शनिवार, 14 अक्टूबर 2017

दहेज और हमारी मानसिकता

                       दहेज और हमारी ओछी मानसिकता 

नीतीश जी दहेज-मुक्त बिहार की बात करते हैं , सही है लेकिन यह तभी संभव है जब हम खुद इसके लिये आगे आयें -इस सन्दर्भ में एक सच्ची घटना का जिक्र करना चाहता हूँ --

     यह कहानी उस सख्श की है जो दहेज-प्रथा का प्रबल विरोधी था । वह बिहार में एक बड़ा अधिकारी बना । उसनें बिना दहेज की शादी करनें का प्रण लिया था । उसनें वैसे तमाम वैवाहिक प्रस्तावों को ठुकराया जो उसे अच्छी खासी रकम दहेज में दे रहे थे । उसनें एक अत्यंत साधारण परिवार की लड़की से विवाह फाईनल कर तारीख आदि तय कर दी ।
    शादी तो तय हो गयी अब लोगों की कानाफूसी शुरु होनें लगी । केवल उसके घर वाले जानते थे कि वह सही कर रहा है । रिश्तेदार नातेदार और करीबी लोग अनुमान लगाते थे कि वह निश्चित रुप से प्रेम विवाह कर रहा है अन्यथा आज के युग में मिलती रकम कौन छोड़ता है ।  
उधर कन्या पक्ष के जलनशील रिश्तेदारों का दावे के साथ कहना था कि लड़के में जरुर कोई ऐब होगा अन्यथा इतना बड़ा अफसर बिना दहेज की शादी क्यों करेगा । लोगों नें तो यह भी दावा करना शुरु कर दिया कि लड़का पहले से ही शादीशुदा है और अधिकारी बननें के बाद वह दूसरी शादी कर रहा है ।
    बहरहाल शादी भी हो गई । बिना दहेज की शादी लोगों के लिये कौतूहल का विषय बन गई । हद तो तब हो गई जब उसकी पहली पुत्री को कुछ तथाकथित करीबी लोगों नें दावे के साथ यह बताना शुरु कर दिया कि ये तो उसकी पहली पत्नी की बेटी है ।
       इसके अलावा भी बहुत सी ऐसी बातें लोगों नें कहीं जो बहुत ही विचित्र थीं लेकिन दोनों पति पत्नी शादी के बाद से लोगों की मानसिकता का उपहास उड़ाते हुए मजे से खुशहाल जिन्दगी गुजारते हैं ।
       इस कहानी के जिक्र करनें का मकसद मात्र इतना है कि आज के युग में हम जब कोई अच्छा काम करना चाहें तो उसमें भी लोगों को शक होता है क्योंकि लोगों को यह उम्मीद या आशा ही नहीं होती कि कोई नेक काम भी कर सकता है । बहुत ही गन्दी व ओछी है हमारी मानसिकता ।
      मैं तमाम वैसे लोगों से अनुरोध करुँगा कि हमारा समाज बदलाव के खिलाफ बोलता तो है लेकिन बदलाव को अपनें फायदे के लिये हो अपनाना चाहता है, अतः अच्छे पद पर पहुँच कर दहेज नहीं लेनें पर उलाहना, उपेक्षा व व्यंगबाणों को झेलनें से बेहतर है, भाई लोग, आप वही करो जो समाज चाहता है ।
            मेरे इस पोस्ट से जिन लोगों को तकलीफ या ठेस पहुँची हो उनकी आत्मा को भगवान शान्ति दे ।

सोमवार, 18 सितंबर 2017

रोहिंग्याओं के लिये बिलखते तथाकथित सेकूलर व गद्दार


                  रोहिंग्याओं के लिये बिलखते सेकूलर व गद्दार

     जिस समय काश्मीर घाटी में हिन्दुओं को काटा जा रहा था वहाँ से भगाया जा रहा था तब तथाकथित सेकूलरों और मुस्लिम नेताओं नें अपनें मुँह को बन्द कर रखा था । भारत की संस्कृति अतिथियों का सम्मान व स्वागत करना सिखाती है लेकिन हमारी उस आवभगत वाली संस्कृति का लाभ उठाकर जब हमें बेदखल करनें की साजिश हो तब वह मेहमान नवाजी नहीं मूर्खता होगी ।

   इन रोहिंग्या मुसलमानों को काश्मीर में बसनें पर देश के सेकूलर व मुलसमान नेता चुप रहते हैं लेकिन जब काश्मीर में हिन्दुओं के बसानें की बात आती है तब ये सारे चुप क्योंं हो जाते हैं । 

  हिन्दुओं नें सदियों से अपनी बहुत दुर्गति देखी है । बहुत पीड़ा व अपमान सहा है । अब ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिये जो हमारे देश की आनें वाली पीढ़ी के लिये दुःखदायक हो ।

  रोहिंग्या मुलसमान भविष्य में देश के लिये घातक सिद्ध होंगे या नहीं इस पर बहस करना बेकार है । हम क्यों ऐसा कोई खतरा मोल लें जो आगे हमारे लिये सिरदर्द बन जाये । हमारे देश में वैसे ही बहुत समस्यायें हैं । हमें एक और समस्या नहीं चाहिये । ये रोहिंग्या किसी भी हालत में हमारे देश में रहनें के लायक नहीं हैं । सिर्फ रोहिंग्या ही नहीं, देश के भीतर बैठे जो अन्य घुसपैठिये व गद्दार हैं उन्हें भी देश से बाहर करना चाहिये , जो हमारे हिस्से का अन्न खाकर हमारे देश के लिये घातक बने हुए हैं । 

  हमें हँसी तब आती है जब पूरी दुनिया को मानवता के सन्देश देनें वाले हमारे देश को ही मानवाधिकार की बात समझाते हैं । सच तो ये है कि यदि हम आज अपनी सहिष्णुता त्याग दें तो देश के साथ गद्दारी करनें वाले गोबरैले कीड़े से ज्यादा की हैसियत वाले साबित नहीं होगें ।

 

रविवार, 10 सितंबर 2017

प्रद्युम्न की माँ और --------- को समर्पित


प्रद्युम्न की माँ और --------- को समर्पित


तुम आओगे नहीं मालूम है , मैं दर्द सहकर, तुम्हारा नाम लेकर जी लूँगी, 

लेकिन, 

स्कूल से आकर जो कुछ भी तुम सुनाते थे,

उन्हें सुननें का जी करेगा तो क्या करूँगी,

तुम जो कपड़े उतार कर फेंक देते थे इधर उधर,

उन्हें सहजनें और साफ करनें का जी करेगा तो क्या करुँगी

तुम्हारी फर्माईशें जिनको पूरा करनें के लिये हम कुछ भी करते थे,

उन फर्माईशों को सुननें का जी करेगा तो क्या करूँगी,

रोज रात को मेरे बिना तुम सोते नहीं थे,

तुम्हें सुलानें का जी करेगा तो क्या करूँगी,

सुबह स्कूल जानें के लिये कितनी मशक्कत के बाद तुम तैयार होते थे,

तुम्हें फिर से तैयार करनें का जी करेगा तो क्या करूँगी,

टिफिन की तैयारी से होती थी, सुबह की शुरुआत मेरी,

तुम्हारे खाली टिफिन में कुछ रखनें का जी करेगा तो क्या करूँगी,

बाहर शोर हो रहा, बच्चे घर को लौटते होंगे,

ऊँगली पकड़कर, घर में लानें का जी करेगा तो क्या करूँगी

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

ईजरायल से हमें क्या सीखना चाहिये ----



                                         ईजरायल से हमें क्या हासिल करना चाहिये


     ईजरायल की कुल आबादी एक करोंड़ के आस-पास । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान की कुल आबादी लगभग एक अरब तीस करोंड़ । ईजरायल के पूरे यहूदी देश-भक्त । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान में कितनें देश-भक्त हैं अनुमान भी नहीं लगा सकते, वैसे दावा है कि 100% भारतीय सच्चे देश-भक्त हैं । भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा-अल्लाह, इंशा-अल्लाह का नारा देनें वाले भी परम् देश-भक्त की श्रेणी में आते हैं । भारत की बर्बादी के नारे तो महज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कायम रखनें के लिये लगाये जाते हैं । हमारे देश में तो ऐसे-ऐसे भी देश-भक्त हैं जो देश के खिलाफ खुलेआम जंग करनें की बात करते हैं लेकिन वह भी देश-भक्ति की अपनी स्टाईल है । ईजरायल को ऊंगली उठानें वालों के हाथ काटनें का शौक है । हमारे देश में हाथ काटनें वालों को ऊंगली दिखाना भी पाप है । ईजरायल देश-द्रोहियों या अपनें नागरिकों पर हमला करनें वालों को सीधे जन्नत पहुँचानें का काम करता है । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान में जहाँ कि बहुत बड़ी संख्या में लोग जन्नत की सैर करना चाहते हैं बहुत सुस्ती की जाती है । एक या दो लोगों को बड़ी मुश्किल से जन्नत की सैर पर भेजा जाता है उस पर तमाम देश-भक्त हल्ला करनें लगते हैं । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान की सरकार को यह समझना चाहिये कि पक्षपात करते हुए केवल एक-दो लोगों को जहन्नुम भेजा जायेगा तो हल्ला होगा ही । इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान में तमाम लोग जन्नत की सैर की ख्वाहिश रखते हैं लेकिन सरकार द्वारा उनकी इस जायज माँग को भी नहीं माना जाता । यदि एक बार में 100-200-400 की संख्या में लोग जन्न भेजें जायें तो कतई हल्ला नहीं होगा । यकीन ना हो तो ईजरायल में देखिये क्या जन्न जानें के लिये वहाँ कोई हल्ला हो रहा है ? नहीं हो रहा है ना । ईजरायल की सरकार तमाम इच्छुक लोगों को समय समय पर जन्न भेजती रहती है । आज हालत यह है कि जन्नत का पासपोर्ट चाहनें वाले कम ही नजर आते हैं । अभी फिलहाल इंडिया That is Bharat यानि हिन्दुस्तान को ईजरायल से केवल यही तकनीकि सखनी है कि कैसे अधिक से अधिक ख्वाहिशमन्द लोगों को जल्दी से जल्दी जन्न की सैर करवाया जाये । देश के तमाम हिस्सों से लोग जन्नत जानें का आवेदन दे चुके हैं । काश्मीर, केरल, बंगाल, आंन्ध्र प्रदेश ही नहीं अन्य कई प्रदेश के लोगों के भी आवेदन-पत्र भी प्रतिक्षा सूची मे डाल दिये गये हैं । यह उचित नहीं है । आशा है मोदी जी ईजरायल से वह तकनीकि जरुर लेकर आयेंगे जिससे हमारे देश में जन्नत भेजनें की रफ्तार तेज की जा सके ।


जय हिन्द – वन्दे मातरम् - भारत माता की जय ।।







शुक्रवार, 16 जून 2017

ऊपर वाले से शिकायत - एक पत्र



      परम आदरणीय प्रभू जी ,
              सादर चरण-स्पर्श,
                     मैं धरती पर जैसे तैसे रहते हुए आशा करता हूँ कि आप ऊपर से नीचे से बीच से जहाँ से भी हो, हम मानवों के हाल‌ात को देखकर मुस्कराते हुए मजे से होंगे । 
                    धरती पर आपनें जितनें  भी जीव बनाये हैं सबसे जटिल जीव आपनें मानव को बना दिया है । वह ज्यों-ज्यों विकास करता जा रहा है त्यों-त्यों जाहिल व जंगली होता जा रहा है । 
                   जैसा कि आपको मालूम ही होगा कि हम दिमागदार मानवों नें आपके अलग-अलग नाम दे रखे हैं और उन नामों के साथ अलग-अलग फिरके भी बना लिये हैं । एक फिरका मानता है कि आपनें धरती सबके लिये बनाई है । एक फिरका मानता है कि धरती आपनें केवल उसके फिरके के लिये बनाई है । उन्हीं फिरकों के चलते आज धरती युद्ध का मैदान बन गई है ।
                   कमाल तो ये है कि हर फिरके के अपनें नियम व कानून हैं और हर फिरका यह दावा करता है कि यह कानून आपनें उसे बनाकर दिया है । मेरी समझ में नहीं आता कि आपको हम मानवों के लिये तरह-तरह के कानून बनानें की क्या जरुरत थी । आपनें किसी जानवर या परिन्दे के लिये तो कोई कानून नहीं बनाया फिर हम इंसानों के लिये क्यों वैसी जहमत उठाई ।
                 हमें तो आपकी नियत पर ही शक होता है । आप किसी बच्चे की तरह से हम इंसानी खिलौनों से खेलकर मनोरंजन करते होंगे, आपका यह मनोरंजन अब हम इंसानो पर भारी पड़नें लगा है । हम इंसान ये मानते हैं कि आपनें हमें बुद्धि दिया है ताकि हम सही व गलत का फैसला खुद कर सकें । सच तो ये है कि हम खुद ही असमंसज में हैं कि क्या सही है व क्या गलत है । एक फिरका जिस काम को जन्नत जानें का रास्ता बतलाता है वहीं दूसरा फिरका उसी काम को जहन्नुम जानें का मार्ग बताता है ।
                     अब मैं कुछ भी लिखनें के लायक नहीं हूँ क्योंकि दूसरे फिरके वालों की आवाजें मुझे सुनाई पड़ रही हैं वे हमारे फिरके वालों के ईलाके में आ रहे हैं । बड़ी दहशत है ।
                                                                              आपका शुक्रगुजार

               

शुक्रवार, 12 मई 2017

फेसबुकिये निन्दक और प्रशंसक





    
फेसबुक के निन्दक व प्रशंसक

पिछले दिनों मेरी पत्नी नें मेरे हाथ को माडर्न स्टाईल में पकड़कर एक फोटो बच्चों से खिचवाई और उसे फेसबुक पर पोस्ट कर दिया । उस फोटो पर मेरे फेसबुकिये मित्रों और पत्नी की सहेलियों के बेहतरीन कमेन्ट्स देखकर मेरी पत्नी बहुत खुश थीं । कुछ कमेन्ट्स ऐसे थे- Best couple in the world, wow, made for each other आदि । मैनें भी उस पोस्ट की फोटो और कमेन्ट्स को देखा । पत्नी के साथ फोटो खिचवानें वाले पति का चेहरा कैसा हो जाता है कहनें की जरुरत नहीं है । मैनें पत्नी से कहा कितनी भद्दी शक्ल लग रही है मेरी । लग रहा है जैसे “ISIS के जेहादियों के सामनें बैठा कोई बन्धक" । मेरी पत्नी नें अपनी सहेलियों के (अविश्सवनीय) कमेन्ट्स को दुहराया । पत्नियों को अपनी सहेलियों की साधारण सी राय भी एक कुन्तल तो पतियों की बेहतरीन राय भी एकाध ग्राम से ज्यादा वजनदार नहीं हो सकती । मेरे बहुत आग्रह के बाद जब मेरी साली नें सत्य के निकट वाला सुझाव पत्नी को दिया तब वह गमगीन फोटो पत्नी के Timeline से हटी ।
फेसबुक की दुनिया अलग है । वह एक ऐसा सामाजिक समागम है जहाँ लोग अपनें विचार बलपूर्वक थोपते नजर आते हैं । शुरु में जिसनें भी अनुरोध किया उसे मैनें अपना फेसबुकिया मित्र बना लिया । फेसबुक पर हर कोई किसी ना किसी का भक्त या धुर विरोधी होता है । एक बार मैनें कुछ राजनीतिक विचार रखे । एक भक्त मंडली के सदस्यों नें जो-जो कमेन्ट्स गालियों के रुप में मुझे लिखे - वैसे कमेन्ट्स आजकल लोग केजरीवाल जी के लिये लिख रहे हैं ।
बेशक, आपको कुछ जानकारी हो या नही लिखना आता हो या नहीं है आप जब चाहें किसी के फटे में अपनी टाँग घुसड़ते हुए बेबाक संविधान के बोलनें के अधिकार का दावा करते हुए कुछ भी पोस्ट कर सकते हैं । फेसबुक पर आलोचक व समालोचक के अलावा भी कई विधाओं के लोग मौजूद होते हैं । यदि कबीर दास जी आज होते तो कतई नहीं लिखते कि - निन्दक नियरे रखिये आंगन कुटी छवाय, बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय । फेसबुक पर आलोचकों व निन्दकों की भरमार है । फेस बुक पर मित्र बनाते समय सबसे पहले मैं अनुरोधक का पूरा प्रोफाईल देखता हूँ, उनके मित्रों/ग्रुप आदि की पूरी सतर्कता के साथ, आयकर अधिकारियों की तरह छान-बीन कर सन्तुष्ट होनें के बाद ही मित्रता का अनुरोध स्वीकार करता हूँ ।
अन्त में मैं सूचित करना चाहता हूँ कि अत्यधिक प्रशंसक या अत्यधिक निंदक लोगों और पत्नी के साथ वाली मेरी ऊपर वर्णित फोटो पर मेरी पत्नी की अनावश्यक रुप से ज्यादा तारीफ करनें वालों को मैनें Unfriend कर दिया है ।

सोमवार, 9 जनवरी 2017

कुत्ते का पिल्ला


                                                               कुत्ते का पिल्ला 

         शरीर त्याग कर वह जीव मानव योनि त्याग कर चेतन रुप में परमात्मा के समक्ष प्रस्तुत किया गया । वह चेतन रुप में परमात्मा के सामनें खड़ा था । परमात्मा नें चेतन रुप को पुनः किसी योनि में प्रविष्ट करनें का निर्देश दिया । वह चेतन रुप इस बार भी मानव योनि में उत्पन्न होनें की सोच रहा था । अचानक उसे एहसास हो गया कि परमात्मा अब उसे पुनः मानव योनि प्रदान करनें के मूड में नहीं हैं । वह गिड़गिड़ाया - प्रभू मैं धरती पर पुनः जाना नहीं चाहता । परमात्मा मुस्कराकर बोले - मुझे मालूम है तुम ऐसा क्यों कह रहे हो । मैं तुम्हे दंडित नहीं कर रहा बल्कि तुम्हे उसी योनि में विचरण करनें का अवसर देना चाहता हूँ जिसके तुम अधिकारी हो । 
      जीव घबराया । प्रभू मैं किस योनि का अधिकारी हूँ । परमात्मा पुनः मुस्कराकर बोले - तुम अपनें पूर्व योनि की बातों को भूले तो नहीं होगे । यदि भूल रहे हो तो बोलो, मैं तुम्हारे सामनें तुम्हारे भूत काल को प्रकट कर दूँ । जीव जनता था कि परमात्मा से कोई बात छिपायी नहीं जा सकती । अतः वह परमात्मा के सामनें तर्क नहीं कर सकता था । उसे यह भी मालूम था कि उसनेंं जो कुकर्म किये हैं उसके लिये उसे किसी बहुत बुरे जानवर या पंछी की योनि ही परमात्मा उसे प्रदान करेंगे ।
     उसनें अपनी तरफ से सफाई देते हुए कहा - प्रभू , मुझे मालूम है कि मैंनें मानव योनि में रहकर बहुत बुरे-बुरे कार्य किये हैं । प्रभू , मैं मानता हूँ कि मैनें मानव योनि में रहकर बहुत से पाप किये हैं लोगों को तकलीफें दी हैं । मेरे अन्दर की चेतना सुप्त हो गई थी । लेकिन प्रभू इसके पीछे एक कारण भी था । मैं मानव योनि में रहते हुए एक सरकारी सेवक बना था । मैं इस दौरान कई लोगों के अधीन सेवारत था और मानव योनि में रहते हुए हे प्रभू, एक अधीनस्थ मानव को विवेक व चेतना को परे रखकर वही कार्य करना पड़ता है जो उसके स्वामी या बॉस को अच्छा लगता हो । प्रभू आप तो जानते हैं कि मैं जिन-जिन मानवों के अधीन था उनमें कई मूर्ख, चापलूसी पसंद, हरामखोर किस्म के दम्भी लोग थे । प्रभू , ज्यादातर स्वामियों को एक चमचा या चाटुकार मानव की जरुरत होती है और मैंनें स्वयं को एक योग्य चाटुकार बनानें में ही अपना सारा समय लगाया ।
जीव पुनः बोला- प्रभू मैं अपनी सेवा काल के दौरान जिन मानवों के अधीन था, वे तो मुझसे काफी पहले ही मानव योनि को त्याग चुके थे । वह भी तो आपके सम्मुख लाये गये होगं । प्रभू मुझे अवगत करायें कि उन्हें किन-किन योनियों में आपनें धरती पर भेजा है या भेजनें जा रहे हैं । प्रभू मुस्कराये- तुम्हारे अधिकांश पूर्व स्वामी जो अधम व दुष्कर्मी थे वे अभी धरती पर ही मानव योनि में अपने कर्मों का फल भुगत रहे हैं । उनमें से कुछ को धरती पर नयी योनियों में भेजा जा चुका है । वे सब किन-किन योनियों में हैं तुम्हे इसकी जानकारी नहीं दी जा सकती । हाँ इतना अवश्य है कि तुम्हारे मानव योनि में रह चुका तुम्हारा एक स्वामी पुनः तुम्हरी नई योनि में तुम्हारे आस-पास ही रहेगा और तुम्हें लगभग वैसे ही काम करनें पड़ेंगे जैसे तुमनें उसके साथ मानव योनि में रहते हुए किये थे । 
जीव घबराकर बोला- प्रभू आपसे कुछ छिपा तो नहीं रह सकता पिर भी मैं अपनें अपराध को स्वीकार करते हुए कहना चाहता हूँ कि मैनें मानव योनि में रहकर अधिकतर केवल किसी कुत्ते के समान ही व्यवहार किया है । मैं दिन भर अपनें स्वामी के आगे-पीछे रहना चहता था ताकि मेरा प्रभुत्व बना रहे । मैनें अपनें स्वामी से झूठी शिकायत करके बहुत से लोगों को क्षति पहुँचाई है । लोग मुझे गालियां देते थे लेकिन मेरा स्वामी मेरे ऊपर आँख मूंदकर विश्वास करता था । लेकिन प्रभू , कुत्ते जैसा आचरण करते हुए भी मैं एक कुत्ते की तरह अपनें स्वामी का कभी वफादार नहीं रहा । मैं उसकी आड़ में केवल अपनी स्वार्थ-पूर्ति में  लगा रहता था । इसलिये, मैं प्रभू कुत्ते की योनि प्राप्त करनें लायक भी नहीं हूँ ।
परमात्मा मुस्कराकर बोले - हे जीव तुम जितनी चतुराई दिखा रहे हो उससे साफ है कि तुम्हारे अन्दर से मानव योनि के दौरान आई गन्दगी अभी तक बाकी है । तुम छल-कपट और प्रपंच में इस चेतन रुप में भी माहिर हो । सोचो जब तुम शरीर मानव योनि में रहे होगे तो तुमनें अन्य साधारण मानवों को कितना दुख दिया होगा । तुम अपनी चतुराई के द्वारा मुझसे यह जाननें का प्रयास कर रहे हो कि तुम्हें किस योनि में भेजा जा सकता है । प्रभू मुस्करा कर बोले - जाओ अब तुम्हारा समय हो गया है ।
जाड़े के मौसम में एक कुतिया नें खुले आकाश में पिल्लों को जन्म दिया । पिल्ले ठंड में ठिठुरते हुए किसी प्रकार चलनें-फिरनें लायक हुए । उन पिल्लों में से एक काले रंग के पिल्ले को सड़क के किनारे रहनें वाले एक भिखारी का बेटा उठाकर अपनें साथ ले गया । वह कुत्ते का पिल्ला भिखारी परिवार का सदस्य बनकर उनकी झोपड़ी के बाहर रहते हुए बड़ा होनें लगा । ना तो उस भिखारी को ना ही उस कुत्ते के पिल्ले को अपनीं पूर्व योनि का ज्ञान था । सब प्रभू की माया है ।

 रिकवरी आफ इंडिया   बनाम   डिस्कवरी आफ इंडिया   संसार के अधिकांश इतिहासकारों नें अपनें देश का इतिहास लिखते समय इस बात का ध्यान र...