रविवार, 1 जुलाई 2012

मुँदहूँ आँख कतऊँ कुछु नाहीं --- रोबटों की दुनिया ।



बाढ़ देख आये ?
बड़ा भयावह सीन था ।
हमरो मन करत रहा बाढ़ देखे के , आकाश से देखे में बड़ा मजा आवा होई ?
हम लोगो की स्थिति स्वयं देखकर आँकलन करना चाहते थे कि कितनी क्षति हुई ।
ओकर आकँड़ा तो आपके मुलाजिम अच्छा से दे सकत रहें ।
तुम फालतू आदमी  हो ।
काहे ? देश का हर काम जब गलत रिपोर्ट पर हो सकत है तो , का फायदा देश के पैसा आकाश में फूँके से ।
हमे राय देते हो ।
राय नहीं सच्चाई कह रहे हैं ।
राहत कार्य के रुपया की जो घोषणा करे हैं , ना ओके हाल देखियेगा ।
मैं स्वयं निगरानी रखूँगा ।
आप और निगरानी , इ संभव नहीं हो सकत , नाही तो देश की हालत ऐसे थोड़ी ना होती ।
तुम जनता , निपट गँवार और मूर्ख हो , निगरानी से मेंरा मतलब ---- ।
देखिये , राहत कार्य मे कुछ शातिर लोग ऐसे ताक में रहते हैं जैसे लाश को नोचे के लिये गिद्ध ।
तो मैं क्या करूँ ।
करनें को सब कुछ किया जा सकत है , सही व ईमानदार आदमी के उ सब काम  में लगावा ही नै जात है ।
देखो मैं असहाय हो जाता हूँ । मेरी कुछ उम्र भी हुई , ज्यादा तनाव मैं झेल नहीं सकता ।
तब काहे झूठै नाटक करते हैं कि कठोर कदम उठाऊँगा , दुश्मन को उसके घर में घुस कर मारुँगा ।
नहीं, नहीं, मैनें किसी दुश्मन को मारनें की बात कही ही नहीं , मैं पूरी तौर पर अहिंसक हूँ ।
आप कबौ-कबौ चीन व पाकिस्तान के लिये कुछ ज्यादा बोल जात हैं न , ए लिये कहे रहे ।
देखो , मैं वास्तव में एक रोबोट से ज्यादा कुछ नहीं रह गया हूँ , जितना ---- डाला गया ------ बस उतना ।
जनता जब चिल्लात है तो , ओके उत्तर आप देर से देत हैं ,  ई सही है , लेकिन उत्तर कैसे देत हैं ?
तुम जैसे जनता के दूत से भी बात करनें के लिये मेंरी प्रोग्रामिंग की जाती है , और उसका संचालन --।
संचालन का काम तो कोई एक ही करता होगा ?
कभी-कभी कई लोगों के हाथ से भी संचालन होता है जिसके कारण , मैं गड़बड़ा जाता हूँ , कभी-कभी ।
दिग्विजय सिंह तो उच्च तकनीकी वाले रोबोट हैं ?
नहीं भाई , उनके सारे यंत्र खराब हो गये हैं , रिपेयर लायक भी नहीं बचा है ।
ई अन्ना और रामदेव बाबा , अक्सर आप जैसे अन्य रोबटों को इंसान समझ लेते हैं ।
इसमें गलती तो उन्हीं लोगों की है ना ।
सरासर गलती है , लेकिन चिदरम्बरम् , सलमान खुर्शीद और कपिल सिब्बल तो वास्तविक इंसान लगते हैं ।
यदि वे लोग ही चकमा खा जायें तो , मैं क्या कर सकता हूँ ?
यही भ्रम के कारण तो सब गड़बड़ हो जाता है ।
एक बात है , आप लोगो की तकनीकी दुनिया में सबसे आगे लगती है ।
पुरानी बातों का मुझे स्मरण नहीं रहता है ।
कोई बात नहीं , हम याद कराते हैं , पुरानें रोबोट  थे एन डी तिवारी जी, वे जूता चप्पल उठाते थे ।
हमारे ग्रुप के पुरानें मेम्बर हैं ,बहुत काम करते हैं , लेकिन पता नहीं कौन उनको बाप बनानें पर तुला है ।
ई जानकारी आपको भी है , लेकिन सुना है , गोपियों संग रास-लीला के शौकीन रहे हैं ।
उनकी सोहबत यानी संगत शायद ठीक नहीं थी ।
लेकिन उहो तो आपै के प्रोडक्शन कम्पनी के देन रहे ।
उनमें विकृति आ गयी होगी ।
ना ,ना हम जनता इतनें मूर्ख नहीं हैं , उन्हें उसी तरह से प्रोग्राम किया हुआ था , ताकि और लोग भी------ले सकें ।
कितनी गन्दी बातें करते हो , भागो यहाँ से ।
किस किस को भगाइयेगा , सभी आप को घेर कर उस समय नोचेंगे , जब आपको कबाड़ में डाला जायेगा  ।
प्लीज , जाओ यहाँ से , ना तो मेरी समझ में कुछ आता है , ना ही मैं कुछ देख पाता हूँ , परेशान हूँ ,क्या करुँ ।  
आप कुछ करें या न करें हम जरुर समझ गये हैं कि , आप में डाले गये प्रोग्राम का नाम है -
                               " मुँदहूँ आँख कतऊँ कुछु नाहीं "।
                                           प्रोग्राम बनाये वाले और डाले वाले के जय ।  
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