बुधवार, 20 जून 2012

मरनें पर भी चैन नहीं -- ।



परनाम बाबा ।
कौन ?
नहीं पहचानें ?
ना ।
अरे बाबा हम हैं चम्पारन वाले पंडित जी ।
यहाँ क्या कर रहे हो ?
का बाबा इहाँ रहे के अधिकार , केवल आपै को है का ?
मेरा मतलब यह नहीं है ।
तब ?
मेरा मतलब था तुम भी यहाँ आ गये ।
ए बाबा इहाँ तो सबै का आना है , कोई को नीचे वाले नरक में , कोई को इधर ,ऊपर ।
देखो मैं थोड़ा शान्ति चाहता हूँ ।
बाबा  आपको अशान्त करनें नहीं , हम तो उनके खोजते हुए इधर आ गये ।
किसको ?
वही -- जिनके हाथे , आप देश का भविष्य छोड़े रहे ।
कौन भाई ?
 वही ..... जिनके कपड़ा धोवे खातिर देश में कउनों धोबिये नै मिलत रहा ।
... ....  उनको यहाँ नहीं ढूंढ़ पाओगे ।
कहाँ मिलिहें ?
वे नीचे वाले हिस्से में होंगे ।
बाबा ,उ तो नरक वाला हिस्सा है ।
कुछ लोग वहाँ भी स्वर्ग ऐसी व्यवस्था बना लेनें में माहिर होते हैं ।
बाबा आप अइसा काहे बोल रहे हैं ।
मैं अनुमान लगाकर बोल रहा हूँ ।
आप हमेशा अनुमानै लगाते रहे बाबा , सुना है देश रसातल में जाय रहा है ।
तो मैं क्या करूँ ?
पहले भी क्या कर लेते बाबा , सब लोग आपै को दोषी मानते हैं कि .....
जब मैं धरती पर था , वो मुझे .. 
काहे खामोश हो गये बाबा ?
जानें दो मैं नहीं चाहता कि यहाँ की बात और कहीं जाये ... और ..
बाबा इहाँ रहते हुए भी , डर ?
मुझे उनका डर नहीं है।
के के डर बाबा ?
मैं उनका नाम नहीं ले सकता ।
इसका मतलब बाबा डर इहाँ भी अभी बाकी हैं ।
तुम बहुत बोलते हो ।
.. ए बाबा का हुआ ...  काहें लुका रहे हैं , --त सिं-- हैं का बाबा ।
चु... ..
-- इ बात है बाबा , आप तो कहे रहे कि नीचे वाले में होंइयें , लेकिन इ तो अँग्रेजवन के साथ
        हँसत भये इधरै आ रहें हैं , आप के ओर तो उ तकते नहीं हैं तबौ आपके हालत खराब हुई
        जा रही है ।
देखो मेरा पीछा छोड़ो , मैं जा रहा हूँ भजन करनें ।
अब भजन करै से का होई बाबा सब तो नाश हुआ जा रहा है , और -
               जानत हैं , सब जगहआफिसन मेंआप के फोटो लगावे और मैदान में  मूर्ति लगाये के प्रचलन चला रहा , लेकिन अब उ फोटो सब चिथड़ा  होकर लटक रहा है , और मैदान नशेड़ियों के काम आता है , नये लोग बतावत हैं ।
भाई बहुत हो गया , अब मैं जा रहा हूँ ।
बाबा , एक सवाल का जवाब दे दीजिये , ओकरे बाद उनहूँ के परनाम करे जाना है ।
चलो जल्दी से पूछो ।
बाबा , सुना है जब आपका देश आजाद भवा (?????) तब आप  कलकत्ता में रहे , दिल्ली में आजादी के जश्न काहे नहीं मनाये ?
तुम्हारे जाननें से भी अब कोई फायदा नहीं होगा ।
बाबा , उनसे मिलनें को जी करता है कि ना इहाँ , मिलना चाहते हैं फिर से ... ?
तुमनें एक ही प्रश्न का उत्तर माँगा था .....
                   हे राम ------  हे राम ---- । 
----------------------------------------------------------------------------------------------------------- 




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

 रिकवरी आफ इंडिया   बनाम   डिस्कवरी आफ इंडिया   संसार के अधिकांश इतिहासकारों नें अपनें देश का इतिहास लिखते समय इस बात का ध्यान र...