रविवार, 3 मई 2015

राहुल गाँधी क्या सफल हास्य कलाकार बन सकते हैं ?




राहुल गाँधी के 59 दिन के अज्ञातवास के बाद देश की राजधानी में पदार्पण करनें पर पुरानें धुरन्धर काँग्रेसी नेता भले ही दिखावटी रुप से खुश नजर आते हों और सत्ता पर बैठे पार्टी के लोग दिखावटी रुप से नाखुश रहे हों,  लेकिन मैं और मेरे मित्र खेदू को उनके आगमन पर बेहद प्रसन्नता हुई और हमारे हृदय को इस बात से राहत मिली कि अब फिर से राजनीति के क्षेत्र में किसी हास्य कलाकार को अपनी प्रतिभा दिखानें का अवसर मिलेगा, जो हमें और हमारे देश की जनता के लिये स्वास्थ्यप्रद सिद्ध होगा ।
देश की हर राजनीतिक पार्टी में कोई ना कोई ऐसा हास्य कलाकार होता है जिसे हास्य से कुछ लेना देना नहीं होता लेकिन जनता उसकी बातों पर खूब ठहाका लगाती है , इस कोटि में आनें वाले नेताओं में लालू यादव शामिल हैं , उनसे बहुत पहले एक समाजवादी नेता राजनारायण जी हुआ करते थे ।
मनमोहन जी नें जब सोनिया गाँधी जी की कृपा से देश को 10 साल तक और कुछ दिया हो या ना दिया हो लेकिन अपनी लाजवाब हास्य प्रतिभा से देश के लोगों को हँसनें के तमाम अवसर प्रदान किये थे, उनके सहयोगी कलाकार के रुप में दिग्विजय सिंह, सुशील कुमार शिन्दे जैसे प्रतिभावान कलाकार थे, लेकिन जनता नें उनकी कला की सराहना तो की लेकिन सम्मान नहीं दिया । 
मनमोहन जी के अवकाश ग्रहण के बाद हमारे जैसे टुच्चों और लुच्चों को लगता था कि काँग्रेस के पास अब कोई प्रतिभावान् हास्य कलाकार नहीं रह गया है लेकिन ऐसा नहीं हुआ । राहुल गाँधी नें एक मंजे हुए हास्य कलाकार की तरह देश के लोगों का मनोरंजन करना शुरु कर दिया है । ये अलग बात है कि अभी राहुल गाँधी के अभिनय को देखनें के लिये हमारे देश की जनता खुद को तैयार नहीं कर पा रही है । 
मुझे देश की जनता के हास्य-बोध पर दया आती है । राहुल गाँधी द्वारा किसानों के पक्ष में चिल्लाकर बोलना , हवा में डाँटना, हर बात पर बोलनें के लिये बगल में सलाहकारों की फौज रखना कि अब ये बोलना है - अब ऐसा बोलना है , ये सब उसी हास्यकला का हिस्सा है जिसपर हमारे देश की जनता हँसनें की बजाय - गम्भीर मुद्रा में आ जाती है । 
मैं देश की जनता से पूछता हूँ कि क्या ये जरुरी है कि हर हास्य कलाकार जोर-जोर से ठहाके लगा कर हँसे तभी आप कहेंगे की वह हास्य कलाकार है , क्या आप लोगों नें सुरेन्द्र शर्मा जैसे हास्य कवि को कभी मंच पर हँसते हुए देखा है ? नहीं देखा ना । यही तो मैं कहना चाहता हूँ - राहुल गाँधी जी की बातों पर आप भले ध्यान ना दें लेकिन उनकी बातों में उन हर चीजों पर अतिरिक्त ध्यान दें जिसपर आपको ठहाके लगानें का अवसर मिल सके ।
वैसे भी गौर करनें वाली बात ये है कि देश की राजनीति का मतलब ही हास्य हो गया है । यही नहीं हमारे देश के नेताओं नें देश के सारे विभागों को हास्य-रस प्रधान बनानें का पूरा इंतजाम कर रखा है जहाँ किसी परेशान आदमी का काम हो या ना हो लेकिन परेशान आदमी की फजीहत पर लोगों को हँसनें का अवसर प्रदान करनें का प्रयास जरुर किया जाता है ।
राहुल जी बहुत परिश्रम करनें के बाद जनता के सामनें अपनी हास्य-कला का प्रदर्शन करते हैं लेकिन हमारे देश की नासमझ जनता - उच्च कोटि के हास्य को नजर अन्दाज कर देती है तथा निम्म कोटि के हास्य पर ताली बजाती है । ये तो ठीक वैसा ही है जैसे - कोई बहुत अच्छी फिल्म पिट जाये और एक घटिया फिल्म बाक्स आफिस के सारे रिकार्ड तोड़ दे । 


शनिवार, 2 मई 2015

तेरी जान , मेरी जान ! पाकिस्तान -पाकिस्तान !!

तेरी जान , मेरी जान! 

 पाकिस्तान-पाकिस्तान !!

किसी देश की भूमि पर उसी देश के खिलाफ, खुलेआम देश-द्रोही हरकत की जाये, देश-द्रोही नारे लगाये जायें तथा देश के झण्डे को जलाया जाये और देश की सरकार और सेना उसे खामोशी के साथ देखती व सुनती रहे, यह केवल भारत में ही संभव हो सकता है। हमारे देश की बहादुर सेना को हिजड़ा बनानें का काम नेहरु जी के समय से ही चला आ रहा है। 
संसार की सबसे बड़ी अनसुलझी समस्याओं में से एक है काश्मीर समस्या । इस समस्या के जनक थे, नेहरु जी और उनके प्रबल खामोश समर्थक गाँधी जी । काश्मीर समस्या का एक ही सर्व-मान्य हल हो सकता है, भारत के खिलाफ चूं तक करनें वाले के सीनें पर खुलेआम गोली मारना । यदि ऐसा नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे देश में ISIS के समर्थक खुलेISIS  का झन्डा लेकर चलेंगे और तब भी हम केवल खामोशी के साथ उन्हें देखते हुए अपनी गर्दन कटवानें के लिये तैयार रहेंगे । 
हमारे देश में किसी भी मुद्दे पर हमारे नेता कोई फैसला लेनें से पहले अपनी कुर्सी तथा वोट को पहले ध्यान में रखते हैं । देश-हित से बड़ी ना तो कोई कुर्सी हो सकती है ना ही कोई वोट बैंक । 
हमारे देश में एक अजीब परम्परा विकसित हो चुकी है , वह है किसी भी देश-द्रोही की हरकत पर उसके जज्बात के बारे में झूठा तर्क देना । काश्मर के अलगाववादी नेताओं को पाकिस्तान से केवल धर्म के नाम पर सहानुभूति मिल सकती है, पाकिस्तान जोकि खुद भीखमंगा हो चुका है वह देश-द्रोही काश्मी अलगाववादियों को एक वक्त की रोटी भी नहीं खिला सकता । 
हमारे देश के नेताओं को यह बात सोचनी होगी कि यदि हम इसी प्रकार उन देश-द्रोहियों की हरकतों को नजर अन्दाज करते रहेंगे तो देश के अन्य हिस्सों में रहनें वाले देश-द्रोहियों को भी बल मिलेगा तथा वे आज नहीं तो कल अपनें को देश से अलग होनें की माँग कर सकते हैं । 
कोई भी रोग आगे चलकर घातक सिद्ध हो उसके पहले ही उसका इलाज शुरु कर देना चाहिये लेकिन दुर्भाग्य से हमारे यहाँ ऐसा नहीं हो रहा और अलगाववाद व देश-द्रोह की घटनायें निरन्तर बढ़ती जा रही हैं । 
ये जानते हुए कि जिन साँपों को हम दूध पिला रहे हैं वे हमें डसनें के लिये ही आये हैं हमें उन्हें दूध पिलानें की जगह उनके समूल नाश के लिये सोचना चाहिये । 
देश का हर देश-भक्त व्यक्ति यही चाहता है कि देश का कोई गद्दार जीवित ना रहे तथा देश में एक भी सा व्यक्ति पैदा ना हो सके जो हमारी मातृ-भूमि कसम्मान ना करता हो ।
वन्दे मातरम् - जय हिन्द - वन्दे मातरम् !! 
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शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015



                 मन की बात 

         जैसा कि आप सभी जानते हैं , हमारा देश एक राय प्रधान देश है जहाँ ढेरों सलाह बिन माँगे मिल जाती है। कभी सुनील गावस्कर को तो कभी सचिन तेन्दुलकर को राय देनें वाले भी कम नहीं थे , उन्हें राय देनें वालों में अधिकांश ऐसे लोग होते थे जिन्होनें कभी बैट या बॉल को हाथ भी ना लगाया होगा ।
          आजकल लोग देश के नेताओं को सलाह देते हैं कि कैसे देश को चलाया जाये , किस विभाग में कौन सा नेता फिट बैठेगा , इनमें ऐसे लोगो की संख्या बहुत ज्यादा है जिनकी सलाह या राय उनके बीबी बच्चे तक नहीं मानते । 
           सलाह  की सर्वाधिक जरुरत अभी सोनिया और राहुल को है । काँग्रेसियों का पूरा दल ही राय देनें मे माहिर है , ये बात अलग है कि वे सही राय देनें के काबिल नहीं हैं । राहुल और सोनिया को राय देनें की हिम्मत देश में केवल दो लोगों को है - मैं उन दोनों के नाम गुप्त रखकर कोई बड़ा तीर नहीं मार सकता इसलिये उन दोनों महान हस्तियों के नाम का खुलासा करता हूँ । 
            जल्द बाजी मत कीजिये - धीरज रखिये जब मैं उनके नाम बताऊँगा तो आप चिल्लाकर कहेंगे कि मैं तो पहले से जानता था - जी हाँ पूरा देश उन दोनों को जानता है । आप इतना पीछे पड़े हैं सो उनका नाम बताना ही पड़ेगा - तो जनाब सोनिया और राहुल को राय देनें की क्षमता रखनें वाले उन महान लोगों के नाम हैं - प्रियंका वाड्रा और राबर्ट वाड्रा । 
             सोनिया गाँधी भले ही केवल अपनी बेटी प्रियंका से राय ले सकें लेकिन राहुल गाँधी को राय देनें के लिये राबर्ट ही काफी है क्योंकि जिस स्तर का विद्यार्थी हो उसी स्तर का शिक्षक भी होना चाहिेये । वैसे भी हिस्ट्री या इंगलिश के टीचर से फिजिक्स या कमेस्ट्री तो पढ़ी नहीं जा सकती - सो राहुल को राय देनें  के लिये वाड्रा या वाड्रा सरीखे लोग ही ज्यादा उपयुक्त हो सकते हैं ।
           मैं भी भारत देश का एक वैध नागरिक हूँ क्योंकि मेरे खानदान की सैकड़ों पीढ़ियाँ इस देश में रहकर भगवान को प्यारी हुई हैं । मेरा दिल भी किसी को राय देनें के लिये हर वक्त मचलता रहता है । एक खास बात आपको बताता चलूँ कि मेरी राय के कद्रदान मेरे ही घर में आपको नहीं मिलेंगे , भले ही मैं राय देनें का भरसक प्रयास करता रहूँ । 
            हाँ तो मैं अपनें मन की बात यानि किसी को राय देनें के बारे में कह रहा था । देश के बलवान और सामर्थ्यवान लोगों को राय देनें वाले या सलाह देनें वाले बहुत से लोग हैं , लेकिन इस समय मुझे लगता है कि मनमोहन जी एक मात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें हमारे सलाह की जरुरत है । मैं अपनी सलाह या राय केवल विनम्रता पूर्वक निवेदन के रुप में ही देना चाहता हूँ । 
            मेंरा माननीय मनमोहन जी से सादर अनुरोध है कि वे पुनः काँग्रेस में सक्रिय नेता के रुप में कार्य करना शुरु करें - क्योंकि बहुत से क्रिकेटर या खिलाड़ी सन्यास लेनें के बाद भी जनता की बेहद माँगपर पुनः क्रिकेट या अन्य खेलों में सक्रिय हो जाते हैं और अपनी टीम का बेड़ा गर्क करनें के बाद पुनः सन्यास ले लेते हैं । 
           काँग्रेस की स्थिति थोड़ी अलग है क्योंकि एक तो मनमोहन जी नें पूरी तरह से सन्यास ग्रहण नहीं किया है तथा सोनिया और राहुल गाँधी नें मिलकर काँग्रेस का जिस प्रकार से बन्टाधार किया है उतना शायद मनमोहन जी के रहते होना संभव नहीं था । 
           मनमोहन जी नें देश के सामनें सेवा-भाव का एक उच्च उदाहरण प्रस्तुत किया है । उन्होनें सोनिया और राहुल की हर राय को ( जिसे लोग आदेश पालन का नाम देते हैं ) माना है , हर तरीके के घोटालों के कागजों पर अपना दस्तखत किया , एक दम आँख मूदकर - उनके वैसे काम  ‌एक जन्मजात अन्धे को भी लज्जित करनें वाले रहे हैं । हो सकता है उनके अन्धेपने वाले कार्य किसी के लिये स्तुत्य हों और किसी के लिये निन्दनीय , लेकिन हमें उससे कोई सरोकार नहीं , क्योंकि मुझे तो अपनें पेट की पीड़ा उन्हें राय देकर कम करनी है । 
            मनमोहन जी से मेरा अनुरोध है कि काँग्रेस पार्टी आज 44 सीट पर सिमट गई है , हम जैसे लोग केवल इतना चाहते हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि आप पुनः काँग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री बनाये जानें के लिये खुद को फिट रखिये और केवल दो में से एक काम कीजिये पहला- काँग्रेस को मरनें से बचाइये या दूसरा- उसे इतिहास के पन्ने में दफन हो जानें का गवाह बनकर अपना नाम अमर कर लीजिये । 
            

 

                किसी सांसद, विधायक, मंत्री या नेता द्वारा

                   आत्म-हत्या करनें के बारे सुना है ?

दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित "आप" वालों की रैली में गजेन्द्र नामक किसान द्वारा आत्महत्या कर लेनें से बहुत से सवाल खड़े हो गये हैं - लेकिन  कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके बारे में भी हमें विचार करना चाहिये - जैसा कि हम हमेशा से देखते आ रहे हैं - देश का ऐसा ही कोई क्षेत्र या व्यवसाय हो जहाँ किसी ना किसी नें आत्महत्या ना की हो । क्या डॉक्टर क्या इंजिनियर क्या उद्यमी क्या विद्यार्थी क्या शिक्षक क्या अधिकारी क्या अमीर क्या गरीब , कहनें का तात्पर्य ये है कि दुनिया के हर क्षेत्र में किसी ना किसी नें आत्महत्या जरुर की है । यहाँ तक कि कई अपराधियों द्वारा भी आत्महत्या करनें की बात भी प्रकाश मे आती है । 


लेकिन क्या आप नें कभी सुना है कि किसी नेता नें , किसी मंत्री नें, किसी सांसद या विधायक नें इस आत्म-हत्या वाली प्रक्रिया का चयन अपनें लिये कभी किया हो ? 
आप सुन भी कैसे सकते हैं - हमारे देश के नेता बेहया शिरोमणि हैं , लाख घोटाला करें , हत्या या बलात्कार जैसे अपराध करें , सजा पा जायें, जेल में सड़ते रहें लेकिन मजाल है जो शर्मिन्दगी का एक कतरा भी उनके भीतर नजर आ जाये ।



 मेंरा यहाँ पर इन बातों को लिखनें या कहनें का आशय ये कदापि नहीं है कि सांसद, विधायक, मंत्री या नेता मेरे इस लेख को पढ़नें के बाद आत्म-हत्या करनें को प्रेरित हों ।  मानव जीवन दुर्लभ है और उसकी रक्षा की जानी चाहिये । अन्त में- निवेदन है कि यदि सांसद, विधायक, मंत्री या नेता भविष्य में वैसा कोई कदम उठाते हैं तो मुझे उसके दुष्प्रेरणा का दोषी ना माना जाये ।


सोमवार, 17 जून 2013

बिहार की राजनीति और लालू ----



  • इधर आप लालू जी के चेहरे को देंखे तो जाहिर होगा कि उनके ख्वाब को झटका लगा है । जिस काँग्रेस के लिये बेचारे नें अपनें सारे सिद्धान्तों को ताक पर रख कर , जय प्रकाश जी के पुरानें शिष्य होनें के बावजूद , काँग्रेस के पीछे चलनें पर मजबूर हुए , वही काँग्रेस आज लालू जी के राजनीतिक बैरी , नीतिश का गुणगान कर रही है, काँग्रेस की पुरानी चाल है , मजबूत को साथ रखो , कमजोर को फेंक दो । 
  • काँग्रेस नें मायावती और मुलायम सिंह जैसे दुश्मनों को CBI का भय दिखाकर अपनें साथ रहनें पर मजबूर किया , उसी प्रकार का काम नीतिश और लालू के साथ काँग्रेस करनें वाली है । लालू जी नें नीतिश के गुप्त कारनामों के बारे में लोगों को बताना शुरु किया , जिसका लाभ लालू जी की जगह काँग्रेस ले गई । काँग्रेस ने हो सकता है नीतिश के बारे में कई ऐसी सूचनाएँ एकत्र कर ली हों जो नीतिश के ईमानदार वाली छवि के विपरीत हों , वरना १७ साल पुरानें गठबन्धन को एक झटके में खत्म करना आसान नहीं होता है । 
  • यह तो सभी जानते हैं कि नेताओं की बहुत से मजबूरी होती है और वह लाख कहे , उसे बहुत से ऐसे फैसले लेनें पड़ते हैं जो सही नहीं होते । नेता कभी बेदाग हो ही नहीं सकता । नीतिश लाख कहें कि मैं ईमानदार नेता हूँ लेकिन क्या एक ईमानदार नेता इस काबिल हो सकता है कि वह चुनाव भी लड़ सके । 

बुधवार, 5 जून 2013

सट्टेबाजी और क्रिकेट - सरकार जुए को वैध क्यों नहीं वैध कर देती ?



  • हम भारतीय लोगों का ऐतिहासिक शौक जुआ खेलना रहा है । महाभारत काल में जो जुआ खेला गया , उसका परिणाम भयानक युद्ध के रुप में सामनें आया । 
  • मनमोहन सिंह को देश का प्रधानमंत्री बनाकर सोनिया नें देशवासियों के साथ जो जुआ खेला उसका नतीजा तमाम घोटालों के रुप में देश के सामनें आया । फिर भी देश की जनता मनमोहन सिंह को झेलनें पर मजबूर है ।
  • नेहरू जी नें चीन के साथ मित्रता करनें और पंचशील के सिद्धान्त पर चलनें का जुआ खेला जिसका परिणाम १९६२ का युद्ध और चीन द्वारा हमारे देश के भूभाग को हड़प लेनें के रुप में सामनें आया , और उस युद्ध में हमारे देश को हार मिली । उसी का परिणाम है कि चीन हमेशा हमारे देश को धमकाता रहता है , और देश के कुछ और हिस्से पर कब्जा करना चाहता है । 
  • पाकिस्तान के साथ हमारे नेता लगातार दोस्ती का जुआ खेल रहे हैं । हर बार हमारे नेता उस जुए में सफलता का भ्रम पाले नया-नया दाँव लगाते हैं लेकिन हर बार मुँह की खानी पड़ती है , क्योंकि पाकिस्तान में , एक नहीं हजारों शकुनी के बाप जैसे मक्कार लोगों की जमात है जो भारत के युधिष्ठिर जैसे नेताओं को मात देनें के फिराक में रहते हैं । हमारे देश के मूर्ख नेता यह मानते हैं कि , पाकिस्तान के सामनें हाथ जोड़कर खड़े रहनें से देश के मुसलमान खुश रहेंगे और वोट देंगे । देश पर होनें वाले जेहादी हमलों के रुप में इसका परिणाम आज हमारे सामनें है ।
  • बात करते हैं देश के क्रिकेट खेल की - यह आज के अरबपतियों व खरबपतियों की कमाई का साधन बन गया है तथा जुआ खेलनें वालों यानि सट्टेबाजों के लिये भी यह उच्चकोटि का खेल बन गया है । चूँकि हम भारतीय पिछले हजार वर्षों से तरह-तरह के जुँए खेल कर देश तक को हार बैठनें का साहस रखते हैं , और जुए में हारना देश की नियति बन चुकी है , इसलिये दूर बैठा कोई डान हम देश वासियों के धन को लूटनें के लिये क्रिकेट के खेल का इस्तेमाल सट्टे यानि जुए के लिये कर रहा है , जिसमें देश के बड़े-बड़े व्यवसायी , खिलाड़ी और नेता लोग शामिल होंगे । 
  • अब समय आ गया है कि देश की जनता , अपनी आवाज बुलन्द करे और सभी प्रकार के जुए , सट्टेबाजी , कुकर्म , दुष्कर्म को वैध घोषित करे , ताकि चोरी-छिपे वैसे काम करनें का अपराध-बोध किसी में ना रहे और कलमाडी , राजा , श्रीसंत और इन जैसे अन्य तमाम नीच लोगों के मन में ग्लानि ना पैदा होनें पाये । इसका परिणाम बड़ा ही सुखद होगा , हर गली मोहल्ले में लोग शान्ति के साथ दांव पर दांव लगाते नजर आयेंगे , पुलिस या कानून का खौफ किसी को नहीं रहेगा । जनता दांव लगानें के लिये पैसा कमानें का प्रयास करेगी जिससे हो सकता है कि देश का और विकास हो सके । अमेरिका जैसे देश के विकास के पीछे यही सोच है , वहाँ सरकार को जैसे ही पता चलता है कि लोग चोरी छिपे कोई काम कर रहे हैं , सरकार उसे वैध घोषित कर देती है जिसके कारण वहाँ के पुलिस वाले केवल हत्या , लूट , डकैती जैसे अपराध करनें वाले अपराधियों को पकड़नें का प्रयास करते हैं , जबकि हमारे देश की पुलिस बड़े अपराधियों को पकड़नें की हिम्मत ही नहीं कर पाती , बल्कि उनके संरक्षण में लगी रहती है । 
  • मनमोहन , नहीं-नहीं सोनिया जी से , जिनके सामनें काँगेस के किसी नेता को कुछ बोलनें का अधिकार नहीं है , अनुरोध है कि वे , लूट-खसोट , घोटाला-भ्रष्टाचार , जुए-सट्टेबाजी , और तमाम ऐसे कार्यों को जिसे हम गलत कार्य या दुष्कर्म-कुकर्म आदि कहते हैं , कानून बनाकर उसे वैधानिक दर्जा प्रदान करवानें की कृपा करें । सोनिया जी इस समय सब कुछ करनें में सक्षम हैं - जैसे मनमोहन को प्रधानमंत्री , शिन्दे को गृहमंत्री , एन्टनी को रक्षा मंत्री और CBI को पंगु बनानें का काम उनकी इच्छा पर हुआ है , वैसे ही ----- -------- ----- । 

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012



           सोनिया मैडम गजब की सपेरिन हैं । मुलायम और माया रुपी खतरनाक साँपों कि जो कि एक दूसरे की जान के प्यासे रहते हैं , मैडम नें ना जानें कौन सी जादू की लकड़ी सूँघा दी है कि जब मैडम के हित की बात होती है तो वे दोनों ही आपसी संग्राम को बन्द कर देते हैं और एक सुर में मैडम की आरती उतारनें लगते हैं ।
            अभी वाल मार्ट का मामला चल रहा है , जबकी संसद के दोनों सदन में , मुलायम व माया के अघोषित  युद्ध विराम से जो कि सोनिया मैडम के भय के कारण हुआ  वाल मार्ट नें भारतीय नेताओं की प्रवृत्ति को परखते हुए , कुछ करोंड़ रुपये खर्च करके भारतीय अर्थव्यवस्था पर घुसपैठ करनें का जुगाड़ कर लिया है । कमाल यह है कि जनता को बताया जा रहा है कि वाल मार्ट के आनें से देश के लोगों के लाभ होगा , यहाँ उन लाभों को गिनानें की जरुरत नहीं है । 
            बात हो रही थी मुलायम और माया जैसे खतरनाक साँपों कि जो मैडम सोनिया के सामनें दन्त-विहिन और विष-विहिन हो जातें है । पूरे देश नें देखा किस प्रकार माया और मुलायम नें देंश की महान जनता को सदैव की तरह मूर्ख समझकर , खूब कोसा मालमार्ट को , लेकिन जब फैसले का वक्त आया तो दोनों सापों नें मैडम के पिटारे में रहना ज्यादा पसन्द किया । पता नहीं हमारे देश की जनता कब तक जाति पाँति आधारित सोच को ढोती रहेगी जिसका फायदा तमाम नीच किस्म के नेता सदा से उठा रहे हैं ।
             अब बात चल निकली है , नौकरियों में प्रमोशन पर आरक्षण की । दोनों साँपों को मैडम , अपनें पिटारे से उस समय निकाल देती हैं जब , देश को डँसनें जैसा कोई काम नहीं रहता । छोटे-मोटे , अन्य कई और भी साँप हैं  जो मैडम को बताते रहते हैं कि हम भी विषधर हैं और देश को स्थायी रुप से डँस सकते हैं , लेकिन मैडम कुशल सपेरिन हैं , सभी साँपों को सही समय पर विष निकालनें का अवसर प्रदान करती है । 
               हाँ , बात नौकरी में प्रमोशन को लेकर हो रही थी । मैडम की पार्टी नें नौकरी में प्रमोशन का झुनझुना बजाया था ,  माया नें मैडम से परमिशन लेकर इसके पक्ष में बोलना शुरु कर दिया है , और मुलायम नें खिलाफ में । उत्तर प्रदेश की जनता में फिर टकराव होगा , लोग मरेंगे , ये दोनों साँप अपनें राजनीतिक विष को उगलेंगे जिससे इन दोनों साँपों को फायदा होगा , और जनता के बीच जाति की खाईं और चौड़ी होगी , जो कि मैडम सोनिया के देश पर हुकूमत के लिये आवश्यक है ।
               हे , देश प्रदेश की जनता , आप लोग कब तक मूर्ख बनते रहोगे । ये मुलायम और माया ,रुपी साँप देश की महान सपेरिन सोनिया जी के पिटारे के साँप हैं उनके विष-दन्तों को निकालना और पुनः लगा देंना मैडम को बखूबी आता है ।             
              इस समय प्रमोशन- प्रमोशन खेलनें के लिये इन दोनों साँपों को मैडम सपेरिन नें अखाड़े में उतार दिया है । दोनों साँपों का एक दूसरे पर विष प्रहार जारी है । जनता भ्रमित है । समझदार साँप अगल-बगल हो गये हैं । लालू और पासवान को कोई रूचि नहीं है अपना जहर खराब करनें में । कोई भी काँग्रेसी साँप अपना जहर नहीं उगल रहा है । वह गिद्ध , चील और कौवे के समान , युद्ध भूमि पर निगाह रखे है । कई अन्य प्रकार के साँप भी हैं जो इन्हीं के बीच अपनें विष-वमन की सोचते होंगे लेकिन अनुकूल समय न होनें के कारण चुप हैं ।
              जनता से अनुरोध है कि वे इन साँपों का पहले से फिक्स प्रमोशन-प्रमोशन के खेल को ना देखे , अन्यथा जहर की बूँदें उसपर पड़ सकती हैं , जिसका फिर कोई इलाज संभव नहीं है ।

 रिकवरी आफ इंडिया   बनाम   डिस्कवरी आफ इंडिया   संसार के अधिकांश इतिहासकारों नें अपनें देश का इतिहास लिखते समय इस बात का ध्यान र...