सोमवार, 18 जून 2012

कैसी खामोशी , कुछ कहिये ।

आप देश में नहीं हैं , आपकी कमी बहुत लोगों को खल रही है ।
खास तौर पर हमारे जैसे आपके शुभचिन्तकों को ।
प्रणव दादा को सभी लोग अभी से राष्ट्रपति माननें लगे हैं , और देश उनसे कुछ अपेक्षा भी कर रहा है ।
लोगों के मन में सवाल उठता है कि , क्यों नहीं अपनें देश के मुखिया को चुननें का अवसर जनता को दिया जाता ।
आप की राय अलग हो सकती है , क्योंकि यदि जनता को सीधे चुनना हो तो , शायद , आप को भी देश की ( या किसी और की ) सेवा का अवसर नहीं मिलता ।
                कलाम साहब की बात करते हैं । इसमें दो राय नहीं कि कलाम साहब को चाहनें वाले प्रणव दादा से ज्यादा होंगे , लेकिन , गणित के हिसाब से वे बहुत पीछे हो जाते हैं ।
                कलाम साहब की इज्जत देश में बगैर राष्ट्रपति भी बहुत ज्यादा है , यदि शक हो तो जनमत करा लें ।
लेकिन हमारे देश में राजनीतिज्ञों द्वारा जन भावना का कितना ख्याल रखा जाता है , आप से ज्यादा कौन जानता है ।
सच बताइये , देश की समस्याओं से आप कितना अवगत हैं । इस मामले में लोग आपको शून्य अंक देते हैं ।
             " ऊपर से तो हमारा देश , विकास करता नजर आता है , लेकिन विकास का फल , राजा , कलमाडी और ना जानें कितनें ऐसे ही घोटाले बाज लोग खा जा रहें हैं , देश की आधी से ज्यादा आबादी पेट भर खाना नहीं खा पाती आप तो सब जानते हैं । भीतर ही भीतर देश को खोखला करनें वालों का पूरा गुट है जिसकी जानकारी तमाम लोगों को है , फिर भी आप देश हित की जगह , उनके पोषण और संरक्षण का कार्य अनजानें में किये जा रहें हैं ।
           क्या आपको एहसास है , कि आम जनता किस कदर मँहगाई से त्रस्त है और कुछ लोग केवल देश का धन लूटनें और विदेशों में जमा करनें का कार्य कर रहें हैं ।
          नाराज ना होइयेगा , एक बात कहें , विदेशों में जो धन भारतीयों का जमा है ना उसमें उनका (?) धन भी है ,
आप कहियेगा हमें नहीं मालूम है तो , कोई विश्वास नहीं करेगा ।
           हमें मालूम है कि आपको अकेले में ग्लानि महसूस होती है , कि मैं कुछ कह क्यों नहीं पाता , इसमें आपकी कोई गलती नहीं है , क्योंकि देश में राहु काल चल रहा है , भले ही ज्योतिषि लोग मुझसे सहमत न हो । राहु काल में बुद्धि का भ्रष्ट हो जाना नयी बात नहीं है । देश की जनता पर भी उसका असर है , नहीं तो , सारे नेतागण जो भ्रष्टाचार या करोड़ों अरबों रुपये के घोटाले में लिप्त पाये गये , या जेल गये , बतौर सांसद , इज्जत पा रहें हैं , उनपर देश द्रोह का मुकदमा चलानें की माँग उठनी चाहिये थी , और फिर फाँसी की माँग करनी चाहिये , ताकि हमारी भारत माता को फिर लूटनें का साहस कोई न करे , और विश्व में हमारी गणना भ्रष्ट राष्ट्र के रुप में न हो सके ।
           क्योंकि आँकड़ों के अनुसार अभी आप संसार के काफी भ्रष्ट देश के प्रधानमंत्री हैं । इस कलंक को मिटाना है और उस परम्परा को कायम रखना है जिसको हमारे सिख गुरुओं नें कायम रखा ।
                              जय भारत माता - ---   वन्दे मातरम् --- वन्दे मातरम्  ।


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