शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015



                 मन की बात 

         जैसा कि आप सभी जानते हैं , हमारा देश एक राय प्रधान देश है जहाँ ढेरों सलाह बिन माँगे मिल जाती है। कभी सुनील गावस्कर को तो कभी सचिन तेन्दुलकर को राय देनें वाले भी कम नहीं थे , उन्हें राय देनें वालों में अधिकांश ऐसे लोग होते थे जिन्होनें कभी बैट या बॉल को हाथ भी ना लगाया होगा ।
          आजकल लोग देश के नेताओं को सलाह देते हैं कि कैसे देश को चलाया जाये , किस विभाग में कौन सा नेता फिट बैठेगा , इनमें ऐसे लोगो की संख्या बहुत ज्यादा है जिनकी सलाह या राय उनके बीबी बच्चे तक नहीं मानते । 
           सलाह  की सर्वाधिक जरुरत अभी सोनिया और राहुल को है । काँग्रेसियों का पूरा दल ही राय देनें मे माहिर है , ये बात अलग है कि वे सही राय देनें के काबिल नहीं हैं । राहुल और सोनिया को राय देनें की हिम्मत देश में केवल दो लोगों को है - मैं उन दोनों के नाम गुप्त रखकर कोई बड़ा तीर नहीं मार सकता इसलिये उन दोनों महान हस्तियों के नाम का खुलासा करता हूँ । 
            जल्द बाजी मत कीजिये - धीरज रखिये जब मैं उनके नाम बताऊँगा तो आप चिल्लाकर कहेंगे कि मैं तो पहले से जानता था - जी हाँ पूरा देश उन दोनों को जानता है । आप इतना पीछे पड़े हैं सो उनका नाम बताना ही पड़ेगा - तो जनाब सोनिया और राहुल को राय देनें की क्षमता रखनें वाले उन महान लोगों के नाम हैं - प्रियंका वाड्रा और राबर्ट वाड्रा । 
             सोनिया गाँधी भले ही केवल अपनी बेटी प्रियंका से राय ले सकें लेकिन राहुल गाँधी को राय देनें के लिये राबर्ट ही काफी है क्योंकि जिस स्तर का विद्यार्थी हो उसी स्तर का शिक्षक भी होना चाहिेये । वैसे भी हिस्ट्री या इंगलिश के टीचर से फिजिक्स या कमेस्ट्री तो पढ़ी नहीं जा सकती - सो राहुल को राय देनें  के लिये वाड्रा या वाड्रा सरीखे लोग ही ज्यादा उपयुक्त हो सकते हैं ।
           मैं भी भारत देश का एक वैध नागरिक हूँ क्योंकि मेरे खानदान की सैकड़ों पीढ़ियाँ इस देश में रहकर भगवान को प्यारी हुई हैं । मेरा दिल भी किसी को राय देनें के लिये हर वक्त मचलता रहता है । एक खास बात आपको बताता चलूँ कि मेरी राय के कद्रदान मेरे ही घर में आपको नहीं मिलेंगे , भले ही मैं राय देनें का भरसक प्रयास करता रहूँ । 
            हाँ तो मैं अपनें मन की बात यानि किसी को राय देनें के बारे में कह रहा था । देश के बलवान और सामर्थ्यवान लोगों को राय देनें वाले या सलाह देनें वाले बहुत से लोग हैं , लेकिन इस समय मुझे लगता है कि मनमोहन जी एक मात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें हमारे सलाह की जरुरत है । मैं अपनी सलाह या राय केवल विनम्रता पूर्वक निवेदन के रुप में ही देना चाहता हूँ । 
            मेंरा माननीय मनमोहन जी से सादर अनुरोध है कि वे पुनः काँग्रेस में सक्रिय नेता के रुप में कार्य करना शुरु करें - क्योंकि बहुत से क्रिकेटर या खिलाड़ी सन्यास लेनें के बाद भी जनता की बेहद माँगपर पुनः क्रिकेट या अन्य खेलों में सक्रिय हो जाते हैं और अपनी टीम का बेड़ा गर्क करनें के बाद पुनः सन्यास ले लेते हैं । 
           काँग्रेस की स्थिति थोड़ी अलग है क्योंकि एक तो मनमोहन जी नें पूरी तरह से सन्यास ग्रहण नहीं किया है तथा सोनिया और राहुल गाँधी नें मिलकर काँग्रेस का जिस प्रकार से बन्टाधार किया है उतना शायद मनमोहन जी के रहते होना संभव नहीं था । 
           मनमोहन जी नें देश के सामनें सेवा-भाव का एक उच्च उदाहरण प्रस्तुत किया है । उन्होनें सोनिया और राहुल की हर राय को ( जिसे लोग आदेश पालन का नाम देते हैं ) माना है , हर तरीके के घोटालों के कागजों पर अपना दस्तखत किया , एक दम आँख मूदकर - उनके वैसे काम  ‌एक जन्मजात अन्धे को भी लज्जित करनें वाले रहे हैं । हो सकता है उनके अन्धेपने वाले कार्य किसी के लिये स्तुत्य हों और किसी के लिये निन्दनीय , लेकिन हमें उससे कोई सरोकार नहीं , क्योंकि मुझे तो अपनें पेट की पीड़ा उन्हें राय देकर कम करनी है । 
            मनमोहन जी से मेरा अनुरोध है कि काँग्रेस पार्टी आज 44 सीट पर सिमट गई है , हम जैसे लोग केवल इतना चाहते हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि आप पुनः काँग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री बनाये जानें के लिये खुद को फिट रखिये और केवल दो में से एक काम कीजिये पहला- काँग्रेस को मरनें से बचाइये या दूसरा- उसे इतिहास के पन्ने में दफन हो जानें का गवाह बनकर अपना नाम अमर कर लीजिये । 
            

 

                किसी सांसद, विधायक, मंत्री या नेता द्वारा

                   आत्म-हत्या करनें के बारे सुना है ?

दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित "आप" वालों की रैली में गजेन्द्र नामक किसान द्वारा आत्महत्या कर लेनें से बहुत से सवाल खड़े हो गये हैं - लेकिन  कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके बारे में भी हमें विचार करना चाहिये - जैसा कि हम हमेशा से देखते आ रहे हैं - देश का ऐसा ही कोई क्षेत्र या व्यवसाय हो जहाँ किसी ना किसी नें आत्महत्या ना की हो । क्या डॉक्टर क्या इंजिनियर क्या उद्यमी क्या विद्यार्थी क्या शिक्षक क्या अधिकारी क्या अमीर क्या गरीब , कहनें का तात्पर्य ये है कि दुनिया के हर क्षेत्र में किसी ना किसी नें आत्महत्या जरुर की है । यहाँ तक कि कई अपराधियों द्वारा भी आत्महत्या करनें की बात भी प्रकाश मे आती है । 


लेकिन क्या आप नें कभी सुना है कि किसी नेता नें , किसी मंत्री नें, किसी सांसद या विधायक नें इस आत्म-हत्या वाली प्रक्रिया का चयन अपनें लिये कभी किया हो ? 
आप सुन भी कैसे सकते हैं - हमारे देश के नेता बेहया शिरोमणि हैं , लाख घोटाला करें , हत्या या बलात्कार जैसे अपराध करें , सजा पा जायें, जेल में सड़ते रहें लेकिन मजाल है जो शर्मिन्दगी का एक कतरा भी उनके भीतर नजर आ जाये ।



 मेंरा यहाँ पर इन बातों को लिखनें या कहनें का आशय ये कदापि नहीं है कि सांसद, विधायक, मंत्री या नेता मेरे इस लेख को पढ़नें के बाद आत्म-हत्या करनें को प्रेरित हों ।  मानव जीवन दुर्लभ है और उसकी रक्षा की जानी चाहिये । अन्त में- निवेदन है कि यदि सांसद, विधायक, मंत्री या नेता भविष्य में वैसा कोई कदम उठाते हैं तो मुझे उसके दुष्प्रेरणा का दोषी ना माना जाये ।


 रिकवरी आफ इंडिया   बनाम   डिस्कवरी आफ इंडिया   संसार के अधिकांश इतिहासकारों नें अपनें देश का इतिहास लिखते समय इस बात का ध्यान र...