गुरुवार, 7 मई 2015

चकल्लसपुर की बाढ़ और मीडिया का पोस्टमार्टम -



चकल्लसपुर की बाढ़ और मीडिया का पोस्टमार्टम

बात उस समय की है जब देश के एक प्रदेश के जिले में भयंकर बाढ़ आई , बहुत से लोगों को बाढ़ नें लील लिया बाढ़ के पानी में ना जानें कितनों के घर गायब हो गये देश के सारे टी.वी. चैनल पर केवल एक ही खबर चल रही थी , उस भयानक बाढ़ की मैंनें भी अपना टी.वी. खोला - विज्ञापन के बाद समाचार शुरु हुआ
समाचार वाचकदर्शकों, ब्रेक के बाद आपका फिर से स्वागत है जैसा कि आप सुबह से सुन रहे हैं , देश के कई हिस्सों में आई भयानक बाढ़ और उससे हुई तबाही के समाचार हम आपको एक गाँव में ले चलते हैं जिसका नाम अभी तक नहीं मालूम है लेकिन हमारे संवाददाता नें अनुमान के आधार पर बताया कि शायद उस गाँव का नाम चकल्लसपुर है वैसे भी नाम में क्या रखा है, गाँव तो सब गाँव ही होते हैं यदि किसी गाँव का नाम वाशिंगटन या न्यूयार्क रख भी दिया जाये तो क्या फर्क पड़ेगा ? वे वाशिंगटन या न्यूयार्क तो बन नहीं जायेंगे - तो नाम पर विवाद करनें से क्या फायदा - उसे चकल्लसपुर ही मानकर चलिये हमारा ये चैनल पहला ऐसा चैनल है जो यहाँ तक पहुँच पाया है
समाचार वाचक आईये चलते हैं चकल्लसपुर जहाँ हमारे संवाददाता राम अवतार जी मौजूद हैं जो अपनी जान को जोखिम में डालकर वहाँ तक पहुँचकर आपतक खबरें पहुँचा रहे हैं -
समाचार वाचककहिये राम अवतार जी क्या समाचार है बाढ़ का ------ ( उधर से खामोशी ) लगता है हमारा सम्पर्क राम अवतार जी से नहीं हो पा रहा है( पुनः जोर से ) आप सुन रहें हैंराम अवतार जी
रामअवतार जी --- जी मैं बहरा नहीं हूँआप लोगों का माईक और अन्य सिस्टम ही बीच-बीच में गड़बड़ा जाता है मैंनें पहले भी कई बार कहा है कि चीनी सामानों का इस्तेमाल बन्द करें , इंडियन सामान का प्रयोग करें , वे मँहगे होंगे लेकिन अच्छे होंगे
समाचार वाचक - जी, राम अवतार जी हम लोग आपकी सलाह इस चैनल के मालिकों तक पहुँचा देंगे
राम अवतार तब मैं अपनी सलाह वापस लेता हूँ राय देनें वाले लोगों का हाल मुझे मालूम है
समाचार वाचकइसीलिये कहा जाता है राम अवतार जी जो काम आपको दिया गया है वही कीजिये सामान कहाँ से लेना है, किसका लेना है, इसे देखना हमारा या आपका काम नहीं है। दुबारा ऐसी गलती ना हो, राम अवतार जी ध्यान रहे
समाचार वाचकहाँ तो राम अवतार जी हमें बतायें कि वहाँ कैसा हाल है लोगों का
राम अवतार यहाँ चारों ओर केवल पानी ही पानी नजर रहा है हम लोग किसी प्रकार से इस ऊँचे टीले पर पहुँच पानें में सफल रहे हैं हमारे साथ इस टीले पर तीन अन्य बाढ़ पीड़ित लोग भी हैं जो बाढ़ में बहकर यहाँ तक पहुँचे हैं इन्हीं से पूछते हैं बाढ़ का हाल -
राम अवतारआप लोग इस टीले पर कब आये ?
एक आदमी - हम लोग तीन दिन से यहाँ भूखे-प्यासे पड़े हैं , बाढ़ का पानी पी पीकर किसी प्रकार से जान बची है । आप लोग हमें यहाँ से बाहर निकालें ।
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - जैसा कि आप लोग देख रहे हैं ये लोग तीन दिन से यहाँ टीले पर फँसे हुए हैं इनके पास खानें पीनें को कुछ भी नहीं है
राम अवतार (पुनः टीले पर मौजूद आदमी से)- इस गाँव के कितनें लोग अब तक लापता हुए हैं बाढ़ में ?
एक आदमी - इस बाढ़ नें पूरा का पूरा हमारा गाँव ही समाप्त कर दिया कहीं भागनें का अवसर ही नहीं मिला लोगों को , ये टीला यहाँ पर ना होता तो हम तीनों भी अब तक मर चुके होते
राम अवतार ( दूसरे आदमी से) - आपके परिवार वाले ?
दूसरा आदमी - सब मर गये भैया
तीसरा आदमी - मुझे छोड़कर कोई नहीं बचा है परिवार में
राम अवतार आप लोग कैसे बचे , बताइये हमारे टीवी के दर्शकों को
तीनों एक साथ भाड़ में जायें आपके दर्शक , यहाँ हमारी जान जा रही है और आपको अपनें समाचार और दर्शकों की पड़ी है इससे तो अच्छा था कि हम भी मर जाते
राम अवतार ( समाचार वाचक से )- देखा आपनें , किस कदर ये लोग बाढ़ से त्रस्त हो गये हैं कि अब अपनें परिवार को खोनें के बाद जीना भी नहीं चाहते हैं मुझे तो ऐसा लगता है कि इस ईलाके में इन तीनों लोगों के अलावा कोई भी जिन्दा नहीं बचा
समाचार वाचकराम अवतार जी हमारे दर्शक यह जाननें के लिये बहुत उत्सुक हैं कि ये लोग खुद को जिन्दा पाकर कैसा महसूस कर रहे हैं
राम अवतार ( तीनों से ) - आप लोगों को खुद को जिन्दा पाकर  कैसा महसूस हो रहा है ?
तीनों चिल्लाकबहुत बुरा लग रहा है , और उससे ज्यादा बुरा तो ये लग रहा है कि भूख प्यास से हमारी जान जा रही है और आपको अपनें टीवी न्यूज की पड़ी है पहले पीनें को पानी दो तब कुछ बोलेंगे
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - जैसा कि आप देख रहे हैं - हमार न्यूज चैनल नें सबसे पहले इस इलाके में राहत पहुँचानें का काम किया है - यहाँ के बाढ़ पीड़ितो को हम पानी देनें जा रहे हैं
समाचार वाचक दर्शकों जैसा कि आप जानते हैं हमारा चैनल हर मुसीबत में जनता के साथ रहता है और राहत के कार्य में में भी सबसे आगे है राम अवतार जी आप अपनें साथ लिये बोतल के पानी से दो-दो घूँट पानी उनको पीनें के लिये दीजिये और कैमरा उनके मुँह के पास रखिये
राम अवतारआइये , आप लोग इस बोतल से केवल दो-दो घूँट पानी पीजिये (राम अवतार नें पानी का बोतल उनको दिया )
राम अवतारये आप लोगों नें क्या कर दिया भाई , आप लोग तो पूरी बोतल ही गटक गये
तीनों एक साथ क्या चाहते हो पानी में कूदकर जान दे दूँ
राम अवतारबाढ़ में गाय, भैंस , बैल बकरी भी मरे होंगे , गधे , कुत्ते सूवर भी मरे होंगे ?
तीनों एक साथ हम लोग तो गधे कुत्ते सूवर से भी बदतर थे , इसीलिये तो नहीं मरे
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - देखिये , यहाँ का पानी लगातार बढ़ता ही जा रहा है , यह टीला जो जमीन से करीब 100 ऊँचा रहा होगा  जो लगभग डूबनें वाला है , बाढ़ का पानी 15-20 फीट नीचे से बह रहा है  यानि पानी लगातार बढ़ता जा रहा है मुझे लगता है कि कुछ देर में यह टीला भी पानी में डूब जायेगा
समाचार वाचक टीला डूबा तो वे तीनों आदमी पानी में डूब कर मर सकते हैं , है ना ?
राम अवतारजी यह टीला जब डूबेगा तो कोई नहीं बचेगा हमें तो चिन्ता इन तीनों आदमियों की है यदि कोई इन्हे बचानें नहीं आया तो ये लोग नहीं बचेंगे
समाचार वाचक –  उन तीनों की चिन्ता करनें का काम सरकार का है । कोई ना कोई सरकारी आदमी हमारा चैनल देखकर सरकार को सूचित कर देगा । आप केवल अपना और कैमरा मैन का ध्यान रखिये, राम अवतार जी
राम अवता – जी, सही कहा आपनें । सरकार के किसी काम में हम दखल नहीं देते । हमारी चिन्ता ना करें , हमारी नाव पानी में रस्सी के सहारे बँधी है बाढ़ का पानी ऊपर चढ़ेगा , नाव ऊपर जायेगी । हम उसपर चढ़कर निकल लेंगे
समाचार वाचकआप केवल उन तीनों को ढाढस देते रहियेगा ताकि वे सरकारी मदद की उम्मीद में जिन्दा रहें । 
राम अवतार जी हाँ , हम तो केवल इन तीनों को ढाढस ही दे सकते हैं , इनको बचानें का काम तो सरकार का है हम टी.वी. वाले लोग, वैसे भी सरकार के किसी काम में दखल नहीं देते हैं
राम अवतार ( तीनों से ) - आप लोग तीन दिन से यहाँ हैं सरकार से कोई मदद आई कि नहीं अभी तक ?
तीनों ( एक साथ ) भाड़ में जाये सरकारी मदद , पहले यहाँ से कोई हम लोगों को निकाले तो ?
राम अवतारनहींनहीं , आप लोग घबड़ाइये नहीं, परेशान ना होइये , हम आपके साथ हैं(राम अवतार जेब से तीन बिस्कुट निकालता है और एक-एक बिस्कुट तीनों को देता है । ) बिस्कुट खाइये ।
राम अवतार - ( समाचार वाचक से ) जैसा कि आप लोग देख रहे हैं यहाँ अभी तक सरकार का ना कोई आदमी पहुँचा है ना ही किसी प्रकार की कोई मदद या राहत सामग्री ही आई है , इससे ये लोग सख्त नाराज हैं इस मौके पर सबसे पहले हमारे न्यूज चैनल नें राहत सामग्री की आपूर्ति बाढ़ पीड़ितों के बीच की है और  इन बाढ़ पीड़ितों के बीच बिस्कुट का वितरण किया है
राम अवतार ( तीनों से ) - एक-एक बिस्कुट खाकर कैसा लग रहा है आप लोगों को ?
तीनों एक साथएक-एक बिस्कुट से क्या होगा - हमारा मजाक बनाते हैं आप लोग दो तीन दिन से घास भी नहीं मिली है खानें को
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - देखा आपनें, इस इलाके में खानें-पीनें की सामग्री का कितना अभाव है मीट-मुर्गा तो छोड़िये यहाँ तो बाढ़ पीड़ितों को घास तक नहीं मिल रही है खानें को । 
समाचार वाचक ( दर्शकों से ) - देखा दर्शकों आपनें कितनी दिक्कत में है चकल्लसपुर गाँव के बाढ़ पीड़ित गाँव वाले सरकार भले ही राहत सामग्री ना पहुँचा पाये लेकिन हमारे चैनल का यह प्रयास होगा कि बाढ़ पीड़ितों तक ताजी हरी घास पहुँचा दी जाये
समाचार वाचक राम अवतार जी आप उन तीनों बाढ़ पीड़ितों से कहिये कि वे लोग अपना साहस ना छोड़ें हिम्मत बनाये रखें हम सभी लोग उनके साथ हैं
राम अवतार ( तीनों से ) - आप लोगों की चिन्ता पूरे देश के साथ-साथ हमें भी है , आप लोग अपना धैर्य बनाये रखिये - केवल आपका साहस और धैर्य ही आपको बचा सकता है, तब तक एक-एक बिस्कुट और खाइये( जेब से पुनः एक-एक बिस्कुट निकालकर उन तीनों की ओर बढ़ाता है )
राम अवतार देखा आपनें हमारे इस टी.वी. चैनल ने इस इलाके में दूसरी बार राहत सामग्री का वितरण किया है , जबकि ना तो सरकार ना ही कोई संस्था की मदद इन बाढ़ पीड़ितों को मिल पाई है
समाचार वाचक हम लगातार इसी प्रयास में रहते हैं कि यदि कहीं भी कोई किसी मुसीबत में हो उसकी मदद की जाये
समाचार वाचक राम अवतार जी , उन तीनों से पूछिये - दूसरी बार मिली राहत सामग्री पाकर बाढ़ पीड़ितों को कैसा महसूस हो रहा है
राम अवतार ( तीनों से ) - दुबारा राहत सामग्री मिलनें और स्वादिष्ट बिस्कुट खानें के बाद अब कैसा महसूस कर रहे हैं आप लोग ?
तीनों एक साथअपनें साथ जहर लेकर नहीं चले थे क्या ?
राम अवताक्यों ? जहर से क्या करना है , यहाँ तो चूहे भी नजर नहीं आ रहे । कहीं आप लोग सुसाईड यानि आत्महत्या के बारे में तो नहीं सोच रहे ?
तीनों - आपकी बातों को सुननें के बाद क्या कोई जिन्दा रहना चाहेगा ?
राम अवतार लेकिन आप लोग जहर खाकर ही क्यों मरना चाहते हैं ? बाढ़ का पानी तो?
तीनों - बात दरअसल ये है कि हम तीनों पानी में डूबकर नहीं मर सकते
राम अवतारक्यों ?
तीनों - क्योंकि हम तीनों को तैरना आता है
राम अवतार –  पानी में कूदनें के बाद  तैरनें का प्रयास मत करना , आसान है ना ?
तीनों- आप यहाँ करनें क्या आये हैं ?
राम अवतार- आपका इन्टरव्यू यानि हाल-चाल जाननें
तीनों - हाल-चाल मिला कि नहीं ? कुछ और नोचना बाकी रह गया है तो वह भी नोच लो ।
राम अवतार- ( समाचार वाचक से) - जैसा कि आप लोग देख रहे हैं , ये तीनों ही अपनें-अपनें परिवार को खोनें के बाद जीवन से निराश हो चुके हैं और यदि इनको अकेला छोड़ दिया गया तो ये लोग सुसाईड कर लेंगे
तीनों एक साथ – जी नहीं । हम लोग सुसाइड नहीं करेंगे, एकदम बेहया जान है हमारी - जल्दी नहीं निकलेगी हाँ , यदि आप जैसे 2-4 टी.वी. वाले और आ गये तो हमारी जान अपनें आप निकल जायेगी ।
राम अवतार ( तीनों से ) - हो सकता है आपकी जान बेहया ना हो लेकिन आप तीनों महान बेहया हैं - सोचिये , क्यों और किसके लिये जिन्दा रहना चाहते हैं, आप तीनों आप लोगों के लिये सबसे बेहतर यही होगा कि आप लोग जीवन का मोह त्याग दें , जोकि अब किसी काम का नहीं रह गया है । आप लोगों को शर्म आनी चाहिये कि जिसके माँ-बाप , पत्नी-बच्चे, सब पानी में डूबकर मर गये हों , वे अपनी जान बचाकर इस टीले पर चढ़ गये ताकि जिन्दा रह सकें । धिक्कार है आप तीनों के जीवन पर ।
तीनों एक साथ ( हाथ जोड़कर ) - आपनें सचमुच हमारी आँखे खोल दी हैं सच कहा है आपनें, हम लोग अब जीकर क्या करेंगे जो अपनें थे , वे सभी तो मर गये । लेकिन हम मरें तो मरें कैसे ?
राम अवतार ( समाचार वाचक से ) - देखा आपनें ये तीनों अपनें परिवार को खोनें के बाद अब जिन्दा ही नहीं रहना चाहते हैं । हमें इनके जज्बातों की कद्र करनी चाहिये वैसे भी अब बाढ़ का पानी काफी ऊपर तक चुका है तथा इस टीले को अपनें आगोश में लेनें ही वाला है हमारी नाव भी ऊपर चुकी है मैं अपनें टी.वी चैनल की तरफ से आखिरी बार फिर से राहत सामग्री का वितरण करनें जा रहा हूँ -( जेब से बिस्कुट निकाल कर , एक-एक बिस्कुट उन तीनों को देता है )
राम अवतार - देखिये अब हम अपनी नाव पर कूदनें वाले हैं , नाव चलानें वाले के अलावा इस नाव पर केवल दो ही लोग बैठ सकते हैं इन तीनों नें अपनें परिवाल वालों के पास जानें का फैसला कर लिया है - मैं और कैमरा मैन नाव पर कूदनें वाले हैं । आपको अपनें स्टूडियो वापस लिये चलते हैं
समाचार वाचक जैसा कि दर्शकों आपनें देखा, चकल्लसपुर में आई भयानक बाढ़ में हमारे टी.वी. चैनल नें बाढ़ पीड़ितों के बीच तीन बार राहत सामग्री का वितरण बिना किसी भेदभाव के किया जोकि अपनें आप में एक मिसाल है आईये अब आपको लेकर चलते हैं - अगले समाचार की ओर ---

समाप्त -

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