प्रद्युम्न
की
माँ
और
---------
को
समर्पित
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रविवार, 10 सितंबर 2017
गुरुवार, 6 जुलाई 2017
ईजरायल से हमें क्या सीखना चाहिये ----
ईजरायल
से
हमें
क्या
हासिल
करना
चाहिये
ईजरायल की कुल आबादी एक करोंड़ के आस-पास । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान की कुल आबादी लगभग एक अरब तीस करोंड़ । ईजरायल के पूरे यहूदी देश-भक्त । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान में कितनें देश-भक्त हैं अनुमान भी नहीं लगा सकते, वैसे दावा है कि 100% भारतीय सच्चे देश-भक्त हैं । भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा-अल्लाह, इंशा-अल्लाह का नारा देनें वाले भी परम् देश-भक्त की श्रेणी में आते हैं । भारत की बर्बादी के नारे तो महज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कायम रखनें के लिये लगाये जाते हैं । हमारे देश में तो ऐसे-ऐसे भी देश-भक्त हैं जो देश के खिलाफ खुलेआम जंग करनें की बात करते हैं लेकिन वह भी देश-भक्ति की अपनी स्टाईल है । ईजरायल को ऊंगली उठानें वालों के हाथ काटनें का शौक है । हमारे देश में हाथ काटनें वालों को ऊंगली दिखाना भी पाप है । ईजरायल देश-द्रोहियों या अपनें नागरिकों पर हमला करनें वालों को सीधे जन्नत पहुँचानें का काम करता है । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान में जहाँ कि बहुत बड़ी संख्या में लोग जन्नत की सैर करना चाहते हैं बहुत सुस्ती की जाती है । एक या दो लोगों को बड़ी मुश्किल से जन्नत की सैर पर भेजा जाता है उस पर तमाम देश-भक्त हल्ला करनें लगते हैं । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान की सरकार को यह समझना चाहिये कि पक्षपात करते हुए केवल एक-दो लोगों को जहन्नुम भेजा जायेगा तो हल्ला होगा ही । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान में तमाम लोग जन्नत की सैर की ख्वाहिश रखते हैं लेकिन सरकार द्वारा उनकी इस जायज माँग को भी नहीं माना जाता । यदि एक बार में 100-200-400 की संख्या में लोग जन्नत भेजें जायें तो कतई हल्ला नहीं होगा । यकीन ना हो तो ईजरायल में देखिये क्या जन्नत जानें के लिये वहाँ कोई हल्ला हो रहा है ? नहीं हो रहा है ना । ईजरायल की सरकार तमाम इच्छुक लोगों को समय समय पर जन्नत भेजती रहती है । आज हालत यह है कि जन्नत का पासपोर्ट चाहनें वाले कम ही नजर आते हैं । अभी फिलहाल इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान को ईजरायल से केवल यही तकनीकि सीखनी है कि कैसे अधिक से अधिक ख्वाहिशमन्द लोगों को जल्दी से जल्दी जन्नत की सैर करवाया जाये । देश के तमाम हिस्सों से लोग जन्नत जानें का आवेदन दे चुके हैं । काश्मीर, केरल, बंगाल, आंन्ध्र प्रदेश ही नहीं अन्य कई प्रदेश के लोगों के भी आवेदन-पत्र भी प्रतिक्षा सूची मे डाल दिये गये हैं । यह उचित नहीं है । आशा है मोदी जी ईजरायल से वह तकनीकि जरुर लेकर आयेंगे जिससे हमारे देश में जन्नत भेजनें की रफ्तार तेज की जा सके ।
जय हिन्द – वन्दे मातरम् - भारत माता की जय ।।
शुक्रवार, 16 जून 2017
ऊपर वाले से शिकायत - एक पत्र
परम आदरणीय प्रभू जी ,
सादर चरण-स्पर्श,
मैं धरती पर जैसे तैसे रहते हुए आशा करता हूँ कि आप ऊपर से नीचे से बीच से जहाँ से भी हो, हम मानवों के हालात को देखकर मुस्कराते हुए मजे से होंगे ।
धरती पर आपनें जितनें भी जीव बनाये हैं सबसे जटिल जीव आपनें मानव को बना दिया है । वह ज्यों-ज्यों विकास करता जा रहा है त्यों-त्यों जाहिल व जंगली होता जा रहा है ।
जैसा कि आपको मालूम ही होगा कि हम दिमागदार मानवों नें आपके अलग-अलग नाम दे रखे हैं और उन नामों के साथ अलग-अलग फिरके भी बना लिये हैं । एक फिरका मानता है कि आपनें धरती सबके लिये बनाई है । एक फिरका मानता है कि धरती आपनें केवल उसके फिरके के लिये बनाई है । उन्हीं फिरकों के चलते आज धरती युद्ध का मैदान बन गई है ।
कमाल तो ये है कि हर फिरके के अपनें नियम व कानून हैं और हर फिरका यह दावा करता है कि यह कानून आपनें उसे बनाकर दिया है । मेरी समझ में नहीं आता कि आपको हम मानवों के लिये तरह-तरह के कानून बनानें की क्या जरुरत थी । आपनें किसी जानवर या परिन्दे के लिये तो कोई कानून नहीं बनाया फिर हम इंसानों के लिये क्यों वैसी जहमत उठाई ।
हमें तो आपकी नियत पर ही शक होता है । आप किसी बच्चे की तरह से हम इंसानी खिलौनों से खेलकर मनोरंजन करते होंगे, आपका यह मनोरंजन अब हम इंसानो पर भारी पड़नें लगा है । हम इंसान ये मानते हैं कि आपनें हमें बुद्धि दिया है ताकि हम सही व गलत का फैसला खुद कर सकें । सच तो ये है कि हम खुद ही असमंसज में हैं कि क्या सही है व क्या गलत है । एक फिरका जिस काम को जन्नत जानें का रास्ता बतलाता है वहीं दूसरा फिरका उसी काम को जहन्नुम जानें का मार्ग बताता है ।
अब मैं कुछ भी लिखनें के लायक नहीं हूँ क्योंकि दूसरे फिरके वालों की आवाजें मुझे सुनाई पड़ रही हैं वे हमारे फिरके वालों के ईलाके में आ रहे हैं । बड़ी दहशत है ।
आपका शुक्रगुजार
शुक्रवार, 12 मई 2017
फेसबुकिये निन्दक और प्रशंसक
फेसबुक के निन्दक व प्रशंसक
पिछले दिनों मेरी पत्नी नें मेरे हाथ को माडर्न स्टाईल में पकड़कर एक फोटो बच्चों से खिचवाई और उसे फेसबुक पर पोस्ट कर दिया । उस फोटो पर मेरे फेसबुकिये मित्रों और पत्नी की सहेलियों के बेहतरीन कमेन्ट्स देखकर मेरी पत्नी बहुत खुश थीं । कुछ कमेन्ट्स ऐसे थे- Best couple in the world, wow, made for each other आदि । मैनें भी उस पोस्ट की फोटो और कमेन्ट्स को देखा । पत्नी के साथ फोटो खिचवानें वाले पति का चेहरा कैसा हो जाता है कहनें की जरुरत नहीं है । मैनें पत्नी से कहा कितनी भद्दी शक्ल लग रही है मेरी । लग रहा है जैसे “ISIS के जेहादियों के सामनें बैठा कोई बन्धक" । मेरी पत्नी नें अपनी सहेलियों के (अविश्सवनीय) कमेन्ट्स को दुहराया । पत्नियों को अपनी सहेलियों की साधारण सी राय भी एक कुन्तल तो पतियों की बेहतरीन राय भी एकाध ग्राम से ज्यादा वजनदार नहीं हो सकती । मेरे बहुत आग्रह के बाद जब मेरी साली नें सत्य के निकट वाला सुझाव पत्नी को दिया तब वह गमगीन फोटो पत्नी के Timeline से हटी ।
फेसबुक की दुनिया
अलग है । वह एक ऐसा सामाजिक समागम है जहाँ लोग अपनें विचार बलपूर्वक थोपते
नजर आते हैं । शुरु में जिसनें भी अनुरोध किया उसे मैनें अपना फेसबुकिया
मित्र बना लिया । फेसबुक पर हर कोई किसी ना किसी का भक्त या धुर विरोधी
होता है । एक बार मैनें कुछ राजनीतिक विचार रखे । एक भक्त मंडली के सदस्यों
नें जो-जो कमेन्ट्स गालियों के रुप में मुझे लिखे - वैसे कमेन्ट्स आजकल
लोग केजरीवाल जी के लिये लिख रहे हैं ।
बेशक, आपको कुछ जानकारी हो या नही लिखना आता हो या नहीं है आप जब चाहें किसी के फटे में अपनी टाँग घुसड़ते हुए बेबाक संविधान के बोलनें के अधिकार का दावा करते हुए कुछ भी पोस्ट कर सकते हैं । फेसबुक पर आलोचक व समालोचक के अलावा भी कई विधाओं के लोग मौजूद होते हैं । यदि कबीर दास जी आज होते तो कतई नहीं लिखते कि - निन्दक नियरे रखिये आंगन कुटी छवाय, बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय । फेसबुक पर आलोचकों व निन्दकों की भरमार है । फेस बुक पर मित्र बनाते समय सबसे पहले मैं अनुरोधक का पूरा प्रोफाईल देखता हूँ, उनके मित्रों/ग्रुप आदि की पूरी सतर्कता के साथ, आयकर अधिकारियों की तरह छान-बीन कर सन्तुष्ट होनें के बाद ही मित्रता का अनुरोध स्वीकार करता हूँ ।
अन्त में मैं सूचित करना चाहता हूँ कि अत्यधिक प्रशंसक या अत्यधिक निंदक लोगों और पत्नी के साथ वाली मेरी ऊपर वर्णित फोटो पर मेरी पत्नी की अनावश्यक रुप से ज्यादा तारीफ करनें वालों को मैनें Unfriend कर दिया है ।
बेशक, आपको कुछ जानकारी हो या नही लिखना आता हो या नहीं है आप जब चाहें किसी के फटे में अपनी टाँग घुसड़ते हुए बेबाक संविधान के बोलनें के अधिकार का दावा करते हुए कुछ भी पोस्ट कर सकते हैं । फेसबुक पर आलोचक व समालोचक के अलावा भी कई विधाओं के लोग मौजूद होते हैं । यदि कबीर दास जी आज होते तो कतई नहीं लिखते कि - निन्दक नियरे रखिये आंगन कुटी छवाय, बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय । फेसबुक पर आलोचकों व निन्दकों की भरमार है । फेस बुक पर मित्र बनाते समय सबसे पहले मैं अनुरोधक का पूरा प्रोफाईल देखता हूँ, उनके मित्रों/ग्रुप आदि की पूरी सतर्कता के साथ, आयकर अधिकारियों की तरह छान-बीन कर सन्तुष्ट होनें के बाद ही मित्रता का अनुरोध स्वीकार करता हूँ ।
अन्त में मैं सूचित करना चाहता हूँ कि अत्यधिक प्रशंसक या अत्यधिक निंदक लोगों और पत्नी के साथ वाली मेरी ऊपर वर्णित फोटो पर मेरी पत्नी की अनावश्यक रुप से ज्यादा तारीफ करनें वालों को मैनें Unfriend कर दिया है ।
सोमवार, 9 जनवरी 2017
कुत्ते का पिल्ला
कुत्ते का पिल्ला
शरीर त्याग कर वह जीव मानव योनि त्याग कर चेतन रुप में परमात्मा के समक्ष प्रस्तुत किया गया । वह चेतन रुप में परमात्मा के सामनें खड़ा था । परमात्मा नें चेतन रुप को पुनः किसी योनि में प्रविष्ट करनें का निर्देश दिया । वह चेतन रुप इस बार भी मानव योनि में उत्पन्न होनें की सोच रहा था । अचानक उसे एहसास हो गया कि परमात्मा अब उसे पुनः मानव योनि प्रदान करनें के मूड में नहीं हैं । वह गिड़गिड़ाया - प्रभू मैं धरती पर पुनः जाना नहीं चाहता । परमात्मा मुस्कराकर बोले - मुझे मालूम है तुम ऐसा क्यों कह रहे हो । मैं तुम्हे दंडित नहीं कर रहा बल्कि तुम्हे उसी योनि में विचरण करनें का अवसर देना चाहता हूँ जिसके तुम अधिकारी हो ।
जीव घबराया । प्रभू मैं किस योनि का अधिकारी हूँ । परमात्मा पुनः मुस्कराकर बोले - तुम अपनें पूर्व योनि की बातों को भूले तो नहीं होगे । यदि भूल रहे हो तो बोलो, मैं तुम्हारे सामनें तुम्हारे भूत काल को प्रकट कर दूँ । जीव जनता था कि परमात्मा से कोई बात छिपायी नहीं जा सकती । अतः वह परमात्मा के सामनें तर्क नहीं कर सकता था । उसे यह भी मालूम था कि उसनेंं जो कुकर्म किये हैं उसके लिये उसे किसी बहुत बुरे जानवर या पंछी की योनि ही परमात्मा उसे प्रदान करेंगे ।
उसनें अपनी तरफ से सफाई देते हुए कहा - प्रभू , मुझे मालूम है कि मैंनें मानव योनि में रहकर बहुत बुरे-बुरे कार्य किये हैं । प्रभू , मैं मानता हूँ कि मैनें मानव योनि में रहकर बहुत से पाप किये हैं लोगों को तकलीफें दी हैं । मेरे अन्दर की चेतना सुप्त हो गई थी । लेकिन प्रभू इसके पीछे एक कारण भी था । मैं मानव योनि में रहते हुए एक सरकारी सेवक बना था । मैं इस दौरान कई लोगों के अधीन सेवारत था और मानव योनि में रहते हुए हे प्रभू, एक अधीनस्थ मानव को विवेक व चेतना को परे रखकर वही कार्य करना पड़ता है जो उसके स्वामी या बॉस को अच्छा लगता हो । प्रभू आप तो जानते हैं कि मैं जिन-जिन मानवों के अधीन था उनमें कई मूर्ख, चापलूसी पसंद, हरामखोर किस्म के दम्भी लोग थे । प्रभू , ज्यादातर स्वामियों को एक चमचा या चाटुकार मानव की जरुरत होती है और मैंनें स्वयं को एक योग्य चाटुकार बनानें में ही अपना सारा समय लगाया ।
जीव पुनः बोला- प्रभू मैं अपनी सेवा काल के दौरान जिन मानवों के अधीन था, वे तो मुझसे काफी पहले ही मानव योनि को त्याग चुके थे । वह भी तो आपके सम्मुख लाये गये होगं । प्रभू मुझे अवगत करायें कि उन्हें किन-किन योनियों में आपनें धरती पर भेजा है या भेजनें जा रहे हैं । प्रभू मुस्कराये- तुम्हारे अधिकांश पूर्व स्वामी जो अधम व दुष्कर्मी थे वे अभी धरती पर ही मानव योनि में अपने कर्मों का फल भुगत रहे हैं । उनमें से कुछ को धरती पर नयी योनियों में भेजा जा चुका है । वे सब किन-किन योनियों में हैं तुम्हे इसकी जानकारी नहीं दी जा सकती । हाँ इतना अवश्य है कि तुम्हारे मानव योनि में रह चुका तुम्हारा एक स्वामी पुनः तुम्हरी नई योनि में तुम्हारे आस-पास ही रहेगा और तुम्हें लगभग वैसे ही काम करनें पड़ेंगे जैसे तुमनें उसके साथ मानव योनि में रहते हुए किये थे ।
जीव घबराकर बोला- प्रभू आपसे कुछ छिपा तो नहीं रह सकता पिर भी मैं अपनें अपराध को स्वीकार करते हुए कहना चाहता हूँ कि मैनें मानव योनि में रहकर अधिकतर केवल किसी कुत्ते के समान ही व्यवहार किया है । मैं दिन भर अपनें स्वामी के आगे-पीछे रहना चहता था ताकि मेरा प्रभुत्व बना रहे । मैनें अपनें स्वामी से झूठी शिकायत करके बहुत से लोगों को क्षति पहुँचाई है । लोग मुझे गालियां देते थे लेकिन मेरा स्वामी मेरे ऊपर आँख मूंदकर विश्वास करता था । लेकिन प्रभू , कुत्ते जैसा आचरण करते हुए भी मैं एक कुत्ते की तरह अपनें स्वामी का कभी वफादार नहीं रहा । मैं उसकी आड़ में केवल अपनी स्वार्थ-पूर्ति में लगा रहता था । इसलिये, मैं प्रभू कुत्ते की योनि प्राप्त करनें लायक भी नहीं हूँ ।
परमात्मा मुस्कराकर बोले - हे जीव तुम जितनी चतुराई दिखा रहे हो उससे साफ है कि तुम्हारे अन्दर से मानव योनि के दौरान आई गन्दगी अभी तक बाकी है । तुम छल-कपट और प्रपंच में इस चेतन रुप में भी माहिर हो । सोचो जब तुम शरीर मानव योनि में रहे होगे तो तुमनें अन्य साधारण मानवों को कितना दुख दिया होगा । तुम अपनी चतुराई के द्वारा मुझसे यह जाननें का प्रयास कर रहे हो कि तुम्हें किस योनि में भेजा जा सकता है । प्रभू मुस्करा कर बोले - जाओ अब तुम्हारा समय हो गया है ।
जाड़े के मौसम में एक कुतिया नें खुले आकाश में पिल्लों को जन्म दिया । पिल्ले ठंड में ठिठुरते हुए किसी प्रकार चलनें-फिरनें लायक हुए । उन पिल्लों में से एक काले रंग के पिल्ले को सड़क के किनारे रहनें वाले एक भिखारी का बेटा उठाकर अपनें साथ ले गया । वह कुत्ते का पिल्ला भिखारी परिवार का सदस्य बनकर उनकी झोपड़ी के बाहर रहते हुए बड़ा होनें लगा । ना तो उस भिखारी को ना ही उस कुत्ते के पिल्ले को अपनीं पूर्व योनि का ज्ञान था । सब प्रभू की माया है ।
शुक्रवार, 6 जनवरी 2017
पुनर्ठेलुआ भव
पुनर्ठेलुआ
भव
ठेलुआ
उसका असली नाम नहीं था बल्कि
लोगों द्वारा दी गई उपाधि थी
। ठेलुआ लोगों की निगाह में
आलसी व अनुपयोगी युवा था ।
घूरे के दिन फिरते हैं । ठेलुआ
के जीवन में भी अचानक परिवर्तन
हुआ । मोदी जी नें 8
नवम्बर
को 8.00
बजे
रात में नोट-बन्दी
का एलान कर दिया । ठेलुआ नें
टी.वी.
पर
न्यूज सुना । उसमें नई उर्जा
का संचार हुआ । ठेलुआ के जिम्मे
एक ऐसा काम आया जिसनें उसे एक
अत्यन्त उपयोगी व्यक्ति बना
दिया । ठेलुआ को उसके घर वालों
व अगल-बगल
के लोगों नें नोट बदलनें की
जिम्मदेारी सौंपी । ठेलुआ को आज
अपनी वास्तविक योग्यता का
अहसास हुआ । ठेलुआ 9
नवम्बर
2016
से
अपनें कर्तव्य को पूरी लगन व
निष्ठा के साथ निभानें के लिये
सुबह से शाम तक बैंक के आगे
लाईन में खड़ा रहनें का काम
करनें लगा । ठेलुआ अत्यन्त
व्यवहार कुशल था । कोई वृद्ध,
महिला
या बीमार लाईन में नहीं लग
पाता या पीछे रहता तो ठेलुआ
उसे अपनी जगह खड़ा कर देता और
खुद सबसे पीछे लाईन में जाकर
खड़ा हो जाता । शाम को वह थका
हारा खाली हाथ घर वापस आता और
लोगों को बताता कि जब तक उसका
नम्बर आता बैंक में नोट ही
खत्म हो जाता है ।
ठेलुआ
के दिन मजे से गुजर रहे थे ।
वह अपनें घर वालों के अलावा
अपने पड़ोसियों का भी चहेता
बन गया था । अब लोग उसे उसके
वास्तविक नाम से ही बुलानें
लगे थे । एक दिन तो वह बैंक के
काऊंटर के पास पहुँच कर रुपया
बदलनें ही वाला था कि एक बुजुर्ग
बेहोश होकर गिर गये । ठेलुआ
काऊन्टर छोड़कर तुरन्त बुजुर्ग
के पास गया और उनके परिजनों
को सांत्वना देनें लगा । उस
दिन भी वह पुनः खाली हाथ घर
वापस आया । ठेलुआ की यह संवेदनशीलता
वाली क्रिया रोज चलती । ठेलुआ
पत्रकारों और टी.वी.
वालों
के आनें पर अपनी कतार को छोड़कर
उनके पास जाकर खड़ा हो जाता
और रुपया न बदल पानें की शिकायत
करता ।
दिसम्बर
माह आते-आते
ठेलुआ का उत्साह कम होनें लगा
क्योंकि अब लाईनें कम होनें
लगीं थीं । उस दिन ठेलुआ हमेशा
की तरह कतार में सबसे पीछे
खड़ा था । तभी कुछ पुलिस वाले
आकर ठेलुआ को पकड़ लिये और
रोज-रोज
लाईन में खड़े होनें के बारे
में पूछ-ताछ
करनें लगे । ठेलुआ नें बताया
कि उसे भीड़ के कारण आज तक एक
भी नोट बदलनें का मौका नहीं
मिला है । पुलिस वाले ठेलुआ
को लेकर बैंक मैनेजर के पास
गये और ठेलुआ के पास रखे 4
हजार
रुपये के पुरानें नोट के बदले
दो हजार के दो गुलाबी नोट
दिलवाये । ठेलुआ को पुलिस की
यह हरकत अच्छी नहीं लगी,
क्योंकि
उसनें अपनें पराक्रम से वे
नोट हासिल नहीं किये थे । ठेलुआ
उदास मन से घर वापस आया ।
ज्यों-ज्यों
बैंक के सामनें कतारें कम होती
जाती ठेलुआ का मन उसी मात्रा
में दुखी हो जाता । 30
दिसम्बर
2016
के
बाद ठेलुआ "पुनर्ठेलुआ
भव"
रह
गया ।
ठेलुआ
अब फिर से एक अनुपयोगी प्राणी
रह गया है । काश,
नोटबन्दी
का एलान एक बार और होता तो ठेलुआ और उसके जैसे बहुत से लोगों
को अपनी उपयोगिता साबित
करनें का मौका मिलता । 
गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016
जाहिल बाप जेहादी बेटा
जाहिल बाप जेहादी बेटा
- बाप- बेटवा आजकल हमरे समझ में नहीं आ रहा है कि तुम रोज भोरे घर से निकल जात हो और देर रात का घर आवत हो, कऊनो काम धाम कर रहे हो का ?
- बेटा - अब्बा , हम जो काम कर रहे हैं ओकरे लिये बहुत से लोग केवल सोचतै रह जात हैं ।
- बाप- कऊन काम कर रहे हो, बेटा ?
- बेटा - तोका बताये से कऊनों फायदा ना है, अब्बा । तुमरे समझ से बाहर की बात है ।
- बाप - हम तुम्हार बाप हैं , हमार हक है कि हमार बेटवा का कर रहा है ओकर जानकारी हमें भी होये ।
- बेटा - बाद में सब जान जाबो, जाने के बाद तुम्हार सीना चौड़ा हो जाई, अब्बा ।
- बाप - हर बाप के ख्वाहिश होत है कि ओकर बेटवा अइसा काम करे कि ओकरे बाप के सीना चौड़ा हो जाये । हमका बताओ कउन सा काम फांदे हो ?
- बेटा - हम अल्ला के राह पर चल रहे हैं , हमार मकसद है कि इ धरती पर अल्ला के हुकूमत कायम हो ।
- बाप- पगला गये हो का, इ पूरी धरती, जहाँन सब अल्ला के बनाये है , फिर ओकर हुकूमत - पागल भये हो का ।
- बेटा- अब्बा , इ सब तुमरे समझ से परे है । तुम जैसे जाहिल लोग ना समझ पाबो कि अल्ला कि हुकूमत का होत है । जब तक धरती पर अल्लाह के हुकूमत ना होईगा, तुम गुलाम बने रहबो ।
- बाप- अबे , अल्लाह तो पूरे कायनात के मालिक है । उ चाहे तो पल में जो चाहे बना दे और पल में मिटा दे । तोका इ सब उल्टी पट्टी के पढ़ा रहा है बे ।
- बेटा - यही तो हम कह रहे हैं कि तुमरे जैसे जाहिल का जानों कि धरती पर अल्ला के हुकूमत के माने का होत है, पूरी जिन्दगी गुलामी में बिता दिये ।
- बाप- तू सचमुच पागल हो गवा है, हम केकरे गुलाम हैं, बोल । तोका तनिक भी चिन्ता है । तोर अम्मी है तोर बहिन सब हैं । तोर बीबी है घर में, ओकरे बच्चा होये वाला है । ओकरे लिये खाना-पीना , दवा दारु के इन्तजाम करे की जगह तू इहे सब चक्कर में घूमत रहत है ।
- बेटा- अल्ला , सब देखत है, वही सब इन्तजाम करीगा । तोका तो अल्ला पर भरोसे नै रहत, अब्बा ।
- बाप- बेटा, तोरे से ज्यादा हमें अल्ला पर भरोसा है । अल्लाह काहिलन के मदद नै करत , हाथ-पैर हिलाबो तबै अल्ला के मदद मिली ।
- बेटा- अब्बा, हाथ पैर तो असल में हमीं जईसे लोग हिलाये रहे हैं । हमका दुनियाबी चीजन से अब कऊनों सरोकार रखे की जरुरत नहीं है । हम जन्नत की राह के मुसाफिर हैं ।
- बाप- अबे , इ जन्नत की राह का होत है ?
- बेटा - तुम जाहिलन के समझ से परे है । हम जो काम कर रहे हैं ओसे सीधा जन्नत मिलिगा । हम सोच लिये हैं कि अल्ला के हुकूमत कायम करे के लिये जेहाद करना है ।
- बाप- अबे, जेहाद के मानें तोका पता भी है ? तोका कऊन समझायेस कि तू जेहादी बन , तोरे माँ-बाप हैं, बहन हैं , बीबी हैं, उनके फिकर तोका नै है का ।
- बेटा - फिकर तो है , लेकिन हमार मकसद के आगे उ सब फिकर बेकार है ।
- बाप- अबे तू उ मौलविया के चक्कर में तो नै आ गवा जो लड़कन के जन्नत के नजारा दिखा के उनके दिमाग खराब करत है । ओकर काम हे लड़कन के बरगलाना, औकरे चक्कर में हो तो अबैहिनें से चेत जाओ ।
- बेटा- उ मौलवी साहब के एक्को लफ्ज ना कहो अब्बा , तुम जईसे लोग का जनबो उनका, कितनी जानकारी है ओकरे पास, अरबी में कुरान, हदीस पढ़त है तो रोअां खड़ा हो जात है । कबौ जाकर उनके तकरीर सुनो ना, तब हकीकत जनबो कि असली आजादी केका कहत हैं और जेहाद का होत है ।
- बाप- उ मौलवी, अरबी में जो पढ़त है , तोरे पल्ले तो कुछ पड़त भी ना होईगा ।
- बेटा - तुम बाप ना भये होते तो तुमका बताईत कि का पल्ले पड़ा और का नाही पड़ा ।
- बाप- बेटा , तुमका इ समय अपनी बीबी के ख्याल तो करे चाही , आखिर उ बच्चा देये वाली है ।
- बेटा - हमार रिश्ता अब जन्नत और वहां के हूरन से कायम होवे वाला है, इहां के बीबी बच्चा से का लेना देना ।
- बाप- अबे तोर निकाह , तो तोेरे रजामंदी से भवा रहा ।
- बेटा- निकाह के टाईम में हम जाहिल रहे , अब हमरे समझ में आ गवा है ।
- बाप - तोका मालूम है , तोरे चार बहन भी हैं , उनके निकाह भी करना है । तुम मदद ना करबो तो कईसे उनके निकाह होईगा ।
- बेटा - अब्बा , तुम सचमुच जाहिल हो, हम बार-बार कह रहे है कि सब अल्ला देखिगा ।
- बाप - बेटा, तोेरे दिमाग में जो जहर भर गवा है ओका हम नै निकाल पाबै । अल्ला तोर मदद करे । लेकिन बेटा इ बात जरुर ध्यान के रखिओ कि अल्ला हमेशा नेकी के साथ रहत है , ईमान के साथ रहत है । तुम जौन मौलवी के शागिर्द बने हो ना , उ बेहद मक्कार आदमी है । ओका देखो , ओके बेटा बेटी सब दिल्ली , बम्बई में पढ़त हैं । पहली बीबी के औलाद तो सब अमेरिका में बस गये हैं । आपन 40 लाख की गाड़ी में चढ़त है । ओके घर देखे हो, घर नहीं पूरा महल बनवाये है । तोरे पास का है , इ कच्चा घर और टूटी-फूटी साईकिल और अलमुनियम के बर्तन ।
- बेटा - अब तुम आये रस्ते पर । जेहाद करे से शहादत मिलीगा , शहादत से जन्नत और जन्नत में उ सब मिली जेकरे लिये इंसान पूरी जिन्दगी तरसत रहत है । एक बात अऊर जान लो, अल्ला जेहाद करे के लिये अपनें मुजाहिद खुद चुनत है । जहाँ तक उ मौलवी साहब के औलादन की बात है, अल्ला उन सबका जेहाद के काबिल ना समझे होई । अब हम अल्ला के सिपाही हैं । हमहूँ फौजी हैं ।
- बाप- बेटा , हम तो सोचा रहा कि , हमार तो पूरी जिन्दगी , जहालत और गुरबत में बीत गई और तुम हमरे सहारा बनबो , लेकिन अब लगत है कि तुम हमरो से ज्यादा जाहिल हो, कम से कम इ तो सोचो कि जेकरे कहे पर तुम जेहाद करे जा रहे हो अऊर जन्नत के ख्वाब देख रहे हो , उ काहे नाही खुद जन्नत चला जात ।
- बेटा - कहा ना तुम , पूरे जाहिल हो । ओकर काम है अल्ला के फौजी बनाना । हमका हथियार चलावे के ट्रेनिंग दिलवाना । तुम का समझबो । अब उ मौलवी साहब का एक्को लफ्ज ना कहना ।
- बाप- तुम हमका धमका रहे हो , अबे आज तक हम कऊनो की धमकी ना सुने हैं । जहाँ तक तोरे मौलवी की बात है ओकरे बारे में तुम का जनबों । ओके सारा पोल-पट्टी हमका मालूम है । तुम का जानो, कितना गिरा हुआ इंसान है । जेहादियन की भर्ती के नाम पर उ लाखों-करोड़ों रुपया कमाये के अपनी चार बीबीयन और उनकी औलादन के एशोआराम से पाल रहा है । तोका का मिली । भागत रहो चोर जईसा जान बचाके कि कहूँ से कोई गोली ना आवे ।
- बेटा - अब्बा , बाप के नाते , तुम्हार लेहाज कर रहे हैं नहीं तो ।
- बाप - का करबो । हाथ उठाबो हमरे ऊपर । नशा-वशा करे है का बे ।
- बेटा - ( हंसते हुए ) अब्बा , जेहाद करे वाले के रोकना गुनाह है और तुम काफिर वाली जुबान बोल के गुनाह पे गुनाह किये जा रहे हो ।
- बाप - अबे तैं मोका धमकी दे रहा है । मोका काफिर बता रहा है । काफिर केका कहत हैं तोका मालूम भी है ।
- बेटा- अल्लाह के राह पर ना चले वाला, अऊर, अल्ला के राह पर जाये वालन के रोके वाला , काफिर होत है । तोका हम बताये रहे हैं , हमरे साथ अईसे अल्लाह के मुजाहिद हैं जो जेहाद करे से रोकै पर अपनें घर वालन का मार डाले हैं ।
- बाप - तो एक काम कर, ले आव आपन असलहा, देखित है कितना दम है तोरे असलहा और जेहाद में ।
- बेटा - अब्बा , हम तोरे जैसे जाहिल आदमी के मुँह लगके गलती किया है । याद रखो , जब हम जन्नत जाबै ना तब तोका अपनें पर गरुर होईगा कि - रशीद मियाँ के बेटवा जेहाद करत भै शहीद हो गवा ।
- बाप ( थककर ) - बेटा , गरुर तो उ मौलवी करीगा जेकरे बहकावे में आकर तोरे जईसे ना जानें कितनें लौंडे , जन्नत और हूरन के फिराक में कुत्ते की मौत मरे के लिये तैयार हो जात हैं । या अल्लाह , इन सबके के अकल पर पत्थर काहे रख दिये ।
- बेटा - अब्बा , तोका अब आखिरी बार समझाये रहे हैं । अब एकौ लफ्ज जुबान से बाहर आवा तो -- ।
- बाप- बेटा , समझ गये इ तू नहीं , तोरे भीतर ठूंसा गया जहर बोल रहा है । जा बेटा, अल्ला यही चाहत है कि तोर कन्धा हमे नसीब ना होवे ।
( गाँव में हो हल्ला हंगामा - मौलवी साहब की तकरीर - " रशीद मियाँ की औलाद को क्या शानदार शहादत मिली , खुदा करे ऐसी शहादत सभी मोमिनों को नसीब हो , उसके चेहरे पर शहादत का नूर देखकर , हमें उससे जलन हो रही है कि अल्लाह नें हमे वैसी शहादत का मौका क्यों ना दिया । )
रशीद मियां के बेटे के जनाजे में जमा भीड़ को देखकर मौलवी की आँखों में चमक आ गई । रशीद मियां का बेटा पुलिस की गोली से मुठभेड़ में मारा गया , उसकी मौत से दुनिया में कुछ हुआ हो या नहीं लेकिन उसकी मौत का सीधा फायदा मौलवी साहब को होना था । झुण्ड के झुण्ड जेहादियों की नई फसल और विदेश से और ज्यादा पैसा मिलनें की उम्मीद । सबका अपना-अपना धन्धा है कारोबार है । कौन, किसको, कहाँ, कैसे,क्यों, कब और क्या बेच रहा है , हमें उससे क्या लेना देना ।
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