शनिवार, 21 अप्रैल 2018

करैला नीम चढ़ा




                                         करैला नीम चढ़ा 

                                                                                                                          

             चौराहे पर छेदी लाल से भेंट हो गई वे आज बहुत भन्नाये हुए थे . मैनें उनके भन्नानें का कारण जानना चाहा . मैनें पूछा कोई अंतर्राष्ट्रीय स्तर का मामला है क्या ? वर्ल्ड वार तीन तो लगता है अब नहीं होगा क्योंकि ट्रम्प और सनकी तानाशाह आपस में बात करनें पर राजी हो गये हैं .
           छेदी लाल कुपित होकर मुझसे बोले - भाड़ में जाये वर्ल्ड वार तीन , एक तो उ खुद करैला हैं ऊपर से सब उन्हें नीम के पेड़ पर चढ़ाये जा रहे हैं . कुछ तो दिमाग होए चाही .
           आप केकरी बात का रहे हैं , मैनें पूछा .
        वे बोले - एक तो पता नहीं कौन उनका खाट सभा करे के सलाह दिए रहा कि खटिया खड़ी हो गई और अब जो कुछ बचा रहा वह सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग चलावे से खत्म हो जाई . अब समझ में आवा हम केकरी बात कर रहे हैं .
         मामला राष्ट्रीय स्तर का था, इसलिए मुझे राहत मिली . मैंने सवाल दागा - तो इसमें बुराई क्या है?
कोर्ट कचेहरी में तो लोग अपनें खिलाफ फैसला होनें पर या खिलाफ फैसला होनें की आशंका में जज के खिलाफ दरख्वास्त तो देते ही हैं .
        छेदी लाल बोले - इहाँ मामला दूसर है चौबे जी , राम जेठ मलानी जैसा वकील भी बोले है कि ई सब फालतू के काम है . ई सब करे से जनता में गलत मैसेज जाइगा कि राम मन्दिर और अन्य मामला के लटकावे के लिए ई सब पैंतरे बाजी की गई है . कपिल सिब्बल उनका ले डूबी .
         छेदी लाल की बॉडी का टेम्प्रेचर बढ़ते देख उनको एक अत्यंत उत्सुक श्रोता के हवाले कर मैं वहाँ से सरक लिया .
         देश में और कुछ हो या ना हो हम जनता को बहस का एक मुद्दा चाहिये तथा टी.वी. वालों को ब्रेकिंग न्यूज़ का मसाला . ये सब अब थोक के भाव में उपलब्ध है .

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

नये कानून



               अब समय आ गया है कि हमारे देश में हत्या व बालात्कार जैसे कारित अपराध के मामलों में राजनैतिक हैसियत रखनें वाले बहुत अमीर, अमीर व कम अमीर तथा गरीब व बहुत गरीब के हिसाब से कानून बनें .
                 भारतीय दंड संहिता में कानून इस तरह के हो सकते हैं जैसे - 
हत्या और बालात्कार जैसे मामले में
  1. ऐसा आरोपी को जिसपर हत्या या बलात्कार के अपराध का आरोप है यदि वैसा आरोपी स्वयं  राजनीतिक हैसियत रखनें वाला है अथवा उसका वैसी हैसियत रखनें वालों से करीबी सम्बन्ध है और वह आर्थिक रूप से बहुत अमीर आदमी की हैसियत रखता है तो उसे उक्त कारित अपराधों में केवल आर्थिक दंड की सजा दी जा सकती है, आर्थिक दंड का निर्धारण  आरोपी के एक वर्ष की आय के आधार पर किया जाएगा . 
  2. ऐसा आरोपी को जिसपर हत्या या बलात्कार के अपराध का आरोप है यदि वैसा आरोपी स्वयं  राजनीतिक हैसियत रखनें वाला नहीं है अथवा उसका वैसी हैसियत रखनें वाले व्यक्तियों से करीबी सम्बन्ध नहीं है और वह आर्थिक रूप सेहुत अमीर आदमी की हैसियत रखता है तो उसे उक्त कारित अपराधों के लिए  केवल आर्थिक दंड की सजा दी जा सकती है. आर्थिक दंड का निर्धारण आरोपी के 8 माह की आय के आधार पर किया जाएगा .
  3. ऐसा आरोपी को जिसपर हत्या या बलात्कार के अपराध का आरोप है यदि वैसा आरोपी स्वयं  राजनीतिक हैसियत रखनें वाला नहीं है अथवा उसका वैसी हैसियत रखनें वाले व्यक्तियों से करीबी सम्बन्ध नहीं है और वह आर्थिक रूप से एक अमीर आदमी की हैसियत रखता है तो उसे उक्त कारित अपराधों के लिए  अधिक से अधिक एक माह के साधारण कैद के साथ आर्थिक दंड की सजा दी जा सकती है ,आर्थिक दंड का निर्धारण आरोपी के 6 माह की आय के  आधार पर किया जाएगा . 
  4. ऐसा आरोपी को जिसपर हत्या या बलात्कार के अपराध का आरोप है यदि वैसा आरोपी स्वयं  राजनीतिक हैसियत रखनें वाला नहीं है अथवा उसका वैसी हैसियत रखनें वाले व्यक्तियों से करीबी सम्बन्ध नहीं है और वह आर्थिक रूप से कम अमीर आदमी की हैसियत रखता है तो उसे उक्त कारित अपराधों के लिए  अधिक से अधिक ६ माह के साधारण कैद के साथ आर्थिक दंड की सजा दी जा सकती है ,आर्थिक दंड का निर्धारण आरोपी के ४  माह की आय के  आधार पर किया जाएगा . 
  5. मध्यम वर्ग व गरीब वर्ग के लोगों के लोगों द्वारा कारित अपराध के सन्दर्भ में लार्ड मैकाले द्वारा सन १८६२ में लिखित भारतीय दंड संहिता के प्रावधान पूर्ववत लागू रहेंगे .  
       स्पष्टीकरण  - 
  • हत्या अथवा बलात्कार के आरोपी को मिलने वाला आर्थिक दंड के निर्धारण में पीड़ित पक्ष की आर्थिक हैसियत पर भी समुचित विचार किया जायेगा .   
  • उक्त आर्थिक दंड की धनराशि तब तक पीड़ित पक्ष को नहीं मिलेगी जब तक वह अपनी वास्तविक आय को साबित न कर दे . अपनी आर्थिक स्थिति को साबित करनें के लिए पीड़ित पक्षकार को वही न्यायिक प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी जो किसी सिविल वाद में अपनानी होती है . 
  • यदि किसी पीड़ित पक्षकार द्वारा अपनी आय के सम्बन्ध में कोई गलत सूचना दी गई हो अथवा अनुचित तरीके से अपनी आय का गलत प्रमाण पत्र हासिल किया गया, पाया जायेगा, तो कंडिका १ से ४ तक में वर्णित आरोपियों को दोष- मुक्त  कर दिया जायेगा तथा पीड़ित पक्षकार और उनकी मदद करनें वालों को हत्या या बलात्कार के अपराध का दोषी मानते हुए लार्ड मैकाले द्वारा सन १८६२ में लिखित भारतीय दंड संहिता में वर्णित धाराओं के तहत दण्डित किया जायेगा . 
  • कंडिका १ से ४ तक श्रेंणी में आनें वाले लोगों के लिए प्रथम दृष्टया यह माना जायेगा कि वे कभी अपराध कारित नहीं कर सकते और गरीब व निम्न मध्यम वर्ग के लोग केवल पैसा ऐठनें के लिए वैसे लोगों के खिलाफ झूठे मुकदमें करते हैं .
  • लार्ड मैकाले द्वारा सन १८६२ में लिखित भारतीय दंड संहिता में वर्णित अन्य अपराध व उनमें दी गई सजाएं कंडिका १ से ४ तक में वर्णित लोगों और उनके परिवार के लोगों पर लागू नहीं होंगी . 
             हमारे देश के कानून में वैसा होना चाहिये या नहीं , अपनी राय दीजियेगा . 
          
  

 रिकवरी आफ इंडिया   बनाम   डिस्कवरी आफ इंडिया   संसार के अधिकांश इतिहासकारों नें अपनें देश का इतिहास लिखते समय इस बात का ध्यान र...