सोमवार, 20 अगस्त 2012

हमहूँ का मौका दो ना -- प्ली-----ज---- ।


   हे भारत भाग्य विधाता ,
                           आप कौन हैं मुझे नहीं मालूम है , मैं बचपन से आप को खोज रहा हूँ , आप ना जानें कितनें आड़े-तिरछों , लुच्चे-लफंगो , गुन्डे-बदमाशों , पापियों-दुराचारियों , नीचों-अधमों को अपनीं शरण में रखकर जमीन से आसमान तक पहुँचा दिये , और वे अब आपके समानान्तर ही देश के भाग्य विधाता बननें की कोशिश में हैं , जिनमें कई तो ऐसे हो गये हैं कि वे भारत की जगह , अन्य देशों की तरक्की में हाथ भी बंटा रहे हैं ।
                           मुझे चालाकी , मक्कारी , देश से गद्दारी , कमीनापन , नीचता और बेईमानी व भ्रष्टाचार आदि के गुण सिखानें वाला कोई योग्य गुरु ही नहीं मिला , जिसके कारण मैं न तो आत्मिक विकास ही कर सका और ना ही अन्य किसी देश में धन रखकर , उस देश की आर्थिक स्थिति सुधारनें में कोई मदद ही कर सका , निश्चित रुप से मेरे अन्दर ना तो कोई प्रतिभा थी ना अब है , लेकिन परिवार में यदि कोई मन्द बुद्धि या अविकसित दिमाग का व्यक्ति  पैदा हो जाये तो क्या उसे प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिये ?
                            मैं जनता हूँ और दावे के साथ कह सकता हूँ कि यदि  आप की थोड़ी सी भी कृपा मिल जाये तो , लँगड़ा एवरेस्ट फतह कर सकता है , गूँगा मो० रफी की मधुर आवाज में गा सकता है , और पागल या गधा टाईप का व्यक्ति  साहित्य में नोबल प्राईज जीत सकता है और देश का सबसे बड़ा पद तक पा सकता है । मुझे आपकी महिमा के बारे में सब मालूम है , यदि आप की कृपा दृष्टि हो जाये तो , खटमल मारनें की दवा बेचनें वाला कई फाईव स्टार होटल का मालिक बन सकता हैं , पान बेचनें वाला देश का सबसे बड़ा उद्योगपति हो सकता है । 
                            आपका गुणगान करनें के लिये , करोंड़ों मुख चाहिये अफसोस कि मेरे पास केवल एक मुँह है  और वह भी आपको दिखनें लायक नहीं है । मेरे मन में विचार आया कि जब तमाम देवी देवताओं की पूजा- अर्चना  करनें , बाबा लोगों का वन्दन करनें और तमाम तंत्र-मंत्र से भी कोई बात नहीं बनी तो क्यों ना आपकी चरणधूलि अपनें गन्दे माथे पर लगाऊँ , शायद मेरा भाग्य भी तमाम नकारों की तरह से पल्टी खा जाये । 
                          मैं आपसे केवल इतना माँगता हूँ कि , अगले आनें वाले कुछ दिनों में जिन तमाम नकारे लोगों को , देश को लूटनें का अवसर मिलनें की संभावना है , उनके सम्भावितों में मुझे भी शामिल कर लीजिये , मैं निष्ठा-पूर्वक शपथ लेकर कहता हूँ कि मैं जो भी घोटाला करूँगा , उसके पाई-पाई का हिसाब पूर्ण पारदर्शिता के साथ आप को दूंगा , फिर मेरी सेवा से खुश होकर जो भी ईनाम आप दीजियेगा मैं उसे सादर आपका प्रसाद समझकर ग्रहण करुँगा , और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं कुछ ही दिन में अपनी स्वामी-भक्ति का ऐसा नमूना पेश करूँगा कि कुछ ही दिन में अपनें सारे , टामियों , मोतियों , जैकियों  जैसे कुत्तों की सेवा लेनें की आपको  कोई जरुरत ही नहीं रह जायेगी  मैं विश्वास दिलाता हूँ कि यदि आपकी कृपा रही तो , देश का कोई भी कुत्ता भौंकनें में मेरी बराबरी नहीं कर पायेगा ।
                          हे भारत के नये नवेले भाग्य विधाता जी - हमहूँ का एक बार मौका प्रदान करिये ना -- प्लीज--  तबियत मस्त ना कर दिये तो ----- कहियेगा । 
                  

                                         

                                  


रविवार, 19 अगस्त 2012

भारत का अगला प्रधान मंत्री कौन ?



           अगस्त का महीना अबकी बार कई महत्वपूर्ण घटनाओं वाला रहा है । १५ अगस्त को हमनें स्वराज्य दिवस मनाया ,जिसे लोग स्वतंत्रता दिवस के नाम से भी जानते हैं । देश के खिलाड़ियों ने जहाँ पदक जीतकर देश का नाम रौशन किया वहीं , सत्ता के खिलाड़ियों नें सारे घोटालों का रिकार्ड तोड़ते हुए  कोयला आबंटन घोटाला किया  देश की जनता नें अपनी नियति मानकर उसे भी देखा ।  लगभग २ लाख करोड़ रुपये का यह घोटाला है जिसमें सोनिया मैडम के परम् भक्त श्री मन मोहन जी का नाम सबसे ऊपर रखा जा रहा है । वैसे देश की जनता घोटालों की इतनी अभ्यस्त हो चुकी है कि देश के किसी भी कोनें से इस बारे में कोई जोरदार आवाज नहीं सुनायी पड़ी , क्योंकि जनता जानती है कि नेता हैं मंत्री हैं , सबको चुनाव लड़ना है । चुनाव में सफेद पैसा तो लगाया नहीं जा सकता , इस लिये घोटाला नहीं होगा तो चुनाव खर्च कहाँ से आयेगा । दूसरे ,हमारे देश के धन से कई देशों की अर्थव्यवस्था चल रही है , उसे भी बरकरार रखना है ।
         इसी महीनें में एक नेता और मंत्री गोपाल कांडा की संगत का दुष्परिणाम भी देखनें को मिला जब गीतिका नामक एक लड़की को अपनी जान गंवानी पड़ी । इसी महीनें बेचारी फिजा नें जिसका संबन्ध भी एक नेता से था इस दुनिया को अलविदा कह दिया , नेतागण की सोहबत में पड़ी अन्य बेचारियों की जिन्दगी सलामत रहे यही रब से दुआ है । इसी महीनें बाबा रामदेव नें अपनीं लीला का प्रदर्शन किया , केन्द्र सरकार नें पुलिस से लाठियाँ नहीं भंजवायी , गोली नहीं चलवायी , इसलिये देश के तमाम लीला-दर्शकों को कोई मजा नहीं आया ।
        इसके अलावा देश नें देखा कि किस तरह से पाकिस्तान के हिन्दू , वहाँ से भागकर देश में आरहे हैं , यदि संसार के किसी कोनें में हमारे वोट बैंक वालों के साथ कुछ होता तो हमारे नेतागण किस कदर आसूँ बहाते , कहना नहीं है , लेकिन हमारे देश के किसी बड़े मंत्री या नेता नें इसपर कोई सकारात्मक टिप्पणी नहीं की । मेरी , छोटी सी राय है कि जिन आतंक वादियों को सोनिया जी की सरकार दामाद ऐसा बैठाकर खिला रही है , वह बन्द करे और उनका सारा राशन पाकिस्तान से आनें वाले लोगों पर खर्च करे , तथा , आतंकवादियों को बाबा रामदेव के आश्रम में काम करनें के लिये भेज दे , ताकि वे आश्रम के व्यवसाय में बाबा की मदद करें , और सरकार उन्हें बतौर खुफिया अधिकारी बाबा के यहाँ से सूचना प्राप्त करनें के लिये भी नियुक्त कर सकती है , क्योंकि इतनें दिन हराम का खानें के बाद हो सकता है वे सरकार के हितैषी हो गये हों । वैसे भी देश से दोनों को ही लगाव नही है ।
          इसके अलावा अगस्त के महीनें में असम में दंगे और उसके कारण देश के अन्य भागों में किये जानें वाले दंगों को भी देश के लोगों नें देखा और पूर्वोत्तर के लोगों का देश के अन्य भागों से पलायन भी देखा , हम भारत देश के लोग बहुत सी बातों को समान्य ही समझ कर उसकी अनदेखी करते हैं और वह दिन दूर नहीं जब सारे भारत वासियों को एक जगह से दूसरी जगह पलायन करना होगा , और फिर अलग- अलग बस्तियाँ होंगी , अलग-अलग के धर्म के लोगों की । देश के भीतर ही इस प्रकार का पलायन देश के नेताओं की समझ में भले ही न आ रहा हो लेकिन देश के हालात पर नजर रखनें वालों की बेचैनी , भयानक भविष्य की ओर इशारा कर रही है ।
           देश भीतर ही भीतर किस तरह सुलगनें की ओर बढ़ रहा है , इस बात से बेपरवाह हमारे नेतागण किस चिन्ता में हैं , यह देखना महत्पूर्ण है ।
          कोयला आबंटन में किये गये महाघोटाले से ध्यान हटानें की साजिश के तहत या अन्य किसी मकसद से मुलायम सिंह जी नें शगूफा छोड़ा है कि , अगला प्रधानमंत्री तीसरे मोर्चे का होगा । देश में घटनें वाली सारी महत्वपूर्ण घटनाओं को दरकिनार कर हमारे देश में बहस चल रही है कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा । सारे लोग तमाम लोगों के नाम गिना रहे हैं । भारत वर्ष की जनता वैसे  भी सब कुछ भूलनें में माहिर है , लेकिन हमारे नेतागण चाहते हैं कि जनता को सोचनें समझनें का वक्त ही ना दो या उसे सोचनें समझनें के लायक ही न रखो , ताकि भूलनें की बीमारी का नाम लेंनें की जरुरत ही न पड़े ।
         मेरा भी आप से सादर निवेदन है कि आप भी देश के हालत के बारे में अपना माथा न खराब करें , और केवल इसपर विचार करें की कौन बनेगा प्रधान-मंत्री , कलमाडी जैसा , राजा जैसा या मनमोहन जी जैसा , देश में ये ही लोग ऐसे हैं जो काफी लोकप्रिय हैं , अभी तो घोटालों की दौड़ में सबसे बड़ी गठरी सिर पर लिये मनमोहन जी ही नम्बर-१ नजर आ रहे हैं , क्या विचार है ?   
        

सोमवार, 13 अगस्त 2012

आप इस देश के कौन ?



प्रणाम , बड़ा रेलेक्स फील  कर रहे होंगे ?
मैं तो हमेशा से रिलेक्स ही फील करता हूँ ।
अन्ना का भूत बिना डरवाये निकल गया और अब बाबा नें अपनें जिन्न को खुद ही बोतल में बन्द कर दिया ।
देखो मैं भूत और जिन्न से नहीं डरनें वाला , समझे ।
तो काहे कुछ नहीं कहे , बाबा और अन्ना के आन्दोलन के समय ?
मैडम नें आदेश दिया था , हम सभी को ।
कैसा आदेश ?
यही कि बोलना मत , ये दोनों खुद ही शान्त हों जायेंगे ।
अच्छा ये बताइये कि आप तो काला धन विदेश में जमा नहीं किये , भ्रष्टाचार नहीं किये , फिर डरे क्यों ?
मैं कहाँ डरा , मैं बस चुप ही रहा ।
ये आन्दोलन तो आपके खिलाफ नहीं था , लेकिन आप ---?
देखो मैं जिन लोगों की संगत में हूँ वे लोग मुझसे कहे कि मैं भी उनके गैंग का मेम्बर हूँ ।
और आप मान लिये कि आप देश के लूटेरों के गैंग के सदस्य हैं ?
नहीं मानूं तो जाऊँ कहाँ । आखिर मैं मैडम का प्रधानमंत्री हूँ , मेरा भी उनके प्रति कोई फर्ज है ।
अरे भाई आप देश के प्रधानमंत्री हैं , आपका फर्ज देश के प्रति पहले है , मैडम के प्रति बाद में ।
ना बाबा ना , मुझे बेवकूफ मत बनाओ , मैं जानता हूँ कि देश की जनता मुझे कुछ नहीं मानती है ।
आप , देश के प्रति , वफदार नहीं हैं क्या ?
हूँ , लेकिन मैडम के आदेश का पालन भी तो करना है ।
वित्त-मंत्री , रक्षा-मंत्री , गृह-मंत्री ,और तमाम मंत्री क्या देश के मंत्री नहीं हैं ?
मेरी अन्तरात्मा से पूछोगे तो मैं कहूँगा , बिल्कुल नहीं ।
क्यों ?
मेरे बारे में तो सब लोग जानते हैं कि ,मैडम नें मुझे यह कुर्सी दी है ।
हाँ ,सब लोग जानते हैं कि आप ---- ।
मेरे समेत सारे मंत्री , मैडम द्वारा बनाये गये हैं , तो तुम्ही बताओ हम सब किसके मंत्री हुए ?
आपके अनुसार भारत देश का ना तो कोई राष्ट्रपति है ना ही प्रधानमंत्री और ना ही कोई मंत्री या नेता है ।
लगता तो है कि , वे लोग हैं , लेकिन हकीकत में , बिना मैडम की चाभी के कोई हिल भी नहीं सकता ।
अब आप बर्दाश्त से बाहर की बात कर रहे हैं ।
तुम भारत वासियों को सब बर्दाश्त करना होगा , देश में ना कोई आन्दोलन होगा ना ही जनता की आवाज होगी ।
तब क्या होगा ?
घोटाले होंगे , हम बिना देखे सुनें कागज पर दस्तखत करेंगे, लोग हमें गाली देंगे ।
आप देश को नरक होते देखते रहें हैं , क्या आगे भी देखते रहेंगे ?
अगर मैडम की कृपा रही तो देश का नाम बदलनें पर भी विचार किया जा सकता है ,समझे ।
सब समझ गया , अब मुझे सोचना है कि मैं इस देश का क्या हूँ ?
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शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

अन्यथा भारत-रत्न जरुर मिलता ।



आज सन्डे मना रहे हैं क्या ?
अच्छा किये आ गये , अन्ना के आन्दोलन के समय से ही कान में रुई और आँख पर पट्टी बँधवाकर अकेले पड़ा रहा ।
रूई और पट्टी क्यों ?
ताकि कुछ देख सुन ना पाऊँ ।
लेकिन मुँह तो खुला ही था , कुछ बोल तो सकते थे ।
जानते हो मैं बिना पूछे , कुछ बोलता नहीं ।
आपकी खामोशी को लोग आप की चतुराई समझे लिये ।
अक्सर मेरे साथ ऐसा ही होता है , मेरी मजबूरी ,ना तो अन्ना समझेंगे ना ही उनकी टीम वाले ।
क्या आपकी पार्टी के सभी नेता को रूई और पट्टी बाँधना अनिवार्य था ?
हाँ जी , और कुछ के मुँह में तो विदेशी टेप भी चिपकाया गया था , कुछ को शीत-निद्रा में भी भेजा गया ।
कपिल सिब्बल टाईप के कुछ लोग जो सर्प योनि में जन्में लगते हैं , अब धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं ।
जानते हो , ये सब मेरे ऊपर , हँसते हैं जब मैं , अपनें पद की गरिमा की बात उन्हें बताता हूँ ।
अच्छा , आप को ऐसा नहीं लगता जैसे आपकी पार्टी के लोग जरुरत से ज्यादा गुलामी में जी रहे हैं ?
लगता तो है , लेकिन करें क्या , मेरी आड़ में सब नंगा नाच कर रहें हैं , बदनाम मैं होता हूँ ।
आप कपड़ा पहनकर नाचनें के लिये क्यों नहीं कहते ।
मजाक मत करो , मैंनें निष्ठा के साथ मैडम की सेवा की है , जो कहा गया सब किया , लेकिन सोचो --- ।
लेकिन सोचें क्या ?
यदि मैंनें वैसी सेवा देश की , की होती तो , मैं भारत-रत्न या देश रत्न का पुरस्कार पानें का हकदार होता ।
लेकिन आप दुखी ना हों , मैडम सेवा मैडल या मैडम रत्न पुरस्कार आपको जरुर मिलेगा ।
वैसा मैडल या पुरस्कार तो है नहीं , लेकिन होता भी तो भी घड़ियाल टाईप के लोग मुझे लेनें नहीं देते ।
आप जैसा व्यक्ति जिसनें देश-हित से कहीं ज्यादा मैडम हित पर ध्यान दिया , आपको ईनाम तो मिलना ही चाहिये ।
सच पूछो तो हमें लगता है कि हम देश से गद्दारी कर रहे हैं , लेकिन करें क्या , दलदल में फँसे हैं ।
आप क्यों दलदल में जाना स्वीकार किये ?
उस समय कितनें नकली आँसू बहे थे ,  मैंनें भवना में बहकर वैसा फैसला लिया ।
लेकिन जनता तो जानती थी कि आप केवल कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं हैं ।
जनता क्या , मैं स्वयं जानता था कि मेरी क्या हैसियत है , लेकिन ऐसी लूट होनें की मुझे उम्मीद नहीं थी ।
झूठ मत बोलिये , आपनें स्वयं घोटाले बाजों के बचाव में कई बयान दिये हैं , आप सब जानते हैं ।
हाँ , मैं सब जानता हूँ किसनें-किसनें , कहाँ-कहाँ कितनें-कितनें घोटाले किये हैं , लेकिन बता नहीं सकता ।
समय आ गया है कि आप , सारे राज खोल कर जनता के सामनें रख दीजिये , और भारतरत्न हो जाइये ।
जानते हो , हर घोटालें में पता नहीं मेरा नाम भी कैसे आ गया है ?
यानि आपको भी चोरों के गैंग नें अपना सदस्य बना ही लिया । आप सच बोलकर  निकल लीजिये वहाँ से ।
अब मैं जहाँ हूँ वही मेरा समाज है , मैं चाहकर भी सामाजिक बन्धनों को तोड़ नहीं सकता ना ही निकल सकता हूँ ।
चोर उचक्कों के समाज में रहना भी चाहते हैं , और सज्जन भी कहलाना चाहते हैं , ये कैसे हो सकता है ?
सहीं कहते हो लेकिन , कुछ वैसे ही काम अनजानें में हम भी कर बैठे हैं , यही हमारी मजबूरी है ।
तब यदि आपको इस जन्म में मिलेगा भी तो केवल मैडम रत्न पुरस्कार या फिर देश का तिरस्कार ।
जा रहे हो क्या ?
जी , अभी आप भी फ्रेश नहीं हुए होंगे , नमस्ते ।
हाँ सही कह रहे हो मैडम से शौच करनें की परमिशन भी अभी लेना है ।
 


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गुरुवार, 26 जुलाई 2012

क्रान्ति की विफलता के कारण ।


             देखो खेदू , इतिहास में इस बात का जिक्र है कि सन् १८५७ ई० की क्रान्ति किस बात पर हुई और क्यों विफल रही । लेकिन  दोनों के लिये इतिहासकारों द्वारा अधिकांश ऐसे कारण बताये गये जो कम से कम समझदार लोगों को हजम नहीं हो सकते । देश भक्ति से ज्यादा बढ़कर क्रान्ति का मूल कारण उस कारतूस के इस्तेमाल को बताया गया जिसमें चर्बी का प्रयोग होता था , इसके अतिरिक्त अन्य बहुत से बेतूके कारण भी बताये गये । अँग्रेजों के अत्याचार को इतिहासकारों नें बहुत सावधानी पूर्वक लिखा ताकि अँग्रेज बन्धु नाराज होकर उन्हें जेल में ना डाल दें । आजादी के बाद ब्रिटेन वालों का शासन खत्म हो गया किन्तु उनके अनुयायियों के हाथ में सत्ता हस्तान्तरित होनें से इतिहास ज्यों का त्यों रहा ।
 लेकिन लल्लन भाई , तुम इस समय काहे , उस क्रान्ति को याद कर रहे हो ?
            खेदूलाल , हमारा देश किस तरफ जा रहा है , यही सोच रहा था । जानते हो उस क्रान्ति को विफल करनें वाले अँग्रेज कतई नहीं हो सकते थे क्योंकि इतना बड़ा देश और मुट्ठी भर अँग्रेज कहाँ-कहाँ लड़नें जाते , हमारे देश के तलुवे चाटनें वालों गद्दारों नें ,अँग्रजों से ज्यादा मेहनत क्रान्ति को विफल करानें में की , १८५७ की क्रान्ति को क्रान्तिकारियों को समर्पित न करके , देश के गद्दारों को समर्पित करना चाहिये , जिनके सहयोग से देश-भक्तों की पराजय हुई ।
लल्लन भाई तुम्हारा मतलब है , अन्ना जी का आन्दोलन भी -----।
            देखो खेदू , ये आन्दोलन है और वो क्रान्ति थी , जिसे गदर भी कहा जाता है । तुम जानते हो , जिस पेड़ को उस समय का भयानक तूफान नहीं हिला सका था , उसे आज की हवा क्या हिलायेगी । 
मतलब ?
           एकदम साफ है , आगे आनें वाली पीढ़ियाँ पढ़ेंगी , अन्ना के आन्दोलन के कारण और उस आन्दोलन  की विफलता के कारण , जिसमें विफलता का केवल एक कारण लिखा होगा जन समर्थन का अभाव ।
देखो लल्लन भाई , जैसा तुम सोचते हो वैसा, आज देश के ज्यादातर लोग सोचते हैं , लेकिन -- ।
लेकिन क्या खेदू ?
तुम जैसे लोग हताश होकर सोचते हो लल्लन भाई , कोई ना कोई तो चाहिये अँधेरे में रोशनी दिखानें वाला ।
हम मानते हैं खेदू , लेकिन सोचो , १८५७ की क्रान्ति , सफल न होनें का क्या असर हुआ ?
यही ना कि हम लोग उसके बाद फिर , काफी दिन तक गुलाम रह गये ।
दिन ही नहीं खेदू लाल , कई दशक तक गुलाम रहे कहो । जोड़ो १८५७ से १९४७ तक कितनें साल हुए ?
पूरे ९० साल लल्लन भाई , सही कहे ।
और १९४७ से आज तक कितनें साल हुए बताओ ?
लल्लन भाई , काहे गणित सिखानें पर तुले हो ।
खेदू लाल , अगर अबकी अन्ना जी दुष्ट नेताओं के बहकावे में आये तो , फिर सन् २१०२ तक यही स्थिति रहेगी ।
लल्लन भाई देश की जनता जानती है कि अबकी अगर वह नहीं जागी तो फिर जगानें के लिये कोई नहीं आनें वाला ।
खेदू लाल , आनें वाली पीढ़ी के लोग इस आन्दोलन की असफलता के गलत कारणों को पढ़ेंगे तो कितना बुरा होगा ।
लल्लन भाई , आशावादी बनिये , समय आयेगा और हम होंगे कामयाब --- एक दिन ।

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बुधवार, 25 जुलाई 2012

खेदू के बुआ के घर में चोर ------ ।



              खेदू की बुआ और फूफा की कोई सन्तान नहीं थी । वे लोग खेदू को बचपन में अपनें घर में रखे । बुआ , के इलाके में चोर काफी सक्रिय रहते थे । चोर भी आजकल जैसे नहीं थे बल्कि अपनें पेशे को अपना धर्म समझकर एक से बढ़कर एक चोरी का आईडिया निकालते थे । वे बड़े धैर्यवान् थे , कई-कई दिन रेकी करनें बाद तब किसी वारदात को अन्जाम देते थे । अगर पकड़ गये तो , दो-चार डन्डे खानें के बाद मृतक समान बन जाते थे , जब लोग नब्ज टटोलनें का प्रयास करते तो उसी समय बिजली की फूर्ती के साथ उठते और किसी को कुछ समझ में आता तब तक वे हवा हो जाते थे । उसके बाद चोरी की वारदात और चोरों के कारामात की चर्चा कई दिन तक चलती , क्योंकि तब मीडिया की कमी के कारण बड़े चोरों के कारनामों को लोग नहीं जान पाते थे । दिल्ली के चोरों की चर्चा दिल्ली तक , इलाहाबादी चोर की चर्चा इलाहाबाद तक , मलीहाबादी चोर की चर्चा मलीहाबाद तक , हैदराबादी चोर की चर्चा , हैदराबाद तक सीमित रहती थी । 
              हाँ तो बात हो रही थी , पुरानें किस्म के चोर की । चोर की हरकत के बारे में जानने से पहले , खेदू के बुआ की घर का स्थल निरीक्षण आवश्यक है । प्रथम तल वाला मकान ,जिसमें पुताई  ५-६ साल पहले  वाली दीपावली में आखिरी बार हुई रही होगी , उसमें कुल जमा दो कमरे , एक बाहरी दूसरा भीतरी , प्रवेश-द्वार सड़क से सलंग्न , बगल में गलियारा जिसमें ताला रात के समय लगता था । गलियारे में पुरानी एटलस साईकिल जिसके पैडल में प्राब्लम रहती थी , ज्यादातर गलियारे में खड़ी रहती थी जिसका केवल पिछली पहिये का टायर ही नजर आता था । खुट्ट से आवाज  आनें पर , बुआ ,फूफा और खेदू सबसे पहले साईकिल का पहिया देखकर आश्वस्त हो जाते थे कि साईकिल सही सलामत है । एक बार फूफा जी , कीर्तन करनें चले गये थे , बिजली भी आती जाती थी , गलियारे से दो तीन बार खुट-खुट की आवाज हुई , खेदू और उसकी बुआ नें साईकिल का पिछला टायर देखा और आवाज को चूहे की शरारत समझकर शान्त हो गये । फूफा जी , करीब ९ बजे रात में लौटे , नवम्बर का महीना था , हल्की ठण्ड भी थी बुआ जी नें मेन गेट देखा तो फूफा जी गेट से होकर भीतर आ रहे थे , जो पहले से ही खुला लग रहा था । बुआ जी दौड़ती हुई आईं और पूछा - कैसे गेट खोला ? फूफा जी घबरा कर बोले - बन्द करना भूल गई होगी , ये तो खुला ही था । बुआ जी बोली - मैंनें खुद बन्द किया था । तब तक बालक खेदू भी वहाँ पहुँच गया और , गेट कैसे खुला पर चल रहे गहन विमर्श में शामिल हो गया । सब लोगों नें गलियारे में देखा ,साईकिल का टायर वाला भाग नजर आ रहा था , राहत मिली । फूफा जी नें ताला मेंन गेट में बन्द किया और ताले को कई बार जोर लगाकर खींच कर देखा  आश्वस्त हुए ,फिर सब लोग कमरे में दाखिल हुए । उसके बाद फूफा जी गलियारे में ताला बन्द करनें गये और जोर से चीखे । बुआ और खेदू  पूरी ऊर्जा के साथ वहाँ पहुँचे , फूफा जी के मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी वे थर-थर काँप रहे थे , बुआ जी बोली, करेन्ट मार दिया न , कहते थे कि लटकते कटे-फटे तार को ठीक कराओ । फूफा नें तर्जनी से साईकिल वाली जगह पर इशारा किया , बुआ जी को जबरदस्त झटका लगा , क्योंकि वहाँ साईकिल की जगह पुराना टायर रखा था ,जिसे इस तरह से रखा गया था कि वह बाहर से देखनें पर लगे की साईकिल वहाँ पर है । खेदू सारा माजरा समझ चुका था वह , झट से बाहर भागा और जोर-जोर से चोर-चोर का हल्ला करनें लगा । बैहत्था के बाबा , नकबहन्चू के बाबू , संगम लाल , श्रीवास्तव जी , जग्गी बाबू और अन्य पड़ोसी आये , और खेदू से पूछे । तब तक रोती चिल्लाती बुआ जी दौड़ती हुई आयीं और भीड़ की ओर देखकर बोली - हाय चोर नें बर्बाद कर दिया । फूफा जी भी पराजित टीम के कैप्टन की भाँति मुण्डी नीचे किये वहाँ आ गये । जग्गी बाबू बोले - चोर की हिम्मत तो देखिये , घर में दिन-दहाड़े चोरी । श्रीवास्तव जी नें जग्गी बाबू को सुधारा , ये दिन नहीं रात है जग्गी बाबू । नकबहन्चू के बाबू बोले - बड़ा हरामी चोर लगत है , बताओ सब लोग घर में और चोरी करके के निकल गवा । बैहत्था के बाबा भी कमेन्ट दिये - देखो ना कल , साईकिल के टायर बदलवा रहा , आज सुबह कऊनो ले के चम्पत हो गवा । हाँ तो का भवा रहा - निर्मल बाबू (खेदू के फूफा) आप के यहाँ ? देखिये ना गलियारे से साईकिल ले गया और एक फटा टायर वहाँ रख दिया , फूफा जी बोले । जग्गी बाबू बोले - कहीं वह वही टायर तो नहीं है जो बैहत्था के बाबा के यहाँ से चोर ले गया था । श्रीवास्तव जी बोले - बेटा खेदू जरा टायर तो लाना । खेदू झट से जाकर टायर ले आया , बैहत्था के बाबा - जोर से बोले - देखा हरामी चोर का , हमार टायर निर्मल बाबू के यहाँ रखके साईकिल ले गवा , साईकिल कहूँ रखीगा और कऊनो के स्कूटर चोराईगा । बात काटकर नकबहन्चू के बाबू बोले - फिर कहबो कि स्कूटर रखके उ कार चुराई , फिर कार रखके उ हवाई जहाज चुराई है ना । निर्मल बाबू चोरी का पता कैसे चला आपको - श्रीवास्तव जी बोले । फिर खेदू के फूफा नें सारे घटनाक्रम का वर्णन किया । पुलिस में रिपोर्ट की जाये या नहीं , इस पर सर्व सम्मत प्रस्ताव नहीं हो सका । सारे मोहल्ले वालों नें  वहाँ एक दो घन्टे तक,  उन सभी चोरी की वारदातों को याद किया जिसमें हैरतअंगेज ढ़ग से चोरों नें साबुन , तौलिया , घड़ी से लेकर साईकिल आदि की चोरी की थी । 
              दिसम्बर माह के आखिरी दिन चल रहे थे , खेदू की बुआ के भाई नें एक सुन्दर मरफी ट्रांजिस्टर , बुआ को खरीद कर दिया , बुआ जी अक्सर उसे सिरहानें मेंज पर रखकर विविध भारती से गानें सुनती रहती थीं । चूँकि ट्रांजिस्टर अभी नया-नया था इसलिये वे उसका वोल्यूम भी तेज रखती थीं , मोहल्लेवालों को भी अपना रेडियो या ट्रांजिस्टर बजानें की जरुरत नहीं पड़ती थी । एक दिन वे बाहरी दरवाजा खोलकर खाट पर लेटकर किशोर कुमार का एक गाना - सुन रही थीं, हलकी-हलकी झपकी उन्हें आ रही थी , माथे पर हाथ रखकर वे सोयी थीं , उन्हें नींद आ गयी । उनकी आँख खुली तो मोहम्मद रफी का गाना ट्रांजिस्टर में बज रहा था , मेंज की ओर देखा तो मरफी ट्रांजिस्टर की जगह एक पुराना मरम्मत किया हुआ ट्रांजिस्टर बज रहा था , उनका कलेजा धक्क से हो गया , इधर-उधर देखा मरफी ट्रांजिस्टर गायब था और उसका रुप बदल गया था , बुआ जी जोर से चिल्लायीं । अगल-बगल की महिलायें आ गईं , एक बारगी किसी को समझ में नहीं आया कि माजरा क्या है । बुआ जी नें सारी बात बताई । खेदू भी स्कूल से आया तो उसे चोर की कारामात का पता चला । फूफा जी शाम में घर आये तो वे भी चोर की अक्लमंदी के कायल हो गये । फिर उस दिन शाम को मोहल्ले वाले बुआ जी यहाँ जमा हुए और चाय पीकर मातम मनाया । सभी एक स्वर से चोर की ढिठाई पर तरह-तहर के कमेन्ट कर रहे थे । चोर नें एक बार फिर बुआ कर घर को निशाना बनाया था ।
                                                                                         क्रमशः

मंगलवार, 24 जुलाई 2012

(अ) नैतिक समर्थन --- ।



प्रणाम ।
तुम इतनी रात में कैसे आ गये , तुम्हें सिक्योरिटी वाले रोकते क्यों नहीं ?
लंका में , हनुमान जी कैसे घुस गये बताईये , रावण की सिक्योरिटी तो आप से कहीं ज्यादा रही होगी ।
हनुमान जी , मच्छर के समान शरीर बनाकर गये थे , जैसा कि रामायण में लिखा है ।
हम कौन से हाथी बनकर आप के पास आये हैं , मँहगाई में शरीर पारदर्शी हो गया है ।
झूठ बोलते हो , सिक्योरिटी वालों को तुमनें सेट कर रखा है कल को कोई आतंकवादी आ जाये तब क्या होगा ।
पूरा देश ही सेटिंग पर चल रहा है , देश में कुछ भी असंभव नहीं है ।
तुम यहाँ किस लिये आये हो , कारण बताओ ?
मैं बिना मकसद , आप के यहाँ रात में आनें का रिस्क नहीं ले सकता । मैं पवार जी के बारे में जानना चाहता हूँ ।
२ नम्बर की कुर्सी उन्हें नहीं मिलेगी , इसके अलावा तुम और क्या जानना चाहते हो ?
सुना है कि वे बहुत नाराज हैं और सरकार गिरायेंगे नहीं लेकिन हिलाते रहेंगे ?
वे सरकार में भले न रहें लेकिन अपना नैतिक समर्थन हमें देते रहेंगे ।
बाहर रह कर समर्थन , सरकार में रहकर समर्थन , नैतिक समर्थन , इसका क्या अर्थ होता है ?
इसका अर्थ तो मुझे भी नहीं मालूम है , इसका अर्थ वे ही समझते हैं जो वैसा समर्थन हमें करते हैं ।
यदि आप मैडम से प्रार्थना करके अपनें बगल में टूटी कुर्सी ही रखवा देते तो क्या, आपकी इज्जत गिर जाती ?
टूटी कुर्सी तो क्या, वहाँ जमीन पर बैठनें को नहीं मिलनें वाला , वैसे मेरी तरफ से नो कमेन्ट ।
अपनें बगल से आप एन्टॉनी को भी यदि हटा देते और दिग्विजय बाबू को बैठा देते तो झगड़ा खत्म नहीं हो जाता ?
क्या मैंनें उन्हें बिठाया है , अपनें बगल में ? पागल जैसी बात करते हो, मेरी हिम्मत है , उन्हें वहाँ से हटानें की ?
आप तो शालीन व्यक्ति हैं , क्रोध क्यों कर रहें हैं मेरे ऊपर ।
तुम ऐसी बेवकूफी की बात करोगे तो मुर्दा भी गुस्से से उठकर चिल्लानें लगेगा ।
देखिये कभी-कभी जन भावना का ख्याल भी रखना चाहिये , आप लोगों को ।
कैसी जन भावना ? मैडम की भावना को ठेस नहीं लगे ,सदैव हम लोग केवल इसी प्रयास में लगे रहते हैं । 
अच्छा , बाबा रामदेव और अन्ना जी देशव्यापी अनशन व आन्दोलन करनें जा रहें हैं , इसपर कुछ कहेंगे ?
देखो , मेरी समझ में आज तक ये नहीं आया कि वे लोग आन्दोलन क्यों और किसके विरुद्ध  कर रहें हैं ?
आप ही लोगों के विरुद्ध तो आन्दोलन हो रहा है, जो-जो कुकर्म हुए हैं वे लोग हिसाब माँग रहे हैं ।
मैंनें अपनें पूरे जीवन काल में मैंने कोई बुरा काम नहीं किया, लेकिन किसी को कुकर्म करनें मना भी नहीं किया ?
देखिये , बाबा रामदेव विदेशों में जमा काला धन देश में लाना चाहते हैं और अन्ना जी लोक-पाल बिल चाहते हैं ।
बाबा रामदेव को किसनें मना किया है कि  काला धन देश में न लाकर रखें , मैंनें तो नहीं रोका है ।
वे भ्रष्टाचारियों और घोटाले-बाजों द्वारा विदेशों में जमा किये गये काले धन को लानें की बात कर रहे हैं ।
मेंरी समझ में नहीं आता कि दूसरों के द्वारा जमा पैसे को कोई और कैसे ला सकता है ?
लोग आपसे उम्मीद करते हैं कि आप यदि चाहें तो कानून बनाकर सारा काला धन देश में मँगा सकते हैं ।
ऐसा कानून बनना संभव नहीं है ,क्योंकि इससे देश का विकास रुक जायेगा ।
आप तो अर्थ-शास्त्री हैं , फिर ऐसा क्यों कह रहे हैं ?
पहले तुम बोलो , सब जानते हुए तुमनें ऐसा प्रश्न क्यों किया ? 
काला-धन तो देश में आनें से रहा , लेकिन अन्ना जी के लोकपाल बिल के बारे में आप की क्या राय है ?
इस बिल को मेरा वैसा ही नैतिक समर्थन है , जैसा समर्थन हमें पवार जी दे रहे हैं ।
तो हम जनता को आश्वस्त कर दें कि लोकपाल बिल जल्द पास हो जायेगा ?
मैंनें उसके पास होनें के बारे में नहीं नैतिक समर्थन देनें के बारे में कहा है ।
कुछ और सवाल पूछूँ , जिनके उत्तर देश की जनता बहुत दिन से चाह रही है ?
अब बहुत हो गया , भागते हो कि बुलाऊँ, सिक्योरिटी को ।

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