गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

जाहिल बाप जेहादी बेटा

          जाहिल बाप जेहादी बेटा   

       
  • बाप- बेटवा आजकल हमरे समझ में नहीं आ रहा है कि तुम रोज भोरे घर से निकल जात हो और देर रात का घर आवत हो, कऊनो काम धाम कर रहे हो का ?  
  • बेटा - अब्बा , हम जो काम कर रहे हैं ओकरे लिये बहुत से लोग केवल सोचतै रह जात हैं ।
  • बाप- कऊन काम कर रहे हो, बेटा ?
  • बेटा - तोका बताये से कऊनों फायदा ना है, अब्बा । तुमरे समझ से बाहर की बात है ।
  • बाप - हम तुम्हार बाप हैं , हमार हक है कि हमार बेटवा का कर रहा है ओकर जानकारी हमें भी होये । 
  • बेटा - बाद में सब जान जाबो, जाने के बाद तुम्हार सीना चौड़ा हो जाई, अब्बा । 
  • बाप - हर बाप के ख्वाहिश होत है कि ओकर बेटवा अइसा काम करे कि ओकरे बाप के सीना चौड़ा हो जाये । हमका बताओ कउन सा काम फांदे हो ?
  • बेटा - हम अल्ला के राह पर चल रहे हैं , हमार मकसद है कि इ धरती पर अल्ला के हुकूमत कायम हो ।
  • बाप- पगला गये हो का, इ पूरी धरती, जहाँन सब अल्ला के बनाये है , फिर ओकर हुकूमत - पागल भये हो का । 
  • बेटा- अब्बा , इ सब तुमरे समझ से परे है । तुम जैसे जाहिल लोग ना समझ पाबो कि अल्ला कि हुकूमत का होत है । जब तक धरती पर अल्लाह के हुकूमत ना होईगा, तुम गुलाम बने रहबो ।
  • बाप-  अबे , अल्लाह तो पूरे कायनात के मालिक है । उ चाहे तो पल में जो चाहे बना दे और पल में मिटा दे । तोका इ सब उल्टी पट्टी के पढ़ा रहा है बे ।
  • बेटा - यही तो हम कह रहे हैं कि तुमरे जैसे जाहिल का जानों कि धरती पर अल्ला के हुकूमत के माने का होत है, पूरी जिन्दगी गुलामी में बिता दिये । 
  • बाप- तू सचमुच पागल हो गवा है, हम केकरे गुलाम हैं, बोल । तोका तनिक भी चिन्ता है । तोर अम्मी है तोर बहिन सब हैं । तोर बीबी है घर में, ओकरे बच्चा होये वाला है । ओकरे लिये खाना-पीना , दवा दारु के इन्तजाम करे की जगह तू इहे सब चक्कर में घूमत रहत है । 
  • बेटा- अल्ला , सब देखत है, वही सब इन्तजाम करीगा । तोका तो अल्ला पर भरोसे नै रहत, अब्बा । 
  • बाप- बेटा, तोरे से ज्यादा हमें अल्ला पर भरोसा है । अल्लाह काहिलन के मदद नै करत , हाथ-पैर हिलाबो तबै अल्ला के मदद मिली । 
  • बेटा- अब्बा, हाथ पैर तो असल में हमीं जईसे लोग हिलाये रहे हैं । हमका दुनियाबी चीजन से अब कऊनों सरोकार रखे की जरुरत नहीं है । हम जन्नत की राह के मुसाफिर हैं ।
  • बाप- अबे , इ जन्नत की राह का होत है ?
  • बेटा - तुम जाहिलन के समझ से परे है । हम जो काम कर रहे हैं ओसे सीधा जन्नत मिलिगा । हम सोच लिये हैं कि अल्ला के हुकूमत कायम करे के लिये जेहाद करना है ।
  • बाप- अबे, जेहाद के मानें तोका पता भी है ? तोका कऊन समझायेस कि तू जेहादी बन , तोरे माँ-बाप हैं, बहन हैं , बीबी हैं, उनके फिकर तोका नै है का ।
  • बेटा - फिकर तो है , लेकिन हमार मकसद के आगे उ सब फिकर बेकार है । 
  • बाप- अबे तू उ मौलविया के चक्कर में तो नै आ गवा जो लड़कन के जन्नत के नजारा दिखा के उनके दिमाग खराब करत है । ओकर काम हे लड़कन के बरगलाना, औकरे चक्कर में हो तो अबैहिनें से चेत जाओ ।
  • बेटा- उ मौलवी साहब के एक्को लफ्ज ना कहो अब्बा , तुम जईसे लोग का जनबो उनका, कितनी जानकारी है ओकरे पास, अरबी में कुरान, हदीस पढ़त है तो रोअां खड़ा हो जात है । कबौ जाकर उनके तकरीर सुनो ना, तब हकीकत जनबो कि असली आजादी केका कहत हैं और जेहाद का होत है ।
  • बाप- उ मौलवी, अरबी में जो पढ़त है , तोरे पल्ले तो कुछ पड़त भी ना होईगा ।
  • बेटा - तुम बाप ना भये होते तो तुमका बताईत कि का पल्ले पड़ा और का नाही पड़ा ।
  • बाप- बेटा , तुमका इ समय अपनी बीबी के ख्याल तो करे चाही , आखिर उ बच्चा देये वाली है । 
  • बेटा - हमार रिश्ता अब जन्नत और वहां के हूरन से कायम होवे वाला है, इहां के बीबी बच्चा से का लेना देना ।
  • बाप- अबे तोर निकाह , तो तोेरे रजामंदी से भवा रहा । 
  • बेटा- निकाह के टाईम में हम जाहिल रहे , अब हमरे समझ में आ गवा है ।
  • बाप - तोका मालूम है , तोरे चार बहन भी हैं , उनके निकाह भी करना है । तुम मदद ना करबो तो कईसे उनके निकाह होईगा ।
  • बेटा - अब्बा , तुम सचमुच जाहिल हो, हम बार-बार कह रहे है कि सब अल्ला देखिगा । 
  • बाप - बेटा, तोेरे दिमाग में जो जहर भर गवा है ओका हम नै निकाल पाबै । अल्ला तोर मदद करे । लेकिन बेटा इ बात जरुर ध्यान के रखिओ कि अल्ला हमेशा नेकी के साथ रहत है , ईमान के साथ रहत है । तुम जौन मौलवी के शागिर्द बने हो ना , उ बेहद मक्कार आदमी है । ओका देखो , ओके बेटा बेटी सब दिल्ली , बम्बई में पढ़त हैं । पहली बीबी के औलाद तो सब अमेरिका में बस गये हैं । आपन 40 लाख की गाड़ी में चढ़त है । ओके घर देखे हो, घर नहीं पूरा महल बनवाये है । तोरे पास का है , इ कच्चा घर और टूटी-फूटी साईकिल और अलमुनियम के बर्तन ।
  • बेटा - अब तुम आये रस्ते पर । जेहाद करे से शहादत मिलीगा , शहादत से जन्नत और जन्नत में उ सब मिली जेकरे लिये इंसान पूरी जिन्दगी तरसत रहत है । एक बात अऊर जान लो, अल्ला जेहाद करे के लिये अपनें मुजाहिद खुद चुनत है । जहाँ तक उ मौलवी साहब के औलादन की बात है, अल्ला उन सबका जेहाद के काबिल ना समझे होई । अब हम अल्ला के सिपाही हैं । हमहूँ फौजी हैं ।
  • बाप- बेटा , हम तो सोचा रहा कि , हमार तो पूरी जिन्दगी , जहालत और गुरबत में बीत गई और तुम हमरे सहारा बनबो , लेकिन अब लगत है कि तुम हमरो से ज्यादा जाहिल हो, कम से कम इ तो सोचो कि जेकरे कहे पर तुम जेहाद करे जा रहे हो अऊर जन्नत के ख्वाब देख रहे हो , उ काहे नाही खुद जन्नत चला जात । 
  • बेटा - कहा ना तुम , पूरे जाहिल हो । ओकर काम है अल्ला के फौजी बनाना । हमका हथियार चलावे के ट्रेनिंग दिलवाना । तुम का समझबो । अब उ मौलवी साहब का एक्को लफ्ज ना कहना । 
  • बाप- तुम हमका धमका रहे हो , अबे आज तक हम कऊनो की धमकी ना सुने हैं । जहाँ तक तोरे मौलवी की बात है ओकरे बारे में तुम का जनबों । ओके सारा पोल-पट्टी हमका मालूम है । तुम का जानो, कितना गिरा हुआ इंसान है । जेहादियन की भर्ती के नाम पर उ लाखों-करोड़ों रुपया कमाये के अपनी चार बीबीयन और उनकी औलादन के एशोआराम से पाल रहा है । तोका का मिली । भागत रहो चोर जईसा जान बचाके कि कहूँ से कोई गोली ना आवे ।
  • बेटा - अब्बा , बाप के नाते , तुम्हार लेहाज कर रहे हैं नहीं तो । 
  • बाप - का करबो । हाथ उठाबो हमरे ऊपर । नशा-वशा करे है का बे ।
  • बेटा - ( हंसते हुए ) अब्बा , जेहाद करे वाले के रोकना गुनाह है और तुम काफिर वाली जुबान बोल के गुनाह पे गुनाह किये जा रहे हो ।
  • बाप - अबे तैं मोका धमकी दे रहा है । मोका काफिर बता रहा है । काफिर केका कहत हैं तोका मालूम भी है ।
  • बेटा- अल्लाह के राह पर ना चले वाला, अऊर, अल्ला के राह पर जाये वालन के रोके वाला , काफिर होत है । तोका हम बताये रहे हैं , हमरे साथ अईसे अल्लाह के मुजाहिद हैं जो जेहाद करे से रोकै पर अपनें घर वालन का मार डाले हैं ।
  • बाप - तो एक काम कर, ले आव आपन असलहा, देखित है कितना दम है तोरे असलहा और जेहाद में ।
  • बेटा - अब्बा , हम तोरे जैसे जाहिल आदमी के मुँह लगके गलती किया है । याद रखो , जब हम जन्नत जाबै ना तब तोका अपनें पर गरुर होईगा कि - रशीद मियाँ के बेटवा जेहाद करत भै शहीद हो गवा । 
  • बाप ( थककर ) - बेटा , गरुर तो उ मौलवी करीगा जेकरे बहकावे में आकर तोरे जईसे ना जानें कितनें लौंडे , जन्नत और हूरन के फिराक में कुत्ते की मौत मरे के लिये तैयार हो जात हैं । या अल्लाह , इन सबके के अकल पर पत्थर काहे रख दिये । 
  • बेटा - अब्बा , तोका अब आखिरी बार समझाये रहे हैं । अब एकौ लफ्ज जुबान से बाहर आवा तो -- । 
  • बाप- बेटा , समझ गये इ तू नहीं , तोरे भीतर ठूंसा गया जहर बोल रहा है । जा बेटा, अल्ला यही चाहत है कि तोर कन्धा हमे नसीब ना होवे ।
      ( गाँव में हो हल्ला हंगामा - मौलवी साहब की तकरीर - " रशीद मियाँ की औलाद को क्या शानदार शहादत मिली , खुदा करे ऐसी शहादत सभी मोमिनों को नसीब हो , उसके चेहरे पर शहादत का नूर देखकर , हमें उससे जलन हो  रही है कि अल्लाह नें हमे वैसी शहादत का मौका क्यों ना दिया । ) 
       रशीद मियां के बेटे के जनाजे में जमा भीड़ को देखकर मौलवी की आँखों में चमक आ गई । रशीद मियां का बेटा पुलिस की गोली से मुठभेड़ में मारा गया , उसकी मौत से दुनिया में कुछ हुआ हो या नहीं लेकिन उसकी मौत का सीधा फायदा मौलवी साहब को होना था । झुण्ड के झुण्ड जेहादियों की नई फसल और विदेश से और ज्यादा पैसा मिलनें की उम्मीद । सबका अपना-अपना धन्धा है कारोबार है । कौन, किसको, कहाँ, कैसे,क्यों, कब और क्या बेच रहा है , हमें उससे क्या लेना देना । 

                                              

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