सर्दी के मौसम के कारण शाम के समय दुकान पर कोई ग्राहक नहीं आया । दुकान बन्द होनें का समय होनें को आया । तभी दुकान पर मालदार टाईप का सख्श आया और बोला - टुकड़े-टुकड़े में दोगे तो खरीदूँगा । मैं समझा नहीं, मैंनें कहा । वह धीरे से बोला - धीरे -धीरे खरीदूँगा तो दिक्कत नहीं होगी । मैनें कहा - क्या बहुत ज्यादा लेना है । वह बोला यदि सब कुछ सही और मेरी सोच के अनुसार हुआ तो सारा लेंनें की कोशिश करूँगा । अभी कितना दूँ मैनें पूछा । वह बोला - इन सब कामों में इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं होती है । मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये किस जल्दबाजी की बात कर रहा है । मैंनें फिर भी शालीनता से कहा - जब आप को लेंनें की जल्दी नहीं तो हमें देंनें में भला क्या जल्दबाजी करनी ।
वह बोला - इसे कहते हैं समझदारी वाली बात । फिर बोला , आप जयचन्द या मानसिंह के रिश्तेदार तो नहीं हैं । मैनें पसीना पोंछते हुए कहा , जय बाबू हमारे पड़ोसी हैं रिश्तेदार नहीं हैं और मान बाबू भी अलग बिरादरी के हैं । वह बोला - अच्छा मजाक करते हैं । पसन्द आया ।
मेरी समझ में नहीं आया कि मैंनें क्या मजाक किया है , जो ये मेरी तारीफ कर रहा है । मैंनें जोर देकर कहा , साहब मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ वे लोग ना तो मेरी बिरादरी के हैं ना ही मेरे रिश्तेदार हैं । वह जोर से हँसते हुए बोला - आप तो प्रेजेन्ट टेंस में उन लोगों का नाम ले रहे हैं । मैंनें घबरा कर पूछा- ऐसा क्यों कह रहे हैं भाई साहब वे लोग तो अभी जिन्दा हैं । वह बहुत जोर से ठहाका लगाकर बोला - आप रियली बहुत उच्च कोटि के विजनेसमैंन हैं , और हर तरह से मुझे जाँच परख लेना चाहते हैं ।
मैंनें फिर घबरा कर कहा - मैं आप को परख नहीं रहा हूँ , बता रहा हूँ । वह बोला - चलिये अब डील किया जाये । मैंनें पूछा क्या डील करना है । वह बोला - देखिये आसाम और बिहार से शुरु करते हैं । मैंनें कहा - आसाम और बिहार से , क्यों मैं तो बंगाल -- । वह बात कर बोला एक साथ तीनों को सम्भालना मुश्किल हो जायेगा । मैंनें कहा - मैं उसे बढ़ियाँ पैक कर दूँगा , कोई दिक्कत नहीं होगी । वह बोला - ठीक है , हम लोग गुप्त भाषा में ही बात करते हैं । मैंनें कहा - देखिये मैं गुप्त भाषा में नहीं साफ-साफ बात कर रहा हूँ । वह बोला अभी हम केवल असम और बिहार की ही डील कर लेते हैं । मैंनें अनजानें में हाँ कह दिया । वह बोला - मैं जानता था कि कोई ना कोई मिल ही जायेगा बेचनें वाला । मैंनें कहा - मैं यहाँ अकेले नहीं हूँ , और भी लोग बेचते हैं । लेकिन मुझे लगता है कि आपके यहाँ से खरीदनें में ठीक रहेगा । मैंनें कहा - देखिये मैं अब घर जानें की जल्दी में हूँ । वह क्रोधित होकर बोला - इतनी बड़ी डील करनें चले हो और , घर की जल्दी में हो । तुम जैसे लोग सही बेचनें वाले नहीं हो ।
वह बोला - क्या तुम्हारे घर में बैठकर डील के बारे में बात हो सकती है । मैंनें कहा - भाई साहब , दुकान का कोई माल मैं घर नहीं ले जाता । वह चौंककर बोला - दुकान और माल तुम्हारा मतलब क्या है । तुम देश बेचनें का काम नहीं करते । मैंनें घबरा कर कहा - तौबा-तौबा , ये क्या कह रहे हैं । देश को बेचनें का कारोबार कुछ नेताओं के जिम्मे है । वह मेरे पास आकर कान में बोला - किसी से कहना नहीं , नहीं तो ? मैंनें डरते हुए कहा - नहीं कहूँगा , बेवकूफ हूँ जो आपके हाथ मारा जाऊँ या किसी नेता के चमचे का हाथ मारा जाऊँ । वह फिर बोला - लेकिन तुमनें जो पोस्टर टाँग रखा है , उसे देखो । मैंनें पोस्टर देखा - किसी शरारती लड़के नें - "यहाँ संदेश भी बिकता है" में से "स" हटा दिया था और वह हो गया था - " यहाँ देश भी बिकता है " इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी ।
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