बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

जसपाल भट्टी और बापू की भेंट ।



ए पंडित जी देखो कैसी हलचल हो रही है , लोग क्यों हँस रहे हैं ?
अरे बापू भट्टी आया है ।
ये भट्टी कौन है भाई ।
इसे जसपाल भट्टी कहते थे , धरती पर , कार से जा रहा था , फिर यहाँ आ गया ।
क्या कार समेत आया है ?
नहीं बापू यमदूत लाये हैं , स्वर्ग में उदासी थी , अब हम लोग जी भर कर हँसेंगे ।
मेरे पास ले आओ , पंडित जी ।
मैं खुद ही आ रहा हूँ , बापू ।
आओ , अभी तो तुम धरती के लायक ही थे , क्या जल्दी थी आनें की , भट्टी जी ।
अब मैं क्या कर सकता हूँ , यमराज जी चाहते होंगे कि मैं उन्हें भी कुछ सुनाऊँ ।
धरती का हाल-चाल बताओ , भट्टी जी ।
बापू , धरती का हाल तो नहीं , लेकिन आपके और अपनें देश का हाल जरुर सुनाऊँगा ।
क्या हाल है मेरे देश का , सब ठीक तो है ?
कुछ भी ठीक नहीं है बापू , देश जिनके भरोसे आप छोड़े थे , उनके वंश का शासन अभी तक कायम है।
देखो भट्टी मैंनें किसी के हाथ में देश नहीं सौंपा था ।
लेकिन नाम तो आपका ही बदनाम हो रहा है ।
मेरी बात कोई मानता भी नहीं था । नेहरू भी मुझे घास नहीं डालते थे ।
लेकिन , देश में चारों और आपकी मूर्ति लगायी गई , सड़कों के नाम रखे गये , फोटो लगाई गई ।
अब मुझे मालूम हुआ है , कि वे सारे काम जनता को बेवकूफ बनानें के लिये किये गये थे ।
जानते हैं बापू , ना तो आपकी बात उस समय मानी जाती थी ना अब ही कोई माननें वाला है ।
मुझे सारी जानकारी मिलती रहती है , भट्टी जी ।
बापू जी , देश में इस समय भ्रष्टाचार ,घोटाले और लूट का बाजार गर्म है ।
देश का प्रधान-मंत्री कौन है ?
लोग कहते हैं कि मनमोहन सिंह हैं लेकिन ।
लेकिन क्या ?
वे नाम मात्र के हैं , केवल आदेश पालक हैं ।
किसके  ?
नाम नहीं लूँगा , पता नहीं , नर्क आनें पर वह पुलिस वालों के साथ आकर मुझे पकड़ ले तब ?
यहाँ कहाँ पुलिस वाले हैं भाई ?
स्वर्ग में नहीं होंगे बापू , दो चार होंगे भी तो , सन्टिंग में होंगे । असली पुलिस वाले नर्क में हो सकते हैं ।
देखो भट्टी , स्वर्ग में मैं बड़ा बोर होता हूँ , ये चम्पारन के पंडित जी ना रहें तो मुझसे बात करनें वाला भी कोई नहीं है ।
क्यों बापू ? आप तो काँग्रेसियों से घिरे रहते थे , क्या अब वे यहाँ नहीं हैं ?
देखो भट्टी , यहाँ पर ज्यादातर वे लोग हैं जिनका विरोध करते हुए मैंनें नेहरु का साथ दिया था ।
ये कैसे हो सकता है , आप तो सही लोगों का साथ देते थे ?
मुझसे कुछ गल्तियाँ हो गई थीं जिसके कारण मैं नेहरु का विरोध नहीं कर पाता था ।
यहाँ पर कुछ लोग तो होंगे जो आपसे जुड़े थे ?
हाँ राजेन्द्र प्रसाद , लाला लाजपत ,शास्त्री , पंत , पटेल आदि हैं लेकिन वे सब अपनें में मग्न रहते हैं ।
चिन्ता मत करिये बापू अब मैं हूँ ना , आप बोर नहीं होंगे ।
अभी तो तुम आये ही हो , थोड़ा सेटल हो जाओ तब आराम से बैठकर , चर्चा करेंगे ।
बापू , हम धरती पर इस खोज में लगे थे कि नेहरू जी कहाँ पैदा हुए थे ताकि वहाँ कोई समाधि का निर्माण हो सके ।
तुम ऐसी वाहियात खोज में क्यों लगे थे , वे पैदा नहीं हुए थे , अवतार लिये थे , समझे मूर्ख भट्टी ।
वाह बापू वाह , मैं आपके मुख से यही सुनना चाहता था , धन्य हैं आप ।
देखो सब तो ठीक है , किसी के व्यक्तिगत जीवन के बारे में झाँकना उचित नहीं है ।
नेहरू जी से भेंट तो कर सकता हूँ ना बापू ?
वे यहाँ स्वर्ग में नहीं रहते ।
तब कहाँ रहते हैं ? कोई नया जन्म ले लिया क्या ?
अभी से इतनें सवाल मत करो ,भट्टी , ये पंडितजी हैं इनसे पूछ लो वे कहाँ पर रह रहे हैं ।
पंडित जी आप कृपया उनका व उनके परिवार का पता देंगे  ?
देखो भट्टी जी , वे अपनें पूरे परिवार के साथ जहाँ पर रह रहे हैं , वहाँ जानें वाले कर्म तुमनें नहीं किये ।
ये तो अन्याय है ,पंडित जी , मैं यमराज जी से शिकायत करूँगा ।
ऐसी गलती मत करना भट्टी जी वरना अगले जन्म में मनमोहन सिंह का डुप्लीकेट बनकर पैदा होगे ।
मेरी दोनों आँखें खोल दी आपनें पंडित जी , चाहे स्ट्रीट डाग बन कर पैदा हूँ या गधा लेकिन , उनके जैसा ना बाबा ना ।
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देश को लूटनें की , हजार साल पुरानी परम्परा अभी भी कायम ।

                  
            संसार के तमाम देशों की तरह हमारा देश भी परम्परा का निर्वाह करनें वाल देश है । देश की कुछ परम्परायें तो इतनी पुरानी हैं कि यह भी याद नहीं है कि उसका पालन हम भारतीय कबसे कर रहे हैं । बहुत सी परम्परायें ऐसी हैं जिनके बारे में इतिहास की पुस्तकों में कुछ गलत और कुछ सही लिखा मिल जायेगा । हमारे देश का इतिहास , अत्यन्त सावधानी पूर्वक लिखा गया है ताकि देश के किसी भाग्य- विधाता को या पुरानें भाग्य-विधाताओं को बुरा न लगनें पाये । आज की पीढ़ी को जो इतिहास की जानकारी दी जा रही है , वह एक प्रकार की सेन्सर्ड हिस्ट्री कही जा सकती है , ताकि देश के सेकूलर ढाँचे पर आँच ना आये और वोट बैंक की राजनीति पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े । खैर , सरकारी इतिहास की पुस्तकों के अलावा देश के तमाम लोग अपनें-अपनें धर्म व मजहब और विश्वास के आधार पर इतिहास आनें वाली पीढ़ी को पढ़ा रहें हैं ।
           विषय से भटकनें से पहले ही हम मूल विषय पर आते हैं । हम बात कर रहें हैं अपनें देश की उस महान् परम्परा के बारे में , जिसे देश को लूटना कहते हैं । इतिहास साक्षी है कि जब से भारत में विदेशी आक्रमणकारियों नें भारत को लूटना प्रारम्भ किया तभी से उस परम्परा को जीवित रखनें का प्रयास हम भारतीय कर रहे हैं । मोहम्मद बिन कासिम या उसके पूर्व से जारी इस देश लूट की परम्परा को हम भारतीय छोड़ना भी नहीं चाहते । हमारा इतिहास गवाह है कि जयचन्द टाईप के लोग आपसी वैमनस्य में भी वैसे लूटेरों को अपनें देश में आनें की खुली छूट देते रहे हैं , और उसको बताते हैं कि कैसे देश की सम्पत्ति को लूटा जाये और फिर वह लूटेरा दोनों को लूटकर चल देता था , और कभी-कभी वह कई-कई बार लूट की घटना को अंजाम देता था ।
             हम भारत वासी तैमूरलंग जी और महमूद गजनी जी के या मोहम्मद गोरी जी के अत्यंत आभारी हैं जिन्होंनें हम देश वासियों के लूटनें की परम्मपरा को और मजबूत किया । बाद के दिमागदार आक्रमणकारियों को जब  हमारे  देश के समझदार मेजबानों नें देश को लूटनें का न्यौता दिया तो उन्हें लगा कि बार-बार यहाँ की सम्पत्ति को लूटकर और देश की महिलाओं व पुरुषों को गुलाम बनाकर अपनें वतन ले जानें से बेहतर है , यहीं रहा जाये और यहाँ के अतिथि देवो भव की भावना वाले , नमक खानें के बाद नमक हारामी ना करनें वाले , लालच के लिये अपनें भाईयों तक का खून करके कोई उपाधि पानें वाले भारत वासी स्वयं ही सारी ऐशो आराम की चीज उपलब्ध करा देंगे , और भगवान की कृपा से सब कुछ वैसा ही हुआ ।
             उसके बाद दौर शुरु हुआ , भारत में अग्रजों का और अन्य प्रकार के विदेशियों जैसे फ्राँसीसी और पुर्तगाली लोगों का , उन लोगों को जो भी हाथ लगा वे देश को नोंचकर ले गये । देश को लूटनें और नोचनें का ज्यादा लम्बा कार्यकाल अँग्रेज लोगों का रहा और हम भारतीयों की लूटनें की परम्परा का खूब पालन हुआ और हम भारतीय अपनी उस गौरवमयी परम्परा का पालन अनवरत करते रहे । जब अँग्रेज देश को लूटते-लूटते थक कर उब गये तब उन्होंनें देश का शासन भारतीयों और पाकिस्तानियों के हाथ में सौंप दिया । जिसको हम हिन्दी में स्वतंत्रता , ऊर्दू में आजादी और अँग्रेजी भाषा में इंडिपेन्डेन्स डे के रुप में मनाते हैं ।
              लूट की परम्परा का पालन भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में कायम है , जनता का ध्यान कहीं लूट पर ना चला जाये इसलिये ये दोनों देश बीच-बीच में देश की जनता को मूर्ख बनानें के लिये और देश-भक्ति जागृत करनें के लिये , एक दूसरे पर जुबानी वार करते हैं और भले ही देश की जनता भूखे मरे , एक दूसरे का नाश करनें के लिये युद्ध की सामग्री खरीदते हैं । हद तो तब होती है जब दोनों ही देश के राजा या बादशाह ( नेता-गण ) एक ही दुकानदार से सामान खरीदते हैं , वह दुकानदार अमेरिकी हो , फ्राँस का हो ईटली का हो या जर्मनी का हो । कभी-कभी ऐसा भी लगता है जैसे दोनों देश के खरीदार राजा या बादशाह एक ही साथ दुकान पर पहुँचते हैं और एक दूसरे से सलाह करके ही सौदा पक्का करते हैं । इन सब में कितनी लूट होती है इसका खुलासा कोई नहीं कर सकता क्योंकि देश की रक्षा के मसले पर आप कोई सवाल पूछे नहीं कि देश द्रोही घोषित हुए । बहरहाल खबर उड़ती है कि करोंड़ों रुपया या करोंड़ों डालर का घपला हुआ , रक्षा सौदे में । कुछ दिन हल्ला गुल्ला होनें के बाद दोनों ही देश के नागरिक किसी नये लूट के पर्व की प्रतिक्षा करनें लगते हैं ।
               हम भारत के लोग जो कि लूट के त्यौहार को बेहद जश्न पूर्वक मनाते हैं , उसमें अब मीडिया का रोल भी शामिल हो गया है । इन्डिपेन्डेन्स मिलनें के बाद देश में लूट का त्यौहार ज्यादा लोग नहीं मना पाते थे कि क्योंकि उस समय कुछ ऐसे नेता थे जिनको सत्यमूर्ति कहा जाता था , वे जो कह देते थे वह ब्रह्म-वाक्य सरीखा होता था , वे कहते हम देश को नहीं लूटे या फलानें नें देश को नहीं लूटा , हम देश वासी उनकी बात मानकर चुप हो जाते थे ।
                अँग्रेजों के आगमन के पूर्व जिस प्रकार देश की सम्पत्ति को लूटकर या यहाँ की महिलाओं और पुरुषों को गुलाम बनाकर विदेश ले जानें की परम्परा रही है , अँग्रेजों नें उस परम्मपरा का कुछ सीमा तक पालन किया । बाद में उस परम्मपरा के निर्वहन में कुछ गिरावट आई । इन्डिपेन्डेन्स भारत में शुरुआत में यह लूट की परम्परा लगभग लुप्त होनें के कगार पर थी , लेकिन देश वासियों के सौभाग्य से  विगत २०-२५ साल से देश में इस प्रकार की लूट की परम्परा का पालन बड़े पैमानें पर किया जा रहा है । हमारा देश पर्व और त्यौहारों को उत्साह-पूर्वक मनाता है , उसी उत्साह और जोश के साथ , हम लूट रुपी पर्व को मनाते आ रहे हैं । इस पर्व की कोई तिथि या मुहुर्त नहीं होता , जब जिसको मौका मिला , इस पर्व को मना लेता है और हम देशवासी उसके जश्न में शामिल हो जाते हैं ।
             इतिहास अपनें को दुहरा रहा है , आज के समय में फिर वही ऐतिहासिक घटना हो रही है , और देश की सम्पत्ति को लूटकर हमारे वर्तमान् भाग्य-विधाता शासक वर्ग के लोग , विदेशों में हमारे देश का लूटा हुआ  धन जमा कर रहें हैं । पता नहीं उन सबकी योजना क्या है ? लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि उन्हें शंका है कि कभी ना कभी इस देश की जनता जो शीत-निद्रा में है जाग जायेगी और लूट की परम्परा को रोकनें का प्रयास करेगी , तब वैसे लोग इस देश को उसी प्रकार छोड़ देंगे जिस प्रकार , अँग्रेजों ने छोड़ा था , तब वैसे समय में विदेशों में जमा धन ही सहायक होगा ।
              फिलहाल ऐसा सोचना अभी बहुत गलत होगा , क्योंकि हम भारतवासी लूटे जानें के लिये ही बनें हैं , और बहुत दिन तक यदि कोई ठीक से नहीं लूटता तो , हम भारतवासियों को बैचैनी होनें लगती है । फिर से मन्दिरों में सोनें जमा हो गये हैं , देश वासी विकास के जश्न में लगे हैं , देश फिर सोनें की चिड़िया बननें की ओर है , पता नहीं  किसी देश-भक्त नें तैमूर जी या महमूद गजनी जी को खबर दी या नहीं । हम भारतवासी चादर तानकर सो रहें हैं , अगली कोई अच्छे किस्म की लूट देश में हो तो जगा देंना , ताकि लूट के जश्न को हम भी मीडिया के साथ सेलीब्रेट कर सकें ।
                                             Thanks .
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रविवार, 21 अक्टूबर 2012

रावण के पुतले का दहन --- ।


            विजय दशमी करीब है , फिर से रावण के पुतले जगह-जगह पर जलाये जायेंगे । बुराई पर अच्छाई की जीत पर प्रवचन होंगे , फिर साल के ३६४ दिन रावण का भूत हावी होगा और साल भर बुराई ही बुराई नजर आयेगी । रावण के पुतले को जला देने से काम नहीं चलनें वाला , रावण को अपनें अन्दर से निकालनें की कोशिश होनी चाहिये । रावण लंका का राजा था , उसके भीतर दस महा-बलवानों की ताकत थी , दस महा-विद्वानों जितना ज्ञान था , यानि हर चीज वह दसगुना था । लेकिन यदि आज रावण जिन्दा होता तो निश्चित रुप से उसका सारा धमण्ड चूर हो जाता जब वह देखता कि एक बिना पढ़ा-लिखा नेता भी उससे सौगुना ज्यादा विद्वान है , और मक्कारी में भी  रावण जी उनसे सौगुना पीछे होते । 
           मैं दशानन रावण को चुनौती देता हूँ कि यदि उसमें या उसकी आत्मा में इतनी ताकत है तो वह हमारे देश में आकर देख ले , एक गली का नेता भी उसे किसी भी फील्ड में मात देनें के लिये तैयार है । एक रावण को मारनें के लिये , प्रभू को कितनी माया फैलानी पड़ी । आज कितनें भी प्रभू अवतरित हो जायें , आज के रावणों को मारा नहीं जा सकता , क्योंकि आज के विभीषण भगवान श्रीराम के साथ नहीं बल्कि कलयुगी रावण के साथ हैं और वे भगवान श्रीराम को परास्त करनें के तरीके खोज रहे हैं । कलयुगी हनुमान बिना फायदे के अब भगवान के साथ रहनें वाले नहीं हैं । कलयुगी लक्ष्मण , अब तमाशबीन ही बने रहना चाहते हैं ।
            प्रभू आपनें गीता में आश्वसन दिया है कि जब जब धर्म की हानि होगी मैं अवतरित होऊँगा । हम भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम लोग जो आप पर यकीन करते हैं , आपकी राह तक रहे हैं । हम सभी आश्वस्त हैं कि कुछ दिन में आप अवश्य अवतार लेंगे , क्योंकि अब धर्म की हानि ही नहीं , बल्कि वह विलुप्त होनें के कगार पर है । यदि आपनें और विलम्ब किया तो , हम यही मानकर चलेंगे कि यह भी आपकी ही इच्छा है कि देश में दुनिया में अधर्म और पाप का विस्तार हो । सारे देश और सारी दुनिया पर शैतानों का कब्जा हो जाये । 
            प्रभू जी , जब आप अवतार लेनें की सोचना तो , कुछ ऐसी व्यवस्था करना , ताकि लोगों को विश्वास हो जाये कि आप अवतरित होनें वाले हैं , क्योंकि बिना पूर्व सूचना के यदि आप आये तो आपसे इतनें किस्म के सवाल पूछे जायेंगे कि आप सोचनें पर मजबूर हो जायेंगे कि कहीं गलत समय पर अवतार तो नहीं ले लिया  , इसका समाधान मैं आपको सूझा सकता हूँ , वह यह कि आप केवल मुझमें ही ऐसी समझ और बुद्धि देना ताकि मैं लोगों को बता सकूँ कि आप ही एक मात्र सारे जहाँ के मालिक हो , ये सूरज , चाँद , तारे ,आकाश , समुद्र , नदियाँ  ,सारे जीव , और सारे कायानात को आपनें ही बनाया है और आप के द्वारा ही वे रौशन हैं और आपके आदेश पर वे अपना काम कर रहे हैं । 
            सवाल ये उठता है कि यदि आप अवतार ले भी लें या मेरे माध्यम से अपना सन्देश दें , तो भी देश में कोई विश्वास करनें वाला नहीं होगा , क्योंकि , देश में इतनें फ्राड किस्म के लोगों नें अपनें को ईश्वर डिक्लेयर कर रखा है कि लोगों को अब ईश्वर पर भी विश्वास नहीं रह गया है । 
            जानते हैं प्रभू , हमारे देश में लोगों को किसी पर भी श्रद्धा उमड़ पड़ती है , चाहे वह कितना भी गया गुजरा क्यों ना हो , जब वैसा गया गुजरा व्यक्ति देख लेता है कि हजार दो हजार लोग उसके मानसिक रुप से गुलाम हो गये तो वह तुरन्त ही अपनें को आपके स्तर का बतलानें लगता है और वह तुरन्त ही अपनें आपको ईश्वर घोषित कर देता है , आश्चर्य तो तब होता है जब उसके मूर्खतापूर्ण बातों पर लोग अमल शुरू कर देते हैं । मेरे एक मित्र हैं खेदू भाई , उन्होंनें ऐसे ही एक भगवान के बारे में उसके एक समर्थक से कुछ शंका मिश्रित प्रश्न पूछे तो , बेचारे खेदू को गाली खाना पड़ा , खेदू भाई को बाद में पता चला कि उनकी पत्नीं भी उक्त भगवान की समर्थक थीं , खेदू के उक्त भगवान के सम्बन्ध में शंका-पूर्ण प्रश्न की  जानकारी  खेदू की पत्नीं को हुई तो बेचारे खेदू को  अपनी पत्नीं के हाथों , मानसिक व शारीरिक रुप से प्रताड़ित होना पड़ा ।
               मेरी बातों से प्रभू जी आप भी खिन्न हो रहे होंगे , लेकिन मैं करुँ तो क्या करूँ । यही वह लाईन है जहाँ यदि दो चार समझदार आदमी , किसी को , कुछ खास गुणवाला कहकर प्रचारित कर दें तो , लोग उत्सुकतावश जाननें की कोशिश करते हैं कि वास्तव में इसमें कोई खास गुण है या नहीं , उनकी यही उत्सुकता , उन्हें शिकार बनाती है । जहाँ दो चार पढ़े लिखे गलती से जाल में फँसे तो समझ लीजिये प्रभू कि मेरा काम बन जायेगा , क्योंकि उन पढ़े-लिखे लोगों को जाल में फँसते देख , अनपढ़ व गँवार लोग स्वयं ही जुटनें लगेंगे , और फिर वे लोग स्वयं ही मेरे प्रचारक बन जायेंगे और फिर मुझे नये जाल फैलानें की जरुरत ही नहीं होगी ।  इस प्रकार मैं लाखों करोड़ों लोगों के द्वारा सम्मान पाता हुआ , अमर हो जाऊँगा ।
                  हे मेरे परम् पूज्य प्रभू , यदि आप की कृपा रही तो , मैं सारी मानव जाति को एकदम नय़ी सोच ,नये विचार दूँगा और ना तो कोई रावण रहेगा ना ही आपको अवतार लेनें की जरुरत होगी । फिलहाल नगाड़े बज रहे हैं , राम लीला का मंचन हो रहा है , रावण के पुतले को अन्तिम रुप दिया जा रहा है ताकि विजय-दशमी यानि दशहरा के दिन उसका दहन किया जा सके । मैं तो चला रावण के पुतले के दहन की तैयारी को देखनें , हो सके तो आप भी देखियेगा रावण के पुतले का दहन , दशहरे वाले रोज -- happy Vijai-Dashmi . 
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शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

डकैतों के प्रवक्ता पर चोरी का आरोप --

        
                  सर्वप्रथम मैं उन तमाम लोगों से एडवांस क्षमा माँगता हूँ कि जिन लोगों को मैं कमीना , देश का लूटेरा , भ्रष्टाचारी , बेईमान् , टुच्चा और वे सभी गालियाँ जिनको यहाँ लिखना संभव नहीं , दे रहा हूँ , वे मुझे उन सभी गालियों और उपाधियों  के लिये क्षमा करेंगे , क्योंकि स्वयं मेरे पास वैसे लोगों के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं है , जिनके लिये मैं उन्हें गालिया आदि परोस रहा हूँ । जो भी सुनी- सुनायी या पढ़ी-पढ़ायी जानकारी मेरे पास है वह पत्र-पत्रिकाओं के पढ़नें या समाचार चैनलों की कृपा से है । 
                  आप सोच रहे होंगे कि किस डकैतों के गिरोह का मेम्बर चोरी जैसी गिरी हुई घटिया हरकत कर सकता है , क्योंकि उसके चोरी जैसी हरकत के कारण डकैतों के अन्य समूहों के बीच उनकी साख को गिरनें  का खतरा हो सकता है । डकैतों के समूह का सरदार कौन है ये किसी को नहीं मालूम , क्योंकि दल का सरदार हमेशा किसी दूसरे को सामनें कर देता है और बाद में लोग जान पाते हैं कि वह सरदार नहीं कोई सेवक था , जिसे कुछ देर के लिये सरदार के रुप में पेश किया गया था ।
                  बात हम उस चोर की कर रहें हैं जिसके कारण डकैतों के दल की साख को खतरा पहुँचनें की संभावना है । प्रगतिशील युग में डकैतों के प्रवक्ता भी बन गये हैं । एक स्वयंभू प्रवक्ता नें ताल ठोंका है - हम डकैत हैं , देश का माल लूट सकते हैं , लेकिन हमारा कोई सदस्य चोरी जैसी ओछी हरकत नहीं कर सकता । 
                  जनता के बीच से आवाज आयी , उस चोर नें बेचारे अपाहिज , चलनें-फिरनें पर मजबूर विकलाँग लोगों को दिये जानें वाले पैसे को चुरा लिया ।
                 डकैतों के प्रवक्ता नें कहा - वह हमारे दल के लिये जान तक देनें की बात दो-चार दिन पहले कर चुका है उसकी निष्ठा पर हमारे दल के सरदार और समूह के अन्य सदस्यों को कोई संदेह नहीं है , जरुर आप लोगों को गलत फहमी हुई है या किसी नें अफवाह उड़ाई है । चोरी या चोरी-चोरी किये गये वैसे कार्य जैसा कि माननीय अभिषेक मनु सिंधवी जी नें या नारायण दत्त तिवारी जी नें किया , उसकी हम ना ही प्रशंसा करते हैं ना ही भर्त्सना करते हैं । क्योंकि वैसे कार्य अत्यंत तुच्छ प्रकृति के होते हैं जिनपर ध्यान देना हम बड़े लोगों का कार्य नहीं है ।
                 सब तो ठीक है लेकिन हम आपहिजों का पैसा क्यों चुराया - जनता नें हूँकार भरी ।
                 प्रवक्ता नाक में ऊँगली डालते हुए बोला - तुम लोगों को मुफ्त का माल चाहिये । क्या वह पैसा तुम लोगों के बाप का था , जो चिल्ला रहे हो चुरा लिया , चुरा लिया । उसके ट्रस्ट का पैसा था वह उसे बाँट कर खाये या अकेले खाये । तुम्हारे बाप के पेट में दर्द क्यों हो रहा है , जो टोपी वाले केजरीवाल के साथ हल्ला करनें पर अमादा हो ।
                  तुम नेता लोग , ये तमाम कम्पनियाँ और ट्रस्ट इतनें आराम से कैसे खोल लेते हो - जनता के बीच के एक पढ़े-लिख विकलाँग नें प्रश्न फेंका ।
                  प्रवक्ता नें लपकते हुए उत्तर दिया - इसके लिये तुम जनता ही जिम्मेदार हो , हम सभी दल के नेताओं को यह खतरा बना रहता है कि कहीं तुम लोग हम लोगों को बेरोजगार ना बना दो या हम लोगों को अपनें कारनामों के कारण देश छोड़कर भागना पड़े तो हम नेता लोग क्या करेंगे क्योंकि किसी भी नेता को स्वयं कुछ करनें आता ही नहीं वास्तव में हम नेता लोग किसी काम के लायक होते भी नहीं  , वैसी दशा में अपनें जीवन-यापन के बारे में सोचकर हम सभी दल वाले एक समझौते के तहत कम्पनी और ट्रस्ट बनाते हैं ताकि यदि देश से भागना पड़े या बेरोजगारी की दशा  आये तो अपना खर्च चलता रहे ।
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सोमवार, 8 अक्टूबर 2012

वफादारी पर शक नहीं -- ।




दरवाजा खोलिये ना , काहे अकेले कमरे में बन्द पड़े हैं ?
दरवाजा नहीं खोलेंगे , जो कहना है , खिड़की से कहो ।
बाहर , कोई देख लिया आपसे बात करते तो ?
फिर तुम चुपके क्यों आते हो ?
आप सबके सामनें सेन्सर्ड बात करते हैं इसलिये , चोरी-चोरी आना पड़ता है ।
क्या पूछना चाहते हो ?
यही की सलमान खुर्शीद नें अपनीं जान कुर्बान करनें को कहा है ।
सुना तो मैनें भी है , इसमें क्या खास है ?
क्योंकि वफादारी में वे सारे टामियों और मोतियों से आगे निकल रहे हैं , आपके लिये खतरा नहीं है ?
मेरे लिये कैसा खतरा , मुझे वफादारी दिखानें की जरुरत ही नहीं पड़ती है ।
फिर भी , मैडम की वफादारी को लेकर कम्पटीशन तो आप लोगों में रहता ही होगा ?
कैसा कम्पटीशन , मैं थका हुआ लगता हूँ लेकिन मौका मिलनें पर ----
हाँ , पार्लियामेंन्ट में आपकी आवाज को मैनें टीवी में सुना था , कमाल की आवाज थी , जर्मन शेफर्ड भी  शर्मा जाये ।
और कुछ पूछना है ?
ये केजरीवाल दहाड़ रहा है , जंगल में शेर की तरह , और देश के दामाद वाड्रा जी पर कमेंन्ट कर रहा है ।
मूर्ख है , वो क्या जानें , देश हमारी मलकिन का है , वे उसे बेटा को दें या दामाद को , दर्द उसे क्यों होता है ?
यही बात तो हम चाहते हैं कि आप सार्वजनिक रुप से , इस बात को जनता को समझा दें ।
देश में दहेज देनें की परम्परा है , जिसकी जितनी औकात होगी वह उतना दहेज देगा ही । जलनें वाले जलें ।
वाड्रा जी , के बारे में आपके क्या विचार हैं ?
वाड्रा जी के बारे में कोई विचार प्रकट करनें की हमारी औकात है , क्या ?
क्यों , आपको तो पूरा अधिकार है कुछ भी कहनें का आखिर आप देश के -- ।
देखो आदमी को अपनी औकात में रहना चाहिये , मैं स्वामिनी-भक्त था , हूँ और सदैव रहूँगा , कोई शक ?
ना -- ना --- हमें और देश वालों को आपकी और तमाम टामियों और मोतियों की वफादारी पर कोई शक नहीं है ।
बहुत हो गया अब जाते हो या जोर से भौकूँ ।
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मंगलवार, 2 अक्टूबर 2012

पहले आओ - पहले पाओ -- ।

                खेदू बड़े खिन्न नजर आ रहे थे , मुझसे रहा नहीं गया , पूछ बैठा - काहें नेनुआ ऐसा मुँह बनाये हो खेदू । खेदू छुटते ही बोले सेल लगी है , लल्लन भाई , त्योहार आ रहा है ना , आफर है पहले आओ , पहले पाओ । ऐसा तो हर जगह होता है , जब स्टाक सीमित हो तो सही चकाचक माल वही पाता है जो पहले आता है - मैंनें समझाया । सेल मे कुछ भी चकाचक नहीं होता , सारा नाटक केवल महिलाओं और बच्चों को बहलानें के लिये होता है , उस समय पति की बात की औकात वही होती है जो मन मोहन जी की बात की सोनिया जी के सामनें होती है । पहले आओ - पहले पाओ की बात तो और भी कहीं सुना था खेदू भाई । लल्लन भाई ,२ जी घोटाला , कोयला घोटाला में भी यही पहले आओ पहले पाओ की नीति लागू हुई  थी , लेकिन दोनों का प्रभाव अलग-अलग होता है । कपड़े आदि के सेल में आपके सामनें सामान रहता है , जबकि २-जी या कोयला जैसी चीजों के लिये , ना तो किसी को पहले बुलाया जाता है ना ही कोई पहले आकर कुछ पाता है , बन्दा सेल लगनें से पहले ही एडवांस में बुक करवा लेता है और , जनता चिल्लपों करती रहती है । सेल लगनें से पहले ही सब कुछ सेल हो जाता है फिर होती है सेल में गड़बड़ी की जाँच । बाकी की बातें बतानें की जरुरत नहीं है । ठीक कहे , खेदू भाई , हमको केवल डर इस बात का है कि कहीं अपनें देश को ही पहले आओ ,पहले पाओ के बहानें , भाई लोग सेल न कर दें । लल्लन भाई , कुछ भी असंभव नहीं है , भाई लोगों के लिये ।

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

हैप्पी बर्थ-डे बापू जी ---- ।



                आदरणीय बापू ,
                                 आज २ अक्टूबर यानि आपको याद करनें का त्योहार है । देश में जहाँ-जहाँ आपकी फटी हुई धूल से भरी हुई उलटी तस्वीरें लटकी हैं और जहाँ-जहाँ आपकी मूर्तियाँ लगी हैं , उस पर जमी धूल और पक्षियों के बीट उस पर से साफ किये जा रहे हैं । देश भर में लोग आपके बताये मार्ग पर चलनें की वही पुरानी कसम दुहरानें की तैयारी में हैं और आपके विचारों को दूसरों को अपनानें का संकल्प दिलवायेंगे ,भले ही स्वयं उसको ना अपनाये , देश के नेता व मंत्री आज सुबह से ही लकदक सफेद वस्त्र में कहीं उपदेश देते नजर आयेंगे । लेकिन जिन नेताओं नें ६५ सालों में आपके विचारों को नहीं अपनाया अब क्या वे खाक अपनायेंगे । 
                               हम बहुत सी बातों का जिक्र करके आपकी आत्मा को विचलित नहीं करना चाहते हैं । फिर भी कुछ ऐसी चीजें हैं जो आपके सच्चे अनुयायियों को हमेशा खटकती रहती हैं । आपनें जो स्वप्न देश के लिये देखे थे , वे सभी आपकी तस्वीरों की तरह ही उलटे लटके हैं , एकदम चमगादड़ के माफिक । आपके विचार केवल गरीबों और कमजोरों के लिये सुरक्षित व आरक्षित कर दिये गये हैं । अन्य लोगों जिनमें देश के तमाम भाग्य-विधाता यानि मंत्री , सांसद , नेता , अधिकारियों तथा कर्मचारियों को आपके विचारों को अपनानें से मुक्त कर दिया गया है । 
                              २ अक्टूबर को ही एक अन्य महान् व्यक्ति लाल बहादुर शास्त्री जी नें जन्म लिया था । वे देश के प्रधानमंत्री भी बनें ,भले ही कम लोगों को उनके बारे में जानकारी हो । यह भी अजब संयोग है कि गोली मारकर आपकी आत्मा को आपके नश्वर शरीर से मुक्त किया गया । शास्त्री जी की आत्मा को उनके नश्वर शरीर से अलग  करनें में किस रासायनिक प्रक्रिया को अपनाया गया इसका रहस्य अभी तक बरकरार है । 
                             बापू जी , लिखनें को बहुत कुछ है लेकिन सब कुछ नहीं लिखा जा सकता है , क्योंकि हमारा देश पर्दा-प्रथा वाला देश रहा है , आप भी जानते हैं । पर्दा-प्रथा आज बदल गई है , और वह केवल घोटालों , लूटों , भ्रष्टाचार और तमाम काले करनामों पर लागू होती है । पर्दा-प्रथा का कड़ाई से पालन , विदेशों में जमा काले-धन को ढकनें में , देश को लूटनें वालों को ढकनें के लिये किया जा रहा है ।
                             सारी बातों को नजर अन्दाज करते हुए बापू -- हैप्पी बर्थ डे ।
                             

                            

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