नेता जी का अपहरण -
वे
लोग हाथों में असलहा लिए हुए
थे,
चेहरा
काले कपड़े से ढंका
हुआ था.
उन्होंने
चिरकुट पार्टी के एक नेता को
अगवा कर उसे एक पेड़ से बांध
रखा था .
हाथी
जैसे शरीर वाला वह चिरकुट बकरी
की तरह मिमिया रहा था उसे मालूम
था कि ये लोग उसके साथ किसी
तरह की नरमी नहीं करनें वाले
.
चिरकुट
नेता अनुमान नहीं लगा पा रहा
था कि ये लोग कौन हैं .
वह
लगातार उन लोगो के सामनें
घिघिया रहा था लेकिन वे लोग
उसे पैर से धक्का देकर चुप
रहनें को कहते थे .
तभी
सामनें से एक अत्यंत खतरनाक
व क्रूर जैसा दिखनें वाला आदमी
अपना मुंह ढके आता दिखाई दिया
.
वहां
मौजूद बाकी सब शांत हो गये .
वह
आदमी नेता के पास आया,
उसे
देख कर नेता की धिग्गी बांध
गई .
उस
आदमी नें नेता के सामनें आकर
बंदूक लिए एक आदमी से पूछा -
क्या
यही वो नेता है ?
उसनें
जवाब दिया -
जी
जनाब .
उत्तर
सुनकर वह आदमी नेता के और करीब
आया .
उसनें
नेता से पूछा -
क्यों
बे कितना खाता है तुझे बाँधनें
के लिए दो रस्सियाँ लगानी पड़ीं
?
नेता
-
जी,
मैं
ज्यादा नहीं खाता हूँ ,
ज्यादा
चलता फिरता नहीं हूँ इस लिए
पेट ऐसा लगता है .
आदमी
-
तूनें
पिछले दिनों टीवी में बोला
था कि ये सब आतंकी हैं इन्हें
गोली से भून देना चाहिये ,
क्यों
बोला था बता ?
नेता
-
ये
टीवी वाले पता नहीं क्या-क्या
दिखाते हैं ,
मैं
ऐसा कैसे कह सकता हूँ ,
मैं
तो आप लोगों का समर्थक हूँ .
आदमी
-
तू
हम लोगों को जनता है ?
नेता
-
मैं
आप लोगों को तो नहीं जानता
लेकिन आप जैसे लोगों से मेरा
करीबी रिश्ता है .
आदमी
-
तूनें
हम लोगों को गद्दार और न जानें
क्या-क्या
कहा था ?
नेता
-
हम
लोग टीवी में जो बोलते हैं वह
सच नहीं होता ,
जनता
को दिखानें के लिए तो हम अपनें
बाप को भी गाली देते रहते हैं
.
आदमी
-
यानि
तुम लोग जन्म जात कमीनें हो
?
नेता
-
यही
समझ लीजिये .
आदमी
-
तब
तेरा जिन्दा रहना ,
बेकार
है .
नेता
-
ऐसा
जुल्म न कीजिये,
हमें
मारकर आप को क्या मिलेगा ?
आदमी
-
पब्लिसिटी
,
लोगों
में खौफ और टीवी पर डिबेट .
नेता
-
देखिये
,
मैं
शुगर और ब्लड प्रेशर का मरीज
हूँ ,
हार्ट
की भी प्राब्लम है ,
मैं
तो खुद मरा हुआ हूँ मुझे मारनें
से क्या मिलेगा ?
आदमी
-
इसे
यहीं खत्म कर दो .
दूसरा
आदमी -
जी
जनाब .
वह
दूसरा आदमी नेता के पास अपनी
बंदूक लेकर पहुंचा .
नेता
कस कर चिल्लाया .
वाह
.
वह
बंदूकधारी अपना मुंह फेर कर
नाक बंद करनें लगा .
नेता
नें राहत की श्वांस ली .
जिस
कब्जियत से वह सालों से परेशान
था ,
न
जानें कितनी दवाओं के सेवन
के बाद भी उसे कोई लाभ नहीं
हुआ था उसे इन लोगों नें कुछ
समय में ही दूर कर दिया था.
नेता
मुस्करा कर बोला -
अब
आप लोग मुझे मार भी दें तो कोई
फर्क नहीं पड़ेगा,
नेता
के शब्दों को सुननें वाला
वहां कोई नहीं था,
वहाँ
फैली भयानक दुर्गन्ध के कारण
सारे मुंह ढके बंदूकधारी भाग
चुके थे .
कुछ
दिन बाद वही नेता -
टीवी
में इन्टरव्यू दे रहा था -
उन
लोगों नें मेरा अपहरण नहीं
किया था बल्कि मै खुद उन लोगों
से मिलनें के लिए गया था,
मैनें
उन लोगों को समझाबुझा कर
मुख्यधारा में लानें का प्रयास
किया.
वे
लोग मेरी बातों से बहुत प्रभावित
हुए हैं .
मुझे
पूरा विश्वास है कि सारी समस्या
का कोई ना कोई हल जरूर निकलेगा
.
नेता
जी के समर्थक उनकी जय जयकार
करनें लगे .