सोमवार, 25 जून 2012

स्वागतम् - अभिनन्दनम् -- ।




आज बहुत क्रोध में लग रहे हैं ?
हद हो गई है जिसको देखो वही , राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री पर ऊँगली उठा रहा है ।
वैसे लोगों को ऊपर ही उठवा देते तो ठीक रहता । इसके लिये कसाब और अबु जिन्दाल का सहयोग ले लेते ।
मजाक उड़ाते हो , जनता किस कदर गन्दे-गन्दे शब्द हमारे लिये प्रयोग करती , शर्म होनी चाहिये ।
आपके कन्धे पर बन्दूक रख कर लोग देश को लूट कर धन विदेश में भेज रहे हैं और जनता , बोले भी नहीं ?
जनता को तुम जैसे कुछ लोग हम लोगों के खिलाफ हमेशा बरगलाते रहते हो ।
ठीक है हम लोगों को बरगलाते रहते हैं , और आप लोग जनता को राहत पहुँचा रहे हैं , क्यों ? 
हम कोशिश तो करते हैं लेकिन पता नहीं क्यों फिर भी लोग चिल्लाते हैं । खास तौर पर अन्ना की टीम वाले ।
क्यों , वे जिन लोगों की काली करतूतों के बारे में कहते हैं , सब गलत है क्या ?
मुझे क्या पता भाई कि कौन-कौन काली करतूत कर रहा है ।
जब आपको किसी के कारनामों के बारे नहीं मालूम रहता तो फिर क्यों उसके पक्ष में स्टेटमेंट दे देते हैं ।
मुझे नहीं पता रहता है , भाई । लिखा हुआ , कागज मैडम के यहाँ से आता है , मैं पढ़ देता हूँ , बस ।
जब आप कुछ जानते ही नहीं तो , क्यों चार्ली चैपलीन स्टाईल का पोज देते रहते हैं बीच-बीच में ?
तुम जैसे लोग कहीं मुझे प्राण विहीन न घोषित कर दो , इसलिये बोलना पड़ता है कि लोग जीवित समझें ।
अफजल , कसाब आदि कब तक देश का माल हराम में खाते रहेंगे ?

मुझे नहीं पता है । लेकिन इन लोगों के लिये सम्मान जनक भाषा का प्रयोग तो कर ही सकते हो ।
हाँ तो श्री अफजल गुरु जी को और श्री कसाब जी को कब तक सम्मान दिया जायेगा ।
हम अपनें मेहमानों से ये सवाल भला कैसे कर सकते हैं ? देश वैसे-वैसे हजारों को कई साल तक खिला सकता है ।
देश का धन लूटनें या घोटाला करनें वालों को भी देश द्रोही मानकर सजा दी जाये , इस पर आप क्या कहेंगे ?
तुम क्या चाहते हो संसद में हमारा बहुमत खत्म हो जाये ?
ये क्या बोल गये आप ?
मैं कुछ बोला क्या ?
अभी आप कहे कि यदि घोटाले बाजों को सजा हुई तो संसद में आपका बहुमत खत्म हो जायेगा ।
मैं भला ऐसा कैसे कह सकता हूँ , तुम मेरी बात को , गलत ढंग से जनता के सामनें रख रहे हो ।


देश का धन लूटनें वालों को , घोटालेबाजों को यदि देश-द्रोह के अपराध में फाँसी की सजा दी जाये तब ?
एकदम गलत ,  हम अहिंसा के पुजारी हैं , अपराध से घृणा करो , अपराधी से नहीं , समझे ।
तब सारे हत्यारों को काहे नहीं छोड़ देते ? बाईज्जत बरी करवा के ।
क्यों देख नहीं रहे कसाब जी और अफजल जी कितनें साल से जेल में है , लोग फाँसी-फाँसी चिल्लाते हैं , झूठ मूठ ।
यानि आप लोग मन बना लिये हैं कि , वे लोग आराम से रहते हुए देश वालों को मुँह चिढ़ायें ।

पहले देश में चुनाव होना बन्द होगा तब किसी की फाँसी के बारे में विचार हो सकता है ।
मतलब ? अब देश में किसी भी आतंकवादी को फाँसी नहीं होगी ?
कहा ना , वोट -- वोट -- कुर्सी -- कुर्सी -- सत्ता -- सत्ता -- , लोकतंत्र में यही महत्वपूर्ण है ।
संसद पर हमला , देश की अस्मिता पर हमला था , कुछ समझते क्यों नहीं , आप भरतीय नहीं हैं क्या ?
तुम सब जानते हुए क्यों अपना ब्लड प्रेशर बढ़ानें के लिये यह सवाल पूछते हो ? हम भी किसी की कृपा पर हैं भाई ।
बहुत अच्छा , आतंकवादी बन्धुओं हमारे देश को लूटिये , बर्बाद कीजिये , हमें कोई शिकायत नहीं होगी क्योंकि :--
         "  हम अपराध से घृणा करते हैं अपराधी से नहीं , कोई आतंकवादी यदि छिपनें की जगह ढूंढ रहा हो तो हम उसकी  मदद करनें को तैयार हैं । आतंक फैलानें का सामान  यदि लानें में दिक्कत हो रही हो तो  हम उसे उपलब्ध करानें की कोशिश करेंगे लेकिन बाद में हम समझायेंगे  कि आप  गलत कर रहे हैं , और आप से सख्ती के साथ  पेश आया जायेगा , लेकिन डरनें की जरुरत नहीं है क्योंकि हम आपको  अपना भूला हुआ मेहमान समझते हैं । 
             देश का धन जिस भावना से विदेशों  में जमा करते हैं , वह भावना है वसुधैव कुटुम्बकम् की । एक सिद्धान्त हम भारतीयों को अपनाना चाहिये कि यदि कोई २५ हजार करोड़ रुपये का घोटाला कर रहा हो तो , यदि संभव हो तो उसकी मदद करनी चाहिये ताकि वह २५ लाख करोड़ का घोटाला  कर सके । हम जनता मूर्ख हैं , और मूर्ख के पास धन शोभा नहीं देता । 
           आइये देश को लूटनें और आतंक फैलानें का सुनहरा अवसर कहीं छूट न जाये, आशा है आप हम भारतीयों का सब कुछ लूटनें और आतंक फैलानें जरुर आयेंगे । आपका अभिनन्दन व स्वागत है ।"
                                                 जय हिन्द ------ ।
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
 



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

 रिकवरी आफ इंडिया   बनाम   डिस्कवरी आफ इंडिया   संसार के अधिकांश इतिहासकारों नें अपनें देश का इतिहास लिखते समय इस बात का ध्यान र...