सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

दिग्गी राजा को मंत्री क्यों नहीं बनाया ?


         जहाँ तक वफादारी की बात है तो मनीष तिवारी से कम तो नहीं थे अपनें दिग्गी राजा , फिर एक को बनाया दूसरे को क्यों छोड़ा , यह हम देश वासी नहीं समझ पा रहे हैं । कहा जाता है कि सलमान भाई नें भ्रष्टाचार के दलदल में सपरिवार गोता लगाकर मात्र ७१ लाख रुपये ही निकाले , एक मंत्री जी नें उनके नौसिखियापन पर कमेन्ट भी किया कि यदि सलमान खुर्शीद असल गोता-बाज या खिलाड़ी होते तो कम से कम ७१ करोड़ रुपये जरुर निकाले होते , यही नहीं  उनकी अक्षमता पर देश भर में हो हल्ला हुआ तो मैडम नें ड्यूटी बदल दी , कि शायद विदेशी सम्पर्क में उनकी क्षमता और गुणवत्ता में वृद्धि हो सके । 
        आखिर दिग्गी राजा का दोष क्या है ? जहाँ तक अनर्गल शब्द बोलनें की बात है तो दिग्गी राजा नें यदि गाली भी दी तो शालीनता के साथ , जबकि मनीष तिवारी , अन्ना को "तुम" और अन्य गन्दे शब्दों के साथ सम्बोधन करते रहे ।
         हमें दिग्गी राजा के साथ-साथ लालू जी के साथ भी पूरी सहानूभूति है । लालू जी का राजनीतिक जन्म ही काँग्रेस विरोध के साथ हुआ था , जय प्रकाश जी के आन्दोलन में उनकी सहभागिता के किस्से हमनें सुनें हैं । जिस आदमी नें अपनें सारे सिद्धान्तों को ठुकरा कर काँग्रेस के दामन को पकड़ा और काँग्रेस पर छोटी कंकड़ फेंकनें वाले पर बड़ा सा पत्थर फेंकनें को तैयार रहनें वाले शख्स को मैडम सोनिया नें क्यों नजर अन्दाज किया समझ में नहीं आता । काँग्रेस या मैडम सोनिया को क्या उनकी विश्वसनीयता पर संदेह है या वे जानती हैं के ये सब तराजू पर रखे जानें मेढक हैं जो कभी स्थिर नहीं रह सकते या वे इन लोगों को विवाह के पूर्व का कालिदास समझती हैं  कि ये लोग जिस डाल पर बैठेंगे उसी को काटेंगे ।
         मेरी राय तो मेरे घर के छोटे बच्चे तक नहीं मानते , फिर भी मैं राय देता हूँ कि सब्र कीजिये , सब्र का फल मीठा होता है । वह दिन जरुर आयेगा जब लालू जी और दिग्गी राजा अपनें-अपनें राज्य के मुखिया होंगे । मंत्री पद का क्या , आज है कल छीन जायेगा और किसी की भीख से कोई मंत्री-पद मिल भी जाये तो क्या होगा , कोई काम रुकनें वाला है आप लोगों का , कोई कितना भी बड़ा मंत्री बनें , सबकी गति मैडम सोनिया के सामनें एक जैसी ही होती है । इसलिये हताश या परेशान होनें की जरुरत नहीं है , मैडम सोनिया की भक्ति में लीन रहिये शायद उनकी कृपा की एक नजर पड़ ही जाये । 
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