आज सन्डे मना रहे हैं क्या ?
अच्छा किये आ गये , अन्ना के आन्दोलन के समय से ही कान में रुई और आँख पर पट्टी बँधवाकर अकेले पड़ा रहा ।
रूई और पट्टी क्यों ?
ताकि कुछ देख सुन ना पाऊँ ।
लेकिन मुँह तो खुला ही था , कुछ बोल तो सकते थे ।
जानते हो मैं बिना पूछे , कुछ बोलता नहीं ।
आपकी खामोशी को लोग आप की चतुराई समझे लिये ।
अक्सर मेरे साथ ऐसा ही होता है , मेरी मजबूरी ,ना तो अन्ना समझेंगे ना ही उनकी टीम वाले ।
क्या आपकी पार्टी के सभी नेता को रूई और पट्टी बाँधना अनिवार्य था ?
हाँ जी , और कुछ के मुँह में तो विदेशी टेप भी चिपकाया गया था , कुछ को शीत-निद्रा में भी भेजा गया ।
कपिल सिब्बल टाईप के कुछ लोग जो सर्प योनि में जन्में लगते हैं , अब धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं ।
जानते हो , ये सब मेरे ऊपर , हँसते हैं जब मैं , अपनें पद की गरिमा की बात उन्हें बताता हूँ ।
अच्छा , आप को ऐसा नहीं लगता जैसे आपकी पार्टी के लोग जरुरत से ज्यादा गुलामी में जी रहे हैं ?
लगता तो है , लेकिन करें क्या , मेरी आड़ में सब नंगा नाच कर रहें हैं , बदनाम मैं होता हूँ ।
आप कपड़ा पहनकर नाचनें के लिये क्यों नहीं कहते ।
मजाक मत करो , मैंनें निष्ठा के साथ मैडम की सेवा की है , जो कहा गया सब किया , लेकिन सोचो --- ।
लेकिन सोचें क्या ?
यदि मैंनें वैसी सेवा देश की , की होती तो , मैं भारत-रत्न या देश रत्न का पुरस्कार पानें का हकदार होता ।
लेकिन आप दुखी ना हों , मैडम सेवा मैडल या मैडम रत्न पुरस्कार आपको जरुर मिलेगा ।
वैसा मैडल या पुरस्कार तो है नहीं , लेकिन होता भी तो भी घड़ियाल टाईप के लोग मुझे लेनें नहीं देते ।
आप जैसा व्यक्ति जिसनें देश-हित से कहीं ज्यादा मैडम हित पर ध्यान दिया , आपको ईनाम तो मिलना ही चाहिये ।
सच पूछो तो हमें लगता है कि हम देश से गद्दारी कर रहे हैं , लेकिन करें क्या , दलदल में फँसे हैं ।
आप क्यों दलदल में जाना स्वीकार किये ?
उस समय कितनें नकली आँसू बहे थे , मैंनें भवना में बहकर वैसा फैसला लिया ।
लेकिन जनता तो जानती थी कि आप केवल कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं हैं ।
जनता क्या , मैं स्वयं जानता था कि मेरी क्या हैसियत है , लेकिन ऐसी लूट होनें की मुझे उम्मीद नहीं थी ।
झूठ मत बोलिये , आपनें स्वयं घोटाले बाजों के बचाव में कई बयान दिये हैं , आप सब जानते हैं ।
हाँ , मैं सब जानता हूँ किसनें-किसनें , कहाँ-कहाँ कितनें-कितनें घोटाले किये हैं , लेकिन बता नहीं सकता ।
समय आ गया है कि आप , सारे राज खोल कर जनता के सामनें रख दीजिये , और भारतरत्न हो जाइये ।
जानते हो , हर घोटालें में पता नहीं मेरा नाम भी कैसे आ गया है ?
यानि आपको भी चोरों के गैंग नें अपना सदस्य बना ही लिया । आप सच बोलकर निकल लीजिये वहाँ से ।
अब मैं जहाँ हूँ वही मेरा समाज है , मैं चाहकर भी सामाजिक बन्धनों को तोड़ नहीं सकता ना ही निकल सकता हूँ ।
चोर उचक्कों के समाज में रहना भी चाहते हैं , और सज्जन भी कहलाना चाहते हैं , ये कैसे हो सकता है ?
सहीं कहते हो लेकिन , कुछ वैसे ही काम अनजानें में हम भी कर बैठे हैं , यही हमारी मजबूरी है ।
तब यदि आपको इस जन्म में मिलेगा भी तो केवल मैडम रत्न पुरस्कार या फिर देश का तिरस्कार ।
जा रहे हो क्या ?
जी , अभी आप भी फ्रेश नहीं हुए होंगे , नमस्ते ।
हाँ सही कह रहे हो मैडम से शौच करनें की परमिशन भी अभी लेना है ।
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