शुक्रवार, 1 जून 2012

कलयुग के हनुमान जी --- (अ)पूजनीय ।

अरे , कहाँ घुसे जाये रहें हैं ?
चुप रहो । यहाँ भी मिल गये तुम ?
का हुआ बड़े डरे हुए हैं ?
क्या करें , वे लोग रोज कोई ना कोई गड़बड़ी ढूंढ़ कर हंगामा खड़ा किये रहते हैं ।
कौन लोग ?
कितनी बार पूछोगे ,कौन लोग ।
हाँ , समझ गया , उस केजरीवाल का नाम , जहरीला सवाल होना चाहिये था , है न  ?
पता नहीं क्यों वह मेरी मजबूरी नहीं समझता ।
लेकिन आप जवाब भी तो ठीक से नहीं देते हैं ।
रोज -रोज इतना सवाल किसी से पूछा जायेगा तो तुरन्त उत्तर कैसे मिलेगा ?
आप कागज पर सवाल  लिखकर देनें के लिये ,अनुरोध क्यों नहीं करते हैं ?
उत्तर पूछकर लिखवानें में समय भी तो लगेगा ।
किससे पूछकर लिखवायेंगे ?
जिसको उत्तर पता होगा , उसी से और क्या ।
वे लोग आप के सहयोगियों के घोटाला के बारे में आपसे जानना चाहते हैं ।
देखो , मुझे ,सच बताओ , मेरे जितनें बुजुर्ग को  कोई घर का मुखिया बनाता  है  ?
मतलब ? जरा खुल कर बताइये न ।
अब तुम्हीं बताओ जो व्यक्ति घर का मुखिया बननें के योग्य न हो , वह देश  का  -----?
सही कह रहे हैं इस बात पर तो कोई गौर ही नहीं कर रहा है , कि आप सन्यास आश्रम ----?
हाँ तो बात सवालों की हो रही थी । घोटाला कोई करे , क्या हम जिम्मेदार हैं ?
आप ही तो देश के ------- हैं तब जिम्मेदारी भी तो आपकी ही बनती है ।
देखो , सच बतायें , मुझसे , जो जो करनें को कहा जाता है मै कर देता हूँ।
कौन कहता है आप को उल्टा -सीधा काम करनें को ।
मुझे तो बाद में पता चलता है कि , गलत काम हो गया ।
ऐसा है तो आप अपनीं कुर्सी काहें नहीं छोड़ देते ?
दूसरा कोई योग्य मिले तब ना ।
आप जैसा योग्य , देश में और कोई नहीं है क्या ?
है , लेकिन विश्वास-पात्र कोई नहीं है ।
किसका , देश का या उनका ?
तुम जिसका समझो ।
काहे , दादा हैं , चिदम्बरम् हैं , सलमान हैं , और भी हैं क्या वे सब विश्वास पात्र नहीं हैं ?
विश्वास पात्र भी हो सकते हैं लेकिन ---- ।
लेकिन ---- क्या ?
उनमें अविरल भक्ति का अभाव है , मैं सदैव निस्वार्थ रहता हूँ , उनका भरोसा --- नहीं है ।
अभी भी आप कहीं खोये हुए हैं , कोई मंत्र जप रहे हैं क्या ?
मैं मन ही मन उनका स्मरण करता हूँ  जैसे हनुमान जी , अपनें प्रभु का ।
धन्य है आपकी भक्ति -
                 " उनको नहीं , आपको मेरा शत् - शत् प्रणाम है ।"
                 



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