गुरुवार, 13 दिसंबर 2012



           सोनिया मैडम गजब की सपेरिन हैं । मुलायम और माया रुपी खतरनाक साँपों कि जो कि एक दूसरे की जान के प्यासे रहते हैं , मैडम नें ना जानें कौन सी जादू की लकड़ी सूँघा दी है कि जब मैडम के हित की बात होती है तो वे दोनों ही आपसी संग्राम को बन्द कर देते हैं और एक सुर में मैडम की आरती उतारनें लगते हैं ।
            अभी वाल मार्ट का मामला चल रहा है , जबकी संसद के दोनों सदन में , मुलायम व माया के अघोषित  युद्ध विराम से जो कि सोनिया मैडम के भय के कारण हुआ  वाल मार्ट नें भारतीय नेताओं की प्रवृत्ति को परखते हुए , कुछ करोंड़ रुपये खर्च करके भारतीय अर्थव्यवस्था पर घुसपैठ करनें का जुगाड़ कर लिया है । कमाल यह है कि जनता को बताया जा रहा है कि वाल मार्ट के आनें से देश के लोगों के लाभ होगा , यहाँ उन लाभों को गिनानें की जरुरत नहीं है । 
            बात हो रही थी मुलायम और माया जैसे खतरनाक साँपों कि जो मैडम सोनिया के सामनें दन्त-विहिन और विष-विहिन हो जातें है । पूरे देश नें देखा किस प्रकार माया और मुलायम नें देंश की महान जनता को सदैव की तरह मूर्ख समझकर , खूब कोसा मालमार्ट को , लेकिन जब फैसले का वक्त आया तो दोनों सापों नें मैडम के पिटारे में रहना ज्यादा पसन्द किया । पता नहीं हमारे देश की जनता कब तक जाति पाँति आधारित सोच को ढोती रहेगी जिसका फायदा तमाम नीच किस्म के नेता सदा से उठा रहे हैं ।
             अब बात चल निकली है , नौकरियों में प्रमोशन पर आरक्षण की । दोनों साँपों को मैडम , अपनें पिटारे से उस समय निकाल देती हैं जब , देश को डँसनें जैसा कोई काम नहीं रहता । छोटे-मोटे , अन्य कई और भी साँप हैं  जो मैडम को बताते रहते हैं कि हम भी विषधर हैं और देश को स्थायी रुप से डँस सकते हैं , लेकिन मैडम कुशल सपेरिन हैं , सभी साँपों को सही समय पर विष निकालनें का अवसर प्रदान करती है । 
               हाँ , बात नौकरी में प्रमोशन को लेकर हो रही थी । मैडम की पार्टी नें नौकरी में प्रमोशन का झुनझुना बजाया था ,  माया नें मैडम से परमिशन लेकर इसके पक्ष में बोलना शुरु कर दिया है , और मुलायम नें खिलाफ में । उत्तर प्रदेश की जनता में फिर टकराव होगा , लोग मरेंगे , ये दोनों साँप अपनें राजनीतिक विष को उगलेंगे जिससे इन दोनों साँपों को फायदा होगा , और जनता के बीच जाति की खाईं और चौड़ी होगी , जो कि मैडम सोनिया के देश पर हुकूमत के लिये आवश्यक है ।
               हे , देश प्रदेश की जनता , आप लोग कब तक मूर्ख बनते रहोगे । ये मुलायम और माया ,रुपी साँप देश की महान सपेरिन सोनिया जी के पिटारे के साँप हैं उनके विष-दन्तों को निकालना और पुनः लगा देंना मैडम को बखूबी आता है ।             
              इस समय प्रमोशन- प्रमोशन खेलनें के लिये इन दोनों साँपों को मैडम सपेरिन नें अखाड़े में उतार दिया है । दोनों साँपों का एक दूसरे पर विष प्रहार जारी है । जनता भ्रमित है । समझदार साँप अगल-बगल हो गये हैं । लालू और पासवान को कोई रूचि नहीं है अपना जहर खराब करनें में । कोई भी काँग्रेसी साँप अपना जहर नहीं उगल रहा है । वह गिद्ध , चील और कौवे के समान , युद्ध भूमि पर निगाह रखे है । कई अन्य प्रकार के साँप भी हैं जो इन्हीं के बीच अपनें विष-वमन की सोचते होंगे लेकिन अनुकूल समय न होनें के कारण चुप हैं ।
              जनता से अनुरोध है कि वे इन साँपों का पहले से फिक्स प्रमोशन-प्रमोशन के खेल को ना देखे , अन्यथा जहर की बूँदें उसपर पड़ सकती हैं , जिसका फिर कोई इलाज संभव नहीं है ।

बुधवार, 12 दिसंबर 2012

देश बिकाऊ है खरीदोगे ?



           सर्दी के मौसम के कारण शाम के समय दुकान पर कोई ग्राहक नहीं आया । दुकान बन्द होनें का समय  होनें को आया । तभी दुकान पर मालदार टाईप का सख्श आया और बोला - टुकड़े-टुकड़े में दोगे तो खरीदूँगा । मैं समझा नहीं, मैंनें कहा । वह धीरे से बोला - धीरे -धीरे खरीदूँगा तो दिक्कत नहीं होगी । मैनें कहा - क्या बहुत ज्यादा लेना है । वह बोला यदि सब कुछ सही और मेरी सोच के अनुसार हुआ तो सारा लेंनें की कोशिश करूँगा । अभी कितना दूँ मैनें पूछा । वह बोला - इन सब कामों में इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं होती है । मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये किस जल्दबाजी की बात कर रहा है । मैंनें फिर भी शालीनता से कहा - जब आप को लेंनें की जल्दी नहीं तो हमें देंनें में भला क्या जल्दबाजी करनी । 
           वह बोला - इसे कहते हैं समझदारी वाली बात । फिर बोला , आप जयचन्द या मानसिंह के रिश्तेदार तो नहीं हैं । मैनें पसीना पोंछते हुए कहा , जय बाबू हमारे पड़ोसी हैं रिश्तेदार नहीं हैं और मान बाबू भी अलग बिरादरी के हैं । वह बोला - अच्छा मजाक करते हैं । पसन्द आया । 
           मेरी समझ में नहीं आया कि मैंनें क्या मजाक किया है , जो ये मेरी तारीफ कर रहा है । मैंनें जोर देकर कहा , साहब मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ वे लोग ना तो मेरी बिरादरी के हैं ना ही मेरे रिश्तेदार हैं ।  वह जोर से हँसते हुए बोला - आप तो प्रेजेन्ट टेंस में उन लोगों का नाम ले रहे हैं । मैंनें घबरा कर पूछा- ऐसा क्यों कह रहे हैं भाई साहब वे लोग तो अभी जिन्दा हैं । वह बहुत जोर से ठहाका लगाकर बोला - आप रियली बहुत उच्च कोटि के विजनेसमैंन हैं , और हर तरह से मुझे जाँच परख लेना चाहते हैं ।
            मैंनें फिर घबरा कर कहा - मैं आप को परख नहीं रहा हूँ , बता रहा हूँ । वह बोला - चलिये अब डील किया जाये । मैंनें पूछा क्या डील करना है । वह बोला - देखिये आसाम और बिहार से शुरु करते हैं । मैंनें कहा - आसाम और बिहार से , क्यों मैं तो बंगाल -- । वह बात कर बोला एक साथ तीनों को सम्भालना मुश्किल हो जायेगा । मैंनें कहा - मैं उसे बढ़ियाँ पैक कर दूँगा , कोई दिक्कत नहीं होगी । वह बोला - ठीक है , हम लोग गुप्त भाषा में ही बात करते हैं । मैंनें कहा - देखिये मैं गुप्त भाषा में नहीं साफ-साफ बात कर रहा हूँ । वह बोला अभी हम केवल असम और बिहार की ही डील कर लेते हैं । मैंनें अनजानें में हाँ कह दिया । वह बोला - मैं जानता था कि कोई ना कोई मिल ही जायेगा बेचनें वाला । मैंनें कहा - मैं यहाँ अकेले नहीं हूँ , और भी लोग बेचते हैं । लेकिन मुझे लगता है कि आपके यहाँ से खरीदनें में ठीक रहेगा । मैंनें कहा - देखिये मैं अब घर जानें की जल्दी में हूँ । वह क्रोधित होकर बोला - इतनी बड़ी डील करनें चले हो और , घर की जल्दी में हो । तुम जैसे लोग सही बेचनें वाले नहीं हो । 
            वह बोला - क्या तुम्हारे घर में बैठकर डील के बारे में बात हो सकती है । मैंनें कहा - भाई साहब , दुकान का कोई माल मैं घर नहीं ले जाता । वह चौंककर बोला - दुकान और माल तुम्हारा मतलब क्या है । तुम देश बेचनें का काम नहीं करते । मैंनें घबरा कर कहा - तौबा-तौबा , ये क्या कह रहे हैं । देश को बेचनें का कारोबार कुछ नेताओं के जिम्मे है । वह मेरे पास आकर कान में बोला - किसी से कहना नहीं , नहीं तो ? मैंनें डरते हुए कहा - नहीं कहूँगा , बेवकूफ हूँ जो आपके हाथ मारा जाऊँ या किसी नेता के चमचे का हाथ मारा जाऊँ । वह फिर बोला - लेकिन तुमनें जो पोस्टर टाँग रखा है , उसे देखो । मैंनें पोस्टर देखा - किसी शरारती लड़के नें - "यहाँ संदेश भी बिकता है"  में से "स" हटा दिया था और वह हो गया था - " यहाँ देश भी बिकता है " इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी  । 

रविवार, 18 नवंबर 2012

बेकार का टापिक --


जय ओसाम जी की , दिग्गी बाबू ।
तुम फिर आ गये लल्लन , और ये तुम जय ओसामा जी क्यों कहते रहते हो ?
क्या , ओसामा से प्रेम खत्म हो गया ?
देखो लल्लन मैं राजनीतिक आदमी हूँ , किसी से स्थाई लगाव नहीं रखता ।
लगता है मैडम आपके इस स्वभाव से परिचित हैं , फिर भी आपका कद मैडम नें कुछ तो बढ़ा ही दिया है ।
तुम काम की बात करो लल्लन ।
सच बतायें आपको देखकर काम की कोई बात दिमाग में आती ही नहीं ।
देखो मैं , टी वी पर ठाकरे जी  की शव यात्रा देख रहा था ।
बहुत लोग शामिल हैं , लगता है जैसे पूरा महाराष्ट्र उमड़ पड़ा है ।
हाँ लल्लन , सम्मान तो उनका था ही ।
उनके जैसा सम्मान तो आपको भी मिल सकता था ।
कैसे ?
पहली बात वे अपनें दल के सुपर पावर थे , और बुरा ना मानियेगा आप अपनीं ही पार्टी में पावर लेस नेता हैं ।
मुझे गुस्सा ना दिलाओ लल्लन ।
सच बात कड़वी होती है , इसमें आपका तनिक भी दोष नहीं है ।
तुम देखना जब मेरा स्वर्गवास होगा , तो उसमें पूरे देश के लोग शामिल होंगे ।
आप क्या सचमुच स्वर्ग में ही जायेंगे , श्योर है , १०० परसेंट ?
मैंनें कभी कोई बुरा काम नहीं किया है , इसलिये ऐसा कह रहा हूँ ।
सच बताइये , ठाकरे जी की मृत्यु से आप पर क्या असर पड़ा ।
यही कि इंसान को एक दिन मृत्यु से जरुर गले मिलना पड़ता है ।
तब आप ऐसा कोई धासूँ काम क्यों नहीं करते कि देश वाले आपको हमेशा याद रखते ? 
लल्लन तुम इस तरह का फालतू टाईप का टापिक क्यों मेरे सामनें उठा दिये ।
हम सोचे कि मातमी माहौल में थोड़ा अपना मूड सही कर लें, इसके लिये आपसे बेहतर देश में कोई और है ही नहीं ।
भागो यहाँ से , राहुल बाबा के यहाँ जानें में देर करा दिया ।
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सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

दिग्गी राजा को मंत्री क्यों नहीं बनाया ?


         जहाँ तक वफादारी की बात है तो मनीष तिवारी से कम तो नहीं थे अपनें दिग्गी राजा , फिर एक को बनाया दूसरे को क्यों छोड़ा , यह हम देश वासी नहीं समझ पा रहे हैं । कहा जाता है कि सलमान भाई नें भ्रष्टाचार के दलदल में सपरिवार गोता लगाकर मात्र ७१ लाख रुपये ही निकाले , एक मंत्री जी नें उनके नौसिखियापन पर कमेन्ट भी किया कि यदि सलमान खुर्शीद असल गोता-बाज या खिलाड़ी होते तो कम से कम ७१ करोड़ रुपये जरुर निकाले होते , यही नहीं  उनकी अक्षमता पर देश भर में हो हल्ला हुआ तो मैडम नें ड्यूटी बदल दी , कि शायद विदेशी सम्पर्क में उनकी क्षमता और गुणवत्ता में वृद्धि हो सके । 
        आखिर दिग्गी राजा का दोष क्या है ? जहाँ तक अनर्गल शब्द बोलनें की बात है तो दिग्गी राजा नें यदि गाली भी दी तो शालीनता के साथ , जबकि मनीष तिवारी , अन्ना को "तुम" और अन्य गन्दे शब्दों के साथ सम्बोधन करते रहे ।
         हमें दिग्गी राजा के साथ-साथ लालू जी के साथ भी पूरी सहानूभूति है । लालू जी का राजनीतिक जन्म ही काँग्रेस विरोध के साथ हुआ था , जय प्रकाश जी के आन्दोलन में उनकी सहभागिता के किस्से हमनें सुनें हैं । जिस आदमी नें अपनें सारे सिद्धान्तों को ठुकरा कर काँग्रेस के दामन को पकड़ा और काँग्रेस पर छोटी कंकड़ फेंकनें वाले पर बड़ा सा पत्थर फेंकनें को तैयार रहनें वाले शख्स को मैडम सोनिया नें क्यों नजर अन्दाज किया समझ में नहीं आता । काँग्रेस या मैडम सोनिया को क्या उनकी विश्वसनीयता पर संदेह है या वे जानती हैं के ये सब तराजू पर रखे जानें मेढक हैं जो कभी स्थिर नहीं रह सकते या वे इन लोगों को विवाह के पूर्व का कालिदास समझती हैं  कि ये लोग जिस डाल पर बैठेंगे उसी को काटेंगे ।
         मेरी राय तो मेरे घर के छोटे बच्चे तक नहीं मानते , फिर भी मैं राय देता हूँ कि सब्र कीजिये , सब्र का फल मीठा होता है । वह दिन जरुर आयेगा जब लालू जी और दिग्गी राजा अपनें-अपनें राज्य के मुखिया होंगे । मंत्री पद का क्या , आज है कल छीन जायेगा और किसी की भीख से कोई मंत्री-पद मिल भी जाये तो क्या होगा , कोई काम रुकनें वाला है आप लोगों का , कोई कितना भी बड़ा मंत्री बनें , सबकी गति मैडम सोनिया के सामनें एक जैसी ही होती है । इसलिये हताश या परेशान होनें की जरुरत नहीं है , मैडम सोनिया की भक्ति में लीन रहिये शायद उनकी कृपा की एक नजर पड़ ही जाये । 
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बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

जसपाल भट्टी और बापू की भेंट ।



ए पंडित जी देखो कैसी हलचल हो रही है , लोग क्यों हँस रहे हैं ?
अरे बापू भट्टी आया है ।
ये भट्टी कौन है भाई ।
इसे जसपाल भट्टी कहते थे , धरती पर , कार से जा रहा था , फिर यहाँ आ गया ।
क्या कार समेत आया है ?
नहीं बापू यमदूत लाये हैं , स्वर्ग में उदासी थी , अब हम लोग जी भर कर हँसेंगे ।
मेरे पास ले आओ , पंडित जी ।
मैं खुद ही आ रहा हूँ , बापू ।
आओ , अभी तो तुम धरती के लायक ही थे , क्या जल्दी थी आनें की , भट्टी जी ।
अब मैं क्या कर सकता हूँ , यमराज जी चाहते होंगे कि मैं उन्हें भी कुछ सुनाऊँ ।
धरती का हाल-चाल बताओ , भट्टी जी ।
बापू , धरती का हाल तो नहीं , लेकिन आपके और अपनें देश का हाल जरुर सुनाऊँगा ।
क्या हाल है मेरे देश का , सब ठीक तो है ?
कुछ भी ठीक नहीं है बापू , देश जिनके भरोसे आप छोड़े थे , उनके वंश का शासन अभी तक कायम है।
देखो भट्टी मैंनें किसी के हाथ में देश नहीं सौंपा था ।
लेकिन नाम तो आपका ही बदनाम हो रहा है ।
मेरी बात कोई मानता भी नहीं था । नेहरू भी मुझे घास नहीं डालते थे ।
लेकिन , देश में चारों और आपकी मूर्ति लगायी गई , सड़कों के नाम रखे गये , फोटो लगाई गई ।
अब मुझे मालूम हुआ है , कि वे सारे काम जनता को बेवकूफ बनानें के लिये किये गये थे ।
जानते हैं बापू , ना तो आपकी बात उस समय मानी जाती थी ना अब ही कोई माननें वाला है ।
मुझे सारी जानकारी मिलती रहती है , भट्टी जी ।
बापू जी , देश में इस समय भ्रष्टाचार ,घोटाले और लूट का बाजार गर्म है ।
देश का प्रधान-मंत्री कौन है ?
लोग कहते हैं कि मनमोहन सिंह हैं लेकिन ।
लेकिन क्या ?
वे नाम मात्र के हैं , केवल आदेश पालक हैं ।
किसके  ?
नाम नहीं लूँगा , पता नहीं , नर्क आनें पर वह पुलिस वालों के साथ आकर मुझे पकड़ ले तब ?
यहाँ कहाँ पुलिस वाले हैं भाई ?
स्वर्ग में नहीं होंगे बापू , दो चार होंगे भी तो , सन्टिंग में होंगे । असली पुलिस वाले नर्क में हो सकते हैं ।
देखो भट्टी , स्वर्ग में मैं बड़ा बोर होता हूँ , ये चम्पारन के पंडित जी ना रहें तो मुझसे बात करनें वाला भी कोई नहीं है ।
क्यों बापू ? आप तो काँग्रेसियों से घिरे रहते थे , क्या अब वे यहाँ नहीं हैं ?
देखो भट्टी , यहाँ पर ज्यादातर वे लोग हैं जिनका विरोध करते हुए मैंनें नेहरु का साथ दिया था ।
ये कैसे हो सकता है , आप तो सही लोगों का साथ देते थे ?
मुझसे कुछ गल्तियाँ हो गई थीं जिसके कारण मैं नेहरु का विरोध नहीं कर पाता था ।
यहाँ पर कुछ लोग तो होंगे जो आपसे जुड़े थे ?
हाँ राजेन्द्र प्रसाद , लाला लाजपत ,शास्त्री , पंत , पटेल आदि हैं लेकिन वे सब अपनें में मग्न रहते हैं ।
चिन्ता मत करिये बापू अब मैं हूँ ना , आप बोर नहीं होंगे ।
अभी तो तुम आये ही हो , थोड़ा सेटल हो जाओ तब आराम से बैठकर , चर्चा करेंगे ।
बापू , हम धरती पर इस खोज में लगे थे कि नेहरू जी कहाँ पैदा हुए थे ताकि वहाँ कोई समाधि का निर्माण हो सके ।
तुम ऐसी वाहियात खोज में क्यों लगे थे , वे पैदा नहीं हुए थे , अवतार लिये थे , समझे मूर्ख भट्टी ।
वाह बापू वाह , मैं आपके मुख से यही सुनना चाहता था , धन्य हैं आप ।
देखो सब तो ठीक है , किसी के व्यक्तिगत जीवन के बारे में झाँकना उचित नहीं है ।
नेहरू जी से भेंट तो कर सकता हूँ ना बापू ?
वे यहाँ स्वर्ग में नहीं रहते ।
तब कहाँ रहते हैं ? कोई नया जन्म ले लिया क्या ?
अभी से इतनें सवाल मत करो ,भट्टी , ये पंडितजी हैं इनसे पूछ लो वे कहाँ पर रह रहे हैं ।
पंडित जी आप कृपया उनका व उनके परिवार का पता देंगे  ?
देखो भट्टी जी , वे अपनें पूरे परिवार के साथ जहाँ पर रह रहे हैं , वहाँ जानें वाले कर्म तुमनें नहीं किये ।
ये तो अन्याय है ,पंडित जी , मैं यमराज जी से शिकायत करूँगा ।
ऐसी गलती मत करना भट्टी जी वरना अगले जन्म में मनमोहन सिंह का डुप्लीकेट बनकर पैदा होगे ।
मेरी दोनों आँखें खोल दी आपनें पंडित जी , चाहे स्ट्रीट डाग बन कर पैदा हूँ या गधा लेकिन , उनके जैसा ना बाबा ना ।
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देश को लूटनें की , हजार साल पुरानी परम्परा अभी भी कायम ।

                  
            संसार के तमाम देशों की तरह हमारा देश भी परम्परा का निर्वाह करनें वाल देश है । देश की कुछ परम्परायें तो इतनी पुरानी हैं कि यह भी याद नहीं है कि उसका पालन हम भारतीय कबसे कर रहे हैं । बहुत सी परम्परायें ऐसी हैं जिनके बारे में इतिहास की पुस्तकों में कुछ गलत और कुछ सही लिखा मिल जायेगा । हमारे देश का इतिहास , अत्यन्त सावधानी पूर्वक लिखा गया है ताकि देश के किसी भाग्य- विधाता को या पुरानें भाग्य-विधाताओं को बुरा न लगनें पाये । आज की पीढ़ी को जो इतिहास की जानकारी दी जा रही है , वह एक प्रकार की सेन्सर्ड हिस्ट्री कही जा सकती है , ताकि देश के सेकूलर ढाँचे पर आँच ना आये और वोट बैंक की राजनीति पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े । खैर , सरकारी इतिहास की पुस्तकों के अलावा देश के तमाम लोग अपनें-अपनें धर्म व मजहब और विश्वास के आधार पर इतिहास आनें वाली पीढ़ी को पढ़ा रहें हैं ।
           विषय से भटकनें से पहले ही हम मूल विषय पर आते हैं । हम बात कर रहें हैं अपनें देश की उस महान् परम्परा के बारे में , जिसे देश को लूटना कहते हैं । इतिहास साक्षी है कि जब से भारत में विदेशी आक्रमणकारियों नें भारत को लूटना प्रारम्भ किया तभी से उस परम्परा को जीवित रखनें का प्रयास हम भारतीय कर रहे हैं । मोहम्मद बिन कासिम या उसके पूर्व से जारी इस देश लूट की परम्परा को हम भारतीय छोड़ना भी नहीं चाहते । हमारा इतिहास गवाह है कि जयचन्द टाईप के लोग आपसी वैमनस्य में भी वैसे लूटेरों को अपनें देश में आनें की खुली छूट देते रहे हैं , और उसको बताते हैं कि कैसे देश की सम्पत्ति को लूटा जाये और फिर वह लूटेरा दोनों को लूटकर चल देता था , और कभी-कभी वह कई-कई बार लूट की घटना को अंजाम देता था ।
             हम भारत वासी तैमूरलंग जी और महमूद गजनी जी के या मोहम्मद गोरी जी के अत्यंत आभारी हैं जिन्होंनें हम देश वासियों के लूटनें की परम्मपरा को और मजबूत किया । बाद के दिमागदार आक्रमणकारियों को जब  हमारे  देश के समझदार मेजबानों नें देश को लूटनें का न्यौता दिया तो उन्हें लगा कि बार-बार यहाँ की सम्पत्ति को लूटकर और देश की महिलाओं व पुरुषों को गुलाम बनाकर अपनें वतन ले जानें से बेहतर है , यहीं रहा जाये और यहाँ के अतिथि देवो भव की भावना वाले , नमक खानें के बाद नमक हारामी ना करनें वाले , लालच के लिये अपनें भाईयों तक का खून करके कोई उपाधि पानें वाले भारत वासी स्वयं ही सारी ऐशो आराम की चीज उपलब्ध करा देंगे , और भगवान की कृपा से सब कुछ वैसा ही हुआ ।
             उसके बाद दौर शुरु हुआ , भारत में अग्रजों का और अन्य प्रकार के विदेशियों जैसे फ्राँसीसी और पुर्तगाली लोगों का , उन लोगों को जो भी हाथ लगा वे देश को नोंचकर ले गये । देश को लूटनें और नोचनें का ज्यादा लम्बा कार्यकाल अँग्रेज लोगों का रहा और हम भारतीयों की लूटनें की परम्परा का खूब पालन हुआ और हम भारतीय अपनी उस गौरवमयी परम्परा का पालन अनवरत करते रहे । जब अँग्रेज देश को लूटते-लूटते थक कर उब गये तब उन्होंनें देश का शासन भारतीयों और पाकिस्तानियों के हाथ में सौंप दिया । जिसको हम हिन्दी में स्वतंत्रता , ऊर्दू में आजादी और अँग्रेजी भाषा में इंडिपेन्डेन्स डे के रुप में मनाते हैं ।
              लूट की परम्परा का पालन भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में कायम है , जनता का ध्यान कहीं लूट पर ना चला जाये इसलिये ये दोनों देश बीच-बीच में देश की जनता को मूर्ख बनानें के लिये और देश-भक्ति जागृत करनें के लिये , एक दूसरे पर जुबानी वार करते हैं और भले ही देश की जनता भूखे मरे , एक दूसरे का नाश करनें के लिये युद्ध की सामग्री खरीदते हैं । हद तो तब होती है जब दोनों ही देश के राजा या बादशाह ( नेता-गण ) एक ही दुकानदार से सामान खरीदते हैं , वह दुकानदार अमेरिकी हो , फ्राँस का हो ईटली का हो या जर्मनी का हो । कभी-कभी ऐसा भी लगता है जैसे दोनों देश के खरीदार राजा या बादशाह एक ही साथ दुकान पर पहुँचते हैं और एक दूसरे से सलाह करके ही सौदा पक्का करते हैं । इन सब में कितनी लूट होती है इसका खुलासा कोई नहीं कर सकता क्योंकि देश की रक्षा के मसले पर आप कोई सवाल पूछे नहीं कि देश द्रोही घोषित हुए । बहरहाल खबर उड़ती है कि करोंड़ों रुपया या करोंड़ों डालर का घपला हुआ , रक्षा सौदे में । कुछ दिन हल्ला गुल्ला होनें के बाद दोनों ही देश के नागरिक किसी नये लूट के पर्व की प्रतिक्षा करनें लगते हैं ।
               हम भारत के लोग जो कि लूट के त्यौहार को बेहद जश्न पूर्वक मनाते हैं , उसमें अब मीडिया का रोल भी शामिल हो गया है । इन्डिपेन्डेन्स मिलनें के बाद देश में लूट का त्यौहार ज्यादा लोग नहीं मना पाते थे कि क्योंकि उस समय कुछ ऐसे नेता थे जिनको सत्यमूर्ति कहा जाता था , वे जो कह देते थे वह ब्रह्म-वाक्य सरीखा होता था , वे कहते हम देश को नहीं लूटे या फलानें नें देश को नहीं लूटा , हम देश वासी उनकी बात मानकर चुप हो जाते थे ।
                अँग्रेजों के आगमन के पूर्व जिस प्रकार देश की सम्पत्ति को लूटकर या यहाँ की महिलाओं और पुरुषों को गुलाम बनाकर विदेश ले जानें की परम्परा रही है , अँग्रेजों नें उस परम्मपरा का कुछ सीमा तक पालन किया । बाद में उस परम्मपरा के निर्वहन में कुछ गिरावट आई । इन्डिपेन्डेन्स भारत में शुरुआत में यह लूट की परम्परा लगभग लुप्त होनें के कगार पर थी , लेकिन देश वासियों के सौभाग्य से  विगत २०-२५ साल से देश में इस प्रकार की लूट की परम्परा का पालन बड़े पैमानें पर किया जा रहा है । हमारा देश पर्व और त्यौहारों को उत्साह-पूर्वक मनाता है , उसी उत्साह और जोश के साथ , हम लूट रुपी पर्व को मनाते आ रहे हैं । इस पर्व की कोई तिथि या मुहुर्त नहीं होता , जब जिसको मौका मिला , इस पर्व को मना लेता है और हम देशवासी उसके जश्न में शामिल हो जाते हैं ।
             इतिहास अपनें को दुहरा रहा है , आज के समय में फिर वही ऐतिहासिक घटना हो रही है , और देश की सम्पत्ति को लूटकर हमारे वर्तमान् भाग्य-विधाता शासक वर्ग के लोग , विदेशों में हमारे देश का लूटा हुआ  धन जमा कर रहें हैं । पता नहीं उन सबकी योजना क्या है ? लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि उन्हें शंका है कि कभी ना कभी इस देश की जनता जो शीत-निद्रा में है जाग जायेगी और लूट की परम्परा को रोकनें का प्रयास करेगी , तब वैसे लोग इस देश को उसी प्रकार छोड़ देंगे जिस प्रकार , अँग्रेजों ने छोड़ा था , तब वैसे समय में विदेशों में जमा धन ही सहायक होगा ।
              फिलहाल ऐसा सोचना अभी बहुत गलत होगा , क्योंकि हम भारतवासी लूटे जानें के लिये ही बनें हैं , और बहुत दिन तक यदि कोई ठीक से नहीं लूटता तो , हम भारतवासियों को बैचैनी होनें लगती है । फिर से मन्दिरों में सोनें जमा हो गये हैं , देश वासी विकास के जश्न में लगे हैं , देश फिर सोनें की चिड़िया बननें की ओर है , पता नहीं  किसी देश-भक्त नें तैमूर जी या महमूद गजनी जी को खबर दी या नहीं । हम भारतवासी चादर तानकर सो रहें हैं , अगली कोई अच्छे किस्म की लूट देश में हो तो जगा देंना , ताकि लूट के जश्न को हम भी मीडिया के साथ सेलीब्रेट कर सकें ।
                                             Thanks .
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रविवार, 21 अक्टूबर 2012

रावण के पुतले का दहन --- ।


            विजय दशमी करीब है , फिर से रावण के पुतले जगह-जगह पर जलाये जायेंगे । बुराई पर अच्छाई की जीत पर प्रवचन होंगे , फिर साल के ३६४ दिन रावण का भूत हावी होगा और साल भर बुराई ही बुराई नजर आयेगी । रावण के पुतले को जला देने से काम नहीं चलनें वाला , रावण को अपनें अन्दर से निकालनें की कोशिश होनी चाहिये । रावण लंका का राजा था , उसके भीतर दस महा-बलवानों की ताकत थी , दस महा-विद्वानों जितना ज्ञान था , यानि हर चीज वह दसगुना था । लेकिन यदि आज रावण जिन्दा होता तो निश्चित रुप से उसका सारा धमण्ड चूर हो जाता जब वह देखता कि एक बिना पढ़ा-लिखा नेता भी उससे सौगुना ज्यादा विद्वान है , और मक्कारी में भी  रावण जी उनसे सौगुना पीछे होते । 
           मैं दशानन रावण को चुनौती देता हूँ कि यदि उसमें या उसकी आत्मा में इतनी ताकत है तो वह हमारे देश में आकर देख ले , एक गली का नेता भी उसे किसी भी फील्ड में मात देनें के लिये तैयार है । एक रावण को मारनें के लिये , प्रभू को कितनी माया फैलानी पड़ी । आज कितनें भी प्रभू अवतरित हो जायें , आज के रावणों को मारा नहीं जा सकता , क्योंकि आज के विभीषण भगवान श्रीराम के साथ नहीं बल्कि कलयुगी रावण के साथ हैं और वे भगवान श्रीराम को परास्त करनें के तरीके खोज रहे हैं । कलयुगी हनुमान बिना फायदे के अब भगवान के साथ रहनें वाले नहीं हैं । कलयुगी लक्ष्मण , अब तमाशबीन ही बने रहना चाहते हैं ।
            प्रभू आपनें गीता में आश्वसन दिया है कि जब जब धर्म की हानि होगी मैं अवतरित होऊँगा । हम भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम लोग जो आप पर यकीन करते हैं , आपकी राह तक रहे हैं । हम सभी आश्वस्त हैं कि कुछ दिन में आप अवश्य अवतार लेंगे , क्योंकि अब धर्म की हानि ही नहीं , बल्कि वह विलुप्त होनें के कगार पर है । यदि आपनें और विलम्ब किया तो , हम यही मानकर चलेंगे कि यह भी आपकी ही इच्छा है कि देश में दुनिया में अधर्म और पाप का विस्तार हो । सारे देश और सारी दुनिया पर शैतानों का कब्जा हो जाये । 
            प्रभू जी , जब आप अवतार लेनें की सोचना तो , कुछ ऐसी व्यवस्था करना , ताकि लोगों को विश्वास हो जाये कि आप अवतरित होनें वाले हैं , क्योंकि बिना पूर्व सूचना के यदि आप आये तो आपसे इतनें किस्म के सवाल पूछे जायेंगे कि आप सोचनें पर मजबूर हो जायेंगे कि कहीं गलत समय पर अवतार तो नहीं ले लिया  , इसका समाधान मैं आपको सूझा सकता हूँ , वह यह कि आप केवल मुझमें ही ऐसी समझ और बुद्धि देना ताकि मैं लोगों को बता सकूँ कि आप ही एक मात्र सारे जहाँ के मालिक हो , ये सूरज , चाँद , तारे ,आकाश , समुद्र , नदियाँ  ,सारे जीव , और सारे कायानात को आपनें ही बनाया है और आप के द्वारा ही वे रौशन हैं और आपके आदेश पर वे अपना काम कर रहे हैं । 
            सवाल ये उठता है कि यदि आप अवतार ले भी लें या मेरे माध्यम से अपना सन्देश दें , तो भी देश में कोई विश्वास करनें वाला नहीं होगा , क्योंकि , देश में इतनें फ्राड किस्म के लोगों नें अपनें को ईश्वर डिक्लेयर कर रखा है कि लोगों को अब ईश्वर पर भी विश्वास नहीं रह गया है । 
            जानते हैं प्रभू , हमारे देश में लोगों को किसी पर भी श्रद्धा उमड़ पड़ती है , चाहे वह कितना भी गया गुजरा क्यों ना हो , जब वैसा गया गुजरा व्यक्ति देख लेता है कि हजार दो हजार लोग उसके मानसिक रुप से गुलाम हो गये तो वह तुरन्त ही अपनें को आपके स्तर का बतलानें लगता है और वह तुरन्त ही अपनें आपको ईश्वर घोषित कर देता है , आश्चर्य तो तब होता है जब उसके मूर्खतापूर्ण बातों पर लोग अमल शुरू कर देते हैं । मेरे एक मित्र हैं खेदू भाई , उन्होंनें ऐसे ही एक भगवान के बारे में उसके एक समर्थक से कुछ शंका मिश्रित प्रश्न पूछे तो , बेचारे खेदू को गाली खाना पड़ा , खेदू भाई को बाद में पता चला कि उनकी पत्नीं भी उक्त भगवान की समर्थक थीं , खेदू के उक्त भगवान के सम्बन्ध में शंका-पूर्ण प्रश्न की  जानकारी  खेदू की पत्नीं को हुई तो बेचारे खेदू को  अपनी पत्नीं के हाथों , मानसिक व शारीरिक रुप से प्रताड़ित होना पड़ा ।
               मेरी बातों से प्रभू जी आप भी खिन्न हो रहे होंगे , लेकिन मैं करुँ तो क्या करूँ । यही वह लाईन है जहाँ यदि दो चार समझदार आदमी , किसी को , कुछ खास गुणवाला कहकर प्रचारित कर दें तो , लोग उत्सुकतावश जाननें की कोशिश करते हैं कि वास्तव में इसमें कोई खास गुण है या नहीं , उनकी यही उत्सुकता , उन्हें शिकार बनाती है । जहाँ दो चार पढ़े लिखे गलती से जाल में फँसे तो समझ लीजिये प्रभू कि मेरा काम बन जायेगा , क्योंकि उन पढ़े-लिखे लोगों को जाल में फँसते देख , अनपढ़ व गँवार लोग स्वयं ही जुटनें लगेंगे , और फिर वे लोग स्वयं ही मेरे प्रचारक बन जायेंगे और फिर मुझे नये जाल फैलानें की जरुरत ही नहीं होगी ।  इस प्रकार मैं लाखों करोड़ों लोगों के द्वारा सम्मान पाता हुआ , अमर हो जाऊँगा ।
                  हे मेरे परम् पूज्य प्रभू , यदि आप की कृपा रही तो , मैं सारी मानव जाति को एकदम नय़ी सोच ,नये विचार दूँगा और ना तो कोई रावण रहेगा ना ही आपको अवतार लेनें की जरुरत होगी । फिलहाल नगाड़े बज रहे हैं , राम लीला का मंचन हो रहा है , रावण के पुतले को अन्तिम रुप दिया जा रहा है ताकि विजय-दशमी यानि दशहरा के दिन उसका दहन किया जा सके । मैं तो चला रावण के पुतले के दहन की तैयारी को देखनें , हो सके तो आप भी देखियेगा रावण के पुतले का दहन , दशहरे वाले रोज -- happy Vijai-Dashmi . 
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