमात्र ऐसी नेता हैं जो थोड़ा बहुत पंजा , तोहरी मैडम से भिड़ा पाती हैं।
लेकिन उससे फायदा क्या होगा , क्योंकि होगा वही जो वे चाहेंगी , आखिरी निर्णय तो उनका ही होता है ।
तब लोकतंत्र कहाँ है आप की पार्टी में ।
लोकतंत्र ? ये क्या होता है भाई ?
आप को नहीं पता , विश्व में सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं हम ।
किस समय की बात कर रहे हो , हम देश के प्र ------------- हैं मुझे नहीं पता होता ?
आप सच कह रहे हैं ?
हम सच कह रहे हैं या नहीं , मैडम से पूछकर बाद में बतायेंगे ।
ठीक है । जाते है , नेता लोग बाहर निकल रहें हैं , आपके साथ देखकर , हमारे नेता जी हमें गाली देंगे ।
जाओ भाई जाओ , मैं तो आखिरी नेता के अन्दर से बाहर आनें तक यहीं रहूँगा ।
        मेरा देश महान् ---- मेरा काम महान् -------- केवल मेरा काम महान ।

दे----- श----- हित ?


मुझे क्यों झिंझोड़ रहे हो ?
ताकि आप की नींद टूटे ।
मैं सोता कहाँ हूँ  ।
क्या देश कि समस्या के कारण सो नहीं पाते ?
ऐसा ही कुछ है ।
लोग तो कहते हैं कि आप सोनें के अलावा कुछ नहीं करते ।
किसनें कहा , मैं सोता हुआ लगता हूँ लेकिन सोता नहीं हूँ ।
आपनें अपनें बारे में ऐसी अफवाह क्यों उड़वाई कि आप ----
क्या मतलब ?
यही कि आपको ना तो कुछ करना रहता है ना ही आप जान पाते हैं कि आप क्या करनें वाले है ।
ये कैसे हो सकता है कि मैं कुछ करूँ और मुझे ही न पता हो कि मैं क्या करनें जा रहा हूँ ।
सच बताइये आपनें इन सात आठ सालों में देश के हित में कौन सा काम किया ।
हमारी पार्टी पहले से ज्यादा मजबूत हो गयी है , इन सात- आठ सालो में ।
मैं पार्टी हित की नहीं देश हित में किये गये आपके कार्य के बारे में पूछ रहा हूँ ।
तुम जो भी हो , जान लो , पहले मैं और मेरी पार्टी है , और उसके बाद वे --- हैं , तब देश है ।
यानि आप देश को और देश वासियों को प्राथमिकता नहीं देते ।
देश और देश वासियों के लिये सोचनें के लिये तमाम लोग मौजूद हैं ।
लेकिन फिर भी आपको लोगों नें यहाँ तक पहुँचाया ताकि ---
एक बात सुन लो , मुझे जिसनें यहाँ तक पहुँचाया है , मैं उन्ही का एहसान मानता हूँ ।
आप जिस पद पर हैं , उसके लिये देश हित सर्वोपरि होता है और आप तो केवल -----
मैं कुछ नहीं जानता -- जो कह रहा हूँ , वही सच है ।
तब हम जनता क्या करें ?
फिर किसी बड़े नये घोटाले की प्रतिक्षा करे , चर्चा करे और भूल जाये , जनता का यही कर्तव्य है ।
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शौचालय ही शौचालय - योजना आयोग


हल्लो ।
कौन बोल रहा है ?
घबराइये नहीं हम वही जनता हैं ।
तुमको ये नम्बर कैसे मिला ?
ई नम्बर , अरे हमरे पास तो वहू नम्बर है , जेपर आपका निर्देश मिलत है ।
क्या काम है ?
कुछ नहीं , सोचा , दिन भर टी वी वाले एक शौचालय को लेकर हल्ला करे हैं , जरा आप से भी पूछ लें ।
मुझे कोई जानकारी नहीं है , इस बारे में ।
हल्ला हो रहा है कि आपके कउनो विभाग है , योजना आयोग ।
हाँ है तो ।
आप ओकर अध्यक्ष हैं शायद , और अहलूवालिया जी आपके नीचे हैं ।
यह भी सही है , तो ?
ओकरे बाथरुम वगैरह के बनावे में सुना है ३५- ४० लाख रु० लगा है , यही मिडिया वाले चिल्लात रहे ।
इसमें कौन सी बड़ी बात है भाई ?
बड़ी बात इ है कि देश के धन के ए तरह से बर्बादी का ठीक है ?
हमारा देश कभी तरक्की नहीं कर सकता , यदि ऐसी घटिया सोच होगी तो ।
क्या इतना पैसा देश का शौचालय में खर्च करके देश में तरक्की हो जाई ?
देखो , हमारा रहन सहन ही हमारे बारे में सब बताता है कि हम तरक्की कर रहे हैं ।
जितने पैसा में आप लोग अपना-अपना शौचालय बनाइयेगा न , उतना में तो ना जानें कितनें गरीब का घर बन जाता ।
तुम आम आदमी हर बात को बस गरीब जनता से जोड़ कर देखनें लगते हो , यही प्राब्लम है ।
योजना आयोग देश का सबसे महत्वपूर्ण विभाग होता है , समझे ।
लेकिन , इ साठ / बासठ साल में केवल योजना ही ना बनाये आप लोग ।
कैसी बात करते हो । देखो बड़े-बड़े नगरों को , कितनी तरक्की हुई है ।
लेकिन तबौ तो किसान आत्म हत्या करते हैं , लोग गरीब हैं बरोजगार हैं ।
हम तो सबको तरक्की करनें का अवसर देते हैं ।
हाँ सही कहा आपनें तबै तो अरबों खरबों का घोटाला सामनें आ रहा है ।
तुम जिस शौचालय में खर्च की बात कर रहे हो , हमारी योजना , सब जगह वैसा ही शौचालय बनानें की है । 
क्या मतलब ? हर आदमी के पास रहे के और खाये के चाहे ना हो  लेकिन शौच के लिये इतना शानदार -- ?
मैं हर आदमी की बात नहीं कर रहा हूँ , जो इसके लायक हैं उनके लिये -----
ओकरे लायक कौन है , आप और हमरे देश के भाग्य विधाता लोग , है न ?
आम आदमी के लिये सुलभ शौचालय बनाया है कि नहीं , जाओ वहाँ ।
एक काम काहे नहीं करते ।
कौन सा काम ?
यही कि देश को आप लोग शौचालय काहे नाहीं घोषित कर देते , गन्दा तो करै दिये हैं ।
ऐसी कोई योजना फिलहाल विचाराधीन नहीं है ।
अहलूवालिया जी के रहते बना लीजिये , नाहीं तो फिर चूक जाइयेगा ।
   जय हिन्द , जय भारत , और जय-जय-जय योजना आयोग ।
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सोमवार, 18 जून 2012

कैसी खामोशी , कुछ कहिये ।

आप देश में नहीं हैं , आपकी कमी बहुत लोगों को खल रही है ।
खास तौर पर हमारे जैसे आपके शुभचिन्तकों को ।
प्रणव दादा को सभी लोग अभी से राष्ट्रपति माननें लगे हैं , और देश उनसे कुछ अपेक्षा भी कर रहा है ।
लोगों के मन में सवाल उठता है कि , क्यों नहीं अपनें देश के मुखिया को चुननें का अवसर जनता को दिया जाता ।
आप की राय अलग हो सकती है , क्योंकि यदि जनता को सीधे चुनना हो तो , शायद , आप को भी देश की ( या किसी और की ) सेवा का अवसर नहीं मिलता ।
                कलाम साहब की बात करते हैं । इसमें दो राय नहीं कि कलाम साहब को चाहनें वाले प्रणव दादा से ज्यादा होंगे , लेकिन , गणित के हिसाब से वे बहुत पीछे हो जाते हैं ।
                कलाम साहब की इज्जत देश में बगैर राष्ट्रपति भी बहुत ज्यादा है , यदि शक हो तो जनमत करा लें ।
लेकिन हमारे देश में राजनीतिज्ञों द्वारा जन भावना का कितना ख्याल रखा जाता है , आप से ज्यादा कौन जानता है ।
सच बताइये , देश की समस्याओं से आप कितना अवगत हैं । इस मामले में लोग आपको शून्य अंक देते हैं ।
             " ऊपर से तो हमारा देश , विकास करता नजर आता है , लेकिन विकास का फल , राजा , कलमाडी और ना जानें कितनें ऐसे ही घोटाले बाज लोग खा जा रहें हैं , देश की आधी से ज्यादा आबादी पेट भर खाना नहीं खा पाती आप तो सब जानते हैं । भीतर ही भीतर देश को खोखला करनें वालों का पूरा गुट है जिसकी जानकारी तमाम लोगों को है , फिर भी आप देश हित की जगह , उनके पोषण और संरक्षण का कार्य अनजानें में किये जा रहें हैं ।
           क्या आपको एहसास है , कि आम जनता किस कदर मँहगाई से त्रस्त है और कुछ लोग केवल देश का धन लूटनें और विदेशों में जमा करनें का कार्य कर रहें हैं ।
          नाराज ना होइयेगा , एक बात कहें , विदेशों में जो धन भारतीयों का जमा है ना उसमें उनका (?) धन भी है ,
आप कहियेगा हमें नहीं मालूम है तो , कोई विश्वास नहीं करेगा ।
           हमें मालूम है कि आपको अकेले में ग्लानि महसूस होती है , कि मैं कुछ कह क्यों नहीं पाता , इसमें आपकी कोई गलती नहीं है , क्योंकि देश में राहु काल चल रहा है , भले ही ज्योतिषि लोग मुझसे सहमत न हो । राहु काल में बुद्धि का भ्रष्ट हो जाना नयी बात नहीं है । देश की जनता पर भी उसका असर है , नहीं तो , सारे नेतागण जो भ्रष्टाचार या करोड़ों अरबों रुपये के घोटाले में लिप्त पाये गये , या जेल गये , बतौर सांसद , इज्जत पा रहें हैं , उनपर देश द्रोह का मुकदमा चलानें की माँग उठनी चाहिये थी , और फिर फाँसी की माँग करनी चाहिये , ताकि हमारी भारत माता को फिर लूटनें का साहस कोई न करे , और विश्व में हमारी गणना भ्रष्ट राष्ट्र के रुप में न हो सके ।
           क्योंकि आँकड़ों के अनुसार अभी आप संसार के काफी भ्रष्ट देश के प्रधानमंत्री हैं । इस कलंक को मिटाना है और उस परम्परा को कायम रखना है जिसको हमारे सिख गुरुओं नें कायम रखा ।
                              जय भारत माता - ---   वन्दे मातरम् --- वन्दे मातरम्  ।


गुरुवार, 7 जून 2012

  कुकर्म के बिना जिन्दगी ? ना बाबा ना ---                   


 का हो , सिन्धवी साहब , सिन्धु घाटी की सभ्यता जैसे विलुप्त काहे हो गये हैं ?
देखो , अभी  समय खराब चल रहा है ।
केकर ? तुम्हार कि, देश के ?
मैं केवल अपनी बात कह रहा हूँ ।
सही कहे , देश की चिन्ता तू लोगन के हो भी नै  सकत ।
आपसे , मैं कह रहा हूँ , प्लीज , मेरे पास से जाइये ।
अभिइनियो , तुम्हार बल नै गवा ।
ये आप कौन सी भाषा बोल रहें हैं , असभ्यों वाली ।
एका इलाहाबादी भाषा कहत हैं , समझयो के नै , तुम्हरी सभ्यता के कलई तो खुल गयी ।
सब मेरे खिलाफ साजिश थी ।
इ बात जनता के सामनें खड़े होकर काहे नै कहतो , हमसे कहे से कउनो लाभ ---- ।
जाइये प्लीज ।
दो तीन बात पूछे बिना हम तोका छोड़ब नै । मोका मालूम है तोहार औकात अब का है ।
मुझे डरा रहे हो ।
तोहरे टाईप के लोग , पावर जाये के बाद , मरियल कुत्ता अस घूमत हैं , पता है न तोका ।
मुझे गाली दे रहे हो , कुत्ता कह रहे हो ।
तोका मुहावरा भी समझ में नै आवत , कैसे प्रवक्ता के काम करत रहे ?
सही हो या गलत अपनी पार्टी के हित में बोलना , प्रवक्ता का काम है ।
लेकिन बड़ा-बड़ा झूठ तो तुम बोलत रहे , ओ समय ।
प्रवक्ता को झूठ सच नहीं देखना रहता , कहा ना ।
तुमरे करेक्टर पर जो लोग कमेन्ट करे रहे , ओपर तुम कुछ कमेन्ट देवे चाहत हो ।
मुझे उसपर कुछ नहीं कहना ।
हाँ , कहे से कउनो फायदा भी होवे वाला नहीं है , काहे कि तुम्हार करम तो एकदम ओपन ----- सरम नै आवा ?
शर्म कैसी ? हमनें क्या किया ?
सही कहे , सरम हया से आप लोगन का लेना देना ।
देखो , तुम आम आदमी लोग ,बस सुना नहीं कि किसी को अपराधी बना दिया ।
सही कहत हो , असली अपराधी तो जनता लोग है , जो तुम जैसन के बोले के लायक बना देत है ।
तुम क्या सोचते हो , सबसे बड़ा अपराधी मैं ही हूँ ?
मालूम है , तोहरे से बड़े-बड़े खिलाड़ी हैं , लेकिन सबके कारनामा उजागर होवे तब न ।
और कोई तो तोका पूछत नहीं , हम एक बात पूछी तोसे ।
पूछो , लेकिन यही आखिरी प्रश्न होगा तुम्हारा ।
तमाम घोटाला , भ्रष्टाचार , बलात्कार , अउर कुकरम के बाद , तुम लोगन के सुसाइड करे  के मन नै करते ?
इधर चार-पाँच साल से लोग हम जैसों के पीछे पड़े हुए हैं । देश में कुछ गलत नहीं हो रहा ।
हम सुसाइड करे के मंशा के बारे -----
हम क्यों सुसाइड के बारे में सोचे , सुसाइड तो उन्हें करना चाहिये , जो जीवन में कुछ नहीं कर पाते । नमस्कार ।
तो हम जनता को आप की तरफ से मैसेज दे देते हैं कि ---
                 " जो जीवन में कोई कुकर्म न करे या घोटाला आदि में शामिल न हो , ओकर जीवन व्यर्थ
                  है , अउर उ जिये के लायक हो ही नै सकत , अइसे लोग सुसाइड करे के प्लान बनावें ,
                  वरना इ बारे में कउनो कठोर कानून सरकार को बनाना पड़ेगा ।"
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शुक्रवार, 1 जून 2012

कलयुग के हनुमान जी --- (अ)पूजनीय ।

अरे , कहाँ घुसे जाये रहें हैं ?
चुप रहो । यहाँ भी मिल गये तुम ?
का हुआ बड़े डरे हुए हैं ?
क्या करें , वे लोग रोज कोई ना कोई गड़बड़ी ढूंढ़ कर हंगामा खड़ा किये रहते हैं ।
कौन लोग ?
कितनी बार पूछोगे ,कौन लोग ।
हाँ , समझ गया , उस केजरीवाल का नाम , जहरीला सवाल होना चाहिये था , है न  ?
पता नहीं क्यों वह मेरी मजबूरी नहीं समझता ।
लेकिन आप जवाब भी तो ठीक से नहीं देते हैं ।
रोज -रोज इतना सवाल किसी से पूछा जायेगा तो तुरन्त उत्तर कैसे मिलेगा ?
आप कागज पर सवाल  लिखकर देनें के लिये ,अनुरोध क्यों नहीं करते हैं ?
उत्तर पूछकर लिखवानें में समय भी तो लगेगा ।
किससे पूछकर लिखवायेंगे ?
जिसको उत्तर पता होगा , उसी से और क्या ।
वे लोग आप के सहयोगियों के घोटाला के बारे में आपसे जानना चाहते हैं ।
देखो , मुझे ,सच बताओ , मेरे जितनें बुजुर्ग को  कोई घर का मुखिया बनाता  है  ?
मतलब ? जरा खुल कर बताइये न ।
अब तुम्हीं बताओ जो व्यक्ति घर का मुखिया बननें के योग्य न हो , वह देश  का  -----?
सही कह रहे हैं इस बात पर तो कोई गौर ही नहीं कर रहा है , कि आप सन्यास आश्रम ----?
हाँ तो बात सवालों की हो रही थी । घोटाला कोई करे , क्या हम जिम्मेदार हैं ?
आप ही तो देश के ------- हैं तब जिम्मेदारी भी तो आपकी ही बनती है ।
देखो , सच बतायें , मुझसे , जो जो करनें को कहा जाता है मै कर देता हूँ।
कौन कहता है आप को उल्टा -सीधा काम करनें को ।
मुझे तो बाद में पता चलता है कि , गलत काम हो गया ।
ऐसा है तो आप अपनीं कुर्सी काहें नहीं छोड़ देते ?
दूसरा कोई योग्य मिले तब ना ।
आप जैसा योग्य , देश में और कोई नहीं है क्या ?
है , लेकिन विश्वास-पात्र कोई नहीं है ।
किसका , देश का या उनका ?
तुम जिसका समझो ।
काहे , दादा हैं , चिदम्बरम् हैं , सलमान हैं , और भी हैं क्या वे सब विश्वास पात्र नहीं हैं ?
विश्वास पात्र भी हो सकते हैं लेकिन ---- ।
लेकिन ---- क्या ?
उनमें अविरल भक्ति का अभाव है , मैं सदैव निस्वार्थ रहता हूँ , उनका भरोसा --- नहीं है ।
अभी भी आप कहीं खोये हुए हैं , कोई मंत्र जप रहे हैं क्या ?
मैं मन ही मन उनका स्मरण करता हूँ  जैसे हनुमान जी , अपनें प्रभु का ।
धन्य है आपकी भक्ति -
                 " उनको नहीं , आपको मेरा शत् - शत् प्रणाम है ।"
                 



 रिकवरी आफ इंडिया   बनाम   डिस्कवरी आफ इंडिया   संसार के अधिकांश इतिहासकारों नें अपनें देश का इतिहास लिखते समय इस बात का ध्यान र...