रविवार, 21 अक्टूबर 2012

रावण के पुतले का दहन --- ।


            विजय दशमी करीब है , फिर से रावण के पुतले जगह-जगह पर जलाये जायेंगे । बुराई पर अच्छाई की जीत पर प्रवचन होंगे , फिर साल के ३६४ दिन रावण का भूत हावी होगा और साल भर बुराई ही बुराई नजर आयेगी । रावण के पुतले को जला देने से काम नहीं चलनें वाला , रावण को अपनें अन्दर से निकालनें की कोशिश होनी चाहिये । रावण लंका का राजा था , उसके भीतर दस महा-बलवानों की ताकत थी , दस महा-विद्वानों जितना ज्ञान था , यानि हर चीज वह दसगुना था । लेकिन यदि आज रावण जिन्दा होता तो निश्चित रुप से उसका सारा धमण्ड चूर हो जाता जब वह देखता कि एक बिना पढ़ा-लिखा नेता भी उससे सौगुना ज्यादा विद्वान है , और मक्कारी में भी  रावण जी उनसे सौगुना पीछे होते । 
           मैं दशानन रावण को चुनौती देता हूँ कि यदि उसमें या उसकी आत्मा में इतनी ताकत है तो वह हमारे देश में आकर देख ले , एक गली का नेता भी उसे किसी भी फील्ड में मात देनें के लिये तैयार है । एक रावण को मारनें के लिये , प्रभू को कितनी माया फैलानी पड़ी । आज कितनें भी प्रभू अवतरित हो जायें , आज के रावणों को मारा नहीं जा सकता , क्योंकि आज के विभीषण भगवान श्रीराम के साथ नहीं बल्कि कलयुगी रावण के साथ हैं और वे भगवान श्रीराम को परास्त करनें के तरीके खोज रहे हैं । कलयुगी हनुमान बिना फायदे के अब भगवान के साथ रहनें वाले नहीं हैं । कलयुगी लक्ष्मण , अब तमाशबीन ही बने रहना चाहते हैं ।
            प्रभू आपनें गीता में आश्वसन दिया है कि जब जब धर्म की हानि होगी मैं अवतरित होऊँगा । हम भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम लोग जो आप पर यकीन करते हैं , आपकी राह तक रहे हैं । हम सभी आश्वस्त हैं कि कुछ दिन में आप अवश्य अवतार लेंगे , क्योंकि अब धर्म की हानि ही नहीं , बल्कि वह विलुप्त होनें के कगार पर है । यदि आपनें और विलम्ब किया तो , हम यही मानकर चलेंगे कि यह भी आपकी ही इच्छा है कि देश में दुनिया में अधर्म और पाप का विस्तार हो । सारे देश और सारी दुनिया पर शैतानों का कब्जा हो जाये । 
            प्रभू जी , जब आप अवतार लेनें की सोचना तो , कुछ ऐसी व्यवस्था करना , ताकि लोगों को विश्वास हो जाये कि आप अवतरित होनें वाले हैं , क्योंकि बिना पूर्व सूचना के यदि आप आये तो आपसे इतनें किस्म के सवाल पूछे जायेंगे कि आप सोचनें पर मजबूर हो जायेंगे कि कहीं गलत समय पर अवतार तो नहीं ले लिया  , इसका समाधान मैं आपको सूझा सकता हूँ , वह यह कि आप केवल मुझमें ही ऐसी समझ और बुद्धि देना ताकि मैं लोगों को बता सकूँ कि आप ही एक मात्र सारे जहाँ के मालिक हो , ये सूरज , चाँद , तारे ,आकाश , समुद्र , नदियाँ  ,सारे जीव , और सारे कायानात को आपनें ही बनाया है और आप के द्वारा ही वे रौशन हैं और आपके आदेश पर वे अपना काम कर रहे हैं । 
            सवाल ये उठता है कि यदि आप अवतार ले भी लें या मेरे माध्यम से अपना सन्देश दें , तो भी देश में कोई विश्वास करनें वाला नहीं होगा , क्योंकि , देश में इतनें फ्राड किस्म के लोगों नें अपनें को ईश्वर डिक्लेयर कर रखा है कि लोगों को अब ईश्वर पर भी विश्वास नहीं रह गया है । 
            जानते हैं प्रभू , हमारे देश में लोगों को किसी पर भी श्रद्धा उमड़ पड़ती है , चाहे वह कितना भी गया गुजरा क्यों ना हो , जब वैसा गया गुजरा व्यक्ति देख लेता है कि हजार दो हजार लोग उसके मानसिक रुप से गुलाम हो गये तो वह तुरन्त ही अपनें को आपके स्तर का बतलानें लगता है और वह तुरन्त ही अपनें आपको ईश्वर घोषित कर देता है , आश्चर्य तो तब होता है जब उसके मूर्खतापूर्ण बातों पर लोग अमल शुरू कर देते हैं । मेरे एक मित्र हैं खेदू भाई , उन्होंनें ऐसे ही एक भगवान के बारे में उसके एक समर्थक से कुछ शंका मिश्रित प्रश्न पूछे तो , बेचारे खेदू को गाली खाना पड़ा , खेदू भाई को बाद में पता चला कि उनकी पत्नीं भी उक्त भगवान की समर्थक थीं , खेदू के उक्त भगवान के सम्बन्ध में शंका-पूर्ण प्रश्न की  जानकारी  खेदू की पत्नीं को हुई तो बेचारे खेदू को  अपनी पत्नीं के हाथों , मानसिक व शारीरिक रुप से प्रताड़ित होना पड़ा ।
               मेरी बातों से प्रभू जी आप भी खिन्न हो रहे होंगे , लेकिन मैं करुँ तो क्या करूँ । यही वह लाईन है जहाँ यदि दो चार समझदार आदमी , किसी को , कुछ खास गुणवाला कहकर प्रचारित कर दें तो , लोग उत्सुकतावश जाननें की कोशिश करते हैं कि वास्तव में इसमें कोई खास गुण है या नहीं , उनकी यही उत्सुकता , उन्हें शिकार बनाती है । जहाँ दो चार पढ़े लिखे गलती से जाल में फँसे तो समझ लीजिये प्रभू कि मेरा काम बन जायेगा , क्योंकि उन पढ़े-लिखे लोगों को जाल में फँसते देख , अनपढ़ व गँवार लोग स्वयं ही जुटनें लगेंगे , और फिर वे लोग स्वयं ही मेरे प्रचारक बन जायेंगे और फिर मुझे नये जाल फैलानें की जरुरत ही नहीं होगी ।  इस प्रकार मैं लाखों करोड़ों लोगों के द्वारा सम्मान पाता हुआ , अमर हो जाऊँगा ।
                  हे मेरे परम् पूज्य प्रभू , यदि आप की कृपा रही तो , मैं सारी मानव जाति को एकदम नय़ी सोच ,नये विचार दूँगा और ना तो कोई रावण रहेगा ना ही आपको अवतार लेनें की जरुरत होगी । फिलहाल नगाड़े बज रहे हैं , राम लीला का मंचन हो रहा है , रावण के पुतले को अन्तिम रुप दिया जा रहा है ताकि विजय-दशमी यानि दशहरा के दिन उसका दहन किया जा सके । मैं तो चला रावण के पुतले के दहन की तैयारी को देखनें , हो सके तो आप भी देखियेगा रावण के पुतले का दहन , दशहरे वाले रोज -- happy Vijai-Dashmi . 
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