हाँ हमारे सेना के जवानों नें दिन रात बचाव का कार्य किया ।
जी सुना और देखा भी ।
सेना के जावानों नें पहले भी कई बार , इससे भी ज्यादा मेहनत की है और जिन्दगी भी बचाई है ।
ये बोरवेल खुले क्यों छोड़े जाते हैं । इन्हें बन्द क्यों नहीं किया जाता ?
अगर खुले नहीं छोड़े जायेंगे तो , आप जिन्दगी और मौत के संघर्ष का आँखों देखा हाल कैसे देखेंगे ।
भाड़ में गया आप का ऐसा आँखों देखा हाल , ना जानें कितनी जिन्दगी ले ली है , इन बोरवेलों नें ।
उसके लिये जिम्मेदार जो होगा , उसे सख्त सजा मिलेगी ।
सजा छोड़िये , कोई उसका दोषी मिलेगा ही नहीं , जैसे तमाम घटनाओं में नहीं मिलते हैं ।
इस प्रकार क्यों अपना धैर्य खो रहे हो ।
हम तो जनता हैं , सोचते हैं कि , इस तरह के कार्य में कितना खर्च आता होगा ।
जिन्दगी , पैसे से ज्यादा अनमोल है , समझे ।
जितना खर्च बचाव के कार्य में होता है उससे कम खर्च में सारे बोरवेल बन्द किये जा सकते हैं ।
ये तुम्हें ही नहीं , पूरे देश को मालूम है ।
तब भी किसी की जिन्दगी को इस तरह से खतरे में डालना और फिर , ये बचाव का कार्य ?
इसे ही जिन्दगी का रोमांच कहते हैं ।
तो आप क्यों नहीं किसी बोरवेल की सैर करते, रोमांच के लिये ।
माही के घर जानें की सोच रहा हूँ ।
सारे बोरवेलों को बन्द करनें का आदेश क्यों नहीं कर देते ?
आदेश तो है ।
हो सकता है , कागज पर वह ढक गया हो और , उसका पैसा भी , सरकार के खाते से निकल गया हो ।
कुछ कह नहीं सकता ।
कहेंगे क्या , कहीं खुला गढ्ढा , कहीं बोरवेल , कहीं आतंकवादी , कहीं ---------।
यानि थ्रिल और रोमांच जिसे पूरे देश कि जनता श्वाँस रोक कर देखती है , फिर न हो , यही चाहते हो ?
सच तो ये है कि , आप लोगों की कृपा से देश में हर वक्त रोमांच और थ्रिल का माहौल बना रहता है ।
देखो , हमारा देश अपनें में मगन रहता है , देश में क्या हो रहा है , कुछ को छोड़कर , किसी से कोई मतलब नहीं ।
इसी का फायदा आप जैसे लोगों को मिल रहा है ।
वो तो मिलता ही रहेगा , और तुम जैसे लोग चिढ़ते , जलते रहोगे , बोलकर थक जाओगे, और भूल जाओगे ।
और फिर कोई माही गिरेगी , किसी बोरवेल में ?
नियति को कोई कैसे बदल सकता है । हम तो ----- ।
सच कहा यही नियति है हम भारत वासियों की ।
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