रविवार, 24 मई 2015

त्रिलोचन की संक्षिप्त प्रेम कथा


त्रिलोचन की संक्षिप्त प्रेम कथा

             त्रिलोचन चूहा सदा की भाँति अपनें बिल से निकलकर बाहर आया तो देखा कि एक गिलहरी जो हल्के भूरे रंग की थी उसके बिल के बाहर गिरे एक बीज के टुकड़े को अपनें पंजो व दाँतों से तोड़ रही थी । उसकी मोहक स्टाईल देखकर त्रिलोचन ठगा सा केवल उसे निहारता रहा । जब तक वह गिलहरी बीज को तोड़ती रही तब तक त्रिलोचन चूहा अपनें बिल के मुँह के पास बैठकर एकटक उसे देखता जा रहा था । 
            थोड़ी देर बाद गिलहरी बीज के अन्दर की फली को खाकर सामनें वाले पेड़ की ओर फुकदती हुए चली गई । त्रिलोचन सम्मोहित अवस्था में उसे जाते हुए देखता रहा । आँखों से ओझल होते ही त्रिलोचन का सम्मोहन टूटा । वह  बिल से बाहर आकर उसी दिशा में भागा । लेकिन गिलहरी नहीं दिखाई दी । त्रिलोचन भोजन की तलाश छोड़ उस गिलहरी की तलाश में इधर उधर भटकता रहा लेकिन वह मोहिनी गिलहरी कहीं दिखाई नहीं दी । थक हार कर बिना भोजन लिये वह उदास मन से बिल के भीतर आया । बिल के सारे चूहे-चुहिया अपनें साथ लाये भोजन को कुतर-कुतर कर खा रहे थे । त्रिलोचन को चूहों द्वारा छोड़े गये भोजन के टुकड़ों से ही काम चलाना पड़ा ।
           त्रिलोचन को सारी रात नींद नहीं आयी । वह बार-बार बिल के बाहर आकर देखता कि शायद वह गिलहरी नजर आ जाये, लेकिन हर बार बोझिल मन से वह पुनः बिल के अन्दर आ जाता । उसकी इस हरकत पर प्रमुख चूहिया नें टोका भी लेकिन त्रिलोचन कोई ना कोई बहाना बनाकर फिर से बिल के मुँह के पास चला आता । किसी प्रकार त्रिलोचन नें बेचैनी के साथ पूरी रात काटी ।
             सुबह हुई, त्रिलोचन उस सम्मोहिनी गिलहरी के दीदार के लिये बिल से बाहर आया लेकिन वहाँ चिड़ियों की चहचहाहट के अलावा कुछ नहीं था । कौओं की काँव-काँव त्रिलोचन की पीड़ा को और बढ़ा रही थी । त्रिलोचन को उस गिलहरी के बगैर सब कुछ सूना-सूना सा लग रहा था । त्रिलोचन को खुद भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह मतवाला होकर उस गिलहरी को क्यों तलाश रहा है । उस गिलहरी में ऐसा क्या था कि त्रिलोचन उसे एक बार देखनें के लिये पागल हुआ जा रहा था । त्रिलोचन अपनें बिल से काफी दूर निकल आया था । भोजन की तलाश का काम उसनें बन्द कर दिया था । रास्ते में कुतरनें की चीजों के मिलनें पर भी वह अपना समय खराब नहीं करना चाहता था।
                गाँव की बिल्लियों का डर भी था सो त्रिलोचन नें अपनें बिल की ओर वापस जानें का फैसला किया । वह पूरे वापसी के मार्ग  पर उस चंचला गिलहरी को तलाश करता रहा । जैसे ही वह अपनें बिल के पास  पहुँचा उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ । उसके बिल के पास ही वह गिलहरी अन्य गिलहरियों के साथ एक पेड़ पर चढ़नें- उतरनें का खेल खेल रही थी ।  त्रिलोचन की सारी थकावट मिट गई । उसे विश्वास हो गया कि दिल से दिल को राह होती है और यदि किसी को सच्चे दिल से याद किया जाये तो वह जरुर मिल जाता है । वह उस गिलहरी को पेड़ पर चढ़ते व उतरते प्रसन्न भाव से देखता रहा ।
              त्रिलोचन विचारों मे लीन था कि अचानक उसके ठीक बगल से एक बिल्ली निकली - त्रिलोचन डर गया । बिल्ली के मुँह के दाँतों के बीच में उसकी एक चूहिया पत्नी दबी थी । त्रिलोचन घबरा के बिल में भागा । बिल के अन्दर उसके परिवार में शोक का माहौल था । सारे परिवार वाले उस चूहिया की लापरवाही के बारे में चर्चा कर रहे थे । त्रिलोचन नें सबको समझाया कि जीवन नश्वर है और हर किसी की मौत किसी ना किसी बहानें से ही होती है । चूहे सब कुछ भूला कर अपनें  कुतरनें के काम में लग गये ।
            थोड़ी देर बाद त्रिलोचन नें बिल के बाहर मुंह निकाल कर देखा सारी गिलहरियाँ जा चुकी थी । अब त्रिलोचन नें उस गिलहरी को अपनें बिल के पास से ही देखनें का प्लान बनाया । बिल्लियों के बढ़ते आतंक के कारण प्रतिदिन बहुत दूर तक जाना उचित भी नहीं था ।
           त्रिलोचन द्वारा अपनें परिवार के सदस्यों के प्रति बरती जा रही उदासीनता से उसके चूहा परिवार के लोग  खिन्न थे । त्रिलोचन द्वारा कुछ दिन से की जा रही अजीब सी हरकतों को देख कर चूहों को शक हुआ कि कहीं त्रिलोचन का मानसिक संतुलन तो नहीं बिगड़ रहा ।
             कुछ नये उभरते हुए चूहों नें परिवार का नया मुखिया चुननें का प्रस्ताव दिया जिसे त्रिलोचन नें भी सहर्ष स्वीकार कर लिया ।  इस प्रकार त्रिलोचन नें गिलहरी का प्यार पानें की आशा में चूहा परिवार के मुखिया का पद त्याग दिया । त्रिलोचन पर परिवार का मुखिया होनें कारण चूहों की जनसंख्या बढ़ानें का महत्वपूर्ण दायित्व था । गिलहरी के प्रति आकर्षित होनें के बाद से वह अपनें दायित्व का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर पा रहा था । चूहों की जनसंख्या का रेट गिरता जा  रहा था । वैसे भी चूहों की जनसंख्या वृद्धि करनें का काम, कोई आसान काम नहीं होता ।
              त्रिलोचन आज खुद को मुक्त पा रहा था । अब उसकी ना तो कोई पत्नी थी ना ही कोई सन्तान । आज के बाद से वह उस सुन्दरी गिलहरी को ज्यादा से ज्यादा समय दे सकता था । वह अपनें बिल के पास इधर-ऊधर कूद-फाँद रहा था लेकिन वह भूरी वाली सुन्दर गिलहरी उसे नहीं दिखाई दी ।
                  आज तीसरा दिन था जब वह गिलहरी त्रिलोचन को नजर नहीं आई । त्रिलोचन उदास मन से बिल से बाहर आकर पत्तों के पास पड़े फल के एक बीज को उठानें के लिये बढ़ा, तभी वह मोहिनी गिलहरी भी लपकती हुई वहाँ आ गई । त्रिलोचन उस बीज को उससे पहले ही अपनी दाँतों से पकड़ चुका था , इसलिये गिलहरी उस बीज को नहीं पा सकी। त्रिलोचन को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ । वह गिलहरी भी त्रिलोचन को देखे जा रही थी । त्रिलोचन नें झट अपनी मुँह से वह बीज निकालकर जमीन पर रख दिया और कुछ दूर पर जाकर बैठ गया, गिलहरी आई और उस बीज को लेकर पेड़ पर चढ़ गई । त्रिलोचन नें फल के बीज के बदले सब कुछ पा लिया था ।
                 त्रिलोचन जान गया था कि उस गिलहरी को एक विशेष प्रकार के फल के बीज ज्यादा पसन्द हैं । त्रिलोचन नें सोचा कि अगर उसी प्रकार के फल के बीज यहाँ मिलेंगे तो ये गिलहरी हमेशा यहाँ आयेगी । अगले दिन त्रिलोचन नें दो-तीन फल के बीज का जुगाड़ किया और अपनें बिल से थोड़ी दूर रख दिया । जैसे ही उसनें वे बीज वहाँ रखे बिल के अन्दर से दो तीन चूहे निकलकर उस बीज को लेकर भागे । त्रिलोचन नें बहुत रोका लेकिन -- ।
               आज गिलहरी उस स्थान पर आई लेकिन वहाँ बीज नहीं थे । गिलहरी को कोई फर्क पड़ा हो या नहीं लेकिन त्रिलोचन अपनी गिलहरी को बीज नहीं खिला सका यह उसके लिये किसी सदमें से कम नहीं था । उसके अपनों नें ही त्रिलोचन का प्लान फेल किया था । त्रिलोचन कुछ कहनें के लिये गिलहरी के पास जानें को हुआ तब तक गिलहरी सामनें वाले पेड़ पर चढ़ गई ।
                त्रिलोचन अपनी योजना को फलीभूत करनें के लिये फल के बीजों की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा, बड़ी मुश्किल से जमीन के भीतर से खोदकर उसनें 5 बीज निकाले । तीन बीजों को उसनें जमीन के नीचे छिपा दिया तथा दो बीजों को वह अपनें बिल से कुछ दूरी पर रखकर बीजों के बगल में ही एक पत्ते की आड़ मे छिप गया । त्रिलोचन का दुर्भाग्य -- आज गिलहरी बीजों के पास नहीं आई । त्रिलोचन बीजों को वहीं छोड़कर वापस अपनें बिल में चला आया । थोड़ी देर बाद उन्ही बीजों को चूहे बिल में लाकर कुतर रहे थे।
                 त्रिलोचन नें 2-3 दिन तक बीज ना रखनें का फैसला किया लेकिन छिपाये गये बीजों को देखनें वह जरुर जाता था । आज चौथा दिन था । सुबह से ही त्रिलोचन की आत्मा कह रही थी कि वह गिलहरी उसके बीजों को खानें आज जरुर आयेगी । त्रिलोचन उन छिपाये गये बीजों को जमीन से निकालकर ले आया तथा उन्हें साफ करके अपनें बिल के सामनें वाले पेड़ के नीचे कुछ-कुछ दूरी पर रख दिया तथा खुद वहीं छिपकर गिलहरी का इन्तजार करनें लगा ।
                   धम्म से एक आवाज आई । त्रिलोचन के शरीर पर किसी नें शूल गड़ा दिया था । प्रेम मार्ग के पथिक  त्रिलोचन के प्रणय-निवेदन की चेष्टा पर कुदृष्टि रखनें वाली एक बिल्ली द्वारा यह जघन्य पाप-कर्म किया गया था । बिल्ली के दाँतों के बीच दबकर त्रिलोचन की आत्मा निकल चुकी थी ।
                 त्रिलोचन द्वारा बनाई गई गिलहरी दर्शन योजना असफल नहीं रही । वह मोहिनी गिलहरी त्रिलोचन द्वारा लाकर रखे गये बीजों को आनन्द के साथ कुतर रही थी ।
                     हाँ , उस बीज कुतरती गिलहरी को देखनें के लिये वहाँ कोई त्रिलोचन नहीं था ।
                                                                    
                                                                                                            ___ समाप्त __

रविवार, 17 मई 2015

कुत्ते और इंसानी कुत्ते


                     ुत् और इंसानी कुत 

              हम अक्सर सुनते हैं साला , एकदम कुत्ता है । यह स्वामी भक्त कुत्तों का कितना बड़ा अपमान है इसे कोई कुत्ता ही समझ सकता है । कुत्ते कई प्रकार के होते हैं - जैसे सड़क का कुत्ता , गली का कुत्ता  गाँव का कुत्ता , बस्ती का कुत्ता, धोबी का कुत्ता । हम तो जिले और प्रदेश तक के कुत्तों में भी अलग-अलग प्रवृत्ति देखते हैं । 

             कुछ कुत्ते भाग्यशाली होते हैं जो अपनें मालिक के साथ बिस्तर पर सोते हैं और कुछ कुत्ते उससे भी ज्यादा किस्मत वाले होते हैं जिन्हें अपनी मालकिन की गोद में रहनें का सुख मिलता है । मैंनें कुछ ऐसे भाग्यशाली कुत्ते भी देखे हैं, जिनकी मालकिन अपनें बच्चे को तो गोद में नहीं उठातीं, लेकिन अपनें प्यारे कुत्ते को गोद में लिये फिरती हैं। देखा जाये तो ऐसे कुत्ते जो किसी पूर्वजन्म के पाप के कारण या ईश्वर की गलती कुक्कुर योनि में पैदा तो हो गये हैं,  लेकिन ऐसे कुत्ते उन इंसानी बच्चों से ज्यादा किस्मत वाले हैं जिनको गोद में लेनें के लिये किसी का हाथ नहीं बढ़ता । 

                 जो वास्तविक कुत्ते हैं वे तो कुत्ते हैं ही लेकिन इंसानी शक्ल वाले वाले ऐसे लोग भी हैं,  जो अपनी कुत्तई से सम्पूर्ण कुत्ता बिरादरी को बदनाम करते रहते हैं। मैनें किसी कुत्ते के बारे में ऐसा नहीं सुना कि वह इंसानी हरकत कर सकता है - हाँ!  इतना जरुर सुना है कि कुछ लाचार कुत्तों से कभी-कभी इंसानी कुत्तई करवाई जाती है । छोड़िये इन बातों को , चलते हैं अपनें मुख्य टापिक की ओर । मैं अपनें देश भारत से बाहर कहीं नहीं गया हूँ , विदेशी कुत्तों के बारे में मेरा ज्ञान नगण्य है । मुझे अपनें देश के कुत्तों और इंसानी कुत्तों के बारे में ही कुछ जानकारी है लेकिन मेरी  यह जानकारी भी पूरी है या अधूरी मैं दावे के साथ नहीं कह सकता ।

                 हमारे देश में कुत्तागिरी को एक व्यवसाय के रुप में अपना लिया गया है । हमारे देश की जनता को लगभग सभी जानवरो से लगाव है लेकिन कुत्तों से कुछ ज्यादा ही लगाव है, इसी लगाव का फायदा इंसानी कुत्ते भी उठाते हैं । ये इंसानी कुत्ते देश के हर कोनें में , हर विभाग में मिलेंगे। ये इंसानी कुत्ते सहज ही उपलब्ध होनें वाले प्राणी नहीं होते  कि रोटी दिखाई और लगे दुम हिलानें ।
                  हमारे देश के ज्यादातर विभाग ( कोई विभाग अछूता नहीं है ) में इन कुत्तों की पहुँच रहती है । यदि पूरी आँखें खोल कर हम देखें तो पायेंगे कि इन इंसानी कुत्तों के बिना हमारे देश का कोई काम नहीं हो सकता । सच तो ये है कि हमारा देश इन इंसानी कुत्तों पर इतना आश्रित हो चुका है कि  यदि इन इंसानी कुत्तों को कुत्तागिरी से रोक दिया जाये तो देश का राजनीतिक , प्रशासनिक तथा न्यायिक ढाँचा ही चरमारा जायेगा । देश में सांवैधानिक संकट खड़ा हो जायेगा । 

                 किसी सरकारी कार्यालय या न्यायालय ही नहीं बल्कि देश के मंत्रालय के आस-पास भी ये निर्बाध रुप से विचरण करते रहते हैं। वैसी तमाम जगहों/आॅफिसों के इर्द-गिर्द भी जहाँ आम आदमी को सबसे ज्यादा काम पड़ता हो, इन इंसानी कुत्तों की बहुत बड़ी जमात रहती है। ये कुत्ते बहुत कुशल नोचवइया होते हैं ये बहुत सावधानी से किसी आदमी को नोचते हैं , यहाँ तक कि नोचा जा रहा आदमी भी यह नहीं  कह सकता कि उसे किसी नें नोचा है ।

                     आदमी को नोचनें वाले इंसानी कुत्ते तो हमें आसानी से नजर आ जाते हैं , लेकिन देश को नोचनें वाले  इंसानी कुत्ते परम पारंगत नोचवइये कुत्ते होते हैं । वे बहुत ही सामान्य कुत्ते जैसा आचरण करते हैं और अक्सर नोचनें का अरोप लगनें पर मुँह खोलकर दिखाते हैं कि उनके पास तो दाँत ही नहीं है, वे कैसे किसी चीज को नोच सकते हैं ।  हमारे देश की कोई भी राजनीतिक पार्टी इन इंसानी कुत्तों के बिना नहीं चल सकती ना ही उसका वजूद रह सकता है ।

                    कुत्ता , कुत्ता ही रहे तो अच्छा है । इंसान , इंसान ही रहे तो अच्छा है । ये इंसानी कुत्ते ना केवल मानव जाति के लिये हानिकारक हैं बल्कि इनके कारण तमाम स्वामी-भक्त कुत्तों की छवि भी खराब हो रही है । किसी और को आपत्ति हो या ना हो हमें इस बात पर घोर आपत्ति है कि ऐसे इंसान जिनके आचरण और करतूतों के आधार पर हम उन्हें कुत्ता कहनें लगते हैं - यह कुत्तों का सरासर अपमान है ।

                       गरीबी हटे या ना हटे , मँहगाई हटे या ना हटे , बेरोजगारी हटे या ना हटे , बलात्कार बन्द हो या ना बन्द हो , सबसे पहले हमारे देश में चल रही कुत्तागिरी बन्द होनी चाहिये, वह चाहे  न्यायपालिका में हो या पुलिस विभाग में हो या प्रशासनिक विभाग में हो या हमारे देश की नेतागिरी में हो । हमारा देश किसी और चीज से नहीं बल्कि इंसानी कुत्तागिरी से त्रस्त है, चारों ओर कुत्ते ही कुत्ते हैं जो सीधी-सादी जनता को नोचनें में लगे हैं । यदि देश को आगे ले जाना है, देश और जनता  का विकास करना है तो इन बहुरुपिये इंसानी कुत्तों को सबसे पहले खत्म करना है - चाहे जैसे भी हो ।

गुरुवार, 14 मई 2015

हैप्पी बर्थ-डे मुनिया





हैप्पी बर्थ-डे मुनिया

आज रधिया की मालकिन की बेटी मोना का बर्थ-डे था मोना की बर्थ-डे पार्टी पर मालिक और मालकिन नें घर को रंग-बिरंगी झालरों से सजवाया था और दावत पर बहुत से मेहमानों को भी बुलाया मोना की बर्थ-डे पार्टी रात्रि में खत्म हुई रधिया और मुनिया को मेहमानों के जानें के बाद फुर्सत मिली
मोना और मुनिया एक ही तारीख को पैदा हुई थीं केवल समय का अन्तर था
मालकिन नें रधिया को अपनें घर जाते समय बचा हुआ खाना और मिठाई कागज में लपेटकर दी घर लौटते समय रधिया नें मालकिन के दरवाजे पर लगे तीन-चार गुब्बारे चुपके से नोच लिये मुनिया खुश हुई दोनों घर पहुँचे घर के दरवाजे पर मोती पहरेदारी कर रहा था, उन दोनों को देखते ही वह दुम हिलाते हुए खड़ा हो गया मुनिया मोती को पुचकारते हुए अपनी माँ के साथ कोठरी में गयी
रधिया अपनें साथ लाये गये गुब्बारों को धागे में बाँधकर कोठरी में लटकानें लगी मुनिया अचम्भित थी। वह अपनी माँ से कुछ पूछती, उसके पहले ही रधिया नें एक स्टूल पर कागज में लपेटी मिठाई को रखा और लटके हुए गुब्बारों को फोड़ते हुए खिलखिलाकर हँसते हुए बोली- "हैप्पी बर्थ-डे मुनिया" और मुनिया को एक मिठाई खिलाई फिर मुनिया से कहा- अब तुम मुझे भी मिठाई खिलाओ, दोनों नें मिठाई खाई, ताली बजाई  
मुनिया का जन्म-दिन आज पहली बार सेलीब्रेट किया गया था । माँ-बेटी आज बेहद खुश थे
मोती कोठरी के अन्दर की सारी गतिविधियों को गौर से देख रहा था मुनिया नें एक मिठाई का टुकड़ा उठाते हुए अपनी माँ रधिया से अनुमति चाही - माँ एक मिठाई मोती को भी खिला दें माँ की अनुमति मिली मुनिया नें अपनें बर्थ-डे पर मोती को मिठाई खिलाई- मोती की आँखें कह रही थीं - "हैप्पी बर्थ-डे-मुनिया"

गुरुवार, 7 मई 2015

चकल्लसपुर की बाढ़ और मीडिया का पोस्टमार्टम -



चकल्लसपुर की बाढ़ और मीडिया का पोस्टमार्टम

बात उस समय की है जब देश के एक प्रदेश के जिले में भयंकर बाढ़ आई , बहुत से लोगों को बाढ़ नें लील लिया बाढ़ के पानी में ना जानें कितनों के घर गायब हो गये देश के सारे टी.वी. चैनल पर केवल एक ही खबर चल रही थी , उस भयानक बाढ़ की मैंनें भी अपना टी.वी. खोला - विज्ञापन के बाद समाचार शुरु हुआ
समाचार वाचकदर्शकों, ब्रेक के बाद आपका फिर से स्वागत है जैसा कि आप सुबह से सुन रहे हैं , देश के कई हिस्सों में आई भयानक बाढ़ और उससे हुई तबाही के समाचार हम आपको एक गाँव में ले चलते हैं जिसका नाम अभी तक नहीं मालूम है लेकिन हमारे संवाददाता नें अनुमान के आधार पर बताया कि शायद उस गाँव का नाम चकल्लसपुर है वैसे भी नाम में क्या रखा है, गाँव तो सब गाँव ही होते हैं यदि किसी गाँव का नाम वाशिंगटन या न्यूयार्क रख भी दिया जाये तो क्या फर्क पड़ेगा ? वे वाशिंगटन या न्यूयार्क तो बन नहीं जायेंगे - तो नाम पर विवाद करनें से क्या फायदा - उसे चकल्लसपुर ही मानकर चलिये हमारा ये चैनल पहला ऐसा चैनल है जो यहाँ तक पहुँच पाया है
समाचार वाचक आईये चलते हैं चकल्लसपुर जहाँ हमारे संवाददाता राम अवतार जी मौजूद हैं जो अपनी जान को जोखिम में डालकर वहाँ तक पहुँचकर आपतक खबरें पहुँचा रहे हैं -
समाचार वाचककहिये राम अवतार जी क्या समाचार है बाढ़ का ------ ( उधर से खामोशी ) लगता है हमारा सम्पर्क राम अवतार जी से नहीं हो पा रहा है( पुनः जोर से ) आप सुन रहें हैंराम अवतार जी
रामअवतार जी --- जी मैं बहरा नहीं हूँआप लोगों का माईक और अन्य सिस्टम ही बीच-बीच में गड़बड़ा जाता है मैंनें पहले भी कई बार कहा है कि चीनी सामानों का इस्तेमाल बन्द करें , इंडियन सामान का प्रयोग करें , वे मँहगे होंगे लेकिन अच्छे होंगे
समाचार वाचक - जी, राम अवतार जी हम लोग आपकी सलाह इस चैनल के मालिकों तक पहुँचा देंगे
राम अवतार तब मैं अपनी सलाह वापस लेता हूँ राय देनें वाले लोगों का हाल मुझे मालूम है
समाचार वाचकइसीलिये कहा जाता है राम अवतार जी जो काम आपको दिया गया है वही कीजिये सामान कहाँ से लेना है, किसका लेना है, इसे देखना हमारा या आपका काम नहीं है। दुबारा ऐसी गलती ना हो, राम अवतार जी ध्यान रहे
समाचार वाचकहाँ तो राम अवतार जी हमें बतायें कि वहाँ कैसा हाल है लोगों का
राम अवतार यहाँ चारों ओर केवल पानी ही पानी नजर रहा है हम लोग किसी प्रकार से इस ऊँचे टीले पर पहुँच पानें में सफल रहे हैं हमारे साथ इस टीले पर तीन अन्य बाढ़ पीड़ित लोग भी हैं जो बाढ़ में बहकर यहाँ तक पहुँचे हैं इन्हीं से पूछते हैं बाढ़ का हाल -
राम अवतारआप लोग इस टीले पर कब आये ?
एक आदमी - हम लोग तीन दिन से यहाँ भूखे-प्यासे पड़े हैं , बाढ़ का पानी पी पीकर किसी प्रकार से जान बची है । आप लोग हमें यहाँ से बाहर निकालें ।
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - जैसा कि आप लोग देख रहे हैं ये लोग तीन दिन से यहाँ टीले पर फँसे हुए हैं इनके पास खानें पीनें को कुछ भी नहीं है
राम अवतार (पुनः टीले पर मौजूद आदमी से)- इस गाँव के कितनें लोग अब तक लापता हुए हैं बाढ़ में ?
एक आदमी - इस बाढ़ नें पूरा का पूरा हमारा गाँव ही समाप्त कर दिया कहीं भागनें का अवसर ही नहीं मिला लोगों को , ये टीला यहाँ पर ना होता तो हम तीनों भी अब तक मर चुके होते
राम अवतार ( दूसरे आदमी से) - आपके परिवार वाले ?
दूसरा आदमी - सब मर गये भैया
तीसरा आदमी - मुझे छोड़कर कोई नहीं बचा है परिवार में
राम अवतार आप लोग कैसे बचे , बताइये हमारे टीवी के दर्शकों को
तीनों एक साथ भाड़ में जायें आपके दर्शक , यहाँ हमारी जान जा रही है और आपको अपनें समाचार और दर्शकों की पड़ी है इससे तो अच्छा था कि हम भी मर जाते
राम अवतार ( समाचार वाचक से )- देखा आपनें , किस कदर ये लोग बाढ़ से त्रस्त हो गये हैं कि अब अपनें परिवार को खोनें के बाद जीना भी नहीं चाहते हैं मुझे तो ऐसा लगता है कि इस ईलाके में इन तीनों लोगों के अलावा कोई भी जिन्दा नहीं बचा
समाचार वाचकराम अवतार जी हमारे दर्शक यह जाननें के लिये बहुत उत्सुक हैं कि ये लोग खुद को जिन्दा पाकर कैसा महसूस कर रहे हैं
राम अवतार ( तीनों से ) - आप लोगों को खुद को जिन्दा पाकर  कैसा महसूस हो रहा है ?
तीनों चिल्लाकबहुत बुरा लग रहा है , और उससे ज्यादा बुरा तो ये लग रहा है कि भूख प्यास से हमारी जान जा रही है और आपको अपनें टीवी न्यूज की पड़ी है पहले पीनें को पानी दो तब कुछ बोलेंगे
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - जैसा कि आप देख रहे हैं - हमार न्यूज चैनल नें सबसे पहले इस इलाके में राहत पहुँचानें का काम किया है - यहाँ के बाढ़ पीड़ितो को हम पानी देनें जा रहे हैं
समाचार वाचक दर्शकों जैसा कि आप जानते हैं हमारा चैनल हर मुसीबत में जनता के साथ रहता है और राहत के कार्य में में भी सबसे आगे है राम अवतार जी आप अपनें साथ लिये बोतल के पानी से दो-दो घूँट पानी उनको पीनें के लिये दीजिये और कैमरा उनके मुँह के पास रखिये
राम अवतारआइये , आप लोग इस बोतल से केवल दो-दो घूँट पानी पीजिये (राम अवतार नें पानी का बोतल उनको दिया )
राम अवतारये आप लोगों नें क्या कर दिया भाई , आप लोग तो पूरी बोतल ही गटक गये
तीनों एक साथ क्या चाहते हो पानी में कूदकर जान दे दूँ
राम अवतारबाढ़ में गाय, भैंस , बैल बकरी भी मरे होंगे , गधे , कुत्ते सूवर भी मरे होंगे ?
तीनों एक साथ हम लोग तो गधे कुत्ते सूवर से भी बदतर थे , इसीलिये तो नहीं मरे
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - देखिये , यहाँ का पानी लगातार बढ़ता ही जा रहा है , यह टीला जो जमीन से करीब 100 ऊँचा रहा होगा  जो लगभग डूबनें वाला है , बाढ़ का पानी 15-20 फीट नीचे से बह रहा है  यानि पानी लगातार बढ़ता जा रहा है मुझे लगता है कि कुछ देर में यह टीला भी पानी में डूब जायेगा
समाचार वाचक टीला डूबा तो वे तीनों आदमी पानी में डूब कर मर सकते हैं , है ना ?
राम अवतारजी यह टीला जब डूबेगा तो कोई नहीं बचेगा हमें तो चिन्ता इन तीनों आदमियों की है यदि कोई इन्हे बचानें नहीं आया तो ये लोग नहीं बचेंगे
समाचार वाचक –  उन तीनों की चिन्ता करनें का काम सरकार का है । कोई ना कोई सरकारी आदमी हमारा चैनल देखकर सरकार को सूचित कर देगा । आप केवल अपना और कैमरा मैन का ध्यान रखिये, राम अवतार जी
राम अवता – जी, सही कहा आपनें । सरकार के किसी काम में हम दखल नहीं देते । हमारी चिन्ता ना करें , हमारी नाव पानी में रस्सी के सहारे बँधी है बाढ़ का पानी ऊपर चढ़ेगा , नाव ऊपर जायेगी । हम उसपर चढ़कर निकल लेंगे
समाचार वाचकआप केवल उन तीनों को ढाढस देते रहियेगा ताकि वे सरकारी मदद की उम्मीद में जिन्दा रहें । 
राम अवतार जी हाँ , हम तो केवल इन तीनों को ढाढस ही दे सकते हैं , इनको बचानें का काम तो सरकार का है हम टी.वी. वाले लोग, वैसे भी सरकार के किसी काम में दखल नहीं देते हैं
राम अवतार ( तीनों से ) - आप लोग तीन दिन से यहाँ हैं सरकार से कोई मदद आई कि नहीं अभी तक ?
तीनों ( एक साथ ) भाड़ में जाये सरकारी मदद , पहले यहाँ से कोई हम लोगों को निकाले तो ?
राम अवतारनहींनहीं , आप लोग घबड़ाइये नहीं, परेशान ना होइये , हम आपके साथ हैं(राम अवतार जेब से तीन बिस्कुट निकालता है और एक-एक बिस्कुट तीनों को देता है । ) बिस्कुट खाइये ।
राम अवतार - ( समाचार वाचक से ) जैसा कि आप लोग देख रहे हैं यहाँ अभी तक सरकार का ना कोई आदमी पहुँचा है ना ही किसी प्रकार की कोई मदद या राहत सामग्री ही आई है , इससे ये लोग सख्त नाराज हैं इस मौके पर सबसे पहले हमारे न्यूज चैनल नें राहत सामग्री की आपूर्ति बाढ़ पीड़ितों के बीच की है और  इन बाढ़ पीड़ितों के बीच बिस्कुट का वितरण किया है
राम अवतार ( तीनों से ) - एक-एक बिस्कुट खाकर कैसा लग रहा है आप लोगों को ?
तीनों एक साथएक-एक बिस्कुट से क्या होगा - हमारा मजाक बनाते हैं आप लोग दो तीन दिन से घास भी नहीं मिली है खानें को
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - देखा आपनें, इस इलाके में खानें-पीनें की सामग्री का कितना अभाव है मीट-मुर्गा तो छोड़िये यहाँ तो बाढ़ पीड़ितों को घास तक नहीं मिल रही है खानें को । 
समाचार वाचक ( दर्शकों से ) - देखा दर्शकों आपनें कितनी दिक्कत में है चकल्लसपुर गाँव के बाढ़ पीड़ित गाँव वाले सरकार भले ही राहत सामग्री ना पहुँचा पाये लेकिन हमारे चैनल का यह प्रयास होगा कि बाढ़ पीड़ितों तक ताजी हरी घास पहुँचा दी जाये
समाचार वाचक राम अवतार जी आप उन तीनों बाढ़ पीड़ितों से कहिये कि वे लोग अपना साहस ना छोड़ें हिम्मत बनाये रखें हम सभी लोग उनके साथ हैं
राम अवतार ( तीनों से ) - आप लोगों की चिन्ता पूरे देश के साथ-साथ हमें भी है , आप लोग अपना धैर्य बनाये रखिये - केवल आपका साहस और धैर्य ही आपको बचा सकता है, तब तक एक-एक बिस्कुट और खाइये( जेब से पुनः एक-एक बिस्कुट निकालकर उन तीनों की ओर बढ़ाता है )
राम अवतार देखा आपनें हमारे इस टी.वी. चैनल ने इस इलाके में दूसरी बार राहत सामग्री का वितरण किया है , जबकि ना तो सरकार ना ही कोई संस्था की मदद इन बाढ़ पीड़ितों को मिल पाई है
समाचार वाचक हम लगातार इसी प्रयास में रहते हैं कि यदि कहीं भी कोई किसी मुसीबत में हो उसकी मदद की जाये
समाचार वाचक राम अवतार जी , उन तीनों से पूछिये - दूसरी बार मिली राहत सामग्री पाकर बाढ़ पीड़ितों को कैसा महसूस हो रहा है
राम अवतार ( तीनों से ) - दुबारा राहत सामग्री मिलनें और स्वादिष्ट बिस्कुट खानें के बाद अब कैसा महसूस कर रहे हैं आप लोग ?
तीनों एक साथअपनें साथ जहर लेकर नहीं चले थे क्या ?
राम अवताक्यों ? जहर से क्या करना है , यहाँ तो चूहे भी नजर नहीं आ रहे । कहीं आप लोग सुसाईड यानि आत्महत्या के बारे में तो नहीं सोच रहे ?
तीनों - आपकी बातों को सुननें के बाद क्या कोई जिन्दा रहना चाहेगा ?
राम अवतार लेकिन आप लोग जहर खाकर ही क्यों मरना चाहते हैं ? बाढ़ का पानी तो?
तीनों - बात दरअसल ये है कि हम तीनों पानी में डूबकर नहीं मर सकते
राम अवतारक्यों ?
तीनों - क्योंकि हम तीनों को तैरना आता है
राम अवतार –  पानी में कूदनें के बाद  तैरनें का प्रयास मत करना , आसान है ना ?
तीनों- आप यहाँ करनें क्या आये हैं ?
राम अवतार- आपका इन्टरव्यू यानि हाल-चाल जाननें
तीनों - हाल-चाल मिला कि नहीं ? कुछ और नोचना बाकी रह गया है तो वह भी नोच लो ।
राम अवतार- ( समाचार वाचक से) - जैसा कि आप लोग देख रहे हैं , ये तीनों ही अपनें-अपनें परिवार को खोनें के बाद जीवन से निराश हो चुके हैं और यदि इनको अकेला छोड़ दिया गया तो ये लोग सुसाईड कर लेंगे
तीनों एक साथ – जी नहीं । हम लोग सुसाइड नहीं करेंगे, एकदम बेहया जान है हमारी - जल्दी नहीं निकलेगी हाँ , यदि आप जैसे 2-4 टी.वी. वाले और आ गये तो हमारी जान अपनें आप निकल जायेगी ।
राम अवतार ( तीनों से ) - हो सकता है आपकी जान बेहया ना हो लेकिन आप तीनों महान बेहया हैं - सोचिये , क्यों और किसके लिये जिन्दा रहना चाहते हैं, आप तीनों आप लोगों के लिये सबसे बेहतर यही होगा कि आप लोग जीवन का मोह त्याग दें , जोकि अब किसी काम का नहीं रह गया है । आप लोगों को शर्म आनी चाहिये कि जिसके माँ-बाप , पत्नी-बच्चे, सब पानी में डूबकर मर गये हों , वे अपनी जान बचाकर इस टीले पर चढ़ गये ताकि जिन्दा रह सकें । धिक्कार है आप तीनों के जीवन पर ।
तीनों एक साथ ( हाथ जोड़कर ) - आपनें सचमुच हमारी आँखे खोल दी हैं सच कहा है आपनें, हम लोग अब जीकर क्या करेंगे जो अपनें थे , वे सभी तो मर गये । लेकिन हम मरें तो मरें कैसे ?
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - देखा आपनें ये तीनों अपनें परिवार को खोनें के बाद अब जिन्दा ही नहीं रहना चाहते हैं । हमें इनके जज्बातों की कद्र करनी चाहिये वैसे भी अब बाढ़ का पानी काफी ऊपर तक चुका है तथा इस टीले को अपनें आगोश में लेनें ही वाला है हमारी नाव भी ऊपर चुकी है मैं अपनें टी.वी चैनल की तरफ से आखिरी बार फिर से राहत सामग्री का वितरण करनें जा रहा हूँ -( जेब से बिस्कुट निकाल कर , एक-एक बिस्कुट उन तीनों को देता है )
राम अवतार - देखिये अब हम अपनी नाव पर कूदनें वाले हैं , नाव चलानें वाले के अलावा इस नाव पर केवल दो ही लोग बैठ सकते हैं इन तीनों नें अपनें परिवाल वालों के पास जानें का फैसला कर लिया है - मैं और कैमरा मैन नाव पर कूदनें वाले हैं । आपको अपनें स्टूडियो वापस लिये चलते हैं
समाचार वाचक जैसा कि दर्शकों आपनें देखा, चकल्लसपुर में आई भयानक बाढ़ में हमारे टी.वी. चैनल नें बाढ़ पीड़ितों के बीच तीन बार राहत सामग्री का वितरण बिना किसी भेदभाव के किया जोकि अपनें आप में एक मिसाल है आईये अब आपको लेकर चलते हैं - अगले समाचार की ओर ---

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 रिकवरी आफ इंडिया   बनाम   डिस्कवरी आफ इंडिया   संसार के अधिकांश इतिहासकारों नें अपनें देश का इतिहास लिखते समय इस बात का ध्यान र...