शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015

                किसी सांसद, विधायक, मंत्री या नेता द्वारा

                   आत्म-हत्या करनें के बारे सुना है ?

दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित "आप" वालों की रैली में गजेन्द्र नामक किसान द्वारा आत्महत्या कर लेनें से बहुत से सवाल खड़े हो गये हैं - लेकिन  कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके बारे में भी हमें विचार करना चाहिये - जैसा कि हम हमेशा से देखते आ रहे हैं - देश का ऐसा ही कोई क्षेत्र या व्यवसाय हो जहाँ किसी ना किसी नें आत्महत्या ना की हो । क्या डॉक्टर क्या इंजिनियर क्या उद्यमी क्या विद्यार्थी क्या शिक्षक क्या अधिकारी क्या अमीर क्या गरीब , कहनें का तात्पर्य ये है कि दुनिया के हर क्षेत्र में किसी ना किसी नें आत्महत्या जरुर की है । यहाँ तक कि कई अपराधियों द्वारा भी आत्महत्या करनें की बात भी प्रकाश मे आती है । 


लेकिन क्या आप नें कभी सुना है कि किसी नेता नें , किसी मंत्री नें, किसी सांसद या विधायक नें इस आत्म-हत्या वाली प्रक्रिया का चयन अपनें लिये कभी किया हो ? 
आप सुन भी कैसे सकते हैं - हमारे देश के नेता बेहया शिरोमणि हैं , लाख घोटाला करें , हत्या या बलात्कार जैसे अपराध करें , सजा पा जायें, जेल में सड़ते रहें लेकिन मजाल है जो शर्मिन्दगी का एक कतरा भी उनके भीतर नजर आ जाये ।



 मेंरा यहाँ पर इन बातों को लिखनें या कहनें का आशय ये कदापि नहीं है कि सांसद, विधायक, मंत्री या नेता मेरे इस लेख को पढ़नें के बाद आत्म-हत्या करनें को प्रेरित हों ।  मानव जीवन दुर्लभ है और उसकी रक्षा की जानी चाहिये । अन्त में- निवेदन है कि यदि सांसद, विधायक, मंत्री या नेता भविष्य में वैसा कोई कदम उठाते हैं तो मुझे उसके दुष्प्रेरणा का दोषी ना माना जाये ।


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