देखो खेदू , इतिहास में इस बात का जिक्र है कि सन् १८५७ ई० की क्रान्ति किस बात पर हुई और क्यों विफल रही । लेकिन दोनों के लिये इतिहासकारों द्वारा अधिकांश ऐसे कारण बताये गये जो कम से कम समझदार लोगों को हजम नहीं हो सकते । देश भक्ति से ज्यादा बढ़कर क्रान्ति का मूल कारण उस कारतूस के इस्तेमाल को बताया गया जिसमें चर्बी का प्रयोग होता था , इसके अतिरिक्त अन्य बहुत से बेतूके कारण भी बताये गये । अँग्रेजों के अत्याचार को इतिहासकारों नें बहुत सावधानी पूर्वक लिखा ताकि अँग्रेज बन्धु नाराज होकर उन्हें जेल में ना डाल दें । आजादी के बाद ब्रिटेन वालों का शासन खत्म हो गया किन्तु उनके अनुयायियों के हाथ में सत्ता हस्तान्तरित होनें से इतिहास ज्यों का त्यों रहा ।
लेकिन लल्लन भाई , तुम इस समय काहे , उस क्रान्ति को याद कर रहे हो ?
खेदूलाल , हमारा देश किस तरफ जा रहा है , यही सोच रहा था । जानते हो उस क्रान्ति को विफल करनें वाले अँग्रेज कतई नहीं हो सकते थे क्योंकि इतना बड़ा देश और मुट्ठी भर अँग्रेज कहाँ-कहाँ लड़नें जाते , हमारे देश के तलुवे चाटनें वालों गद्दारों नें ,अँग्रजों से ज्यादा मेहनत क्रान्ति को विफल करानें में की , १८५७ की क्रान्ति को क्रान्तिकारियों को समर्पित न करके , देश के गद्दारों को समर्पित करना चाहिये , जिनके सहयोग से देश-भक्तों की पराजय हुई ।
लेकिन लल्लन भाई , तुम इस समय काहे , उस क्रान्ति को याद कर रहे हो ?
खेदूलाल , हमारा देश किस तरफ जा रहा है , यही सोच रहा था । जानते हो उस क्रान्ति को विफल करनें वाले अँग्रेज कतई नहीं हो सकते थे क्योंकि इतना बड़ा देश और मुट्ठी भर अँग्रेज कहाँ-कहाँ लड़नें जाते , हमारे देश के तलुवे चाटनें वालों गद्दारों नें ,अँग्रजों से ज्यादा मेहनत क्रान्ति को विफल करानें में की , १८५७ की क्रान्ति को क्रान्तिकारियों को समर्पित न करके , देश के गद्दारों को समर्पित करना चाहिये , जिनके सहयोग से देश-भक्तों की पराजय हुई ।
लल्लन भाई तुम्हारा मतलब है , अन्ना जी का आन्दोलन भी -----।
देखो खेदू , ये आन्दोलन है और वो क्रान्ति थी , जिसे गदर भी कहा जाता है । तुम जानते हो , जिस पेड़ को उस समय का भयानक तूफान नहीं हिला सका था , उसे आज की हवा क्या हिलायेगी ।
मतलब ?
एकदम साफ है , आगे आनें वाली पीढ़ियाँ पढ़ेंगी , अन्ना के आन्दोलन के कारण और उस आन्दोलन की विफलता के कारण , जिसमें विफलता का केवल एक कारण लिखा होगा जन समर्थन का अभाव ।
देखो लल्लन भाई , जैसा तुम सोचते हो वैसा, आज देश के ज्यादातर लोग सोचते हैं , लेकिन -- ।
लेकिन क्या खेदू ?
तुम जैसे लोग हताश होकर सोचते हो लल्लन भाई , कोई ना कोई तो चाहिये अँधेरे में रोशनी दिखानें वाला ।
हम मानते हैं खेदू , लेकिन सोचो , १८५७ की क्रान्ति , सफल न होनें का क्या असर हुआ ?
यही ना कि हम लोग उसके बाद फिर , काफी दिन तक गुलाम रह गये ।
दिन ही नहीं खेदू लाल , कई दशक तक गुलाम रहे कहो । जोड़ो १८५७ से १९४७ तक कितनें साल हुए ?
पूरे ९० साल लल्लन भाई , सही कहे ।
और १९४७ से आज तक कितनें साल हुए बताओ ?
लल्लन भाई , काहे गणित सिखानें पर तुले हो ।
खेदू लाल , अगर अबकी अन्ना जी दुष्ट नेताओं के बहकावे में आये तो , फिर सन् २१०२ तक यही स्थिति रहेगी ।
लल्लन भाई देश की जनता जानती है कि अबकी अगर वह नहीं जागी तो फिर जगानें के लिये कोई नहीं आनें वाला ।
खेदू लाल , आनें वाली पीढ़ी के लोग इस आन्दोलन की असफलता के गलत कारणों को पढ़ेंगे तो कितना बुरा होगा ।
लल्लन भाई , आशावादी बनिये , समय आयेगा और हम होंगे कामयाब --- एक दिन ।
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देखो लल्लन भाई , जैसा तुम सोचते हो वैसा, आज देश के ज्यादातर लोग सोचते हैं , लेकिन -- ।
लेकिन क्या खेदू ?
तुम जैसे लोग हताश होकर सोचते हो लल्लन भाई , कोई ना कोई तो चाहिये अँधेरे में रोशनी दिखानें वाला ।
हम मानते हैं खेदू , लेकिन सोचो , १८५७ की क्रान्ति , सफल न होनें का क्या असर हुआ ?
यही ना कि हम लोग उसके बाद फिर , काफी दिन तक गुलाम रह गये ।
दिन ही नहीं खेदू लाल , कई दशक तक गुलाम रहे कहो । जोड़ो १८५७ से १९४७ तक कितनें साल हुए ?
पूरे ९० साल लल्लन भाई , सही कहे ।
और १९४७ से आज तक कितनें साल हुए बताओ ?
लल्लन भाई , काहे गणित सिखानें पर तुले हो ।
खेदू लाल , अगर अबकी अन्ना जी दुष्ट नेताओं के बहकावे में आये तो , फिर सन् २१०२ तक यही स्थिति रहेगी ।
लल्लन भाई देश की जनता जानती है कि अबकी अगर वह नहीं जागी तो फिर जगानें के लिये कोई नहीं आनें वाला ।
खेदू लाल , आनें वाली पीढ़ी के लोग इस आन्दोलन की असफलता के गलत कारणों को पढ़ेंगे तो कितना बुरा होगा ।
लल्लन भाई , आशावादी बनिये , समय आयेगा और हम होंगे कामयाब --- एक दिन ।
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