शुक्रवार, 16 जून 2017

ऊपर वाले से शिकायत - एक पत्र



      परम आदरणीय प्रभू जी ,
              सादर चरण-स्पर्श,
                     मैं धरती पर जैसे तैसे रहते हुए आशा करता हूँ कि आप ऊपर से नीचे से बीच से जहाँ से भी हो, हम मानवों के हाल‌ात को देखकर मुस्कराते हुए मजे से होंगे । 
                    धरती पर आपनें जितनें  भी जीव बनाये हैं सबसे जटिल जीव आपनें मानव को बना दिया है । वह ज्यों-ज्यों विकास करता जा रहा है त्यों-त्यों जाहिल व जंगली होता जा रहा है । 
                   जैसा कि आपको मालूम ही होगा कि हम दिमागदार मानवों नें आपके अलग-अलग नाम दे रखे हैं और उन नामों के साथ अलग-अलग फिरके भी बना लिये हैं । एक फिरका मानता है कि आपनें धरती सबके लिये बनाई है । एक फिरका मानता है कि धरती आपनें केवल उसके फिरके के लिये बनाई है । उन्हीं फिरकों के चलते आज धरती युद्ध का मैदान बन गई है ।
                   कमाल तो ये है कि हर फिरके के अपनें नियम व कानून हैं और हर फिरका यह दावा करता है कि यह कानून आपनें उसे बनाकर दिया है । मेरी समझ में नहीं आता कि आपको हम मानवों के लिये तरह-तरह के कानून बनानें की क्या जरुरत थी । आपनें किसी जानवर या परिन्दे के लिये तो कोई कानून नहीं बनाया फिर हम इंसानों के लिये क्यों वैसी जहमत उठाई ।
                 हमें तो आपकी नियत पर ही शक होता है । आप किसी बच्चे की तरह से हम इंसानी खिलौनों से खेलकर मनोरंजन करते होंगे, आपका यह मनोरंजन अब हम इंसानो पर भारी पड़नें लगा है । हम इंसान ये मानते हैं कि आपनें हमें बुद्धि दिया है ताकि हम सही व गलत का फैसला खुद कर सकें । सच तो ये है कि हम खुद ही असमंसज में हैं कि क्या सही है व क्या गलत है । एक फिरका जिस काम को जन्नत जानें का रास्ता बतलाता है वहीं दूसरा फिरका उसी काम को जहन्नुम जानें का मार्ग बताता है ।
                     अब मैं कुछ भी लिखनें के लायक नहीं हूँ क्योंकि दूसरे फिरके वालों की आवाजें मुझे सुनाई पड़ रही हैं वे हमारे फिरके वालों के ईलाके में आ रहे हैं । बड़ी दहशत है ।
                                                                              आपका शुक्रगुजार

               

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