सोमवार, 7 मई 2018

बच्चों को राजनीति में भेजनें का सपना भी देखिये -



 बच्चों को राजनीति में भेजनें का सपना भी देखिये - 


                 देश में करोड़ों बच्चे हैं जो अपनें माता-पिता के सपनों को अपनें कंधों पर लादे रोज स्कूल जाते हैं . हर माता पिता की ख्वाहिश होती है कि उनका बेटा या बेटी पढ़ लिख कर बड़ा अधिकारी बनें या सम्मानजनक पद पर कार्य करे . शायद ही कोई ऐसे माता-पिता होंगे जो अपनें बेटों को एक सफल राजनेता के रूप में देखना चाहते हों, ऐसी स्थिति में किसी भी बच्चे का सपना नेता बननें का हो ही नहीं सकता . सब जानते हैं कि पढ़ लिख कर  उनका बेटा या बेटी कितने ही उच्च पद पर क्यों न आसीन हो जाये लेकिन उसे वह रुतबा व हैसियत नहीं मिल सकती जो एक सफल राजनेता को मिलती है . 
                यह  कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि हम लोगों नें राजनीति को एक ऐसा उपेक्षित क्षेत्र मान लिया है जिसमें किसी सभ्य या पढ़े लिखे व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है . सोचिए जिस क्षेत्र में काम करनें वाले लोगों के ऊपर हमारे  देश का और हमारा भविष्य निर्भर करता है उसमें जानें के लिए हम जानबूझ कर ऐसे लोगों के लिए हम स्वयं रास्ता बनाते हैं जो समाज के बहिष्कृत और नकारा लोग कहे जाते हैं . 
                 एक बार इलाहाबाद में सभासद का चुनाव था , चुनाव में भद्र और सज्जन कहे जानें वाले एक प्रोफ़ेसर साहब भी चुनाव में खड़े हुए . चुनाव में जीतनें वाला उम्मीदवार कैसा था यह बतानें की जरूरत नहीं है लेकिन प्रोफ़ेसर साहब को उस चुनाव में इतनें कम वोट मिले कि उन्होंने कभी दुबारा चुनाव लड़नें की हिम्मत नहीं की .
               इसका कारण भी साफ है , प्रोफ़ेसर साहब यदि चुनाव जीत कर नगर महा पालिका में जाकर वहां के अधिकारियों व कर्मचारियों से सभ्यता से बात करते और जनता की समस्याओं को उठाते तो एक तो कोई उन्हें तवज्जो नहीं देता दूसरे नगर महा पालिका के लोगों को सभ्यता से बात सुननें की आदत भी नहीं है . 
                 बिहार में बाहुबली नेता सहाबुद्दीन और पूर्णिया के नेता पप्पू यादव नें अपने जिलों में सारे विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को सुधार दिया था, यहाँ तक कि डॉक्टर लोग भी मनमानी फीस नहीं ले सकते थे , क्या किसी शरीफ व सज्जन नेता ऐसा कर सकता था , उत्तर एक है - नहीं , कभी नहीं . 
                   मेरी देश के तमाम माता-पिताओं से करबद्ध प्रार्थना है कि वे अपनें बच्चों को बेशक पढ़ायें , लेकिन उन्हें लुच्चई , लफंगई , गुंडई , आदि की शिक्षा भी अवश्य दें ताकि वह देश में एक सफल राजनेता के रूप में अपना कैरियर बनानें के बारे में सोचे . यदि आपका बेटा या बेटी एक सफल नेता बना गया तो फिर आपकी दस बीस पीढ़ी को किसी काम धाम की जरूरत नहीं रह जायेगी . सब कुछ हराम में मिलेगा . सोचिए यदि आपका बेटा पढ़ लिख कर कोई अधिकारी या बाबू बन गया और गलती से वह ईमानदार रह गया तो वह अपनें जीवन का नाश तो करेगा ही साथ ही साथ अपनीं पत्नी और बच्चों का जीवन भी बर्बाद कर देगा . 
                   नेता बनना आज के युग में सबसे कठिन काम भी है . जिस प्रकार किसी भी नौकरी में योग्यता जरूरी होती है और जो सबसे योग्य पाया जाता है उसे ही चुना जाता है. उसी प्रकार नेता बननें के लिए दूसरे प्रकार की योग्यता जरुरी होती है जिसे हम जैसे अज्ञानी लोग अयोग्यता की श्रेणी में रखते हैं . राजनीति में प्रतिस्पर्द्धा दूसरे तरह की है जैसे आप नें दस अपराध किये हों और खुद को योग्य समझ रहे हों लेकिन बारह या पन्द्रह संगीन अपराध करनें वाला आपसे ज्यादा योग्य माना जाता है .  किसी अपराधी को अपनें को लम्बे समय तक जिन्दा बचाए रखना बहुत मुश्किल होता है , इसके लिए उसे कभी-कभी राजनीतिक संरक्षण और पुलिस की मदद भी लेनी पड़ती है जो जोखिम भरा भी होता है . धीरे-धीरे वह अपराधी अपनें सम्पर्क सीमा का विस्तार करता जाता है और अपनी काबिलियत को निखरता जाता है यही वह काबिलियत और योग्यता होती है जिसके कारण संरक्षण देनें वाला नेता उसका चमचा और पुलिस वाला उसका बॉडी गार्ड  बन जाता है . 
                हमारे देश की जनता मिमियानें वाले व्यक्ति को नेता नहीं मान  सकती . नेता का मतलब होता है एक कड़कदार आवाज वाला रोबीला दबंग व्यक्तित्व जिसे देखते ही सरकारी अधिकारी व बाबू की पैंट गीली हो जाये, बिना दिमाग का होता हुए भी दूसरे को ज्ञान दे . छोटे मोटे गुंडे उसके यहाँ नौकरों की तरह काम करें और उसके एक ईशारे पर किसी कुत्ते की तरह सामनें वाले पर झपट पड़ें . 
                     जिस दिन हमारे देश के सारे सरकारी विभाग ईमानदारी से जनता की तकलीफों को दूर करनें लगेंगे और बिना किसी गुंडे टाईप नेता का लात- जूता खाए सही तरीके से अपना काम करेंगे तो निश्चित रूप से देश को उन नेताओं से मुक्ति मिलेगी जिनके कारण हमारे देश की संसद और विधान सभाओं का मजाक उड़ता है और उस उच्च आसन पर अपराधी और अनपढ़ लोग विराजमान होते जा रहे हैं .  

का सपना भी देखिये - ना भी देखिये - 

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