रविवार, 1 मई 2016

शुगर - ब्लड-प्रेशर - हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के कारण हम खुद हैं ।


शुगर, ब्लड-प्रेशर हृदय रोग आदि के जनक हम खुद हैं

1. आज अधिकांश लोग शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय आदि की बीमारियों से पीड़ित हैं यदि हम एक पल के लिये सोचें कि ऐसा क्यों हो रहा है तो जवाब खुद हमारे सामनें होगा हम आलसी हुए हैं, हमारी दिनचर्या बेहद खराब है, हम शारीरिक श्रम नहीं करते, हमारा खान-पान सही नहीं है, ये सब बहुत छोटे-मोटे कारण हैं आज अधिकांश लोग उन बीमारियों से जूझ रहे हैं हम दवा खाकर उसपर नियंत्रण का प्रयास करते हैं जिसका दुष्परिणाम यह होता है कि हमारा शरीर धीरे-धीरे रोग प्रतिरोधक क्षमता ही खोता जाता है 90 % मामलों में उन जानलेवा बीमारियों को पैदा करनें वाले और खुद को बीमार बनानें वाले हम स्वयं हैं तथा अपनें कर्मों से शरीर में ऐसी बीमारियों को पाल लेते हैं जिनका ईलाज इस जन्म में संभव नहीं होता
2. हमें सबसे ज्यादा सचेत रहना है अपनें भीतर बैठी उन बीमारियों से, जिनका ईलाज आज का मेडिकल साइंस नहीं कर सकता वे बीमारियाँ हैं हमारा लालच, झूठ बोलनें की आदत, हमारे अन्दर बैठी जलन, ईर्ष्या , कुन्ठा, घृणा, क्रोध, नफरत, आवेश, प्रतिशोध, आदि की भावना, जिनके जन्मदाता हमीं हैं जो धीरे-धीरे हमारे दिल दिमाग में प्रवेश करता है और बाद में एक भयंकर बीमारी के रुप में हमारे शरीर में स्थायी निवास बना लेता है एक बुरे आदमी का हश्र क्या होता है सब जानते हैं वैज्ञानिकों नें भी माना है कि कुविचार आनें और कुत्सित कर्म करनें की इच्छा भर से तमाम किस्म के विषैले पदार्थों का स्राव हमारे शरीर की अन्तः ग्रंथियों से होनें लगता है जिनका बुरा असर हमारे शरीर के सभी अंगों पर होता है वास्तव में हम उन जैसी तमाम खतरनाक बीमारियों को सदा आमंत्रित करते रहते हैं लेकिन हमारा दुष्ट मन अन्तरात्मा द्वारा चेतावनी देनें के बाद भी नहीं चेतता । मिलनें हमें बार-बार बुरे कामों को करनें की प्रेरणा देता रहता है और हम एक रोबट की तरह विवेक को परे रखकर केवल मन की बात सुनते रहते हैं
3. आज हम बहुत से उन लक्षणों से ग्रसित व्यक्तियों को झट से कह देते हैं कि फलां आदमी बेहद कमीना और नीच है लेकिन हमें उसके प्रति सहानुभूति रखनी चाहिये क्योंकि वैसा व्यक्ति इस बात से अंजान रहता है कि उसके भीतर कितनी भयंकर बीमारी पल रही है सच तो ये है कि वे केवल खुद ही बीमार ही नहीं होते हैं बल्कि वे अपनी बीमारी से अपनें करीबी और घर वालों को भी संक्रमित कर देते हैं
4. शरीर के भीतर बैठे उन भयंकर बीमारियों के कीटाणु को मारनें की दवा हमारे और आपके पास है तो आइये आज से शुरु करें - वह कार्य जिससे लोगों को खुशी मिले और हम भी खुश रहें । शायद इससे आसान काम इस दुनिया में कोई और नहीं है विश्वास रखिये यह किसी भी दवा से ज्यादा कारगर है । ऐसा करनें से , शुगर, ब्लड प्रेशर और हृदय रोग आदि में राहत जरुर मिलेगी
5. अन्त में आप से विनम्र निवेदन है कि यदि आप अपनें भीतर बैठे शैतान से पराजित हो चुके हैं तो कृपया अपनी आनें वाली पीढ़ी को इतना ताकत‌वर अवश्य बनायें जो उस शैतान को अपनें समीप आनें ही ना दें । हमें अपनें देश को स्वस्थ बनाना है । पैसे से चीजें खरीदी जा सकती हैं - सुख, सन्तोष, चैन व शान्ति नहीं ।  

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