जय ओसाम जी की , दिग्गी बाबू ।
तुम फिर आ गये लल्लन , और ये तुम जय ओसामा जी क्यों कहते रहते हो ?
क्या , ओसामा से प्रेम खत्म हो गया ?
देखो लल्लन मैं राजनीतिक आदमी हूँ , किसी से स्थाई लगाव नहीं रखता ।
लगता है मैडम आपके इस स्वभाव से परिचित हैं , फिर भी आपका कद मैडम नें कुछ तो बढ़ा ही दिया है ।
तुम काम की बात करो लल्लन ।
सच बतायें आपको देखकर काम की कोई बात दिमाग में आती ही नहीं ।
देखो मैं , टी वी पर ठाकरे जी की शव यात्रा देख रहा था ।
बहुत लोग शामिल हैं , लगता है जैसे पूरा महाराष्ट्र उमड़ पड़ा है ।
हाँ लल्लन , सम्मान तो उनका था ही ।
उनके जैसा सम्मान तो आपको भी मिल सकता था ।
कैसे ?
पहली बात वे अपनें दल के सुपर पावर थे , और बुरा ना मानियेगा आप अपनीं ही पार्टी में पावर लेस नेता हैं ।
मुझे गुस्सा ना दिलाओ लल्लन ।
सच बात कड़वी होती है , इसमें आपका तनिक भी दोष नहीं है ।
तुम देखना जब मेरा स्वर्गवास होगा , तो उसमें पूरे देश के लोग शामिल होंगे ।
आप क्या सचमुच स्वर्ग में ही जायेंगे , श्योर है , १०० परसेंट ?
मैंनें कभी कोई बुरा काम नहीं किया है , इसलिये ऐसा कह रहा हूँ ।
सच बताइये , ठाकरे जी की मृत्यु से आप पर क्या असर पड़ा ।
यही कि इंसान को एक दिन मृत्यु से जरुर गले मिलना पड़ता है ।
तब आप ऐसा कोई धासूँ काम क्यों नहीं करते कि देश वाले आपको हमेशा याद रखते ?
लल्लन तुम इस तरह का फालतू टाईप का टापिक क्यों मेरे सामनें उठा दिये ।
हम सोचे कि मातमी माहौल में थोड़ा अपना मूड सही कर लें, इसके लिये आपसे बेहतर देश में कोई और है ही नहीं ।
भागो यहाँ से , राहुल बाबा के यहाँ जानें में देर करा दिया ।
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें