हे भारत भाग्य विधाता ,
आप कौन हैं मुझे नहीं मालूम है , मैं बचपन से आप को खोज रहा हूँ , आप ना जानें कितनें आड़े-तिरछों , लुच्चे-लफंगो , गुन्डे-बदमाशों , पापियों-दुराचारियों , नीचों-अधमों को अपनीं शरण में रखकर जमीन से आसमान तक पहुँचा दिये , और वे अब आपके समानान्तर ही देश के भाग्य विधाता बननें की कोशिश में हैं , जिनमें कई तो ऐसे हो गये हैं कि वे भारत की जगह , अन्य देशों की तरक्की में हाथ भी बंटा रहे हैं ।
मुझे चालाकी , मक्कारी , देश से गद्दारी , कमीनापन , नीचता और बेईमानी व भ्रष्टाचार आदि के गुण सिखानें वाला कोई योग्य गुरु ही नहीं मिला , जिसके कारण मैं न तो आत्मिक विकास ही कर सका और ना ही अन्य किसी देश में धन रखकर , उस देश की आर्थिक स्थिति सुधारनें में कोई मदद ही कर सका , निश्चित रुप से मेरे अन्दर ना तो कोई प्रतिभा थी ना अब है , लेकिन परिवार में यदि कोई मन्द बुद्धि या अविकसित दिमाग का व्यक्ति पैदा हो जाये तो क्या उसे प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिये ?
मैं जनता हूँ और दावे के साथ कह सकता हूँ कि यदि आप की थोड़ी सी भी कृपा मिल जाये तो , लँगड़ा एवरेस्ट फतह कर सकता है , गूँगा मो० रफी की मधुर आवाज में गा सकता है , और पागल या गधा टाईप का व्यक्ति साहित्य में नोबल प्राईज जीत सकता है और देश का सबसे बड़ा पद तक पा सकता है । मुझे आपकी महिमा के बारे में सब मालूम है , यदि आप की कृपा दृष्टि हो जाये तो , खटमल मारनें की दवा बेचनें वाला कई फाईव स्टार होटल का मालिक बन सकता हैं , पान बेचनें वाला देश का सबसे बड़ा उद्योगपति हो सकता है ।
आपका गुणगान करनें के लिये , करोंड़ों मुख चाहिये अफसोस कि मेरे पास केवल एक मुँह है और वह भी आपको दिखनें लायक नहीं है । मेरे मन में विचार आया कि जब तमाम देवी देवताओं की पूजा- अर्चना करनें , बाबा लोगों का वन्दन करनें और तमाम तंत्र-मंत्र से भी कोई बात नहीं बनी तो क्यों ना आपकी चरणधूलि अपनें गन्दे माथे पर लगाऊँ , शायद मेरा भाग्य भी तमाम नकारों की तरह से पल्टी खा जाये ।
मैं आपसे केवल इतना माँगता हूँ कि , अगले आनें वाले कुछ दिनों में जिन तमाम नकारे लोगों को , देश को लूटनें का अवसर मिलनें की संभावना है , उनके सम्भावितों में मुझे भी शामिल कर लीजिये , मैं निष्ठा-पूर्वक शपथ लेकर कहता हूँ कि मैं जो भी घोटाला करूँगा , उसके पाई-पाई का हिसाब पूर्ण पारदर्शिता के साथ आप को दूंगा , फिर मेरी सेवा से खुश होकर जो भी ईनाम आप दीजियेगा मैं उसे सादर आपका प्रसाद समझकर ग्रहण करुँगा , और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं कुछ ही दिन में अपनी स्वामी-भक्ति का ऐसा नमूना पेश करूँगा कि कुछ ही दिन में अपनें सारे , टामियों , मोतियों , जैकियों जैसे कुत्तों की सेवा लेनें की आपको कोई जरुरत ही नहीं रह जायेगी मैं विश्वास दिलाता हूँ कि यदि आपकी कृपा रही तो , देश का कोई भी कुत्ता भौंकनें में मेरी बराबरी नहीं कर पायेगा ।
हे भारत के नये नवेले भाग्य विधाता जी - हमहूँ का एक बार मौका प्रदान करिये ना -- प्लीज-- तबियत मस्त ना कर दिये तो ----- कहियेगा ।
हे भारत के नये नवेले भाग्य विधाता जी - हमहूँ का एक बार मौका प्रदान करिये ना -- प्लीज-- तबियत मस्त ना कर दिये तो ----- कहियेगा ।