आज पाँच दिन बाद नजर आ रहे हो खेदू , कहाँ थे ?
लल्लन भाई , थानें का दरोगा , मुझे तिरछी निगाह से रोज देख रहा था , इसीलिये ।
तिरछी निगाह के देखनें भर से तुम भूमिगत हो गये खेदू , पकड़ लेता तब ?
पकड़नें की ताक में था , लोगों से कहा भी था कि अन्ना और बाबा के आन्दोलन में सक्रिय रहा है, देश-द्रोही है ।
तो तुम छिप गये ताकि वह तुम्हे देश-द्रोही ना मान ले , है ना ?
अब मामला शान्त हुआ है तो राहत मिली है ।
अब क्या विचार है ?
कुछ नहीं बस , घर पर बैठकर समाचार चैनल ब्लैक & व्हाईट टी वी देखूँगा ।
तब तो तुम्हारे जैसे बहुत से लोग जो भीड़ बनते हैं , किसी भी धरना प्रदर्शन में नहीं रहेंगे ?
ना रहें , देश-द्रोही कहलानें से अच्छा है कि घर में बीबी बच्चों के साथ रहा जाये ।
खेदू , तुम ऐसा सोचोगे तो देश का क्या होगा ?
हमी ठेका लिये हैं , क्या , देश सुधारनें का ?
तुमसे हम मोहल्ला वालों की बड़ी उम्मीद थी , खेदू भाई ।
क्या चाहते हो , लल्लन भाई , मैं भी कसाव के साथ वाले बैरक में चला जाऊँ ।
अपनें शहर के तमाम आफिस के बाबू और अधिकारी खुलेआम दाम लेते हैं , उन्हें कौन सुधारेगा ?
उन्हें सुधारनें के लिये , भगवान को एक साथ बीसों अवतार लेनें होंगे , लल्लन , समझे ।
अगर ईश्वर अवतार नहीं हुआ तो क्या सब कुछ ऐसे ही होता रहेगा ?
तुम मुझसे ही ये सवाल क्यों पूछ रहे हो , मैं कोई दिग्विजय सिंह हूँ क्या ?
नहीं खेदू भाई , तुम्हारा मोहल्ले में बहुत सम्मान है , उन्हें कौन जानता है ।
देखो लल्लन , देश की दशा के बारे में पुरी दुनिया में गलत मैसेज जा रहा है कि हम सब भ्रष्ट और बेईमान हैं ।
इस गलत मैसेज को सही मैसेज में कैसे बदला जाये खेदू भाई ।
उस घड़ी की प्रतीक्षा करो जब संसार में प्रलय आ जाये ।
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