खेदू की बुआ और फूफा की कोई सन्तान नहीं थी । वे लोग खेदू को बचपन में अपनें घर में रखे । बुआ , के इलाके में चोर काफी सक्रिय रहते थे । चोर भी आजकल जैसे नहीं थे बल्कि अपनें पेशे को अपना धर्म समझकर एक से बढ़कर एक चोरी का आईडिया निकालते थे । वे बड़े धैर्यवान् थे , कई-कई दिन रेकी करनें बाद तब किसी वारदात को अन्जाम देते थे । अगर पकड़ गये तो , दो-चार डन्डे खानें के बाद मृतक समान बन जाते थे , जब लोग नब्ज टटोलनें का प्रयास करते तो उसी समय बिजली की फूर्ती के साथ उठते और किसी को कुछ समझ में आता तब तक वे हवा हो जाते थे । उसके बाद चोरी की वारदात और चोरों के कारामात की चर्चा कई दिन तक चलती , क्योंकि तब मीडिया की कमी के कारण बड़े चोरों के कारनामों को लोग नहीं जान पाते थे । दिल्ली के चोरों की चर्चा दिल्ली तक , इलाहाबादी चोर की चर्चा इलाहाबाद तक , मलीहाबादी चोर की चर्चा मलीहाबाद तक , हैदराबादी चोर की चर्चा , हैदराबाद तक सीमित रहती थी ।
हाँ तो बात हो रही थी , पुरानें किस्म के चोर की । चोर की हरकत के बारे में जानने से पहले , खेदू के बुआ की घर का स्थल निरीक्षण आवश्यक है । प्रथम तल वाला मकान ,जिसमें पुताई ५-६ साल पहले वाली दीपावली में आखिरी बार हुई रही होगी , उसमें कुल जमा दो कमरे , एक बाहरी दूसरा भीतरी , प्रवेश-द्वार सड़क से सलंग्न , बगल में गलियारा जिसमें ताला रात के समय लगता था । गलियारे में पुरानी एटलस साईकिल जिसके पैडल में प्राब्लम रहती थी , ज्यादातर गलियारे में खड़ी रहती थी जिसका केवल पिछली पहिये का टायर ही नजर आता था । खुट्ट से आवाज आनें पर , बुआ ,फूफा और खेदू सबसे पहले साईकिल का पहिया देखकर आश्वस्त हो जाते थे कि साईकिल सही सलामत है । एक बार फूफा जी , कीर्तन करनें चले गये थे , बिजली भी आती जाती थी , गलियारे से दो तीन बार खुट-खुट की आवाज हुई , खेदू और उसकी बुआ नें साईकिल का पिछला टायर देखा और आवाज को चूहे की शरारत समझकर शान्त हो गये । फूफा जी , करीब ९ बजे रात में लौटे , नवम्बर का महीना था , हल्की ठण्ड भी थी बुआ जी नें मेन गेट देखा तो फूफा जी गेट से होकर भीतर आ रहे थे , जो पहले से ही खुला लग रहा था । बुआ जी दौड़ती हुई आईं और पूछा - कैसे गेट खोला ? फूफा जी घबरा कर बोले - बन्द करना भूल गई होगी , ये तो खुला ही था । बुआ जी बोली - मैंनें खुद बन्द किया था । तब तक बालक खेदू भी वहाँ पहुँच गया और , गेट कैसे खुला पर चल रहे गहन विमर्श में शामिल हो गया । सब लोगों नें गलियारे में देखा ,साईकिल का टायर वाला भाग नजर आ रहा था , राहत मिली । फूफा जी नें ताला मेंन गेट में बन्द किया और ताले को कई बार जोर लगाकर खींच कर देखा आश्वस्त हुए ,फिर सब लोग कमरे में दाखिल हुए । उसके बाद फूफा जी गलियारे में ताला बन्द करनें गये और जोर से चीखे । बुआ और खेदू पूरी ऊर्जा के साथ वहाँ पहुँचे , फूफा जी के मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी वे थर-थर काँप रहे थे , बुआ जी बोली, करेन्ट मार दिया न , कहते थे कि लटकते कटे-फटे तार को ठीक कराओ । फूफा नें तर्जनी से साईकिल वाली जगह पर इशारा किया , बुआ जी को जबरदस्त झटका लगा , क्योंकि वहाँ साईकिल की जगह पुराना टायर रखा था ,जिसे इस तरह से रखा गया था कि वह बाहर से देखनें पर लगे की साईकिल वहाँ पर है । खेदू सारा माजरा समझ चुका था वह , झट से बाहर भागा और जोर-जोर से चोर-चोर का हल्ला करनें लगा । बैहत्था के बाबा , नकबहन्चू के बाबू , संगम लाल , श्रीवास्तव जी , जग्गी बाबू और अन्य पड़ोसी आये , और खेदू से पूछे । तब तक रोती चिल्लाती बुआ जी दौड़ती हुई आयीं और भीड़ की ओर देखकर बोली - हाय चोर नें बर्बाद कर दिया । फूफा जी भी पराजित टीम के कैप्टन की भाँति मुण्डी नीचे किये वहाँ आ गये । जग्गी बाबू बोले - चोर की हिम्मत तो देखिये , घर में दिन-दहाड़े चोरी । श्रीवास्तव जी नें जग्गी बाबू को सुधारा , ये दिन नहीं रात है जग्गी बाबू । नकबहन्चू के बाबू बोले - बड़ा हरामी चोर लगत है , बताओ सब लोग घर में और चोरी करके के निकल गवा । बैहत्था के बाबा भी कमेन्ट दिये - देखो ना कल , साईकिल के टायर बदलवा रहा , आज सुबह कऊनो ले के चम्पत हो गवा । हाँ तो का भवा रहा - निर्मल बाबू (खेदू के फूफा) आप के यहाँ ? देखिये ना गलियारे से साईकिल ले गया और एक फटा टायर वहाँ रख दिया , फूफा जी बोले । जग्गी बाबू बोले - कहीं वह वही टायर तो नहीं है जो बैहत्था के बाबा के यहाँ से चोर ले गया था । श्रीवास्तव जी बोले - बेटा खेदू जरा टायर तो लाना । खेदू झट से जाकर टायर ले आया , बैहत्था के बाबा - जोर से बोले - देखा हरामी चोर का , हमार टायर निर्मल बाबू के यहाँ रखके साईकिल ले गवा , साईकिल कहूँ रखीगा और कऊनो के स्कूटर चोराईगा । बात काटकर नकबहन्चू के बाबू बोले - फिर कहबो कि स्कूटर रखके उ कार चुराई , फिर कार रखके उ हवाई जहाज चुराई है ना । निर्मल बाबू चोरी का पता कैसे चला आपको - श्रीवास्तव जी बोले । फिर खेदू के फूफा नें सारे घटनाक्रम का वर्णन किया । पुलिस में रिपोर्ट की जाये या नहीं , इस पर सर्व सम्मत प्रस्ताव नहीं हो सका । सारे मोहल्ले वालों नें वहाँ एक दो घन्टे तक, उन सभी चोरी की वारदातों को याद किया जिसमें हैरतअंगेज ढ़ग से चोरों नें साबुन , तौलिया , घड़ी से लेकर साईकिल आदि की चोरी की थी ।
दिसम्बर माह के आखिरी दिन चल रहे थे , खेदू की बुआ के भाई नें एक सुन्दर मरफी ट्रांजिस्टर , बुआ को खरीद कर दिया , बुआ जी अक्सर उसे सिरहानें मेंज पर रखकर विविध भारती से गानें सुनती रहती थीं । चूँकि ट्रांजिस्टर अभी नया-नया था इसलिये वे उसका वोल्यूम भी तेज रखती थीं , मोहल्लेवालों को भी अपना रेडियो या ट्रांजिस्टर बजानें की जरुरत नहीं पड़ती थी । एक दिन वे बाहरी दरवाजा खोलकर खाट पर लेटकर किशोर कुमार का एक गाना - सुन रही थीं, हलकी-हलकी झपकी उन्हें आ रही थी , माथे पर हाथ रखकर वे सोयी थीं , उन्हें नींद आ गयी । उनकी आँख खुली तो मोहम्मद रफी का गाना ट्रांजिस्टर में बज रहा था , मेंज की ओर देखा तो मरफी ट्रांजिस्टर की जगह एक पुराना मरम्मत किया हुआ ट्रांजिस्टर बज रहा था , उनका कलेजा धक्क से हो गया , इधर-उधर देखा मरफी ट्रांजिस्टर गायब था और उसका रुप बदल गया था , बुआ जी जोर से चिल्लायीं । अगल-बगल की महिलायें आ गईं , एक बारगी किसी को समझ में नहीं आया कि माजरा क्या है । बुआ जी नें सारी बात बताई । खेदू भी स्कूल से आया तो उसे चोर की कारामात का पता चला । फूफा जी शाम में घर आये तो वे भी चोर की अक्लमंदी के कायल हो गये । फिर उस दिन शाम को मोहल्ले वाले बुआ जी यहाँ जमा हुए और चाय पीकर मातम मनाया । सभी एक स्वर से चोर की ढिठाई पर तरह-तहर के कमेन्ट कर रहे थे । चोर नें एक बार फिर बुआ कर घर को निशाना बनाया था ।
क्रमशः
दिसम्बर माह के आखिरी दिन चल रहे थे , खेदू की बुआ के भाई नें एक सुन्दर मरफी ट्रांजिस्टर , बुआ को खरीद कर दिया , बुआ जी अक्सर उसे सिरहानें मेंज पर रखकर विविध भारती से गानें सुनती रहती थीं । चूँकि ट्रांजिस्टर अभी नया-नया था इसलिये वे उसका वोल्यूम भी तेज रखती थीं , मोहल्लेवालों को भी अपना रेडियो या ट्रांजिस्टर बजानें की जरुरत नहीं पड़ती थी । एक दिन वे बाहरी दरवाजा खोलकर खाट पर लेटकर किशोर कुमार का एक गाना - सुन रही थीं, हलकी-हलकी झपकी उन्हें आ रही थी , माथे पर हाथ रखकर वे सोयी थीं , उन्हें नींद आ गयी । उनकी आँख खुली तो मोहम्मद रफी का गाना ट्रांजिस्टर में बज रहा था , मेंज की ओर देखा तो मरफी ट्रांजिस्टर की जगह एक पुराना मरम्मत किया हुआ ट्रांजिस्टर बज रहा था , उनका कलेजा धक्क से हो गया , इधर-उधर देखा मरफी ट्रांजिस्टर गायब था और उसका रुप बदल गया था , बुआ जी जोर से चिल्लायीं । अगल-बगल की महिलायें आ गईं , एक बारगी किसी को समझ में नहीं आया कि माजरा क्या है । बुआ जी नें सारी बात बताई । खेदू भी स्कूल से आया तो उसे चोर की कारामात का पता चला । फूफा जी शाम में घर आये तो वे भी चोर की अक्लमंदी के कायल हो गये । फिर उस दिन शाम को मोहल्ले वाले बुआ जी यहाँ जमा हुए और चाय पीकर मातम मनाया । सभी एक स्वर से चोर की ढिठाई पर तरह-तहर के कमेन्ट कर रहे थे । चोर नें एक बार फिर बुआ कर घर को निशाना बनाया था ।
क्रमशः
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