बुधवार, 4 जुलाई 2012

गाँधीजी के बन्दर जी -- भेंट वार्ता .







आइये , बन्दर जी , आप लोगों का स्वागत है , बैठिये ।
धन्यवाद ।
आप तीनों मे से कौन बोला ?
ये तीनों नहीं , मैं बोल रहा हूँ , मुझे मदारी कह सकते हो ।
तुम क्यों आये ?
मैं ही इन्हें दाना पानी देता हूँ । पिछले ६०-६२ साल से ।
लेकिन मुझे तो इन लोगों से बात करनी थी ।
ये तीनों ठीक से बोलने लायक नहीं रह गये हैं , जो ये कहना चाहेंगे , मैं कह दूँगा ।
तुम्हे मालूम है , ये तीनो लोग कौन हैं ? इन्हें साधारण बन्दर मत समझना ।
खूब अच्छे से जानता हूँ । इनके असर से ही देश में , लोगों ने देखना , सुनना और कहना सब बन्द कर दिया है ।
कैसी बात करते हो , बन्दर की बात भी कभी , इन्सान मानता है ?
मेरा मदारी सच कह रहा है , भाई ।
अब कौन बोला मदारी जी ?
वही जो केवल आँख बन्द किये है ।
बकिया क्या नहीं बोलते मदारी जी ?
जबसे मेरे साथ हैं तबसे तो बोलते नहीं सुना , केवल बन्द आँख वाला ही बोलता है कभी-कभी ।
मेरे आलावा ये दोनों कभी बोले ही नहीं तो सुनोगे कैसे ?
ये दोनों बोल नहीं पाते हैं ,क्या , मदारी जी ?
साहब , देखते नहीं पहला बन्दर अपना कान बन्द किये है , वह कुछ सुनता ही नहीं, तो बोलेगा क्या ।
इस बन्दर का प्रभाव तो पूरे देश में है मदारी जी , देश के नेता हों या अधिकारी , सभी इसके अनुयायी हैं ।
हाँ साहब , सब देखता समझता है लेकिन फिर भी हमेशा स्माईलिंग फेस बनाये रखता है , मोहन बाबू जैसा ।
कौन , मोहन दास करम चन्द गाँधी जी , हमारे बापू जी ?
नहीं साहब , अपनें मनमोहन जी का बात कर रहा हूँ ।
बड़े समझदार लगते हो , मदारी जी । 
हाँ साहब , दूसरा वाला बन्दर जो मुँह बन्द किये है , देखता , सुनता सब है लेकिन बोलता नहीं ।
इसका भी जबरदस्त क्रेज है हमारे देश में , सभी इसके परम् भक्त हो गये हैं ।
मैं एक बात बोलूँ ।
कौन बोला ।
मैं ,तीसरा बन्दर हूँ  मुझेबोलने वाला बन्दर कह सकते हो, मैं सुन भी सकता हूँ ,लेकिन बापू आँख बन्द कर दिये हैं ।
हाँ बोलिये, आप क्या कहना चाहते हैं ?
देखिये , बापू हमारे माध्यम से लोगों को कुछ मैसेज देना चाहते थे , लेकिन वह मैसेज ही बदल गया है ।
देखियेर बन्दर जी , आपका क्रेज भी कम नहीं है , देश में सभी आप तीनों की ही नकल कर रहे हैं ।
हम सोचते थे कि बापू के स्वर्गीय होनें के बाद - लोग हमें पकड़ कर जंगल में भेजवा देंगे ।
नहीं-नहींं , ऐसा कैसे होता , आप तीनों ही देश के वास्तविक प्रतीक हैं ।
मैं देखता नहीं , लेकिन सुनता सब हूँ , बापू की बात माननें वाले कहीं सुनायी नहीं पड़ते ।
आप देखनें वाले बन्दर से पूछिये , वे बता देंगे कि बापू का कितना सम्मान होता है , २ अक्टूबर को ।
देखनें वाले बन्दर की बात मत कीजिये , सब देखकर अकेले-अकेले आनन्द उठाता है ।
फिर भी पूछ कर तो देखिये ।
हद करते हैं ,कैसे पूछें , देखनें वाला बन्दर मुँह बन्द किये है , बोलेगा नहीं ,दूसरा कान बन्द किये है , सुनेगा नहीं ।
आप एक काम करिये बन्दर जी , चुपके से आँख खोल कर सब नजारा देख कर फिर आँख बन्द कर लीजियेगा ।
साहब आप ठीक नहीं कर रहे हैं , बन्दर जी को इंसानों जैसा बेईमानी का पाठ सिखा रहें हैं । 
मदारी जी , आप ख्वामख्वाह नाराज हो रहें , इसे बेईमानी नहीं होशियारी और समझदारी कहते हैं ।
देखिये साहब , अगर बन्दर भी बेईमान होनें लगेंगे तो , गाँधी जी की आत्मा को दुःख होगा ।
मदारी जी , गाँधी जी के चेलों को उनकी फिक्र नहीं है , फिर बन्दर जी को क्यों हो , क्यों बन्दर जी ?
लेकिन मैं अपनी आँखें खोलकर अब क्या करुँगा , वृद्ध भी हो चला हूँ ।
बन्दर जी कहाँ हैं आप , पूरे देश में नये किस्म के बन्दरों का राज है , हर जगह , आँख खोल कर देखियेगा ।
दूसरे किस्म के बन्दर ?  भाई , हम तीनों तो ब्रह्मचारी रहे हैं , वे हमारी सन्तान नहीं हो सकते ।
हम आप पर चरित्र-हीनता का आरोप नहीं लगा रहे बन्दर जी ।
फिर भी यदि शक हो तो हमारा डी एन टेस्ट करवा सकते हैं , जैसे एन डी का हुआ ।
आपनें कैसे जाना उन्हें ? आपकी तो आँख बन्द रही है , जमानें से ।
को नहीं जानत है जग में -------। लोग उनके बारे में चटकारे ले लेकर बात करते हैं , मेरा कान खुला है भाई ।
बन्दर जी , बुरा ना मानें तो , एक बात कहें , क्यों कि आपका मदारी अभी बाहर बीड़ी पीनें गया है ।
बोलिये ।
मदारी जो आप को लिये-लिये घूमता है ना , वह आपके स्टेन्डर्ड का नहीं लगता ।
क्या मतलब ?
सुनिये ,देश में तरह-तरह के मदारी हो गये हैं वे अपनें बन्दरों से करतब कराते हैं और फिर दोनों शान से रहते हैं ।
कैसे करतब ? क्या करतब दिखाते हैं ?
कुछ नहीं , बस छलाँग लगाकर-लगाकर जहाँ मौका मिला माल उड़ाया और मदारी को दे दिया ।
लेकिन बन्दरों को तो केवल गाली मिलती होगी ।
छोड़िये , गाली की चिन्ता , आँखे खोलिये , चलते हैं एक बड़े मदारी के पास ।
इन दोनों बन्दरों का क्या होगा ?
छोड़िये केवल अपनें बारे में सोचिये ,जो इनकी किस्मत में ऐसे हा पड़ा रहना लिखा है । जल्दी आँखें खोलिये ।
वाह , क्या दुनिया है , कमाल की , बताइये , बेवकूफों जैसा मैनें आँखें बन्द किये ६०-६५ साल बिता दिये ।
अब कैसा महसूस हो रहा है ।
वाह -वाह कुछ पूछिये मत , जब आँख बन्द किया था तो सब ब्लैक एन्ड व्हाईट था , और अब एकदम रंगीन ।
अब आपका क्या प्रोग्राम है , कुछ बताइयेगा ?
मैं  बता रहा हूँ  ---
              " हमनें जीवन के बहुमूल्य क्षण , बापू के चक्कर मे बर्बाद किये हैं , भारत वासियों के मन में गाँधी जी से ज्यादा श्रद्धा बन्दरों और उनके मदारियों के प्रति है । यहाँ , हम बुजुर्ग बन्दरों  के आदर्श श्री एन डी तिवारी जी एवं  मार्ग दर्शक मनु सिन्धवी साहब हैं । इनके अलावा , कपि-श्रेष्ठ कपिल जी , दिग्भ्रमित से दिग्गी राजा , कलंकी कलमाडी जी और बिना मुकुट वाला राजा है , बिना इनके दर्शन के मेरा जीवन कितना सूना -सूना था ।
                        चलिये ना, किसी मदारी के यहाँ , बर्दाश्त नहीं हो रहा है , चलिये --- ना -- ।

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