- इधर आप लालू जी के चेहरे को देंखे तो जाहिर होगा कि उनके ख्वाब को झटका लगा है । जिस काँग्रेस के लिये बेचारे नें अपनें सारे सिद्धान्तों को ताक पर रख कर , जय प्रकाश जी के पुरानें शिष्य होनें के बावजूद , काँग्रेस के पीछे चलनें पर मजबूर हुए , वही काँग्रेस आज लालू जी के राजनीतिक बैरी , नीतिश का गुणगान कर रही है, काँग्रेस की पुरानी चाल है , मजबूत को साथ रखो , कमजोर को फेंक दो ।
- काँग्रेस नें मायावती और मुलायम सिंह जैसे दुश्मनों को CBI का भय दिखाकर अपनें साथ रहनें पर मजबूर किया , उसी प्रकार का काम नीतिश और लालू के साथ काँग्रेस करनें वाली है । लालू जी नें नीतिश के गुप्त कारनामों के बारे में लोगों को बताना शुरु किया , जिसका लाभ लालू जी की जगह काँग्रेस ले गई । काँग्रेस ने हो सकता है नीतिश के बारे में कई ऐसी सूचनाएँ एकत्र कर ली हों जो नीतिश के ईमानदार वाली छवि के विपरीत हों , वरना १७ साल पुरानें गठबन्धन को एक झटके में खत्म करना आसान नहीं होता है ।
- यह तो सभी जानते हैं कि नेताओं की बहुत से मजबूरी होती है और वह लाख कहे , उसे बहुत से ऐसे फैसले लेनें पड़ते हैं जो सही नहीं होते । नेता कभी बेदाग हो ही नहीं सकता । नीतिश लाख कहें कि मैं ईमानदार नेता हूँ लेकिन क्या एक ईमानदार नेता इस काबिल हो सकता है कि वह चुनाव भी लड़ सके ।
यह ब्लाग स्वतंत्र लेखन के रुप में है । कृपया , इसमें लिखी सामग्री का प्रयोग आप बिना मेरी अनुमति के ना करें ।
सोमवार, 17 जून 2013
बिहार की राजनीति और लालू ----
बुधवार, 5 जून 2013
सट्टेबाजी और क्रिकेट - सरकार जुए को वैध क्यों नहीं वैध कर देती ?
- हम भारतीय लोगों का ऐतिहासिक शौक जुआ खेलना रहा है । महाभारत काल में जो जुआ खेला गया , उसका परिणाम भयानक युद्ध के रुप में सामनें आया ।
- मनमोहन सिंह को देश का प्रधानमंत्री बनाकर सोनिया नें देशवासियों के साथ जो जुआ खेला उसका नतीजा तमाम घोटालों के रुप में देश के सामनें आया । फिर भी देश की जनता मनमोहन सिंह को झेलनें पर मजबूर है ।
- नेहरू जी नें चीन के साथ मित्रता करनें और पंचशील के सिद्धान्त पर चलनें का जुआ खेला जिसका परिणाम १९६२ का युद्ध और चीन द्वारा हमारे देश के भूभाग को हड़प लेनें के रुप में सामनें आया , और उस युद्ध में हमारे देश को हार मिली । उसी का परिणाम है कि चीन हमेशा हमारे देश को धमकाता रहता है , और देश के कुछ और हिस्से पर कब्जा करना चाहता है ।
- पाकिस्तान के साथ हमारे नेता लगातार दोस्ती का जुआ खेल रहे हैं । हर बार हमारे नेता उस जुए में सफलता का भ्रम पाले नया-नया दाँव लगाते हैं लेकिन हर बार मुँह की खानी पड़ती है , क्योंकि पाकिस्तान में , एक नहीं हजारों शकुनी के बाप जैसे मक्कार लोगों की जमात है जो भारत के युधिष्ठिर जैसे नेताओं को मात देनें के फिराक में रहते हैं । हमारे देश के मूर्ख नेता यह मानते हैं कि , पाकिस्तान के सामनें हाथ जोड़कर खड़े रहनें से देश के मुसलमान खुश रहेंगे और वोट देंगे । देश पर होनें वाले जेहादी हमलों के रुप में इसका परिणाम आज हमारे सामनें है ।
- बात करते हैं देश के क्रिकेट खेल की - यह आज के अरबपतियों व खरबपतियों की कमाई का साधन बन गया है तथा जुआ खेलनें वालों यानि सट्टेबाजों के लिये भी यह उच्चकोटि का खेल बन गया है । चूँकि हम भारतीय पिछले हजार वर्षों से तरह-तरह के जुँए खेल कर देश तक को हार बैठनें का साहस रखते हैं , और जुए में हारना देश की नियति बन चुकी है , इसलिये दूर बैठा कोई डान हम देश वासियों के धन को लूटनें के लिये क्रिकेट के खेल का इस्तेमाल सट्टे यानि जुए के लिये कर रहा है , जिसमें देश के बड़े-बड़े व्यवसायी , खिलाड़ी और नेता लोग शामिल होंगे ।
- अब समय आ गया है कि देश की जनता , अपनी आवाज बुलन्द करे और सभी प्रकार के जुए , सट्टेबाजी , कुकर्म , दुष्कर्म को वैध घोषित करे , ताकि चोरी-छिपे वैसे काम करनें का अपराध-बोध किसी में ना रहे और कलमाडी , राजा , श्रीसंत और इन जैसे अन्य तमाम नीच लोगों के मन में ग्लानि ना पैदा होनें पाये । इसका परिणाम बड़ा ही सुखद होगा , हर गली मोहल्ले में लोग शान्ति के साथ दांव पर दांव लगाते नजर आयेंगे , पुलिस या कानून का खौफ किसी को नहीं रहेगा । जनता दांव लगानें के लिये पैसा कमानें का प्रयास करेगी जिससे हो सकता है कि देश का और विकास हो सके । अमेरिका जैसे देश के विकास के पीछे यही सोच है , वहाँ सरकार को जैसे ही पता चलता है कि लोग चोरी छिपे कोई काम कर रहे हैं , सरकार उसे वैध घोषित कर देती है जिसके कारण वहाँ के पुलिस वाले केवल हत्या , लूट , डकैती जैसे अपराध करनें वाले अपराधियों को पकड़नें का प्रयास करते हैं , जबकि हमारे देश की पुलिस बड़े अपराधियों को पकड़नें की हिम्मत ही नहीं कर पाती , बल्कि उनके संरक्षण में लगी रहती है ।
- मनमोहन , नहीं-नहीं सोनिया जी से , जिनके सामनें काँगेस के किसी नेता को कुछ बोलनें का अधिकार नहीं है , अनुरोध है कि वे , लूट-खसोट , घोटाला-भ्रष्टाचार , जुए-सट्टेबाजी , और तमाम ऐसे कार्यों को जिसे हम गलत कार्य या दुष्कर्म-कुकर्म आदि कहते हैं , कानून बनाकर उसे वैधानिक दर्जा प्रदान करवानें की कृपा करें । सोनिया जी इस समय सब कुछ करनें में सक्षम हैं - जैसे मनमोहन को प्रधानमंत्री , शिन्दे को गृहमंत्री , एन्टनी को रक्षा मंत्री और CBI को पंगु बनानें का काम उनकी इच्छा पर हुआ है , वैसे ही ----- -------- ----- ।
गुरुवार, 13 दिसंबर 2012
सोनिया मैडम गजब की सपेरिन हैं । मुलायम और माया रुपी खतरनाक साँपों कि जो कि एक दूसरे की जान के प्यासे रहते हैं , मैडम नें ना जानें कौन सी जादू की लकड़ी सूँघा दी है कि जब मैडम के हित की बात होती है तो वे दोनों ही आपसी संग्राम को बन्द कर देते हैं और एक सुर में मैडम की आरती उतारनें लगते हैं ।
अभी वाल मार्ट का मामला चल रहा है , जबकी संसद के दोनों सदन में , मुलायम व माया के अघोषित युद्ध विराम से जो कि सोनिया मैडम के भय के कारण हुआ वाल मार्ट नें भारतीय नेताओं की प्रवृत्ति को परखते हुए , कुछ करोंड़ रुपये खर्च करके भारतीय अर्थव्यवस्था पर घुसपैठ करनें का जुगाड़ कर लिया है । कमाल यह है कि जनता को बताया जा रहा है कि वाल मार्ट के आनें से देश के लोगों के लाभ होगा , यहाँ उन लाभों को गिनानें की जरुरत नहीं है ।
बात हो रही थी मुलायम और माया जैसे खतरनाक साँपों कि जो मैडम सोनिया के सामनें दन्त-विहिन और विष-विहिन हो जातें है । पूरे देश नें देखा किस प्रकार माया और मुलायम नें देंश की महान जनता को सदैव की तरह मूर्ख समझकर , खूब कोसा मालमार्ट को , लेकिन जब फैसले का वक्त आया तो दोनों सापों नें मैडम के पिटारे में रहना ज्यादा पसन्द किया । पता नहीं हमारे देश की जनता कब तक जाति पाँति आधारित सोच को ढोती रहेगी जिसका फायदा तमाम नीच किस्म के नेता सदा से उठा रहे हैं ।
अब बात चल निकली है , नौकरियों में प्रमोशन पर आरक्षण की । दोनों साँपों को मैडम , अपनें पिटारे से उस समय निकाल देती हैं जब , देश को डँसनें जैसा कोई काम नहीं रहता । छोटे-मोटे , अन्य कई और भी साँप हैं जो मैडम को बताते रहते हैं कि हम भी विषधर हैं और देश को स्थायी रुप से डँस सकते हैं , लेकिन मैडम कुशल सपेरिन हैं , सभी साँपों को सही समय पर विष निकालनें का अवसर प्रदान करती है ।
हाँ , बात नौकरी में प्रमोशन को लेकर हो रही थी । मैडम की पार्टी नें नौकरी में प्रमोशन का झुनझुना बजाया था , माया नें मैडम से परमिशन लेकर इसके पक्ष में बोलना शुरु कर दिया है , और मुलायम नें खिलाफ में । उत्तर प्रदेश की जनता में फिर टकराव होगा , लोग मरेंगे , ये दोनों साँप अपनें राजनीतिक विष को उगलेंगे जिससे इन दोनों साँपों को फायदा होगा , और जनता के बीच जाति की खाईं और चौड़ी होगी , जो कि मैडम सोनिया के देश पर हुकूमत के लिये आवश्यक है ।
हे , देश प्रदेश की जनता , आप लोग कब तक मूर्ख बनते रहोगे । ये मुलायम और माया ,रुपी साँप देश की महान सपेरिन सोनिया जी के पिटारे के साँप हैं उनके विष-दन्तों को निकालना और पुनः लगा देंना मैडम को बखूबी आता है ।
इस समय प्रमोशन- प्रमोशन खेलनें के लिये इन दोनों साँपों को मैडम सपेरिन नें अखाड़े में उतार दिया है । दोनों साँपों का एक दूसरे पर विष प्रहार जारी है । जनता भ्रमित है । समझदार साँप अगल-बगल हो गये हैं । लालू और पासवान को कोई रूचि नहीं है अपना जहर खराब करनें में । कोई भी काँग्रेसी साँप अपना जहर नहीं उगल रहा है । वह गिद्ध , चील और कौवे के समान , युद्ध भूमि पर निगाह रखे है । कई अन्य प्रकार के साँप भी हैं जो इन्हीं के बीच अपनें विष-वमन की सोचते होंगे लेकिन अनुकूल समय न होनें के कारण चुप हैं ।
जनता से अनुरोध है कि वे इन साँपों का पहले से फिक्स प्रमोशन-प्रमोशन के खेल को ना देखे , अन्यथा जहर की बूँदें उसपर पड़ सकती हैं , जिसका फिर कोई इलाज संभव नहीं है ।
बुधवार, 12 दिसंबर 2012
देश बिकाऊ है खरीदोगे ?
सर्दी के मौसम के कारण शाम के समय दुकान पर कोई ग्राहक नहीं आया । दुकान बन्द होनें का समय होनें को आया । तभी दुकान पर मालदार टाईप का सख्श आया और बोला - टुकड़े-टुकड़े में दोगे तो खरीदूँगा । मैं समझा नहीं, मैंनें कहा । वह धीरे से बोला - धीरे -धीरे खरीदूँगा तो दिक्कत नहीं होगी । मैनें कहा - क्या बहुत ज्यादा लेना है । वह बोला यदि सब कुछ सही और मेरी सोच के अनुसार हुआ तो सारा लेंनें की कोशिश करूँगा । अभी कितना दूँ मैनें पूछा । वह बोला - इन सब कामों में इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं होती है । मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये किस जल्दबाजी की बात कर रहा है । मैंनें फिर भी शालीनता से कहा - जब आप को लेंनें की जल्दी नहीं तो हमें देंनें में भला क्या जल्दबाजी करनी ।
वह बोला - इसे कहते हैं समझदारी वाली बात । फिर बोला , आप जयचन्द या मानसिंह के रिश्तेदार तो नहीं हैं । मैनें पसीना पोंछते हुए कहा , जय बाबू हमारे पड़ोसी हैं रिश्तेदार नहीं हैं और मान बाबू भी अलग बिरादरी के हैं । वह बोला - अच्छा मजाक करते हैं । पसन्द आया ।
मेरी समझ में नहीं आया कि मैंनें क्या मजाक किया है , जो ये मेरी तारीफ कर रहा है । मैंनें जोर देकर कहा , साहब मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ वे लोग ना तो मेरी बिरादरी के हैं ना ही मेरे रिश्तेदार हैं । वह जोर से हँसते हुए बोला - आप तो प्रेजेन्ट टेंस में उन लोगों का नाम ले रहे हैं । मैंनें घबरा कर पूछा- ऐसा क्यों कह रहे हैं भाई साहब वे लोग तो अभी जिन्दा हैं । वह बहुत जोर से ठहाका लगाकर बोला - आप रियली बहुत उच्च कोटि के विजनेसमैंन हैं , और हर तरह से मुझे जाँच परख लेना चाहते हैं ।
मैंनें फिर घबरा कर कहा - मैं आप को परख नहीं रहा हूँ , बता रहा हूँ । वह बोला - चलिये अब डील किया जाये । मैंनें पूछा क्या डील करना है । वह बोला - देखिये आसाम और बिहार से शुरु करते हैं । मैंनें कहा - आसाम और बिहार से , क्यों मैं तो बंगाल -- । वह बात कर बोला एक साथ तीनों को सम्भालना मुश्किल हो जायेगा । मैंनें कहा - मैं उसे बढ़ियाँ पैक कर दूँगा , कोई दिक्कत नहीं होगी । वह बोला - ठीक है , हम लोग गुप्त भाषा में ही बात करते हैं । मैंनें कहा - देखिये मैं गुप्त भाषा में नहीं साफ-साफ बात कर रहा हूँ । वह बोला अभी हम केवल असम और बिहार की ही डील कर लेते हैं । मैंनें अनजानें में हाँ कह दिया । वह बोला - मैं जानता था कि कोई ना कोई मिल ही जायेगा बेचनें वाला । मैंनें कहा - मैं यहाँ अकेले नहीं हूँ , और भी लोग बेचते हैं । लेकिन मुझे लगता है कि आपके यहाँ से खरीदनें में ठीक रहेगा । मैंनें कहा - देखिये मैं अब घर जानें की जल्दी में हूँ । वह क्रोधित होकर बोला - इतनी बड़ी डील करनें चले हो और , घर की जल्दी में हो । तुम जैसे लोग सही बेचनें वाले नहीं हो ।
वह बोला - क्या तुम्हारे घर में बैठकर डील के बारे में बात हो सकती है । मैंनें कहा - भाई साहब , दुकान का कोई माल मैं घर नहीं ले जाता । वह चौंककर बोला - दुकान और माल तुम्हारा मतलब क्या है । तुम देश बेचनें का काम नहीं करते । मैंनें घबरा कर कहा - तौबा-तौबा , ये क्या कह रहे हैं । देश को बेचनें का कारोबार कुछ नेताओं के जिम्मे है । वह मेरे पास आकर कान में बोला - किसी से कहना नहीं , नहीं तो ? मैंनें डरते हुए कहा - नहीं कहूँगा , बेवकूफ हूँ जो आपके हाथ मारा जाऊँ या किसी नेता के चमचे का हाथ मारा जाऊँ । वह फिर बोला - लेकिन तुमनें जो पोस्टर टाँग रखा है , उसे देखो । मैंनें पोस्टर देखा - किसी शरारती लड़के नें - "यहाँ संदेश भी बिकता है" में से "स" हटा दिया था और वह हो गया था - " यहाँ देश भी बिकता है " इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी ।
रविवार, 18 नवंबर 2012
बेकार का टापिक --
जय ओसाम जी की , दिग्गी बाबू ।
तुम फिर आ गये लल्लन , और ये तुम जय ओसामा जी क्यों कहते रहते हो ?
क्या , ओसामा से प्रेम खत्म हो गया ?
देखो लल्लन मैं राजनीतिक आदमी हूँ , किसी से स्थाई लगाव नहीं रखता ।
लगता है मैडम आपके इस स्वभाव से परिचित हैं , फिर भी आपका कद मैडम नें कुछ तो बढ़ा ही दिया है ।
तुम काम की बात करो लल्लन ।
सच बतायें आपको देखकर काम की कोई बात दिमाग में आती ही नहीं ।
देखो मैं , टी वी पर ठाकरे जी की शव यात्रा देख रहा था ।
बहुत लोग शामिल हैं , लगता है जैसे पूरा महाराष्ट्र उमड़ पड़ा है ।
हाँ लल्लन , सम्मान तो उनका था ही ।
उनके जैसा सम्मान तो आपको भी मिल सकता था ।
कैसे ?
पहली बात वे अपनें दल के सुपर पावर थे , और बुरा ना मानियेगा आप अपनीं ही पार्टी में पावर लेस नेता हैं ।
मुझे गुस्सा ना दिलाओ लल्लन ।
सच बात कड़वी होती है , इसमें आपका तनिक भी दोष नहीं है ।
तुम देखना जब मेरा स्वर्गवास होगा , तो उसमें पूरे देश के लोग शामिल होंगे ।
आप क्या सचमुच स्वर्ग में ही जायेंगे , श्योर है , १०० परसेंट ?
मैंनें कभी कोई बुरा काम नहीं किया है , इसलिये ऐसा कह रहा हूँ ।
सच बताइये , ठाकरे जी की मृत्यु से आप पर क्या असर पड़ा ।
यही कि इंसान को एक दिन मृत्यु से जरुर गले मिलना पड़ता है ।
तब आप ऐसा कोई धासूँ काम क्यों नहीं करते कि देश वाले आपको हमेशा याद रखते ?
लल्लन तुम इस तरह का फालतू टाईप का टापिक क्यों मेरे सामनें उठा दिये ।
हम सोचे कि मातमी माहौल में थोड़ा अपना मूड सही कर लें, इसके लिये आपसे बेहतर देश में कोई और है ही नहीं ।
भागो यहाँ से , राहुल बाबा के यहाँ जानें में देर करा दिया ।
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सोमवार, 29 अक्टूबर 2012
दिग्गी राजा को मंत्री क्यों नहीं बनाया ?
जहाँ तक वफादारी की बात है तो मनीष तिवारी से कम तो नहीं थे अपनें दिग्गी राजा , फिर एक को बनाया दूसरे को क्यों छोड़ा , यह हम देश वासी नहीं समझ पा रहे हैं । कहा जाता है कि सलमान भाई नें भ्रष्टाचार के दलदल में सपरिवार गोता लगाकर मात्र ७१ लाख रुपये ही निकाले , एक मंत्री जी नें उनके नौसिखियापन पर कमेन्ट भी किया कि यदि सलमान खुर्शीद असल गोता-बाज या खिलाड़ी होते तो कम से कम ७१ करोड़ रुपये जरुर निकाले होते , यही नहीं उनकी अक्षमता पर देश भर में हो हल्ला हुआ तो मैडम नें ड्यूटी बदल दी , कि शायद विदेशी सम्पर्क में उनकी क्षमता और गुणवत्ता में वृद्धि हो सके ।
आखिर दिग्गी राजा का दोष क्या है ? जहाँ तक अनर्गल शब्द बोलनें की बात है तो दिग्गी राजा नें यदि गाली भी दी तो शालीनता के साथ , जबकि मनीष तिवारी , अन्ना को "तुम" और अन्य गन्दे शब्दों के साथ सम्बोधन करते रहे ।
हमें दिग्गी राजा के साथ-साथ लालू जी के साथ भी पूरी सहानूभूति है । लालू जी का राजनीतिक जन्म ही काँग्रेस विरोध के साथ हुआ था , जय प्रकाश जी के आन्दोलन में उनकी सहभागिता के किस्से हमनें सुनें हैं । जिस आदमी नें अपनें सारे सिद्धान्तों को ठुकरा कर काँग्रेस के दामन को पकड़ा और काँग्रेस पर छोटी कंकड़ फेंकनें वाले पर बड़ा सा पत्थर फेंकनें को तैयार रहनें वाले शख्स को मैडम सोनिया नें क्यों नजर अन्दाज किया समझ में नहीं आता । काँग्रेस या मैडम सोनिया को क्या उनकी विश्वसनीयता पर संदेह है या वे जानती हैं के ये सब तराजू पर रखे जानें मेढक हैं जो कभी स्थिर नहीं रह सकते या वे इन लोगों को विवाह के पूर्व का कालिदास समझती हैं कि ये लोग जिस डाल पर बैठेंगे उसी को काटेंगे ।
मेरी राय तो मेरे घर के छोटे बच्चे तक नहीं मानते , फिर भी मैं राय देता हूँ कि सब्र कीजिये , सब्र का फल मीठा होता है । वह दिन जरुर आयेगा जब लालू जी और दिग्गी राजा अपनें-अपनें राज्य के मुखिया होंगे । मंत्री पद का क्या , आज है कल छीन जायेगा और किसी की भीख से कोई मंत्री-पद मिल भी जाये तो क्या होगा , कोई काम रुकनें वाला है आप लोगों का , कोई कितना भी बड़ा मंत्री बनें , सबकी गति मैडम सोनिया के सामनें एक जैसी ही होती है । इसलिये हताश या परेशान होनें की जरुरत नहीं है , मैडम सोनिया की भक्ति में लीन रहिये शायद उनकी कृपा की एक नजर पड़ ही जाये ।
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बुधवार, 24 अक्टूबर 2012
जसपाल भट्टी और बापू की भेंट ।
ए पंडित जी देखो कैसी हलचल हो रही है , लोग क्यों हँस रहे हैं ?
अरे बापू भट्टी आया है ।
ये भट्टी कौन है भाई ।
इसे जसपाल भट्टी कहते थे , धरती पर , कार से जा रहा था , फिर यहाँ आ गया ।
क्या कार समेत आया है ?
नहीं बापू यमदूत लाये हैं , स्वर्ग में उदासी थी , अब हम लोग जी भर कर हँसेंगे ।
मेरे पास ले आओ , पंडित जी ।
मैं खुद ही आ रहा हूँ , बापू ।
आओ , अभी तो तुम धरती के लायक ही थे , क्या जल्दी थी आनें की , भट्टी जी ।
अब मैं क्या कर सकता हूँ , यमराज जी चाहते होंगे कि मैं उन्हें भी कुछ सुनाऊँ ।
धरती का हाल-चाल बताओ , भट्टी जी ।
बापू , धरती का हाल तो नहीं , लेकिन आपके और अपनें देश का हाल जरुर सुनाऊँगा ।
क्या हाल है मेरे देश का , सब ठीक तो है ?
कुछ भी ठीक नहीं है बापू , देश जिनके भरोसे आप छोड़े थे , उनके वंश का शासन अभी तक कायम है।
देखो भट्टी मैंनें किसी के हाथ में देश नहीं सौंपा था ।
लेकिन नाम तो आपका ही बदनाम हो रहा है ।
मेरी बात कोई मानता भी नहीं था । नेहरू भी मुझे घास नहीं डालते थे ।
लेकिन , देश में चारों और आपकी मूर्ति लगायी गई , सड़कों के नाम रखे गये , फोटो लगाई गई ।
अब मुझे मालूम हुआ है , कि वे सारे काम जनता को बेवकूफ बनानें के लिये किये गये थे ।
जानते हैं बापू , ना तो आपकी बात उस समय मानी जाती थी ना अब ही कोई माननें वाला है ।
मुझे सारी जानकारी मिलती रहती है , भट्टी जी ।
बापू जी , देश में इस समय भ्रष्टाचार ,घोटाले और लूट का बाजार गर्म है ।
देश का प्रधान-मंत्री कौन है ?
लोग कहते हैं कि मनमोहन सिंह हैं लेकिन ।
लेकिन क्या ?
वे नाम मात्र के हैं , केवल आदेश पालक हैं ।
किसके ?
नाम नहीं लूँगा , पता नहीं , नर्क आनें पर वह पुलिस वालों के साथ आकर मुझे पकड़ ले तब ?
यहाँ कहाँ पुलिस वाले हैं भाई ?
स्वर्ग में नहीं होंगे बापू , दो चार होंगे भी तो , सन्टिंग में होंगे । असली पुलिस वाले नर्क में हो सकते हैं ।
देखो भट्टी , स्वर्ग में मैं बड़ा बोर होता हूँ , ये चम्पारन के पंडित जी ना रहें तो मुझसे बात करनें वाला भी कोई नहीं है ।
क्यों बापू ? आप तो काँग्रेसियों से घिरे रहते थे , क्या अब वे यहाँ नहीं हैं ?
देखो भट्टी , यहाँ पर ज्यादातर वे लोग हैं जिनका विरोध करते हुए मैंनें नेहरु का साथ दिया था ।
ये कैसे हो सकता है , आप तो सही लोगों का साथ देते थे ?
मुझसे कुछ गल्तियाँ हो गई थीं जिसके कारण मैं नेहरु का विरोध नहीं कर पाता था ।
यहाँ पर कुछ लोग तो होंगे जो आपसे जुड़े थे ?
हाँ राजेन्द्र प्रसाद , लाला लाजपत ,शास्त्री , पंत , पटेल आदि हैं लेकिन वे सब अपनें में मग्न रहते हैं ।
चिन्ता मत करिये बापू अब मैं हूँ ना , आप बोर नहीं होंगे ।
अभी तो तुम आये ही हो , थोड़ा सेटल हो जाओ तब आराम से बैठकर , चर्चा करेंगे ।
बापू , हम धरती पर इस खोज में लगे थे कि नेहरू जी कहाँ पैदा हुए थे ताकि वहाँ कोई समाधि का निर्माण हो सके ।
तुम ऐसी वाहियात खोज में क्यों लगे थे , वे पैदा नहीं हुए थे , अवतार लिये थे , समझे मूर्ख भट्टी ।
वाह बापू वाह , मैं आपके मुख से यही सुनना चाहता था , धन्य हैं आप ।
देखो सब तो ठीक है , किसी के व्यक्तिगत जीवन के बारे में झाँकना उचित नहीं है ।
नेहरू जी से भेंट तो कर सकता हूँ ना बापू ?
वे यहाँ स्वर्ग में नहीं रहते ।
तब कहाँ रहते हैं ? कोई नया जन्म ले लिया क्या ?
अभी से इतनें सवाल मत करो ,भट्टी , ये पंडितजी हैं इनसे पूछ लो वे कहाँ पर रह रहे हैं ।
पंडित जी आप कृपया उनका व उनके परिवार का पता देंगे ?
देखो भट्टी जी , वे अपनें पूरे परिवार के साथ जहाँ पर रह रहे हैं , वहाँ जानें वाले कर्म तुमनें नहीं किये ।
ये तो अन्याय है ,पंडित जी , मैं यमराज जी से शिकायत करूँगा ।
ऐसी गलती मत करना भट्टी जी वरना अगले जन्म में मनमोहन सिंह का डुप्लीकेट बनकर पैदा होगे ।
मेरी दोनों आँखें खोल दी आपनें पंडित जी , चाहे स्ट्रीट डाग बन कर पैदा हूँ या गधा लेकिन , उनके जैसा ना बाबा ना ।
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