यात्रियों
के बोझ से बैठ गई सम्पूर्ण
क्रांति एक्सप्रेस
नई
दिल्ली से पटना जानें वाली
सम्पूर्ण
क्रांति एक्सप्रेस रेल की
जनरल बोगी में इतनें यात्री
बैठ गये कि वह बोगी ही बैठ गई
.
आजादी
के इतनें दिन बाद भी आम आदमी
जो हवाई जहाज व रेल के ए.सी.
बोगी
में बैठ कर यात्रा नहीं कर
सकता वह स्लीपर में या जनरल
बोगी में बैठकर यात्रा करता
है .
जनरल
बोगी में बैठे यात्रियों को
देखकर लगता है यदि धरती पर
कहीं नर्क है तो यहीं है .
हमारे
रेल विभाग नें मान लिया है कि
आम गरीब आदमी इसी प्रकार नर्क
की यातना भोगकर यात्रा करनें
के लिए बना है .
हमारे
देश की जनरल बोगियों का हांल
किसी बड़े त्यौहार में देखनें
लायक होता है .
ईद
हो या होली ,
दशहरा
हो या छठ उस समय वैसे तो पूरी
ट्रेन को ठीक से देख पाना भी
असंभव होता है चारों और केवल
लटके हुए यात्री ही नजर आते
हैं .
हमारे
देश के नेता जिन लोगों के वोट
पर मुफ्त में हवाई जहाज पर या
ए.सी.
में
बैठकर यात्रा करनें और फाइव
स्टार होटल में हराम का माल
उड़ाते हैं उन्हें इन यात्रियों
की कोई चिंता नहीं होती जो
मेहनत मजदूरी करके पर्व त्यौहार
पर अपनें घर गांव लौटते हैं
.
सरकार
यदि चाहे तो आम आदमी को और खास
तौर पर जनरल बोगी में यात्रा
करनें वालों को भी सुविधाजनक
ढंग से यात्रा करनें की व्यवस्था
कर सकती है लेकिन सरकार को
उनसे क्या लेना देना ,
जिनकी
किस्मत में नर्क की यातना
भोगना लिखा है उनके लिए सरकार
आखिर कुछ करे भी तो क्यों ?
हो
सकता है आज तक देश के किसी नेता
को शायद पर्व त्यौहारों पर
जनरल बोगियों में यात्रा करने
वाले अभागे यात्रियों को
देखनें का अवसर ही नहीं मिला
हो .
यदि
देखनें का मौका मिला भी होगा
तो उन्हें उससे क्या लेना देना
.
देश
में रोज कहीं न कहीं किसी न
किसी मुद्दे पर बवाल होता है,
बंदी
की जाती है ,
सडकों
पर उतर कर लोग आक्रोश व्यक्त
करते हैं,
लेकिन
शायद ही कभी सुननें में आया
हो कि रेलों में जनरल बोगियों
में यात्रा करनें वाले यात्रियों
की सुविधा के लिए भी किसी नें
कोई चिंता की हो .
जनरल
बोगियों में यात्रा करनें
वालों के साथ और भी कई दिक्कते
हैं .
इनमें
यात्रा करनें वाले यात्री
साल भर कमाकर वापस अपनें घर
आते हैं .
जिस
प्रकार जंगल में शिकारी जानवर
हिरन या अन्य शाकाहारी जानवरों
के शिकार में रहते हैं उसी
प्रकार इन यात्रियों पर भी
कई प्रकार के शिकारियों की
निगाहें लगी होती हैं .
यात्रा
के क्रम में नशीला पदार्थ
खिलाकर लूटनें वालों के अलावा
किन्नर ,
पुलिस
वाले और कभी सही ढंग से कर्तव्य
का पालन न करनें वाले टी.टी.
भी
शिकार
करनें में लगे रहते हैं .
रेल
मंत्री जी से आग्रह है कि
आप कृपया किसी पर्व या त्यौहार
के अवसर पर किसी जनरल बोगी में
आम जनता की तरह से सफर करके
दिखाएँ और जिस नर्क की कल्पना
हम बचपन से करते आ रहे हैं उसे
स्वयं देखें और भोगें .